विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.5 बल और न्यूटन के नियम
बल भौतिकी की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है। बल वह बाह्य कारण है जो किसी वस्तु की विरामावस्था या एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन लाने का प्रयास करता है, या वस्तु को धकेलने या खींचने की क्रिया है। किसी वस्तु पर बल लगाने से वस्तु की चाल, वेग या दिशा में परिवर्तन हो सकता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में बल और न्यूटन के नियमों से प्रतिवर्ष 3 से 5 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें न्यूटन के नियमों की परिभाषा, बल की गणना और संवेग से संबंधित प्रश्न प्रमुख होते हैं।
बल की SI इकाई न्यूटन है। एक न्यूटन वह बल है जो एक किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु में एक मीटर प्रति सेकंड वर्ग का त्वरण उत्पन्न करता है। बल एक सदिश राशि है जिसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। बल के मापन के लिए स्प्रिंग बैलेंस (कमानी तुला) का उपयोग किया जाता है। बल दो प्रकार के होते हैं — संपर्क बल जैसे घर्षण और सामान्य बल, तथा असंपर्क बल जैसे गुरुत्वीय बल, चुंबकीय बल और विद्युत स्थैतिक बल। गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही पृथ्वी पर वस्तुएँ नीचे गिरती हैं।
इस अध्याय में हम न्यूटन के तीन गति नियमों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। न्यूटन का प्रथम नियम जड़त्व से संबंधित है, द्वितीय नियम बल, द्रव्यमान और त्वरण के संबंध को व्यक्त करता है, और तृतीय नियम प्रत्येक क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया के बारे में बताता है। इन नियमों का उपयोग ट्रेन की गति, ब्रेकिंग व्यवस्था और रेलवे परिचालन के अनेक पहलुओं में होता है। यह अध्याय संवेग और कार्य-ऊर्जा के अध्यायों की नींव है।
न्यूटन का प्रथम गति नियम कहता है कि कोई वस्तु अपनी विरामावस्था में या एकसमान सरल रेखीय गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है जब तक उस पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता। इस नियम को जड़त्व का नियम भी कहा जाता है। जड़त्व किसी वस्तु का वह गुण है जिसके कारण वह अपनी विरामावस्था या गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है। वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसका जड़त्व उतना ही अधिक होता है, और उसकी अवस्था बदलना उतना ही कठिन होता है।
जड़त्व के व्यावहारिक उदाहरण रेलवे परिचालन में सर्वत्र दिखाई देते हैं। जब ट्रेन अचानक ब्रेक लगाती है, तो यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं क्योंकि उनका शरीर जड़त्व के कारण अपनी गतिमान अवस्था बनाए रखना चाहता है। जब ट्रेन अचानक चलना प्रारंभ करती है, तो खड़े यात्री पीछे की ओर झुकते हैं, क्योंकि शरीर अपनी विरामावस्था बनाए रखना चाहता है। ट्रेन की सीट पर रखा सामान ब्रेक लगने पर आगे सरक जाता है। ये सभी जड़त्व के उदाहरण हैं, और इसी गुण के कारण रेलवे सुरक्षा नियमों में सीट बेल्ट और सुरक्षा उपायों पर बल दिया जाता है।
न्यूटन का द्वितीय गति नियम बताता है कि किसी वस्तु पर लगाया गया बल वस्तु के द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है। गणितीय रूप में F = ma होता है, जहाँ F बल, m द्रव्यमान और a त्वरण है। यह नियम बताता है कि किसी निश्चित द्रव्यमान की वस्तु पर बल बढ़ाने पर त्वरण बढ़ता है, और निश्चित बल के लिए द्रव्यमान बढ़ाने पर त्वरण घटता है। द्रव्यमान किसी वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा है और यह स्थान के अनुसार नहीं बदलता, जबकि बल और त्वरण में परिवर्तन संभव है।
इस नियम से बल की इकाई न्यूटन की परिभाषा प्राप्त होती है। यदि m = 1 किलोग्राम और a = 1 मीटर/सेकंड वर्ग हो, तो F = 1 न्यूटन। बल का सूत्र इस प्रकार भी लिखा जा सकता है कि बल संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है, अर्थात F = (mv - mu) ÷ t। यह द्वितीय नियम का ही दूसरा रूप है। व्यावहारिक रूप में, भारी ट्रेन को त्वरित करने के लिए इंजन को अधिक बल लगाना पड़ता है, और हल्की वस्तु को त्वरित करने में कम बल लगता है। रेलवे इंजनों के डिजाइन में इसी सिद्धांत का उपयोग होता है।
उदाहरण 1: एक ट्रेन का द्रव्यमान 1000 किलोग्राम है। इसमें 2 मीटर/सेकंड वर्ग का त्वरण उत्पन्न करने के लिए कितना बल चाहिए?
हल: सूत्र F = ma से, F = 1000 × 2 = 2000 न्यूटन। अतः आवश्यक बल 2000 न्यूटन है।
उदाहरण 2: एक वस्तु पर 15 न्यूटन का बल लगाने से 3 मीटर/सेकंड वर्ग का त्वरण उत्पन्न होता है। वस्तु का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
हल: m = F ÷ a = 15 ÷ 3 = 5 किलोग्राम। अतः वस्तु का द्रव्यमान 5 किलोग्राम है।
न्यूटन का तृतीय गति नियम कहता है कि प्रत्येक क्रिया के लिए उसके बराबर और विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया होती है। इसका अर्थ है कि बल हमेशा जोड़ों में कार्य करते हैं। यदि वस्तु A, वस्तु B पर कोई बल लगाती है, तो वस्तु B भी वस्तु A पर समान परिमाण का बल विपरीत दिशा में लगाती है। क्रिया और प्रतिक्रिया दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, इसलिए वे कभी एक-दूसरे को संतुलित नहीं करते। यह ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तृतीय नियम के अनेक व्यावहारिक उदाहरण हैं। जब हम चलते हैं तो हमारा पैर पृथ्वी पर पीछे की ओर बल लगाता है, और पृथ्वी हमें आगे की ओर बल लगाती है। जब रॉकेट प्रक्षेपित होता है, तो रॉकेट गैसों को नीचे की ओर धकेलता है और गैसें रॉकेट को ऊपर की ओर धकेलती हैं। जब एक बंदूक चलाई जाती है, तो गोली आगे की ओर जाती है और बंदूक पीछे की ओर धक्का अनुभव करती है, जिसे प्रतिक्षेप (रिकॉइल) कहते हैं। रेलवे में जब ट्रेन पटरी पर चलती है, तो पहिए पटरी पर पीछे की ओर बल लगाते हैं और पटरी पहियों को आगे की ओर बल लगाती है।
उदाहरण 3: जब एक रेल इंजन 5000 न्यूटन का बल डिब्बों पर आगे की ओर लगाता है, तो डिब्बे इंजन पर कितना बल लगाते हैं?
हल: न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार प्रतिक्रिया क्रिया के बराबर और विपरीत होती है। अतः डिब्बे इंजन पर 5000 न्यूटन का बल पीछे की ओर लगाते हैं।
| नियम | कथन | व्यावहारिक उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रथम नियम | बाह्य बल न हो तो विराम या एकसमान गति बनी रहती है | ब्रेक पर यात्री आगे झुकते हैं |
| द्वितीय नियम | F = ma | भारी ट्रेन को अधिक बल चाहिए |
| तृतीय नियम | क्रिया का बराबर विपरीत प्रतिक्रिया | बंदूक की प्रतिक्षेप |
| बल का प्रकार | संपर्क/असंपर्क | उदाहरण |
|---|---|---|
| घर्षण बल | संपर्क | ट्रेन के पहिये और पटरी |
| सामान्य बल | संपर्क | पटरी का ट्रेन पर बल |
| गुरुत्वीय बल | असंपर्क | वस्तु का नीचे गिरना |
| चुंबकीय बल | असंपर्क | चुंबक का लोहे को खींचना |
| विद्युत स्थैतिक बल | असंपर्क | आवेशों का परस्पर आकर्षण |
flowchart TD
A[बल और न्यूटन के नियम] --> B[बल F = ma]
A --> C[प्रथम नियम]
A --> D[द्वितीय नियम]
A --> E[तृतीय नियम]
B --> B1[SI इकाई न्यूटन]
B --> B2[सदिश राशि]
C --> C1[जड़त्व]
C --> C2[ब्रेक पर आगे झुकना]
D --> D1[संवेग परिवर्तन की दर]
D --> D2[F = (mv - mu)/t]
E --> E1[क्रिया प्रतिक्रिया]
E --> E2[रॉकेट प्रक्षेपण]
बल और न्यूटन के गति नियम यांत्रिकी की संपूर्ण संरचना की नींव हैं। इस अध्याय में हमने बल की परिभाषा, उसकी SI इकाई और प्रकारों का अध्ययन किया। न्यूटन के प्रथम नियम से हमने जड़त्व की अवधारणा को समझा, द्वितीय नियम से बल, द्रव्यमान और त्वरण का संबंध F = ma सीखा, और तृतीय नियम से क्रिया-प्रतिक्रिया के सिद्धांत को जाना। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में ये नियम सीधे अंक दिलाते हैं। ट्रेन इंजन के बल, ब्रेकिंग व्यवस्था और रेलवे सुरक्षा में इन नियमों का व्यावहारिक उपयोग होता है। इन नियमों की दृढ़ पकड़ संवेग, गुरुत्वाकर्षण और कार्य-ऊर्जा जैसे अध्यायों को समझने का आधार प्रदान करती है।