राहुल सांकृत्यायन का जन्म सन 1893 में हुआ था। उन्हें 'महापंडित' कहा जाता है। उन्होंने घुमक्कड़ी को एक शास्त्र का रूप दिया और यात्रा-वृत्तांत लेखन में उनका कोई सानी नहीं है।
'ल्हासा की ओर' एक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें लेखक ने अपनी तिब्बत यात्रा (1929-30) का वर्णन किया है। उस समय भारतीयों को तिब्बत जाने की अनुमति नहीं थी, इसलिए उन्होंने यह यात्रा एक 'भिखमंगे' के छद्म वेश में की थी।
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