17.3 पादप और जंतु कोशिका Notes

17.3 पादप और जंतु कोशिका

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ) अध्याय: 17.3 पादप और जंतु कोशिका विषय-वस्तु: पादप बनाम जंतु कोशिका अंतर

1. परिचय

पादप और जंतु दोनों बहुकोशिकीय यूकैरियोटिक जीव हैं, अतः दोनों की कोशिकाओं में केन्द्रक, साइटोप्लाज्म, कोशिका झिल्ली, माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी सम्मिश्र तथा अंतर्द्रव्यी जालिका जैसी मूलभूत रचनाएँ समान रूप से पाई जाती हैं। परंतु इनके रहन-सहन, आहार और शारीरिक संरचना में अंतर के कारण पादप कोशिका तथा जंतु कोशिका में कुछ महत्वपूर्ण भिन्नताएँ होती हैं। ये अंतर संरचनात्मक तथा कार्यात्मक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं।

पादप कोशिका स्वयं भोजन का निर्माण करने वाली (स्वपोषी) होती है, इसलिए इसमें क्लोरोप्लास्ट जैसे प्लास्टिड तथा प्रकाश संश्लेषण के उपकरण पाए जाते हैं। जंतु कोशिकाएँ विषमपोषी होती हैं, जो भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहती हैं, इसलिए उनमें प्लास्टिड नहीं होते। इसके अलावा पादप कोशिका को कठोर कोशिका भित्ति मिलती है, जो उसे स्थिर आकृति देती है, जबकि जंतु कोशिका में केवल लचीली कोशिका झिल्ली होती है।

परीक्षा की दृष्टि से पादप और जंतु कोशिका के अंतर से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। कौन सी रचना पादप कोशिका में पाई जाती है और जंतु में नहीं, कौन सी जंतु में पाई जाती है और पादप में नहीं, यह अंतर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का प्रमुख आधार होता है। निम्नलिखित अनुभागों में इन अंतरों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

2. पादप कोशिका की विशिष्ट रचनाएँ

कोशिका भित्ति (Cell Wall): पादप कोशिका झिल्ली के बाहर एक कठोर एवं मोटी भित्ति होती है, जिसे कोशिका भित्ति कहते हैं। इसकी खोज रॉबर्ट हुक ने की थी। यह मुख्यतः सेल्यूलोज की बनी होती है। कोशिका भित्ति की विशेषताएँ:

प्लास्टिड (Plastids): ये पादप कोशिकाओं में पाए जाने वाले दोहरी झिल्ली वाले कोशिकांग हैं। प्लास्टिड तीन प्रकार के होते हैं:

  1. क्लोरोप्लास्ट: हरे रंग के प्लास्टिड, जिनमें क्लोरोफिल नामक वर्णक होता है। ये प्रकाश संश्लेषण करते हैं। इनके अंदर की थैली जैसी रचनाओं को थायलाकोइड तथा उनके समूह को ग्राना कहते हैं।
  2. क्रोमोप्लास्ट: रंगीन प्लास्टिड, जिनमें कैरोटीनॉयड वर्णक होते हैं, जो फूलों और फलों को रंग देते हैं।
  3. ल्यूकोप्लास्ट: रंगहीन प्लास्टिड, जो स्टार्च, प्रोटीन व तेल का संचय करते हैं। उदाहरण- एमाइलोप्लास्ट स्टार्च संचित करता है।

प्लास्टिड में भी अपना DNA तथा राइबोसोम होते हैं, इसलिए ये भी माइटोकॉन्ड्रिया की तरह अर्धस्वायत्त कोशिकांग हैं।

बड़ी रिक्तिका (Vacuole): परिपक्व पादप कोशिका में एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है, जो लगभग 90 प्रतिशत कोशिका स्थान घेर सकती है। यह रिक्तिका कोशिका रस (Cell Sap) से भरी होती है। इसकी झिल्ली को टोनोप्लास्ट कहते हैं। रिक्तिका जल संचय, परासरणी दाब बनाए रखने तथा अपशिष्ट संचय का कार्य करती है।

3. जंतु कोशिका की विशिष्ट रचनाएँ

सेंट्रीओल (Centriole): जंतु कोशिकाओं में केन्द्रक के निकट स्थित सूक्ष्म, झिल्ली रहित कोशिकांग सेंट्रीओल पाया जाता है। ये बेलनाकार रचनाएँ 9 ट्रिपलेट सूक्ष्मनलिकाओं से बनी होती हैं। सेंट्रीओल का समूह सेंट्रोसोम कहलाता है।

लाइसोसोम की अधिकता: जंतु कोशिकाओं में लाइसोसोम अधिक संख्या में पाए जाते हैं, जो कोशिका के अपशिष्ट पदार्थों को पचाते हैं। पादप कोशिकाओं में लाइसोसोम कम संख्या में होते हैं या रिक्तिका के रूप में कार्य करते हैं।

लचीली आकृति: जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति न होने के कारण वह अपनी आकृति बदल सकती है। यही कारण है कि श्वेत रक्त कोशिकाएँ आकार बदलकर अमीबा की तरह बैक्टीरिया को घेर लेती हैं।

4. पादप और जंतु कोशिका में मुख्य अंतर

संरचनात्मक अंतर:

  1. पादप कोशिका में कोशिका भित्ति होती है, जंतु कोशिका में नहीं।
  2. पादप कोशिका में प्लास्टिड (क्लोरोप्लास्ट) होते हैं, जंतु कोशिका में नहीं।
  3. पादप कोशिका में एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में छोटी-छोटी अनेक रिक्तिकाएँ होती हैं।
  4. जंतु कोशिका में सेंट्रीओल पाया जाता है, परिपक्व पादप कोशिका में नहीं।
  5. पादप कोशिका की आकृति निश्चित एवं नियमित होती है, जंतु कोशिका की आकृति अनियमित हो सकती है।
  6. पादप कोशिका में भोजन का संचय स्टार्च के रूप में होता है, जंतु कोशिका में ग्लाइकोजन के रूप में।
  7. लाइसोसोम जंतु कोशिका में अधिक तथा पादप कोशिका में कम या अनुपस्थित होते हैं।
  8. कोशिका विभाजन में पादप कोशिका मध्य पटल से और जंतु कोशिका विभाजी खाँच से विभाजित होती है।

परासरणी संबंधी अंतर: पादप कोशिका कोशिका भित्ति के कारण आस-पास के जल में सूजकर फटती नहीं है, जबकि जंतु कोशिका जल में लिए जाने पर फट सकती है। अलवणीय जल में रखे अमीबा की कोशिका विशेष रचना 'कांट्रैक्टाइल रिक्तिका' से अतिरिक्त जल बाहर निकालती है, जो जंतु कोशिका में जल संतुलन का उदाहरण है।

समानताएँ: दोनों कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली, साइटोप्लाज्म, केन्द्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, अंतर्द्रव्यी जालिका, गॉल्जी सम्मिश्र आदि समान रूप से पाए जाते हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: पादप और जंतु कोशिका में मुख्य अंतर

लक्षण पादप कोशिका जंतु कोशिका
कोशिका भित्ति उपस्थित (सेल्यूलोज) अनुपस्थित
प्लास्टिड उपस्थित अनुपस्थित
सेंट्रीओल प्रायः अनुपस्थित उपस्थित
रिक्तिका एक बड़ी केंद्रीय अनेक छोटी
खाद्य संचय स्टार्च ग्लाइकोजन
आकृति निश्चित अनियमित

तालिका 2: प्लास्टिड के प्रकार और कार्य

प्लास्टिड वर्णक मुख्य कार्य
क्लोरोप्लास्ट क्लोरोफिल (हरा) प्रकाश संश्लेषण
क्रोमोप्लास्ट कैरोटीनॉयड (रंगीन) फल-फूल को रंग देना
ल्यूकोप्लास्ट रंगहीन स्टार्च, प्रोटीन, तेल का संचय

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[17.3 पादप और जंतु कोशिका] --> B[पादप कोशिका]
    A --> C[जंतु कोशिका]
    B --> B1[कोशिका भित्ति]
    B --> B2[प्लास्टिड]
    B --> B3[बड़ी रिक्तिका]
    C --> C1[सेंट्रीओल]
    C --> C2[लाइसोसोम अधिक]
    C --> C3[लचीली आकृति]
    B1 --> B4[सेल्यूलोज]
    B2 --> B5[क्लोरोप्लास्ट]
    C --> C4[ग्लाइकोजन संचय]
    B --> B6[स्टार्च संचय]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

पादप कोशिका कोशिका भित्ति कोशिका झिल्ली क्लोरोप्लास्ट केन्द्रक बड़ी रिक्तिका जंतु कोशिका कोशिका झिल्ली मात्र केन्द्रक सेंट्रीओल लचीली आकृति, लाइसोसोम अधिक स्वर्ण नियम: कोशिका भित्ति और प्लास्टिड पादप कोशिका की पहचान हैं।

प्लास्टिड के प्रकार प्लास्टिड क्लोरोप्लास्ट क्लोरोफिल, प्रकाश संश्लेषण क्रोमोप्लास्ट रंगीन वर्णक ल्यूकोप्लास्ट स्टार्च, प्रोटीन, तेल संचय स्वर्ण नियम: क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण का स्थल है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. विद्यार्थी कोशिका भित्ति को अर्धपारगम्य मान लेते हैं, जबकि कोशिका भित्ति पूर्ण पारगम्य होती है और कोशिका झिल्ली अर्धपारगम्य होती है।
  2. जंतु कोशिका में क्लोरोप्लास्ट नहीं होता, परंतु कई बार छात्र सभी प्लास्टिड को जंतु कोशिका से जोड़ देते हैं।
  3. सेंट्रीओल केवल जंतु कोशिका में होता है, परंतु कुछ निम्न पादपों (जैसे अधिकांश शैवाल) में भी होता है; परिपक्व उच्च पादप कोशिकाओं में अनुपस्थित होने का ध्यान रखें।
  4. पादप कोशिका में खाद्य संचय स्टार्च रूप में और जंतु कोशिका में ग्लाइकोजन रूप में होता है; इसका उलटा याद करना सामान्य गलती है।
  5. रिक्तिका की झिल्ली को टोनोप्लास्ट कहते हैं; कई छात्र इसे प्लाज्मा झिल्ली समझ लेते हैं।
  6. कोशिका विभाजन में पादप कोशिका मध्य पटल और जंतु कोशिका विभाजी खाँच से विभाजित होती है; इस अंतर को उल्टा याद किया जाता है।
  7. क्लोरोप्लास्ट में थायलाकोइड के समूह को ग्राना कहते हैं; ग्राना और स्ट्रोमा के अंतर में भ्रम हो जाता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. पादप कोशिका की तीन विशेष रचनाएँ याद रखें: कोशिका भित्ति, प्लास्टिड और बड़ी रिक्तिका।
  2. जंतु कोशिका की दो विशेष रचनाएँ याद रखें: सेंट्रीओल और अधिक लाइसोसोम।
  3. प्लास्टिड के तीनों प्रकारों और उनके वर्णकों को तालिका रूप में याद करें।
  4. कोशिका भित्ति = सेल्यूलोज + पूर्ण पारगम्य; कोशिका झिल्ली = लिपिड दोहरी परत + अर्धपारगम्य, यह जोड़ी बार-बार पूछी जाती है।
  5. टोनोप्लास्ट शब्द को रिक्तिका झिल्ली से जोड़ें।
  6. मध्य पटल (पादप) और विभाजी खाँच (जंतु) का संबंध कोशिका विभाजन के प्रश्नों में उपयोगी है।
  7. क्लोरोप्लास्ट को अर्धस्वायत्त कोशिकांग के उदाहरण में शामिल करें, क्योंकि इसमें अपना DNA और राइबोसोम होते हैं।
  8. श्वेत रक्त कोशिका की लचीली आकृति का कारण कोशिका भित्ति का न होना है, यह कारण-प्रभाव समझें।

10. निष्कर्ष

पादप और जंतु कोशिका के अंतर को समझना कोशिका विज्ञान का आधारभूत ज्ञान है। कोशिका भित्ति, प्लास्टिड और बड़ी रिक्तिका पादप कोशिका की विशेषताएँ हैं, जबकि सेंट्रीओल, अधिक लाइसोसोम और लचीली आकृति जंतु कोशिका की पहचान हैं। इन अंतरों के साथ-साथ दोनों की समानताओं को भी याद रखना चाहिए, क्योंकि परीक्षा में 'कौन सी रचना दोनों में समान है' जैसे प्रश्न भी पूछे जाते हैं। इस प्रकार संरचनात्मक भिन्नता और कार्यात्मक अनुकूलन का संयोजन ही इन अंतरों की सही समझ देता है।