विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश) अध्याय: 12.1 ऊष्मा और तापमान विषय-वस्तु: ऊष्मा, तापमान मापन
ऊष्मा (heat) ऊर्जा का एक रूप है, जो तापमान में अंतर के कारण एक पिंड से दूसरे पिंड में प्रवाहित होती है। ऊष्मा का प्रवाह हमेशा उच्च तापमान वाले पिंड से निम्न तापमान वाले पिंड की ओर होता है। जब दो पिंडों का तापमान बराबर हो जाता है तो ऊष्मा का प्रवाह रुक जाता है, और उन्हें तापीय संतुलन की अवस्था में कहा जाता है। ऊष्मा की SI इकाई जूल (J) है, जबकि व्यावहारिक रूप में ऊष्मा की इकाई कैलोरी (cal) भी प्रयोग होती है। एक कैलोरी वह ऊष्मा है जो 1 ग्राम जल का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ाती है। 1 कैलोरी = 4.184 जूल होता है। चाय गर्म होने से ठंडी होना, धूप में पत्थर गर्म होना – ये सभी ऊष्मा के व्यावहारिक उदाहरण हैं।
तापमान (temperature) किसी पिंड की गर्मी या ठंडक की माप है, अर्थात यह बताता है कि पिंड कितना गर्म या कितना ठंडा है। तापमान ऊष्मा से भिन्न है; ऊष्मा ऊर्जा है, जबकि तापमान पिंड के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप है। तापमान मापने का यंत्र थर्मामीटर है, और इसकी SI इकाई केल्विन (K) है। तापमान के तीन प्रमुख पैमाने प्रचलित हैं – सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन। नैदानिक (क्लिनिकल) थर्मामीटर में मानव शरीर का तापमान मापा जाता है, जो सामान्यतः लगभग 37 डिग्री सेल्सियस या 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है।
रेलवे ग्रुप D परीक्षा में ऊष्मा और तापमान की परिभाषा, ऊष्मा की इकाइयाँ, विभिन्न तापमान पैमानों के बीच परिवर्तन और थर्मामीटर से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन के बीच परिवर्तन के सूत्र याद रखना अनिवार्य है। इस अध्याय में हम ऊष्मा और तापमान की अवधारणा, तापमान पैमानों का परिवर्तन, थर्मामीटर के प्रकार और हल किए गए संख्यात्मक उदाहरणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे, जिससे परीक्षा में आने वाले सभी प्रश्न सरलता से हल हो सकें।
ऊष्मा को समझने के लिए उसकी परिभाषा, इकाइयों और ऊष्मा से संबंधित राशियों का अध्ययन आवश्यक है।
उदाहरण 1: 2 किलोग्राम जल का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस बढ़ाने में कितनी ऊष्मा लगेगी? (जल की विशिष्ट ऊष्मा = 4200 जूल/किग्रा-केल्विन) हल: Q = mcΔt = 2 × 4200 × 10 = 84000 जूल = 84 किलोजूल। उदाहरण 2: 500 ग्राम जल को 20 डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने में कितनी ऊष्मा चाहिए? हल: Q = mcΔt = 0.5 × 4200 × 10 = 21000 जूल।
तापमान मापने के लिए तीन प्रमुख पैमाने प्रयोग होते हैं – सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन।
उदाहरण 3: 100 डिग्री सेल्सियस को फारेनहाइट में बदलिए। हल: F = (9/5) × 100 + 32 = 180 + 32 = 212 डिग्री फारेनहाइट। उदाहरण 4: 98.6 डिग्री फारेनहाइट को सेल्सियस में बदलिए। हल: C = (98.6 − 32) × 5/9 = 66.6 × 5/9 = 37 डिग्री सेल्सियस। उदाहरण 5: 50 डिग्री सेल्सियस को केल्विन में बदलिए। हल: K = 50 + 273 = 323 केल्विन। उदाहरण 6: 300 केल्विन को सेल्सियस में बदलिए। हल: C = 300 − 273 = 27 डिग्री सेल्सियस।
तापमान मापने वाले यंत्र को थर्मामीटर कहते हैं, जिसमें अधिकतर पारे का प्रयोग होता है क्योंकि पारा कमरे के तापमान पर द्रव रहता है और समान रूप से विस्तार करता है।
उदाहरण 7: सामान्य शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट है, इसे केल्विन में बदलिए। हल: C = (98.6 − 32) × 5/9 = 37 डिग्री सेल्सियस; K = 37 + 273 = 310 केल्विन। उदाहरण 8: यदि किसी स्थान का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस है, तो फारेनहाइट में कितना होगा? हल: F = (9/5) × 30 + 32 = 54 + 32 = 86 डिग्री फारेनहाइट।
| पैमाना | जल का हिमांक | जल का क्वथनांक | परिवर्तन सूत्र |
|---|---|---|---|
| सेल्सियस | 0 डिग्री C | 100 डिग्री C | C |
| फारेनहाइट | 32 डिग्री F | 212 डिग्री F | F = (9/5)C + 32 |
| केल्विन | 273 K | 373 K | K = C + 273 |
| राशि | सूत्र/मान | SI इकाई |
|---|---|---|
| ऊष्मा | Q = mcΔt | जूल |
| कैलोरी | 1 cal | 4.184 जूल |
| विशिष्ट ऊष्मा | c = Q/mΔt | जूल/किग्रा-केल्विन |
| तापमान | K = C + 273 | केल्विन |
| परम शून्य | 0 K | −273 डिग्री C |
flowchart TD
A[ऊष्मा और तापमान] --> B[ऊष्मा]
B --> C[ऊर्जा का रूप]
B --> D[SI इकाई जूल]
B --> E[1 कैलोरी = 4.184 जूल]
A --> F[तापमान]
F --> G[सेल्सियस]
F --> H[फारेनहाइट]
F --> I[केल्विन]
G --> J[F = 9/5 C + 32]
G --> K[K = C + 273]
A --> L[मापन उपकरण]
L --> M[क्लिनिकल थर्मामीटर]
L --> N[प्रयोगशाला थर्मामीटर]
L --> O[पाइरोमीटर]
A --> P[विशिष्ट ऊष्मा]
P --> Q[Q = mcΔt]
ऊष्मा तापमान में अंतर के कारण प्रवाहित होने वाली ऊर्जा है जिसकी SI इकाई जूल है, जबकि तापमान पिंड की गर्मी-ठंडक का माप है जिसकी इकाई केल्विन है। सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन के बीच परिवर्तन के सूत्र परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं। ऊष्मा की गणना Q = mcΔt से होती है और जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होने के कारण समुद्र तटीय जलवायु स्थिर रहती है। थर्मामीटर के प्रकार, उनका परास और मानव शरीर का सामान्य तापमान भी महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इस अध्याय की स्पष्ट समझ से तापीय प्रसार और ऊष्मा संचरण जैसे आगे के अध्यायों को समझना सरल हो जाता है और रेलवे ग्रुप D परीक्षा के प्रश्न आसानी से हल होते हैं।