15.5 द्विविस्थापन अभिक्रिया Notes

15.5 द्विविस्थापन अभिक्रिया

विषय: रेलवे ग्रुप D – रसायन विज्ञान (अभिक्रियाएँ और रासायनिक गुण) अध्याय: 15.5 द्विविस्थापन अभिक्रिया विषय-वस्तु: द्विविस्थापन, अवक्षेप

1. परिचय

द्विविस्थापन अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें दो यौगिक अपने घटकों (आयनों) का परस्पर आदान-प्रदान करते हैं और दो नए यौगिक बनते हैं। इसका सामान्य रूप AB + CD → AD + CB है, जिसमें AB और CD दो यौगिक अपने आयनों का अदला-बदली करके AD और CB बनाते हैं। यह सामान्यतः जलीय घोल (aqueous solution) में होती है, जब विद्युत धारा चालक करने वाले आयन युक्त विलयनों को आपस में मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए सोडियम सल्फेट के घोल में बेरियम क्लोराइड का घोल मिलाने पर सफेद बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनता है।

द्विविस्थापन अभिक्रिया की सबसे पहचानने योग्य विशेषता यह है कि इसमें अक्सर 'अवक्षेप' (Precipitate) बनता है, अर्थात एक अघुलनशील ठोस पदार्थ जो घोल के नीचे बैठ जाता है। ऐसी द्विविस्थापन अभिक्रियाओं को 'अवक्षेपण अभिक्रिया' भी कहते हैं। रंगीन अवक्षेपों की पहचान, जैसे पीला लेड आयोडाइड (PbI2), परीक्षा का अत्यंत लोकप्रिय प्रश्न है। इसके अतिरिक्त अम्ल और क्षार के बीच उदासीनीकरण भी एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है।

RRB ग्रुप D की परीक्षा में द्विविस्थापन अभिक्रिया की पहचान, अवक्षेप के रंग तथा उत्पादों को सही क्रम में लिखने वाले प्रश्न बहुधा पूछे जाते हैं। AgNO3 + NaCl → AgCl + NaNO3 और Pb(NO3)2 + 2KI → PbI2 + 2KNO3 जैसे समीकरणों का सही संतुलित रूप तथा अवक्षेप का रंग याद रखना अत्यंत आवश्यक है। इस अध्याय में हम इन्हीं अवधारणाओं को उदाहरण सहित विस्तार से पढ़ेंगे।

2. द्विविस्थापन अभिक्रिया की परिभाषा और नियम

द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिकों के आयन आपस में स्थान बदलते हैं। इसका सामान्य रूप है:

यहाँ AB में A धनायन (cation) और B ऋणायन (anion) है; CD में C धनायन और D ऋणायन है। अदला-बदली में A, D से और C, B से जुड़ जाता है। इस अभिक्रिया के मुख्य लक्षण:

पहचान का सरल नियम: यदि समीकरण में दो यौगिक मिलकर दो यौगिक बना रहे हैं, तथा धन और ऋण आयन अदला-बदली कर रहे हैं, तो वह द्विविस्थापन अभिक्रिया है। इसे विस्थापन अभिक्रिया से इस प्रकार अलग करें – विस्थापन में एक तत्व और एक यौगिक भाग लेते हैं (A + BC), जबकि द्विविस्थापन में दो यौगिक भाग लेते हैं (AB + CD)।

3. अवक्षेपण अभिक्रियाओं के प्रमुख उदाहरण

द्विविस्थापन अभिक्रियाओं के महत्वपूर्ण उदाहरण निम्न हैं:

इन उदाहरणों में रंगीन अवक्षेपों को विशेष रूप से याद रखें: PbI2 पीला, Cu(OH)2 नीला, Fe(OH)3 लाल-भूरा, जबकि AgCl और BaSO4 सफेद। अवक्षेपण अभिक्रिया में '↓' चिन्ह अवक्षेप को और '↑' चिन्ह गैस को दर्शाता है। जब किसी धातु आयन की पहचान करनी होती है, तो उपयुक्त अभिकर्मक मिलाकर रंगीन अवक्षेप बनने से धातु आयन का पता लगाया जाता है।

4. कार्य उदाहरण और उदासीनीकरण

उदाहरण 1: बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट के घोलों को मिलाने पर क्या होता है? - उत्तर: सफेद बेरियम सल्फेट (BaSO4) का अवक्षेप बनता है। - समीकरण: BaCl2(aq) + Na2SO4(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq) - यह अवक्षेपण द्विविस्थापन अभिक्रिया है।

उदाहरण 2: लेड नाइट्रेट में पोटेशियम आयोडाइड मिलाने पर कौन-सा रंगीन अवक्षेप बनता है? - उत्तर: पीला लेड आयोडाइड (PbI2)। - समीकरण: Pb(NO3)2(aq) + 2KI(aq) → PbI2(s) + 2KNO3(aq)

उदाहरण 3: अम्ल और क्षार की अभिक्रिया (उदासीनीकरण)। - HCl(aq) + NaOH(aq) → NaCl(aq) + H2O(l) - यह द्विविस्थापन अभिक्रिया है, जिसमें लवण और जल बनते हैं। - अवक्षेप नहीं बनता, क्योंकि NaCl जल में घुलनशील है।

उदाहरण 4: सिल्वर नाइट्रेट और सोडियम क्लोराइड। - AgNO3(aq) + NaCl(aq) → AgCl(s) + NaNO3(aq) - सफेद AgCl अवक्षेप बनता है; इसका उपयोग क्लोराइड आयन की पहचान में होता है।

द्विविस्थापन अभिक्रिया उद्योगों तथा प्रयोगशाला में बहुत उपयोगी है। रंगीन अवक्षेपों द्वारा अज्ञात लवणों के धातु आयनों की पहचान (qualitative analysis) की जाती है। अवक्षेपण अभिक्रियाओं से अनेक अघुलनशील लवण बनाए जाते हैं, और जल के कठोरता को दूर करने जैसी प्रक्रियाओं में भी इन अभिक्रियाओं का उपयोग होता है। आंतरिक दहन इंजनों के सिलिंडरों में बने लेड ऑक्साइड को हटाने में भी ये अभिक्रियाएँ काम आती हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

क्रम द्विविस्थापन अभिक्रिया अवक्षेप अवक्षेप का रंग
1 AgNO3 + NaCl → AgCl + NaNO3 AgCl सफेद
2 BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4 + 2NaCl BaSO4 सफेद
3 Pb(NO3)2 + 2KI → PbI2 + 2KNO3 PbI2 पीला
4 FeCl3 + 3NaOH → Fe(OH)3 + 3NaCl Fe(OH)3 लाल-भूरा
5 CuSO4 + 2NaOH → Cu(OH)2 + Na2SO4 Cu(OH)2 नीला
6 ZnSO4 + Na2S → ZnS + Na2SO4 ZnS सफेद

तालिका 2

अभिक्रिया प्रकार सामान्य रूप अभिकारकों की प्रकृति उदाहरण
विस्थापन A + BC → AC + B एक तत्व + एक यौगिक Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu
द्विविस्थापन AB + CD → AD + CB दो यौगिक AgNO3 + NaCl → AgCl + NaNO3
उदासीनीकरण अम्ल + क्षार → लवण + जल अम्ल + क्षार HCl + NaOH → NaCl + H2O
अवक्षेपण लवण + लवण → अवक्षेप + लवण दो घुलनशील लवण Pb(NO3)2 + 2KI → PbI2 + 2KNO3

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[द्विविस्थापन अभिक्रिया AB + CD → AD + CB] --> B[आयनों की अदला-बदली]
    A --> C[अवक्षेपण अभिक्रिया]
    A --> D[उदासीनीकरण]
    B --> B1[दो यौगिक, दो उत्पाद]
    C --> C1[AgNO3 + NaCl → AgCl + NaNO3]
    C --> C2[Pb(NO3)2 + 2KI → PbI2 + 2KNO3]
    C --> C3[BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4 + 2NaCl]
    D --> D1[HCl + NaOH → NaCl + H2O]
    D --> D2[लवण और जल बनते हैं]
    A --> E[अवक्षेप रंग]
    E --> E1[PbI2 पीला]
    E --> E2[Cu(OH)2 नीला]
    E --> E3[Fe(OH)3 लाल-भूरा]
    E --> E4[AgCl सफेद]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

द्विविस्थापन अभिक्रिया AB + CD → AD + CB AB धन A ऋण B CD धन C ऋण D + AD A + D जुड़े CB C + B जुड़े प्रमुख अवक्षेपण अभिक्रियाएँ AgNO3 + NaCl → AgCl(सफेद) + NaNO3 BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4(सफेद) + 2NaCl Pb(NO3)2 + 2KI → PbI2(पीला) + 2KNO3 CuSO4 + 2NaOH → Cu(OH)2(नीला) + Na2SO4 स्वर्ण नियम दो यौगिकों के आयनों की अदला-बदली ही द्विविस्थापन है।

रंगीन अवक्षेप की पहचान पीला अवक्षेप PbI2 लेड आयोडाइड Pb(NO3)2 + 2KI से नीला अवक्षेप Cu(OH)2 कॉपर हाइड्रॉक्साइड CuSO4 + 2NaOH से लाल-भूरा अवक्षेप Fe(OH)3 आयरन हाइड्रॉक्साइड FeCl3 + 3NaOH से सफेद अवक्षेप AgCl, BaSO4 क्लोराइड/सल्फेट पहचान उदासीनीकरण भी द्विविस्थापन: HCl + NaOH → NaCl + H2O लवण और जल बनते हैं स्वर्ण नियम अवक्षेप के रंग से अज्ञात आयन की पहचान की जाती है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. उत्पादों का क्रम: Pb(NO3)2 + 2KI का उत्पाद PbI2 + 2KNO3 है, इसे Pb(NO3)I + KNO3 जैसा गलत लिखना सामान्य भूल है।
  2. अवक्षेप का रंग: PbI2 को सफेद बताना गलत है; यह चमकीला पीला होता है।
  3. संतुलन में गलती: BaCl2 + Na2SO4 में NaCl के सामने गुणांक 2 होता है, इसे छोड़ देना गलत है।
  4. अवक्षेप चिन्ह न लगाना: अघुलनशील उत्पाद के साथ (s) या ↓ चिन्ह अनिवार्य है।
  5. विस्थापन से भ्रम: द्विविस्थापन को विस्थापन (A + BC) समझ लेना गलत है; द्विविस्थापन में दोनों अभिकारक यौगिक होते हैं।
  6. उदासीनीकरण न पहचानना: HCl + NaOH → NaCl + H2O में अवक्षेप न होने से इसे रासायनिक अभिक्रिया न मानना गलत है; यह द्विविस्थापन है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. दो यौगिकों की अदला-बदली देखते ही द्विविस्थापन कहें।
  2. रंगीन अवक्षेपों की सूची रटें: PbI2 पीला, Cu(OH)2 नीला, Fe(OH)3 लाल-भूरा, AgCl/BaSO4 सफेद।
  3. Pb(NO3)2 + 2KI → PbI2 + 2KNO3 को सबसे लोकप्रिय अवक्षेपण प्रश्न के रूप में याद रखें।
  4. अम्ल-क्षार उदासीनीकरण को द्विविस्थापन की श्रेणी में पहचानें, जिसमें उत्पाद लवण और जल हैं।
  5. समीकरण संतुलन पर ध्यान दें; NaCl के साथ गुणांक 2 जैसी छोटी बात अंक दिला सकती है।

10. निष्कर्ष

द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिक अपने आयनों का परस्पर आदान-प्रदान करके दो नए यौगिक बनाते हैं, और इसका सामान्य रूप AB + CD → AD + CB है। यदि उत्पादों में से एक अघुलनशील ठोस हो तो वह अवक्षेप कहलाता है और अभिक्रिया को अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं। पीला PbI2, नीला Cu(OH)2, लाल-भूरा Fe(OH)3 तथा सफेद AgCl और BaSO4 प्रमुख रंगीन अवक्षेपों के उदाहरण हैं। अम्ल और क्षार की उदासीनीकरण अभिक्रिया भी द्विविस्थापन का ही रूप है। परीक्षा में अभिकारकों की प्रकृति और उत्पादों के रंग पर ध्यान देकर इस अध्याय के प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है।