20.3 आधुनिक भारत Notes

20.3 आधुनिक भारत

विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (इतिहास और संस्कृति) अध्याय: 20.3 आधुनिक भारत विषय-वस्तु: ब्रिटिश शासन, कंपनी राज

1. परिचय

आधुनिक भारत का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के मध्य से आरंभ होता है जब अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में व्यापार से राजनीतिक शक्ति प्राप्त कर ली। 1600 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई और 1613 में मुगल शासक जहांगीर ने कंपनी को सूरत में व्यापार की अनुमति दी। धीरे-धीरे कंपनी ने फ्रांसीसियों को पराजित किया, बंगाल की सत्ता 1757 के प्लासी युद्ध में जीती और 1764 के बक्सर युद्ध के बाद बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी 1765 में प्राप्त की। इसी काल को 'कंपनी राज' और बाद के काल को 'ब्रिटिश राज' कहा जाता है।

रेलवे ग्रुप D की सामान्य जागरूकता परीक्षा में आधुनिक भारत से प्रश्नों की संख्या सबसे अधिक होती है। इनमें गवर्नर-जनरल और वायसराय के नाम, उनके कार्य, महत्वपूर्ण युद्ध, संधियाँ, कानून, आर्थिक नीतियाँ (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी, महालवाड़ी), शिक्षा की शुरुआत और प्रेस सुधार शामिल हैं। जैसे- किस गवर्नर-जनरल ने सती प्रथा का अंत किया या किसने दास प्रथा को समाप्त किया।

इस अध्याय में हम ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन से लेकर 1857 के विद्रोह तक के काल का अध्ययन करेंगे। इसमें प्रमुख युद्धों, गवर्नर-जनरल के सुधारों, आर्थिक व्यवस्थाओं और प्रतिरोध आंदोलनों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अंत में तालिकाओं, माइंड मैप और परीक्षा युक्तियों द्वारा त्वरित दोहराव किया जाएगा।

2. कंपनी का आगमन और राजनीतिक विजय

वास्को डी गामा 1498 में भारत पहुंचा, फ्रांसीसियों की फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी 1664 में बनी, परंतु अंग्रेजों ने धीरे-धीरे सभी को पीछे छोड़ दिया। तृतीय कर्नाटक युद्ध (1756-1763) के बाद पेरिस की संधि से फ्रांसीसियों का भारत से लगभग समाप्त हो गया। रॉबर्ट क्लाइव ने 1757 में प्लासी के युद्ध में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को पराजित किया। मीर जाफर ने कंपनी का साथ दिया और बंगाल की गद्दी प्राप्त की। 1760 में वांडीवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों को पराजित किया। 1764 में बक्सर के युद्ध में मीर कासिम, शुजाउद्दौला (अवध) और शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना पराजित हुई।

1765 में रॉबर्ट क्लाइव ने शाह आलम द्वितीय से बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त की और कंपनी राज्य का वास्तविक शासक बन गई। वारेन हेस्टिंग्स (1772-1785) प्रथम गवर्नर-जनरल थे जिन्होंने 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट लागू किया। 1784 में पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा बोर्ड ऑफ कंट्रोल बनाया गया। कॉर्नवालिस (1786-1793) ने स्थायी बंदोबस्त 1793 में लागू किया और सिविल सेवा में सुधार किया। वेलेजली (1798-1805) ने 'सहायक संधि' (सब्सिडियरी एलायंस) प्रणाली से हैदराबाद, मैसूर और अवध को अपने अधीन किया।

त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - 1853 में रेलवे की शुरुआत, 1854 में 'सार्वजनिक नौकरी का प्रतियोगी परीक्षा' (चार्ल्स वुड डिस्पैच)। - बंगाल में प्रथम युद्ध 1757 प्लासी, मैसूर युद्ध 1799 में टीपू सुल्तान की मृत्यु (चौथा मैसूर युद्ध)। - 'सहायक संधि' वेलेजली द्वारा, 'विलय का सिद्धांत' डलहौजी द्वारा (1848-1856)। - 1765 दीवानी प्राप्ति, 1793 स्थायी बंदोबस्त, 1829 सती प्रथा का अंत। - प्रथम गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स, अंतिम गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग (जो प्रथम वायसराय भी बने)। - सिक्ख युद्ध 1845-46 (प्रथम) और 1848-49 (द्वितीय); पंजाब का विलय 1849 में।

3. गवर्नर-जनरल और उनके सुधार

बंगाल का प्रथम गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स था जिसने 1774 में 'रोहिला युद्ध' में भाग लिया और 1781 में 'हेस्टिंग्स पर महाभियोग' लगा। कॉर्नवालिस ने पुलिस सुधार, सिविल सर्विस सुधार और 1793 में स्थायी बंदोबस्त लागू किया, इसलिए उसे 'कंपनी का सेसिल रोड्स' नहीं बल्कि 'सिविल सेवा का जनक' कहा जाता है। वेलेजली ने फोर्ट विलियम कॉलेज (कलकत्ता) की स्थापना की। हेस्टिंग्स प्रथम गवर्नर-जनरल थे जिन्होंने 1784 में अमेरिकी युद्ध का प्रभाव झेला। लॉर्ड मिंटो प्रथम ने 1813 के चार्टर एक्ट में व्यापार एकाधिकार में ढील दी। लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1828-1835) ने 1829 में सती प्रथा का अंत किया, थगी प्रथा दमन के लिए कदम उठाए और 1835 में अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम पारित किया। वहीं चार्ल्स मेटकाफ ने 1835 में प्रेस की स्वतंत्रता को बहाल किया।

लॉर्ड डलहौजी (1848-1856) सबसे युवा गवर्नर-जनरल थे जिन्होंने 'विलय का सिद्धांत' (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) लागू किया। इसके अंतर्गत संतान न होने पर रियासतें ब्रिटिश राज्य में विलय कर ली गईं, जैसे सतारा (1848), झांसी (1853), नागपुर (1854) और जैतपुर। डलहौजी ने रेलवे, टेलीग्राफ और डाक टिकट की शुरुआत की। लॉर्ड कैनिंग ने 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित कराया और प्रथम वायसराय बने। 1857 के विद्रोह के समय लॉर्ड कैनिंग वायसराय थे। 1861 में भारतीय परिषद अधिनियम पारित हुआ।

त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट, 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट, 1813 का चार्टर एक्ट (ईस्ट इंडिया कंपनी के एकाधिकार का अंत)। - 1833 का चार्टर एक्ट- गवर्नर-जनरल को बंगाल का गवर्नर बनाया, कंपनी को व्यापारी संस्था से प्रशासक बनाया। - 1853 का चार्टर एक्ट- सिविल सेवा में प्रतियोगी परीक्षा की शुरुआत। - विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 में लॉर्ड कैनिंग ने पारित कराया। - 1813 के बाद मिशनरियों को शिक्षा का अधिकार मिला। - स्थायी बंदोबस्त बंगाल, बिहार, उड़ीसा में; रैयतवाड़ी मद्रास व बंबई में; महालवाड़ी उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में। - द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1947 में स्वतंत्रता मिली।

4. आर्थिक नीतियाँ और प्रतिरोध आंदोलन

कंपनी राज की आर्थिक नीतियों ने भारतीय कृषि को गंभीर रूप से प्रभावित किया। स्थायी बंदोबस्त (1793) के अंतर्गत जमींदारों को स्थायी भूमि कर का दायित्व दिया गया। रैयतवाड़ी व्यवस्था (1820) में रैयत (किसान) सीधे सरकार को कर देता था और महालवाड़ी (1833) में पूरे गांव से कर वसूला जाता था। इन व्यवस्थाओं से किसानों पर करों का बोझ बढ़ा और कई जगह विद्रोह हुए। इनमें संथाल विद्रोह (1855-56), बिरसा मुंडा विद्रोह (1899-1900), पाजी विद्रोह और मेपिला विद्रोह शामिल हैं। 1857 के पूर्व अनेक किसान और जनजातीय आंदोलन हुए जैसे- ब्रिटिश नीति के विरुद्ध सिपाही विद्रोह भी।

इस काल में ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय हथकरघा उद्योग को नष्ट किया और भारत कच्चे माल का निर्यातक तथा तैयार माल का आयातक बन गया। 1813 के चार्टर एक्ट के बाद व्यापार एकाधिकार समाप्त हुआ और स्वतंत्र व्यापार शुरू हुआ। 1858 में भारत सरकार अधिनियम द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत हुआ और शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आया। इसी वर्ष वायसराय की पदवी बनाई गई। भारतीय प्रतिरोध में 1857 का विद्रोह सबसे बड़ा था जिसमें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, नाना साहेब और तात्या टोपे जैसे वीर शामिल थे।

त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - 1857 के विद्रोह की शुरुआत 10 मई को मेरठ से हुई और दिल्ली तक फैली। - मंगल पांडे 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में प्रथम सिपाही थे जिन्होंने विद्रोह किया। - दिल्ली में बहादुर शाह जफर को विद्रोही नेता घोषित किया गया। - 1858 में रानी विक्टोरिया की उद्घोषणा से भारत क्राउन के अधीन आया। - लॉर्ड कैनिंग प्रथम वायसराय (1858-1862) और लॉर्ड माउंटबेटन अंतिम वायसराय (1947) थे। - 1877 में प्रथम दिल्ली दरबार में रानी विक्टोरिया को 'कैसर-ए-हिंद' घोषित किया गया।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

गवर्नर-जनरल/वायसराय काल प्रमुख उपलब्धि
वारेन हेस्टिंग्स 1772-1785 रेग्युलेटिंग एक्ट 1773
कॉर्नवालिस 1786-1793 स्थायी बंदोबस्त 1793
वेलेजली 1798-1805 सहायक संधि प्रणाली
विलियम बेंटिंक 1828-1835 सती प्रथा का अंत 1829
डलहौजी 1848-1856 विलय का सिद्धांत, रेलवे
कैनिंग 1856-1862 विद्रोह 1857, प्रथम वायसराय

तालिका 2

युद्ध/घटना वर्ष परिणाम
प्लासी का युद्ध 1757 बंगाल की दीवानी की ओर प्रथम कदम
बक्सर का युद्ध 1764 1765 में दीवानी प्राप्ति
तृतीय कर्नाटक युद्ध 1763 फ्रांसीसियों का अंत
चौथा मैसूर युद्ध 1799 टीपू सुल्तान की मृत्यु
प्रथम सिक्ख युद्ध 1845-46 लाहौर की संधि
विद्रोह 1857 1857 कंपनी शासन का अंत, 1858

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[आधुनिक भारत] --> B[कंपनी राज]
    A --> C[ब्रिटिश शासन]
    B --> B1[प्लासी 1757]
    B --> B2[बक्सर 1764]
    B --> B3[दीवानी 1765]
    B --> B4[स्थायी बंदोबस्त]
    C --> C1[गवर्नर-जनरल]
    C --> C2[सुधार और कानून]
    C --> C3[आर्थिक नीतियाँ]
    C --> C4[प्रतिरोध आंदोलन]
    C1 --> D1[वारेन हेस्टिंग्स]
    C1 --> D2[बेंटिंक]
    C1 --> D3[डलहौजी]
    C1 --> D4[कैनिंग]
    C2 --> E1[सती प्रथा का अंत]
    C2 --> E2[विलय का सिद्धांत]
    C2 --> E3[विधवा पुनर्विवाह]
    C4 --> F1[संथाल विद्रोह]
    C4 --> F2[विद्रोह 1857]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

कंपनी राज का विस्तार प्लासी 1757 सिराजुद्दौला पराजित बक्सर 1764 मीर कासिम पराजित दीवानी 1765 बंगाल-बिहार-उड़ीसा सहायक संधि वेलेजली 1798 विलय का सिद्धांत डलहौजी 1848 विद्रोह 1857 कंपनी शासन का अंत विद्रोह के प्रमुख नेता मंगल पांडे - बैरकपुर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई - झांसी नाना साहेब - कानपुर, तात्या टोपे - ग्वालियर स्वर्ण नियम कंपनी राज के प्रमुख चरण याद रखें: व्यापार, युद्ध, दीवानी, प्रशासन, विद्रोह।

भूमि राजस्व व्यवस्थाएँ स्थायी बंदोबस्त कॉर्नवालिस 1793 बंगाल, बिहार, उड़ीसा जमींदार को स्थायी कर रैयतवाड़ी मुनरो 1820 मद्रास, बंबई रैयत सीधे सरकार को कर महालवाड़ी 1833 उत्तर-पश्चिमी प्रांत गांव सामूहिक रूप से कर प्रभाव किसानों पर कर का बोझ बढ़ा जमींदारों की शक्ति बढ़ी, किसान विद्रोह हुए संथाल विद्रोह 1855-56, बिरसा मुंडा 1899-1900 स्वर्ण नियम तीनों भूमि व्यवस्थाओं के प्रवर्तक और क्षेत्र जोड़कर याद रखें। स्थायी-जमींदार, रैयतवाड़ी-रैयत, महालवाड़ी-गांव। वर्ष 1793, 1820, 1833 कंठस्थ रखें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. प्रथम गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स को 'प्रथम वायसराय' समझ लिया जाता है, जबकि प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग थे।
  2. प्लासी युद्ध (1757) को बक्सर युद्ध (1764) से भ्रमित कर दिया जाता है; प्लासी में सिराजुद्दौला और बक्सर में मीर कासिम पराजित हुआ।
  3. सती प्रथा का अंत (1829) विलियम बेंटिंक ने किया, इसे कॉर्नवालिस या डलहौजी से जोड़ने की गलती होती है।
  4. स्थायी बंदोबस्त कॉर्नवालिस ने 1793 में लागू किया, इसे वेलेजली से जोड़ने की भूल होती है।
  5. 'विलय का सिद्धांत' डलहौजी से जुड़ा है, जबकि 'सहायक संधि' वेलेजली से; दोनों आपस में बदल दिए जाते हैं।
  6. 1857 विद्रोह की शुरुआत मेरठ (10 मई) से हुई, इसे बैरकपुर से शुरू मान लिया जाता है; बैरकपुर में मंगल पांडे का विद्रोह पहले हुआ था।
  7. कंपनी शासन का अंत 1858 के भारत सरकार अधिनियम से हुआ, इसे 1857 में ही समाप्त मान लिया जाता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. गवर्नर-जनरल की सूची वर्ष के क्रम में बनाएं और हर नाम के साथ एक सुधार जोड़ें।
  2. युद्धों को 'वर्ष-विरोधी-परिणाम' की त्रिपुटी में याद रखें।
  3. स्मरणीय मुहावरे बनाएं, जैसे- 'बेंटिंक सती-विधवा'।
  4. तिथियों (1757, 1764, 1765, 1793, 1829, 1857) को कंठस्थ करें, ये सबसे अधिक पूछी जाती हैं।
  5. भूमि व्यवस्थाओं का क्षेत्रवार वर्गीकरण बनाएं।
  6. 1857 के विद्रोह के नेताओं को उनके केंद्रों के साथ जोड़कर पढ़ें।
  7. प्रत्येक चार्टर एक्ट (1773, 1784, 1813, 1833, 1853) की मुख्य बात एक पंक्ति में लिखकर अभ्यास करें।

10. निष्कर्ष

आधुनिक भारत का अध्याय रेलवे ग्रुप D परीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। कंपनी का आगमन, प्लासी और बक्सर के युद्ध, दीवानी प्राप्ति, विभिन्न गवर्नर-जनरलों के सुधार, भूमि राजस्व व्यवस्थाएँ और 1857 का विद्रोह इस अध्याय की रीढ़ हैं। इन तथ्यों को तिथियों और व्यक्तित्वों के साथ तार्किक रूप से जोड़ने से परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देना आसान हो जाता है। नियमित अभ्यास और तालिका-आधारित दोहराव आपको इस अध्याय में पूर्ण अंक दिलाने में सहायक होगा और यह ज्ञान स्वतंत्रता आंदोलन के अगले अध्याय को समझने का आधार भी तैयार करेगा।