विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: तर्कशक्ति – संबंध और दिशा विषय-वस्तु: 8.3 दिशा ज्ञान
दिशा ज्ञान (Direction Sense) तर्कशक्ति परीक्षा की एक बहुत महत्वपूर्ण और लगभग हर शिफ्ट में पूछी जाने वाली विधा है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इस विधा से प्रायः 1 से 2 प्रश्न अवश्य आते हैं। इन प्रश्नों में किसी व्यक्ति या वस्तु की गति को दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) के संदर्भ में बताया जाता है और पूछा जाता है कि वह व्यक्ति अंततः किस दिशा में है या किस दिशा की ओर मुख करके खड़ा है। इस विधा में चार मुख्य दिशाएँ (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) और चार मध्यवर्ती दिशाएँ (उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम) का ज्ञान आवश्यक है।
दिशा ज्ञान के प्रश्नों में आकाशीय पिंडों (सूर्य, चंद्रमा, तारे) का संदर्भ भी दिया जाता है, जो दिशाओं के निर्धारण में सहायक होता है। सामान्य ज्ञान के अनुसार सूर्य पूर्व में उगता है और पश्चिम में अस्त होता है। सूर्योदय के समय व्यक्ति की छाया पश्चिम की ओर होती है और सूर्यास्त के समय पूर्व की ओर। चुंबकीय दिशासूचक (कम्पास) में उत्तर की दिशा में सुई का चुम्बकीय उत्तर होता है। इन बुनियादी तथ्यों का ज्ञान दिशा ज्ञान के कई प्रश्नों को हल करने में सहायक होता है।
इस अध्याय में हम मुख्य और मध्यवर्ती दिशाओं, बाएँ-दाएँ मोड़ के नियम, वामावर्त-घड़ी की दिशा के क्रम और दिशा ज्ञान के प्रश्नों को हल करने की चरणबद्ध विधि को उदाहरण सहित सीखेंगे। सबसे महत्वपूर्ण है बाएँ-दाएँ मोड़ का नियम - जब व्यक्ति उत्तर की ओर मुख करके खड़ा हो तो उसका दाहिना हाथ पूर्व और बायाँ हाथ पश्चिम की ओर होता है। मोड़ की दिशा सदैव व्यक्ति के मुख की दिशा के सापेक्ष होती है। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
चार मुख्य दिशाएँ हैं - उत्तर (North), दक्षिण (South), पूर्व (East) और पश्चिम (West)। इनके बीच में चार मध्यवर्ती दिशाएँ होती हैं - उत्तर-पूर्व (North-East), उत्तर-पश्चिम (North-West), दक्षिण-पूर्व (South-East) और दक्षिण-पश्चिम (South-West)। चारों मुख्य दिशाएँ आपस में 90 अंश के कोण पर होती हैं, जबकि मुख्य और मध्यवर्ती दिशा के बीच 45 अंश का कोण होता है। रेखाचित्र बनाते समय ऊपर उत्तर, नीचे दक्षिण, दाईं ओर पूर्व और बाईं ओर पश्चिम रखा जाता है।
उदाहरण 1: यदि कोई व्यक्ति पूर्व की ओर मुख करके खड़ा है, तो उसकी बाईं ओर कौन-सी दिशा होगी?
समाधान: पूर्व की ओर मुख होने पर दाहिना हाथ दक्षिण और बायाँ हाथ उत्तर की ओर होता है। अतः उत्तर है।
दिशाओं का चक्रीय क्रम याद रखने का सरल उपाय - घड़ी की दिशा में क्रम है - उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम। इस क्रम में एक-एक करके मुड़ने पर प्रत्येक मोड़ 45 अंश का होता है। यदि कोई व्यक्ति इस क्रम में (घड़ी की दिशा में) चार मोड़ लेता है, तो वह 180 अंश घूमकर विपरीत दिशा में पहुँचता है। यह चक्रीय ज्ञान मोड़ वाले प्रश्नों को शीघ्र हल करने में सहायक है।
उदाहरण 2: यदि कोई व्यक्ति उत्तर की ओर मुख करके खड़ा है और 90 अंश घड़ी की दिशा में (दाईं ओर) मुड़ता है, तो वह किस दिशा की ओर मुख करेगा?
समाधान: उत्तर से 90 अंश दाईं ओर (घड़ी की दिशा में) मुड़ने पर पूर्व की ओर मुख होगा। अतः उत्तर पूर्व है।
दिशा ज्ञान के प्रश्नों में सबसे अधिक उपयोग बाएँ-दाएँ मोड़ का होता है। मूल नियम यह है कि जब व्यक्ति उत्तर की ओर मुख करके खड़ा होता है, तो उसकी दाईं ओर पूर्व और बाईं ओर पश्चिम होता है। दक्षिण की ओर मुख होने पर दाईं ओर पश्चिम और बाईं ओर पूर्व होता है। पूर्व की ओर मुख होने पर दाईं ओर दक्षिण और बाईं ओर उत्तर होता है। पश्चिम की ओर मुख होने पर दाईं ओर उत्तर और बाईं ओर दक्षिण होता है। इन नियमों को याद रखना आवश्यक है।
उदाहरण 3: राहुल उत्तर की ओर मुख करके चलना शुरू करता है। 2 किमी चलने के बाद वह अपने दाईं ओर मुड़ता है और 3 किमी चलता है। अब वह किस दिशा की ओर मुख करके चल रहा है?
समाधान: उत्तर की ओर मुख से दाईं ओर मुड़ने पर पूर्व की ओर मुख होता है। अतः वह पूर्व की ओर मुख करके चल रहा है।
बाएँ-दाएँ मोड़ के प्रश्नों में मोड़ की दिशा सदैव व्यक्ति की वर्तमान दिशा के सापेक्ष होती है, न कि पहली दिशा के सापेक्ष। अतः प्रत्येक मोड़ के बाद व्यक्ति की नई दिशा निर्धारित करें और अगला मोड़ उसी के सापेक्ष लें। यदि कोई व्यक्ति दक्षिण की ओर मुख करके चल रहा है और उसके दाईं ओर मुड़ता है, तो वह पश्चिम की ओर जाएगा। चलते समय रेखाचित्र बनाना सबसे सुरक्षित तरीका है - प्रत्येक कदम को दिशा के साथ रेखा पर अंकित करें, ताकि अंतिम स्थिति स्पष्ट दिखे।
उदाहरण 4: सीमा पश्चिम की ओर मुख करके चलती है। 4 किमी बाद वह बाईं ओर मुड़ती है और 5 किमी चलती है, फिर बाईं ओर मुड़कर 3 किमी चलती है। अब वह किस दिशा की ओर मुख कर रही है?
समाधान: पश्चिम से बाईं ओर मुड़ने पर दक्षिण, फिर दक्षिण से बाईं ओर मुड़ने पर पूर्व की ओर मुख होगा। अतः उत्तर पूर्व है।
कुछ प्रश्नों में दिशा का निर्धारण सूर्य, छाया या घड़ी के संदर्भ से किया जाता है। सामान्य नियम - सूर्य पूर्व में उगता है, इसलिए सूर्योदय के समय व्यक्ति का मुख पूर्व की ओर होता है तो छाया पश्चिम में बनती है। सूर्यास्त के समय सूर्य पश्चिम में होता है, अतः छाया पूर्व की ओर बनती है। दोपहर में सूर्य सिर के ठीक ऊपर होता है, तब छाया सबसे छोटी होती है। छाया की दिशा हमेशा सूर्य की विपरीत दिशा में होती है।
उदाहरण 5: सुबह सूर्योदय के समय मोहन अपनी छाया की ओर मुख करके खड़ा है। उसके बाईं ओर कौन-सी दिशा होगी?
समाधान: सुबह सूर्य पूर्व में होता है, अतः छाया पश्चिम में बनती है। मोहन छाया की ओर (पश्चिम की ओर) मुख करके है। पश्चिम की ओर मुख होने पर बाईं ओर दक्षिण होता है। अतः उत्तर दक्षिण है।
उदाहरण 6: शाम को सूर्यास्त के समय राधा पूर्व की ओर मुख करके चल रही है। उसकी छाया किस दिशा में पड़ेगी?
समाधान: शाम को सूर्य पश्चिम में होता है, अतः छाया पूर्व की ओर बनती है। चूँकि राधा पूर्व की ओर मुख है, उसकी छाया उसके पीछे पूर्व दिशा में पड़ेगी, क्योंकि छाया सूर्य की विपरीत दिशा में होती है। वास्तव में छाया उसके सामने पड़ेगी जब वह पश्चिम की ओर मुख हो। राधा पूर्व की ओर मुख है और सूर्य पश्चिम में है, अतः छाया उसके सामने पूर्व दिशा में पड़ेगी। उत्तर पूर्व में है।
घड़ी आधारित प्रश्नों में घड़ी की सुई की स्थिति से दिशा ज्ञात की जाती है। सामान्यतः यदि किसी प्रश्न में घड़ी के संदर्भ में दिशा दी जाए, तो उसे सीधे कम्पास से नहीं जोड़ा जा सकता, क्योंकि घड़ी की स्थिति व्यक्ति के मुख पर निर्भर करती है। ऐसे प्रश्नों को रेखाचित्र बनाकर और व्यक्ति के मुख की दिशा निर्धारित करके हल करें। छाया-आधारित प्रश्नों में हमेशा याद रखें - सूर्योदय पूर्व, सूर्यास्त पश्चिम, और छाया सदैव सूर्य की विपरीत दिशा में।
| मुख की दिशा | दाईं ओर मुड़ने पर | बाईं ओर मुड़ने पर |
|---|---|---|
| उत्तर | पूर्व | पश्चिम |
| दक्षिण | पश्चिम | पूर्व |
| पूर्व | दक्षिण | उत्तर |
| पश्चिम | उत्तर | दक्षिण |
| समय | सूर्य की दिशा | छाया की दिशा |
|---|---|---|
| सूर्योदय (सुबह) | पूर्व | पश्चिम |
| दोपहर | सिर के ऊपर | सबसे छोटी/कोई नहीं |
| सूर्यास्त (शाम) | पश्चिम | पूर्व |
flowchart TD
A[दिशा ज्ञान] --> B[मुख्य दिशाएँ]
A --> C[मध्यवर्ती दिशाएँ]
A --> D[बाएँ-दाएँ मोड़]
A --> E[सूर्य-छाया]
B --> B1[उत्तर, दक्षिण]
B --> B2[पूर्व, पश्चिम]
C --> C1[उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व]
C --> C2[उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम]
D --> D1[मुख की दिशा से मोड़]
D --> D2[रेखाचित्र बनाना]
E --> E1[सूर्योदय = पूर्व]
E --> E2[छाया सूर्य की विपरीत]
दिशा ज्ञान तर्कशक्ति की एक व्यावहारिक और स्कोरिंग विधा है, जो दिशाओं के ज्ञान और रेखाचित्र बनाने की क्षमता पर आधारित है। इस अध्याय में हमने चार मुख्य और चार मध्यवर्ती दिशाओं, बाएँ-दाएँ मोड़ के नियम, सूर्य-छाया संबंध और रेखाचित्र विधि को उदाहरण सहित समझा। सफलता का आधार वर्तमान मुख-दिशा के सापेक्ष मोड़ लेना और प्रत्येक प्रश्न में सटीक रेखाचित्र बनाना है। छाया के प्रश्नों में सूर्य और छाया की दिशा का सही संबंध याद रखना आवश्यक है। नियमित अभ्यास से रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में दिशा ज्ञान के प्रश्न शीघ्र और बिना गलती के हल होंगे।