17.4 पादप ऊतक Notes

17.4 पादप ऊतक

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ) अध्याय: 17.4 पादप ऊतक विषय-वस्तु: मेरिस्टेमेटिक, स्थायी ऊतक

1. परिचय

बहुकोशिकीय जीवों में अनेक कोशिकाएँ मिलकर विशिष्ट कार्य करती हैं। समान संरचना, समान उत्पत्ति तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक (Tissue) कहते हैं। पादपों में ऊतकों का अध्ययन पादप शरीर क्रिया विज्ञान की नींव है। पादपों में जंतुओं की तरह गति नहीं होती, अतः उनके ऊतक जंतुओं से भिन्न होते हैं। पादप ऊतकों को मुख्यतः विभाजक (मेरिस्टेमेटिक) और स्थायी दो श्रेणियों में बाँटा जाता है।

मेरिस्टेमेटिक ऊतकों में कोशिकाएँ विभाजित होती रहती हैं और पादप की वृद्धि करती हैं। जब ये कोशिकाएँ विभाजन करना बंद कर देती हैं, तब वे स्थायी ऊतक बन जाती हैं। स्थायी ऊतक अपना विभाजन खो देते हैं और विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं, जैसे संरचना देना, भोजन का संचय, परिवहन आदि। इस प्रकार मेरिस्टेमेटिक ऊतक 'निर्माण इकाइयाँ' हैं तथा स्थायी ऊतक 'कार्य इकाइयाँ'।

पादप ऊतकों का सही ज्ञान कृषि, वानस्पतिकी और परीक्षा दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। ग्रुप D की परीक्षा में ऊतकों के प्रकार, उनके स्थान, कार्य तथा जाइलम-फ्लोएम जैसे प्रवाहक ऊतकों से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। इस अध्याय में पादप ऊतकों की सम्पूर्ण संरचना एवं कार्य को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है।

2. मेरिस्टेमेटिक (विभाजक) ऊतक

वे ऊतक जिनकी कोशिकाएँ जीवन भर विभाजित होती रहती हैं, मेरिस्टेमेटिक ऊतक कहलाते हैं। इन कोशिकाओं में केन्द्रक बड़ा, रिक्तिका छोटी या अनुपस्थित तथा कोशिका भित्ति पतली होती है। ये कोशिकाएँ घनी होती हैं और अंतरकोशिकीय स्थान (Intercellular Spaces) इनमें प्रायः नहीं पाए जाते।

मेरिस्टेमेटिक ऊतक की विशेषताएँ:

  1. कोशिकाएँ सदैव विभाजित होती रहती हैं।
  2. कोशिका भित्ति पतली, केन्द्रक बड़ा तथा साइटोप्लाज्म घना होता है।
  3. रिक्तिकाएँ छोटी या अनुपस्थित होती हैं।
  4. अंतरकोशिकीय स्थान नहीं पाए जाते।
  5. इनके विभाजन से पादप की वृद्धि होती है।

मेरिस्टेमेटिक ऊतकों का वर्गीकरण स्थान के आधार पर:

  1. शीर्षस्थ मेरिस्टेम (Apical Meristem): जड़ और तने के अग्र भाग पर स्थित होता है। यह पादप की लंबाई में वृद्धि करता है, जिसे प्राथमिक वृद्धि कहते हैं।
  2. पार्श्वीय मेरिस्टेम (Lateral Meristem): जड़ और तने के पार्श्व (किनारों) में स्थित होता है, जैसे संवहनी कैम्बियम और कॉर्क कैम्बियम। यह मोटाई में वृद्धि करता है, जिसे द्वितीयक वृद्धि कहते हैं।
  3. अंतर्विष्ट मेरिस्टेम (Intercalary Meristem): पर्व के आधार (इंटरनोड) पर स्थित होता है, जैसे घास में। यह तने के पर्वों के बीच की वृद्धि करता है।

प्रकार्य के आधार पर वर्गीकरण: प्रोटोडर्म (बाह्य त्वचा बनाता है), प्रोकैम्बियम (प्रवाहक ऊतक बनाता है) तथा मौलिक मेरिस्टेम (भरण ऊतक बनाता है)।

3. स्थायी ऊतक

जो ऊतक विभाजन की क्षमता खो चुके होते हैं, वे स्थायी ऊतक कहलाते हैं। ये मेरिस्टेमेटिक कोशिकाओं के विभेदन से बनते हैं। स्थायी ऊतकों में कोशिका भित्ति मोटी, केन्द्रक छोटा तथा रिक्तिका बड़ी होती है। स्थायी ऊतक दो प्रकार के होते हैं:

1. सरल स्थायी ऊतक (Simple Tissues): इसमें एक ही प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं।

2. जटिल स्थायी ऊतक (Complex Tissues): इसमें एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं।

स्रावी ऊतक: ये विशेष ऊतक रेजिन, गोंद, तेल आदि का स्राव करते हैं।

4. विशेष पादप ऊतक तथा महत्वपूर्ण तथ्य

सुरक्षात्मक ऊतक: पादप की सतह को ढकने वाले ऊतक हैं।

स्थायी ऊतकों के प्रमुख अंतर:

ऊतक तंत्र: तीन ऊतक तंत्र होते हैं- त्वचीय ऊतक तंत्र (एपिडर्मिस), संवहनी ऊतक तंत्र (जाइलम-फ्लोएम) तथा मौलिक ऊतक तंत्र (भरण ऊतक)।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: मेरिस्टेमेटिक ऊतक के प्रकार

प्रकार स्थान मुख्य कार्य
शीर्षस्थ मेरिस्टेम जड़-तने का अग्र भाग लंबाई में वृद्धि (प्राथमिक)
पार्श्वीय मेरिस्टेम जड़-तने के पार्श्व मोटाई में वृद्धि (द्वितीयक)
अंतर्विष्ट मेरिस्टेम पर्व के आधार पर्वों के बीच की वृद्धि

तालिका 2: सरल स्थायी ऊतक

ऊतक कोशिका अवस्था भित्ति कार्य
पैरेन्काइमा जीवित पतली भरण, खाद्य संचय
कोलेन्काइमा जीवित कोनों पर गाढ़ी लचीलापन
स्क्लेरेन्काइमा मृत मोटी लिग्निन युक्त यांत्रिक सहारा

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[17.4 पादप ऊतक] --> B[मेरिस्टेमेटिक]
    A --> C[स्थायी ऊतक]
    B --> B1[शीर्षस्थ]
    B --> B2[पार्श्वीय]
    B --> B3[अंतर्विष्ट]
    C --> C1[सरल]
    C --> C2[जटिल]
    C1 --> C11[पैरेन्काइमा]
    C1 --> C12[कोलेन्काइमा]
    C1 --> C13[स्क्लेरेन्काइमा]
    C2 --> C21[जाइलम]
    C2 --> C22[फ्लोएम]
    C21 --> C211[जल संवहन]
    C22 --> C221[भोजन संवहन]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

पादप ऊतकों का वर्गीकरण पादप ऊतक मेरिस्टेमेटिक विभाजक, वृद्धि स्थायी ऊतक विभेदित, कार्य सरल और जटिल स्थायी ऊतक स्वर्ण नियम: मेरिस्टेमेटिक ऊतक विभाजन से वृद्धि करते हैं।

जाइलम और फ्लोएम संवहन पत्तियाँ जाइलम जल ऊपर की ओर फ्लोएम भोजन दोनों ओर जड़ें जाइलम: ट्रेकिड्स, वेसल्स एकमार्गी, मृत तत्व फ्लोएम: चालनी नलिकाएँ द्विमार्गी, जीवित तत्व स्वर्ण नियम: जाइलम जल और फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. जाइलम को भोजन का संवाहक तथा फ्लोएम को जल का संवाहक मान लिया जाता है, जबकि जाइलम जल और फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
  2. जाइलम में अधिकांश तत्व मृत होते हैं और फ्लोएम के तत्व जीवित रहते हैं; यह अंतर भुला दिया जाता है।
  3. जाइलम परिवहन एकमार्गी (ऊपर की ओर) होता है जबकि फ्लोएम द्विमार्गी; विद्यार्थी इन्हें उल्टा याद कर लेते हैं।
  4. स्क्लेरेन्काइमा को जीवित ऊतक समझ लिया जाता है, जबकि इसकी कोशिकाएँ मृत और लिग्निन युक्त मोटी भित्ति वाली होती हैं।
  5. कोलेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा के कार्यों में भ्रम होता है; कोलेन्काइमा लचीलापन देता है, स्क्लेरेन्काइमा कठोरता।
  6. मेरिस्टेमेटिक ऊतक की कोशिकाओं में रिक्तिका बड़ी होती है, यह गलत धारणा है; वास्तव में रिक्तिका छोटी या अनुपस्थित होती है।
  7. पार्श्वीय मेरिस्टेम को लंबाई बढ़ाने वाला मान लिया जाता है, जबकि लंबाई शीर्षस्थ और मोटाई पार्श्वीय मेरिस्टेम से बढ़ती है।
  8. एरेन्काइमा (वायु स्थान वाला पैरेन्काइमा) और क्लोरेन्काइमा (क्लोरोप्लास्ट वाला) को एक ही समझ लिया जाता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. जाइलम-फ्लोएम की तुलना को हमेशा याद रखें: जाइलम = जल + मृत + एकमार्गी; फ्लोएम = भोजन + जीवित + द्विमार्गी।
  2. सरल स्थायी ऊतकों को 'पतली-गाढ़ी-कठोर' क्रम में याद करें: पैरेन्काइमा (पतली), कोलेन्काइमा (कोने गाढ़े), स्क्लेरेन्काइमा (पूरी मोटी लिग्निन)।
  3. मेरिस्टेम के तीनों प्रकारों को स्थान से जोड़ें: सिरा = शीर्षस्थ, किनारा = पार्श्वीय, पर्व आधार = अंतर्विष्ट।
  4. संवहनी कैम्बियम और कॉर्क कैम्बियम को पार्श्वीय मेरिस्टेम से जोड़ें।
  5. रंध्र = रक्षक कोशिकाएँ + वाष्पोत्सर्जन, यह जोड़ी बार-बार पूछी जाती है।
  6. स्क्लेरेन्काइमा के उदाहरण (नारियल का रेशा, अमरूद की गुठली) याद रखें।
  7. चालनी नलिका और सहचर कोशिका शब्दों को फ्लोएम से जोड़ें।
  8. पैरेन्काइमा के दो रूप- क्लोरेन्काइमा और एरेन्काइमा को उनके वर्णक/वायु स्थान के साथ याद रखें।

10. निष्कर्ष

पादप ऊतकों का अध्ययन यह बताता है कि पादप में प्रत्येक कोशिका का विशेष कार्य होता है। मेरिस्टेमेटिक ऊतक वृद्धि करते हैं और स्थायी ऊतक विभिन्न जैविक कार्यों को संपन्न करते हैं। जाइलम-फ्लोएम जैसे जटिल ऊतक पूरे पादप में जल और भोजन का संवहन सुनिश्चित करते हैं। परीक्षा की दृष्टि से ऊतकों के वर्गीकरण, स्थान और कार्य का स्पष्ट ज्ञान तथा जाइलम-फ्लोएम के अंतर को याद रखना अत्यंत लाभदायक है, क्योंकि ये अवधारणाएँ जीवन प्रक्रियाओं के अध्यायों से भी जुड़ी हैं।