विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (अर्थव्यवस्था खेल और विज्ञान)
अध्याय: 22.9 अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक
विषय-वस्तु: ISRO, रक्षा मिसाइल
1. परिचय
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम विश्व के सबसे सफल अंतरिक्ष कार्यक्रमों में से एक है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अनेक उपग्रह प्रक्षेपण, चंद्र मिशन और मंगल मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। साथ ही रक्षा क्षेत्र में भारत ने मिसाइल विकास, युद्धक विमान और नौसैनिक तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
रेलवे ग्रुप D परीक्षा के सामान्य जागरूकता खंड में अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें ISRO के प्रमुख मिशन, रॉकेट एवं उपग्रह, चंद्रयान, मंगलयान, गगनयान, मिसाइलों के प्रकार एवं नाम, रक्षा अनुसंधान संगठन DRDO तथा प्रमुख रक्षा तकनीकों से जुड़े तथ्य शामिल होते हैं। ये प्रश्न अक्सर वर्तमान घटनाओं पर आधारित होते हैं।
इस अध्याय में हम ISRO के प्रमुख मिशनों, प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों तथा रक्षा क्षेत्र की मिसाइलों एवं तकनीकों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। परीक्षा उपयोगी तथ्यों को स्मरणीय तालिकाओं में प्रस्तुत किया गया है।
2. ISRO और अंतरिक्ष मिशन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना 15 अगस्त 1969 में हुई थी। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रारंभिक स्थल तिरुवनंतपुरम में थुम्बा रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई को माना जाता है।
ISRO के प्रमुख मिशन:
चंद्रयान-1 (2008): भारत का पहला चंद्र मिशन, जिसने चंद्रमा पर पानी के निशान खोजे।
मंगलयान (MOM, 2013): भारत का पहला मंगल मिशन, पहले ही प्रयास में सफल।
चंद्रयान-2 (2019): विक्रम लैंडर का क्रमिक संपर्क टूट गया, परंतु आर्बिटर सफल रहा।
चंद्रयान-3 (2023): भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बना। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर सफल रहे।
आदित्य-L1 (2023): सूर्य का अध्ययन करने वाला भारत का पहला मिशन।
गगनयान: मानव अंतरिक्ष मिशन, जो भारत का पहला मानवयुक्त मिशन होगा।
चंद्रयान-3 की प्रमुख उपलब्धियाँ:
23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग।
भारत चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश और दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना।
लैंडर का नाम 'विक्रम' और रोवर का नाम 'प्रज्ञान' रखा गया।
इससे पहले उतरने वाले देश: अमेरिका, रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) और चीन।
3. प्रक्षेपण यान और उपग्रह
भारत के प्रमुख प्रक्षेपण यान (रॉकेट) निम्न हैं:
SLV (सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल): भारत का पहला स्वदेशी प्रक्षेपण यान, 1980 में सफल।
ASLV: अग्रिम उपग्रह प्रक्षेपण यान।
PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल): भारत का सबसे सफल रॉकेट, उपग्रह प्रक्षेपण का कार्यक्षेत्र।
GSLV (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल): भारी उपग्रहों के लिए।
GSLV-MkIII (LVM3): सबसे भारी रॉकेट, चंद्रयान-3 एवं भविष्य के मिशनों के लिए।
SSLV (स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल): छोटे उपग्रहों के तीव्र प्रक्षेपण के लिए।
प्रमुख भारतीय उपग्रह:
आर्यभट्ट (1975): भारत का पहला उपग्रह, सोवियत संघ की सहायता से प्रक्षेपित।
रोहिणी (1980): SLV द्वारा प्रक्षेपित पहला स्वदेशी उपग्रह।
INSAT श्रृंखला: संचार उपग्रह।
IRS श्रृंखला: रिमोट सेंसिंग उपग्रह।
नाविक (NavIC): भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली।
ऋषभ कुमार/जीसैट: संचार उपग्रह।
आर्यभट्ट उपग्रह का नाम महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएँ प्रदान की हैं। PSLV ने एक साथ 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने का विश्व रिकॉर्ड 2017 में बनाया।
4. रक्षा तकनीक और मिसाइल
भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का मुख्य संगठन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) है। भारत ने कई मिसाइल प्रणालियाँ विकसित की हैं:
मिसाइलों के प्रकार:
बैलिस्टिक मिसाइल: अग्नि श्रृंखला (अग्नि-1 से अग्नि-5 तक)।
आईएनएस विक्रांत: भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत।
भारत ने अपनी पहली परमाणु पनडुब्बी INS अरिहंत 2016 में कमीशन की।
पिनाका: बहुउद्देश्यीय रॉकेट लांचर प्रणाली।
ड्रोन तकनीक में भारत लगातार प्रगति कर रहा है।
भारत का रक्षा बजट रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रतिवर्ष बढ़ाया जाता है। आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया जा रहा है।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
मिशन
वर्ष
विशेषता
चंद्रयान-1
2008
चंद्रमा पर पानी की खोज
मंगलयान
2013
पहले प्रयास में सफल
चंद्रयान-2
2019
विक्रम संपर्क टूटा
चंद्रयान-3
2023
दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग
आदित्य-L1
2023
सूर्य का अध्ययन
तालिका 2
मिसाइल
प्रकार
विशेषता
अग्नि
बैलिस्टिक
लंबी दूरी
पृथ्वी
बैलिस्टिक
पहली स्वदेशी
ब्रह्मोस
क्रूज
सुपरसोनिक
आकाश
सतह से हवा
मध्यम दूरी
नाग
टैंक रोधी
सटीक मारक
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक] --> B[ISRO]
A --> C[प्रक्षेपण यान]
A --> D[रक्षा मिसाइल]
B --> E[चंद्रयान-3]
B --> F[मंगलयान]
B --> G[आदित्य-L1]
B --> H[गगनयान]
C --> I[PSLV]
C --> J[GSLV]
C --> K[SSLV]
D --> L[अग्नि]
D --> M[ब्रह्मोस]
D --> N[आकाश]
E --> O[23 अगस्त 2023]
I --> P[104 उपग्रह रिकॉर्ड]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
चंद्रयान-2 और 3 का भ्रम: चंद्रयान-3 (2023) सफल रहा, चंद्रयान-2 (2019) का लैंडर असफल रहा; दोनों को नहीं मिलाना चाहिए।
ISRO की स्थापना वर्ष: ISRO 1969 में स्थापित हुआ, जबकि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष समिति (INCOSPAR) 1962 में बनी।
आर्यभट्ट उपग्रह: यह 1975 में प्रक्षेपित हुआ, जिसे सोवियत संघ ने प्रक्षेपित किया; रोहिणी (1980) स्वदेशी SLV से गया।
मंगलयान का वर्ष: मंगलयान 2013 में प्रक्षेपित हुआ, न कि 2014 में।
मिसाइल का प्रकार: ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल है, बैलिस्टिक नहीं; अग्नि बैलिस्टिक है।
गगनयान: यह अभी भविष्य का मानव मिशन है, इसे चंद्रयान के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
9. परीक्षा युक्तियाँ
चंद्रयान-3 की तिथि 23 अगस्त 2023 तथा लैंडर-रोवर के नाम (विक्रम, प्रज्ञान) याद रखें।
मिसाइलों का वर्गीकरण (बैलिस्टिक, क्रूज, सतह-हवा) तालिका बनाकर पढ़ें।
PSLV के 104 उपग्रह प्रक्षेपण रिकॉर्ड (2017) को हाइलाइट करें।
आर्यभट्ट (1975) और रोहिणी (1980) के प्रक्षेपण के अंतर को स्पष्ट रखें।
नाविक (NavIC) भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली है, इसे GPS से भ्रमित न करें।
DRDO, आईएनएस अरिहंत और आईएनएस विक्रांत के तथ्य तैयार रखें।
10. निष्कर्ष
अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक भारत की वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में ISRO के मिशन, प्रक्षेपण यान, उपग्रह तथा रक्षा मिसाइलों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। चंद्रयान-3 की सफलता, मंगलयान की उपलब्धि तथा मिसाइल कार्यक्रमों की जानकारी से परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। नियमित पुनरावृत्ति एवं स्मरणीय तालिकाओं के साथ यह विषय निश्चित सफलता दिलाने में सहायक है।