विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: तर्कशक्ति – कूटलेखन और वर्गीकरण विषय-वस्तु: 7.3 संख्या कूटलेखन
कूटलेखन-विकूटलेखन (Coding-Decoding) तर्कशक्ति परीक्षा की सबसे महत्वपूर्ण विधाओं में से एक है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में प्रत्येक शिफ्ट में इस विधा से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। कूटलेखन का अर्थ है किसी शब्द, अक्षर या संख्या को एक निश्चित नियम के अनुसार बदलना ताकि केवल जानकार व्यक्ति ही उसे समझ सके। विकूटलेखन का अर्थ है उसी नियम का उपयोग करके कूटबद्ध संदेश को पुनः सामान्य रूप में लाना। इस अध्याय में हम संख्या कूटलेखन के विभिन्न नियमों का अध्ययन करेंगे, जहाँ अक्षरों को संख्याओं और संख्याओं को अक्षरों में बदला जाता है।
संख्या कूटलेखन में सबसे अधिक उपयोग अंग्रेजी वर्णमाला की स्थिति संख्या (A=1, B=2, ..., Z=26) का किया जाता है। इसके अलावा विपरीत क्रम (A=26, B=25, ..., Z=1) भी बहुत प्रयोग होता है। कई बार अक्षरों की स्थिति संख्याओं को जोड़कर, घटाकर या गुणा करके कूट बनाया जाता है। कुछ प्रश्नों में केवल अक्षर के स्थान की संख्या ही कूट होती है, तो कुछ में दो अक्षरों की संख्याओं का योग या अंतर। सबसे पहले परीक्षार्थी को वर्णमाला की स्थिति संख्या का पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है, क्योंकि अधिकांश कूट इसी पर आधारित होते हैं।
इस अध्याय में हम चार मुख्य प्रकार के संख्या कूट सीखेंगे - (क) स्थिति संख्या कूट, जिसमें अक्षर को उसकी स्थिति संख्या से बदला जाता है; (ख) व्युत्क्रम स्थिति कूट; (ग) संक्रिया आधारित कूट जिसमें जोड़, घटाव, गुणा, भाग का प्रयोग होता है; और (घ) संख्या-अक्षर प्रतिस्थापन कूट। परीक्षा में इन नियमों का संयोजन भी आता है, जिसे मिश्रित कूटलेखन कहते हैं। इन सभी का अभ्यास करके परीक्षार्थी इस विधा में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकता है। आइए इन्हें एक-एक करके उदाहरण सहित समझते हैं।
इस प्रकार के कूट में अंग्रेजी वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर को उसकी स्थिति संख्या से बदल दिया जाता है। A की स्थिति 1, B की 2, C की 3 और इसी क्रम में Z की 26 होती है। जब कोई शब्द दिया होता है और कूट पूछा जाता है, तो प्रत्येक अक्षर को उसकी स्थिति संख्या में बदल दिया जाता है। उदाहरण के लिए, शब्द "CAT" का कूट बनाने के लिए C = 3, A = 1, T = 20, अतः कूट 3120 होगा।
उदाहरण 1: यदि "GO" को 715 के रूप में कूटबद्ध किया जाता है, तो "UP" का कूट क्या होगा?
समाधान: G की स्थिति संख्या 7 है और O की 15 है, अतः GO → 715। इसी नियम से U की स्थिति 21 है और P की 16, अतः UP → 2116।
उदाहरण 2: यदि "MAN" को 13114 लिखा जाए, तो "SON" का कूट क्या होगा?
समाधान: M = 13, A = 1, N = 14, अतः MAN → 13114। इसी नियम से S = 19, O = 15, N = 14, अतः SON → 191514।
परीक्षा में कभी-कभी कूट को उल्टे क्रम में भी लिखा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि "DOG" को 1574 (अर्थात अक्षरों को पीछे से लिखकर G = 7, O = 15, D = 4) के रूप में कूटबद्ध किया जाता है। ऐसे में वर्णमाला के क्रम पर ध्यान देने के साथ-साथ कूट में अक्षरों की दिशा (आगे/पीछे) का भी ध्यान रखना आवश्यक है। विकूटलेखन के प्रश्नों में विपरीत प्रक्रिया अपनाई जाती है - कूट की संख्याओं को अलग-अलग करके प्रत्येक संख्या के अनुरूप अक्षर लिखा जाता है।
व्युत्क्रम क्रम (Reverse order) कूट में A को 26, B को 25, C को 24 ... Z को 1 माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि "AX" का कूट 263 (A=26, X=3) लिखा जाता है। यह स्थिति कूट का सबसे सामान्य रूपांतर है। यह याद रखने के लिए ध्यान दें कि किसी अक्षर की स्थिति संख्या (n) और व्युत्क्रम संख्या (27 - n) का योग हमेशा 27 होता है। अर्थात M की स्थिति 13 है तो व्युत्क्रम क्रम में M = 27 - 13 = 14 होगा।
उदाहरण 3: यदि व्युत्क्रम क्रम में "BYE" का कूट 25222 हो, तो सामान्य क्रम में "DOG" का कूट क्या होगा?
समाधान: व्युत्क्रम क्रम में B = 25, Y = 2, E = 22, अतः BYE → 25222 सत्य है। अब "DOG" का सामान्य क्रम में कूट D = 4, O = 15, G = 7, अतः 4157।
संक्रिया आधारित कूट में दो अक्षरों की स्थिति संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा या भाग की संक्रिया करके एक अंक या संख्या प्राप्त की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि शब्द "AB" का कूट 3 (A + B = 1 + 2) है, तो "CD" का कूट 3 + 4 = 7 होगा। इसी प्रकार कभी-कभी "AZ" का कूट 1 (Z - A = 26 - 1 = 25 नहीं, बल्कि A और Z का योग 27) जैसे नियम होते हैं, जिन्हें प्रश्न में दिए गए उदाहरण से ही पहचानना होता है।
उदाहरण 4: यदि "D" और "E" को मिलाकर "DE" का कूट 9 लिखा जाता है (4 + 5 = 9), तो "MN" का कूट क्या होगा?
समाधान: यहाँ दो अक्षरों की स्थिति संख्याओं का योग कूट है। M = 13, N = 14, अतः योग = 13 + 14 = 27। कूट = 27।
कुछ प्रश्नों में केवल एक अक्षर का कूट दिया जाता है जिसमें संक्रिया से दो अंक बनते हैं। उदाहरण के लिए, यदि "K" का कूट 1120 है (K की स्थिति 11 और व्युत्क्रम क्रम में 16... वास्तव में K के पिछले अक्षर J = 10 और अगले L = 12, अतः 10 + 12 = 22 नहीं)। ऐसे अस्पष्ट प्रश्नों में विकल्पों की सहायता से सही नियम का चयन करना चाहिए। संक्रिया आधारित कूट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले दिए गए उदाहरण (प्रश्न में) को हल करके नियम निश्चित करें, फिर उसी नियम को लक्ष्य शब्द पर लागू करें।
संख्या-अक्षर प्रतिस्थापन कूट में किसी अक्षर के लिए एक निश्चित संख्या दी जाती है जो वर्णमाला की स्थिति से मेल नहीं खाती। उदाहरण के लिए, यदि कहा जाए कि कूट में P = 1, Q = 2, R = 3, S = 4, T = 5 है, तो "QST" का कूट 245 होगा। ऐसे प्रश्नों में दिए गए प्रतिस्थापन तालिका के अनुसार ही कूट बनाना होता है, वर्णमाला की स्थिति से मेल नहीं करना चाहिए।
संयुक्त कूट में दो या अधिक नियम एक साथ लागू होते हैं। उदाहरण के लिए, पहले अक्षर को उसकी स्थिति संख्या दी जाती है और फिर उस संख्या में 2 जोड़कर कूट बनाया जाता है। यदि "FAT" का कूट 623 है, तो यहाँ F = 6 (स्थिति 6), A = 3 (स्थिति 1 + 2), T = 23 (स्थिति 20 + 3) जैसे भिन्न-भिन्न नियम हो सकते हैं। ऐसे प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रत्येक अक्षर के कूट के अंकों की तुलना करनी चाहिए।
उदाहरण 5: यदि "ROAD" का कूट 181514 और "SIDE" का कूट 1945 है, तो "RIDE" का कूट क्या होगा?
समाधान: "ROAD" से R = 18, O = 15, A = 1, D = 4 स्पष्ट है। "SIDE" से S = 19, I = 9, D = 4, E = 5 स्पष्ट है। अतः RIDE = R(18) I(9) D(4) E(5) = 18945।
उदाहरण 6: यदि "BOMB" का कूट 215213 और "ROOM" का कूट 18151313 है, तो "BOOM" का कूट क्या होगा?
समाधान: यहाँ प्रत्येक अक्षर की स्थिति संख्या सीधे लिखी गई है। B = 2, O = 15, M = 13। अतः BOOM → 2 15 15 13 = 2151513।
संयुक्त कूट हल करते समय दिए गए शब्दों में समान अक्षरों की पहचान करना सबसे प्रभावी रणनीति है। समान अक्षर के कूट के अंक समान होंगे। उदाहरण के लिए, ऊपर "BOMB" में B दो बार आया है और कूट 215213 में 2 दो बार है, जिससे नियम स्पष्ट हो जाता है। इस तरह की तुलना विधि से कम समय में सटीक उत्तर पाया जा सकता है। परीक्षा में समय बचाने के लिए जब भी समान अक्षर वाले शब्द हों, पहले उनकी तुलना करें।
| अक्षर | स्थिति संख्या | व्युत्क्रम संख्या | अक्षर | स्थिति संख्या | व्युत्क्रम संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| A | 1 | 26 | N | 14 | 13 |
| E | 5 | 22 | O | 15 | 12 |
| H | 8 | 19 | R | 18 | 9 |
| K | 11 | 16 | T | 20 | 7 |
| M | 13 | 14 | Z | 26 | 1 |
| कूट का प्रकार | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्थिति संख्या कूट | अक्षर की स्थिति (A=1...Z=26) | CAT → 3120 |
| व्युत्क्रम क्रम कूट | A=26...Z=1 | AX → 263 |
| संक्रिया कूट | दो अक्षरों की संख्या का योग/अंतर | DE → 9 |
| प्रतिस्थापन कूट | निश्चित संख्या-अक्षर तालिका | QST → 245 |
| संयुक्त कूट | दो नियमों का मिश्रण | RIDE → 18945 |
flowchart TD
A[संख्या कूटलेखन] --> B[स्थिति संख्या कूट]
A --> C[व्युत्क्रम क्रम कूट]
A --> D[संक्रिया आधारित कूट]
A --> E[प्रतिस्थापन कूट]
A --> F[संयुक्त कूट]
B --> B1[A = 1 से Z = 26]
B --> B2[अक्षर को उसकी संख्या से बदलना]
C --> C1[A = 26 से Z = 1]
C --> C2[स्थिति + व्युत्क्रम = 27]
D --> D1[योग, अंतर, गुणा]
E --> E1[दी गई तालिका का अनुसरण]
F --> F1[समान अक्षरों की तुलना]
F --> F2[नियम पहले सत्यापित करना]
संख्या कूटलेखन तर्कशक्ति की एक महत्वपूर्ण और आसान विधा है, जिसमें नियम पहचानने की क्षमता का परीक्षण होता है। इस अध्याय में हमने स्थिति संख्या कूट (A=1 से Z=26), व्युत्क्रम क्रम कूट (A=26 से Z=1), संक्रिया आधारित कूट, प्रतिस्थापन कूट और संयुक्त कूट को उदाहरण सहित समझा। प्रत्येक प्रकार का आधार वर्णमाला की स्थिति संख्याएँ हैं, अतः उन्हें पूर्ण रूप से याद करना सर्वाधिक आवश्यक है। दिए गए उदाहरण से नियम पहचानना, समान अक्षरों की तुलना करना और नियम को सत्यापित करना इस विधा की सफलता की कुंजी है। नियमित अभ्यास से रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इस विधा के प्रश्नों को बिना किसी कठिनाई के और न्यूनतम समय में हल किया जा सकता है।