संवेग Notes

संवेग

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.6 संवेग

1. परिचय

संवेग यांत्रिकी की एक मौलिक अवधारणा है जो किसी गतिमान वस्तु की गति की मात्रा को व्यक्त करती है। किसी वस्तु का संवेग उसके द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के बराबर होता है, अर्थात संवेग p = mv होता है। संवेग एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग की दिशा होती है। इसकी SI इकाई किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड (kg m/s) है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में संवेग से संबंधित प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं, जिनमें संवेग की गणना, संवेग संरक्षण के नियम और बल-संवेग संबंध प्रमुख होते हैं।

संवेग की अवधारणा का व्यावहारिक महत्व अत्यंत अधिक है। एक भारी ट्रेन 60 किमी/घंटा की चाल से चल रही है, उसका संवेग अत्यधिक होता है, इसलिए उसे रोकने के लिए बहुत अधिक बल की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर, हल्की वस्तु जैसे टेबल टेनिस की गेंद को रोकना आसान होता है। संवेग के अध्ययन से यह समझ आता है कि द्रव्यमान और वेग दोनों मिलकर गति की मात्रा निर्धारित करते हैं। द्रव्यमान स्थिर होने पर संवेग वेग के समानुपाती होता है, और वेग स्थिर होने पर संवेग द्रव्यमान के समानुपाती होता है।

इस अध्याय में हम संवेग की परिभाषा, बल और संवेग में संबंध, संवेग संरक्षण का नियम तथा संवेग से जुड़े संख्यात्मक प्रश्नों का अध्ययन करेंगे। संवेग संरक्षण का नियम बताता है कि यदि किसी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता तो उसका कुल संवेग स्थिर रहता है। इस नियम का उपयोग टक्कर (संघट्ट) की घटनाओं का विश्लेषण करने में होता है। रेलवे के संदर्भ में ट्रेनों की टक्कर, कपलिंग और ब्रेकिंग व्यवस्था में संवेग की अवधारणा अत्यंत उपयोगी है।

2. संवेग की परिभाषा और गणना

किसी गतिमान वस्तु का संवेग उसके द्रव्यमान और वेग का गुणनफल होता है। यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान m और वेग v है, तो उसका संवेग p = mv होता है। संवेग की SI इकाई kg m/s है। संवेग की विमाएँ द्रव्यमान × वेग अर्थात M L T⁻¹ होती हैं। संवेग एक सदिश राशि है, इसलिए इसकी दिशा भी महत्वपूर्ण होती है। यदि वेग की दिशा बदल जाती है, तो संवेग की दिशा भी बदल जाती है, भले ही परिमाण समान रहे।

विरामावस्था में स्थित वस्तु का वेग शून्य होता है, इसलिए उसका संवेग भी शून्य होता है। विराम में वस्तु का संवेग शून्य होता है। जब वस्तु गतिमान होती है तो उसका संवेग धनात्मक होता है, और विपरीत दिशा में गति करने पर संवेग ऋणात्मक हो सकता है। किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन तब होता है जब उसका द्रव्यमान या वेग या दोनों में परिवर्तन होता है। अधिकांश स्थितियों में द्रव्यमान स्थिर रहता है, इसलिए संवेग में परिवर्तन वेग में परिवर्तन के कारण होता है।

उदाहरण 1: एक ट्रेन का द्रव्यमान 2000 किलोग्राम है और उसका वेग 5 मीटर/सेकंड है। ट्रेन का संवेग ज्ञात कीजिए।

हल: संवेग p = mv = 2000 × 5 = 10000 kg m/s। अतः ट्रेन का संवेग 10000 kg m/s होगा।

उदाहरण 2: एक वस्तु का संवेग 40 kg m/s है और उसका द्रव्यमान 8 किलोग्राम है। वस्तु का वेग ज्ञात कीजिए।

हल: p = mv से, v = p ÷ m = 40 ÷ 8 = 5 मीटर/सेकंड। अतः वस्तु का वेग 5 m/s है।

3. बल और संवेग में संबंध

न्यूटन का द्वितीय नियम बल और संवेग के बीच महत्वपूर्ण संबंध स्थापित करता है। नियम के अनुसार बल संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है, अर्थात F = (mv - mu) ÷ t। यहाँ mu प्रारंभिक संवेग और mv अंतिम संवेग है। यदि संवेग में परिवर्तन Δp = mv - mu है और समय t है, तो F = Δp ÷ t होता है। यह द्वितीय नियम का संवेग के रूप में व्यक्त रूप है, जो बताता है कि बल संवेग परिवर्तन की दर के बराबर है।

इस संबंध का एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक निहितार्थ है। यदि किसी वस्तु के संवेग में निश्चित परिवर्तन करना है, तो यदि समय अधिक हो, बल कम लगेगा, और यदि समय कम हो, बल अधिक लगेगा। इसी सिद्धांत पर क्रैश टेस्ट, एयरबैग और स्प्रिंग आदि का डिजाइन आधारित है। एयरबैग संवेग परिवर्तन का समय बढ़ा देता है, जिससे यात्रियों पर लगने वाला बल कम हो जाता है। रेलवे में टक्कर से बचाव के लिए बफर स्प्रिंग का उपयोग इसी सिद्धांत पर होता है, जो संवेग परिवर्तन का समय बढ़ाकर बल घटाता है।

उदाहरण 3: एक वस्तु का प्रारंभिक संवेग 10 kg m/s और अंतिम संवेग 30 kg m/s है। यह परिवर्तन 4 सेकंड में होता है। बल ज्ञात कीजिए।

हल: F = (mv - mu) ÷ t = (30 - 10) ÷ 4 = 20 ÷ 4 = 5 न्यूटन। अतः बल 5 न्यूटन है।

4. संवेग संरक्षण का नियम

संवेग संरक्षण का नियम कहता है कि यदि किसी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता, तो टक्कर से पहले का कुल संवेग, टक्कर के बाद के कुल संवेग के बराबर होता है। दूसरे शब्दों में, बाह्य बल की अनुपस्थिति में किसी निकाय का कुल संवेग स्थिर (संरक्षित) रहता है। यह नियम न्यूटन के तृतीय नियम का परिणाम है, क्योंकि टक्कर के दौरान दोनों वस्तुएँ एक-दूसरे पर बराबर और विपरीत बल लगाती हैं।

दो वस्तुओं के टकराने की स्थिति में, यदि वस्तु A का द्रव्यमान m1 और वेग u1 है, तथा वस्तु B का द्रव्यमान m2 और वेग u2 है, तो टक्कर से पहले कुल संवेग = m1u1 + m2u2 होता है। टक्कर के बाद यदि वेग क्रमशः v1 और v2 हों, तो कुल संवेग = m1v1 + m2v2 होगा। संवेग संरक्षण के अनुसार m1u1 + m2u2 = m1v1 + m2v2 होता है। रेलवे में डिब्बों को जोड़ने (कपलिंग) की प्रक्रिया में भी यही नियम कार्य करता है, जब चलता हुआ डिब्बा स्थिर डिब्बे से टकराकर जुड़ता है।

उदाहरण 4: एक 1000 किलोग्राम का डिब्बा 2 मीटर/सेकंड के वेग से चलते हुए विराम में स्थित 1000 किलोग्राम के दूसरे डिब्बे से टकराकर जुड़ जाता है। जुड़ने के बाद संयुक्त डिब्बों का वेग ज्ञात कीजिए।

हल: टक्कर से पहले कुल संवेग = 1000 × 2 + 1000 × 0 = 2000 kg m/s। टक्कर के बाद कुल द्रव्यमान = 2000 kg। संवेग संरक्षण से 2000 × v = 2000, अतः v = 1 मीटर/सेकंड। जुड़े हुए डिब्बों का वेग 1 m/s होगा।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: संवेग से संबंधित राशियाँ

राशि सूत्र SI इकाई
संवेग p = mv kg m/s
बल F = (mv - mu)/t न्यूटन
संवेग परिवर्तन Δp = m(v - u) kg m/s
संवेग परिवर्तन की दर Δp/t न्यूटन

तालिका 2: संवेग संरक्षण के उदाहरण

घटना टक्कर से पहले टक्कर के बाद
डिब्बों की कपलिंग m1u1 + m2u2 (m1 + m2)v
रॉकेट प्रक्षेपण शून्य mv + MV
बंदूक चलाना शून्य mgvg + mbvb

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[संवेग] --> B[परिभाषा p = mv]
    A --> C[बल-संवेग संबंध]
    A --> D[संवेग संरक्षण]
    B --> B1[सदिश राशि]
    B --> B2[SI इकाई kg m/s]
    C --> C1[F = (mv - mu)/t]
    C --> C2[एयरबैग का सिद्धांत]
    D --> D1[बाह्य बल न होने पर संरक्षित]
    D --> D2[m1u1 + m2u2 = m1v1 + m2v2]
    D --> D3[कपलिंग में उपयोग]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

संवेग की अवधारणा p = mv द्रव्यमान m SI इकाई kg वेग v SI इकाई m/s × संवेग p = mv SI इकाई kg m/s, सदिश राशि उदाहरण: m = 2000 kg, v = 5 m/s p = 2000 × 5 = 10000 kg m/s स्वर्ण नियम संवेग हमेशा वेग की दिशा में कार्य करता है।

संवेग संरक्षण - डिब्बों की कपलिंग डिब्बा 1 m1 = 1000 kg, u1 = 2 m/s डिब्बा 2 m2 = 1000 kg, u2 = 0 टक्कर टक्कर से पहले कुल संवेग = 2000 kg m/s जुड़ा हुआ डिब्बा कुल द्रव्यमान 2000 kg, वेग 1 m/s संवेग संरक्षण से m1u1 + m2u2 = (m1+m2)v स्वर्ण नियम बाह्य बल न होने पर टक्कर से पहले और बाद का कुल संवेग समान रहता है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. संवेग को अदिश राशि मान लेना; संवेग एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग के अनुसार होती है।
  2. संवेग की इकाई को न्यूटन लिखना; संवेग की इकाई kg m/s होती है।
  3. संवेग संरक्षण के नियम को बाह्य बल की उपस्थिति में भी लागू करना।
  4. बल की गणना में संवेग परिवर्तन को समय से गुणा करना, जबकि उसे समय से भाग देना चाहिए।
  5. कपलिंग के प्रश्न में टक्कर के बाद संयुक्त द्रव्यमान निकालना भूल जाना।
  6. विराम में वस्तु का संवेग शून्य होता है, इसे शून्येतर मान लेना।
  7. संवेग में परिवर्तन की दिशा में गलती करना, जबकि परिवर्तन की दिशा अंतिम संवेग की दिशा होती है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. संवेग का सूत्र p = mv और इसकी इकाई kg m/s सदैव याद रखें।
  2. बल-संवेग संबंध F = (mv - mu)/t को द्वितीय नियम के रूप में पहचानें।
  3. संवेग संरक्षण के प्रश्न में पहले कुल द्रव्यमान निकालें, फिर वेग ज्ञात करें।
  4. विराम में वस्तु का संवेग शून्य होता है, इस तथ्य का उपयोग कपलिंग प्रश्नों में करें।
  5. एयरबैग और बफर स्प्रिंग समय बढ़ाकर बल कम करते हैं, यह अवधारणात्मक प्रश्नों में पूछा जाता है।
  6. बंदूक चलाने के प्रश्न में बंदूक और गोली के संवेग बराबर और विपरीत होते हैं।
  7. संवेग परिवर्तन Δp = m(v - u) के रूप में भी लिखा जा सकता है, इससे गणना सरल होती है।

10. निष्कर्ष

संवेग गतिमान वस्तुओं की गति की मात्रा का माप है। इस अध्याय में हमने संवेग की परिभाषा p = mv, उसकी SI इकाई kg m/s, बल और संवेग के बीच संबंध तथा संवेग संरक्षण के नियम का विस्तार से अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में संवेग से संबंधित प्रश्न सरल और निश्चित अंक देने वाले हैं। रेलवे के दैनिक कार्य में डिब्बों की कपलिंग, टक्कर सुरक्षा और ब्रेकिंग व्यवस्था में संवेग की अवधारणा का व्यावहारिक उपयोग होता है। संवेग संरक्षण का नियम न्यूटन के तृतीय नियम का परिणाम है, इसलिए इन दोनों का अंतर्संबंध समझना आवश्यक है। नियमित अभ्यास से संवेग की गणना में दक्षता प्राप्त की जा सकती है और परीक्षा में अच्छे अंक लाए जा सकते हैं।