प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय) का जन्म सन 1880 में बनारस के लमही गाँव में हुआ था। उन्हें 'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है। उन्होंने हिंदी कथा-साहित्य को एक नई दिशा दी और उसे आदर्शवाद से यथार्थवाद की ओर मोड़ा।
'दो बैलों की कथा' के माध्यम से प्रेमचंद ने कृषक समाज और पशुओं के भावनात्मक संबंध का वर्णन किया है। यह कहानी स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को भी प्रतीकात्मक रूप में दर्शाती है कि "स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।"
| विषय (Theme) | वर्णन (Description) |
|---|---|
| पशु-प्रेम | मनुष्य और पशु के बीच आत्मीय संबंध। झूरी और बैलों का आपसी स्नेह। |
| स्वतंत्रता का महत्व | आज़ादी के लिए संघर्ष। हीरा-मोती का बार-बार बंधन तोड़ना। |
| सच्ची मित्रता | विपत्ति में एक-दूसरे का साथ न छोड़ना। (जैसे कांजीहौस में हीरा का मोती के लिए रुकना)। |
| नारी सम्मान | औरत जात पर सींग चलाना मना है - यह बैलों के माध्यम से समाज को संदेश है। |
प्रश्न 1: कांजीहौस में कैद पशुओं की हाजिरी क्यों ली जाती होगी?
उत्तर: कांजीहौस एक प्रकार की पशु-जेल है जहाँ आवारा पशुओं को रखा जाता है। उनकी हाजिरी इसलिए ली जाती होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पशु भाग तो नहीं गया, उनकी संख्या ठीक है या नहीं, और कोई पशु बीमार या मृत तो नहीं है।
प्रश्न 2: छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?
उत्तर: छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी और उसकी सौतेली माँ उसे मारती थी। बैलों को भी गया द्वारा मारा-पीटा जा रहा था। बच्ची ने अपने जैसी पीड़ा बैलों में देखी, जिससे उनके प्रति उसका प्रेम उमड़ आया।