13.3 विभवांतर Notes

13.3 विभवांतर

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (विद्युत और चुंबकत्व) अध्याय: 13.3 विभवांतर विषय-वस्तु: विभव, विभवांतर, वोल्ट

1. परिचय

विद्युत विभव विद्युत क्षेत्र का वह गुण है जो बताता है कि एक इकाई धन आवेश को किसी बिंदु तक लाने में कितना कार्य करना पड़ेगा। सरल शब्दों में, विद्युत विभव विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु की स्थितिज ऊर्जा का माप है। जल जिस प्रकार ऊँचाई से नीचे बहता है, उसी प्रकार आवेश उच्च विभव से निम्न विभव की ओर प्रवाहित होता है। विद्युत परिपथ में धारा के प्रवाह के लिए दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर आवश्यक होता है, जिसे विभवांतर कहते हैं।

विभवांतर विद्युत परिपथ का वह मूल कारण है जो आवेशों को प्रवाहित करने के लिए प्रेरित करता है। किसी सेल या बैटरी के दो सिरों के बीच विभवांतर होता है, जिसके कारण परिपथ में धारा प्रवाहित होती है। विभवांतर की SI इकाई वोल्ट (V) है। यदि किसी चालक के दो बिंदुओं के बीच एक कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में एक जूल कार्य करना पड़े तो उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर एक वोल्ट होता है।

रेलवे ग्रुप D परीक्षा में विभव, विभवांतर और वोल्ट की इकाई पर आधारित प्रश्न बहुत अधिक पूछे जाते हैं। विभवांतर मापने वाले यंत्र का नाम, इसकी इकाई, संयोजन की विधि तथा संख्यात्मक प्रश्न (जैसे कार्य और आवेश से विभवांतर ज्ञात करना) परीक्षा में सामान्यतः आते हैं। इस अध्याय में इन सभी पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाया गया है।

2. विद्युत विभव और विभवांतर

विद्युत विभव: विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु पर एक इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य विद्युत विभव कहलाता है। विद्युत विभव एक अदिश राशि है और इसकी SI इकाई वोल्ट है।

विद्युत विभव का सूत्र: (V = \frac{W}{Q}) - यहाँ (V) = विद्युत विभव (वोल्ट), (W) = किया गया कार्य (जूल), (Q) = आवेश (कूलॉम)।

विभवांतर की परिभाषा: किसी विद्युत क्षेत्र में दो बिंदुओं के बीच एक इकाई धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य, उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर कहलाता है। विभवांतर को 'वोल्टेज' भी कहा जाता है।

विभवांतर का सूत्र: (V_{AB} = \frac{W}{Q}) - यहाँ (W) = आवेश (Q) को A से B तक ले जाने में किया गया कार्य।

विभवांतर की आवश्यकता: - धारा के प्रवाह के लिए परिपथ के दो बिंदुओं के बीच विभवांतर आवश्यक है। - जल उच्च स्तर से निम्न स्तर की ओर बहता है, उसी प्रकार आवेश उच्च विभव से निम्न विभव की ओर प्रवाहित होता है। - सेल या बैटरी ही परिपथ में आवश्यक विभवांतर उत्पन्न करते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: - विद्युत धारा धन टर्मिनल से ऋण टर्मिनल की ओर प्रवाहित होती है (पारंपरिक दिशा)। - धन टर्मिनल का विभव उच्च होता है तथा ऋण टर्मिनल का विभव निम्न होता है। - विभवांतर एक अदिश राशि है। - विभवांतर की SI इकाई वोल्ट है, जिसे इतालवी वैज्ञानिक अलेसांद्रो वोल्टा के सम्मान में रखा गया है।

उदाहरण 1: एक आवेश 5 कूलॉम को किसी बिंदु तक लाने में 20 जूल कार्य करना पड़ता है। उस बिंदु का विभव ज्ञात कीजिए। - हल: (V = W/Q = 20/5 = 4) वोल्ट। - उत्तर: बिंदु का विभव 4 वोल्ट है।

उदाहरण 2: किसी परिपथ के दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 10 वोल्ट है। 2 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में कितना कार्य होगा? - हल: (W = V \times Q = 10 \times 2 = 20) जूल। - उत्तर: किया गया कार्य 20 जूल है।

3. वोल्ट और वोल्टमीटर

एक वोल्ट की परिभाषा: यदि किसी चालक के दो बिंदुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में 1 जूल कार्य करना पड़े, तो उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट कहलाता है। - (1 \text{ वोल्ट} = \frac{1 \text{ जूल}}{1 \text{ कूलॉम}})

वोल्ट की छोटी-बड़ी इकाइयाँ: - मिली वोल्ट (mV): (1 \text{ V} = 1000 \text{ mV}) - किलो वोल्ट (kV): (1 \text{ kV} = 1000 \text{ V}) - मेगा वोल्ट (MV): (1 \text{ MV} = 10^6 \text{ V}) - (1 \text{ mV} = 10^{-3} \text{ V})

विभवांतर मापने का यंत्र - वोल्टमीटर: - विभवांतर मापने वाला यंत्र वोल्टमीटर कहलाता है। - वोल्टमीटर को परिपथ में समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है। - वोल्टमीटर उन दो बिंदुओं के बीच जोड़ा जाता है, जिनके बीच का विभवांतर मापना होता है। - आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत होता है, जिससे परिपथ की धारा पर प्रभाव न पड़े। - वोल्टमीटर का धन सिरा उच्च विभव की ओर और ऋण सिरा निम्न विभव की ओर जोड़ा जाता है। - वोल्टमीटर का चिन्ह (V) अक्षर में वृत्त बनाकर दिखाया जाता है।

वोल्टमीटर और एमीटर में अंतर: - एमीटर श्रेणी क्रम में जुड़ता है, वोल्टमीटर समानांतर क्रम में। - एमीटर धारा मापता है, वोल्टमीटर विभवांतर मापता है। - आदर्श एमीटर का प्रतिरोध शून्य, आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत होता है।

उदाहरण 3: एक वोल्टमीटर पर 2 किलो वोल्ट मापा गया। इसे वोल्ट में व्यक्त कीजिए। - हल: (2 \times 1000 = 2000) वोल्ट। - उत्तर: 2 किलो वोल्ट = 2000 वोल्ट।

उदाहरण 4: 0.5 किलो वोल्ट और 750 मिली वोल्ट का योग ज्ञात कीजिए। - हल: 0.5 kV = 500 वोल्ट, 750 mV = 0.75 वोल्ट। - कुल = (500 + 0.75 = 500.75) वोल्ट। - उत्तर: 500.75 वोल्ट।

4. विभवांतर से संबंधित संख्यात्मक उदाहरण

मुख्य सूत्र: - (V = W/Q) - (W = V \times Q) - (Q = W/V) - विभवांतर तथा धारा से कार्य: (W = V \times I \times t)

कार्य और शक्ति का संबंध: - कार्य (W = V \times Q) - यदि (Q = I \times t) रखें तो (W = V \times I \times t) - शक्ति (P = W/t = V \times I)

महत्वपूर्ण बिंदु: - विभवांतर जितना अधिक होगा, धारा उतनी ही अधिक होगी (प्रतिरोध स्थिर रहने पर)। - विभवांतर की इकाई वोल्ट, कार्य की इकाई जूल और आवेश की इकाई कूलॉम है। - विभवांतर ऊर्जा का माप नहीं है, यह प्रति इकाई आवेश किए गए कार्य का माप है।

उदाहरण 5: एक परिपथ में 12 वोल्ट का विभवांतर लगाया गया है और 3 एम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है। 5 सेकंड में कितना कार्य होगा? - हल: (W = V \times I \times t = 12 \times 3 \times 5 = 180) जूल। - उत्तर: 180 जूल कार्य होगा।

उदाहरण 6: किसी बिंदु पर विभव 15 वोल्ट है। 4 कूलॉम आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में कितना कार्य होगा? - हल: (W = V \times Q = 15 \times 4 = 60) जूल। - उत्तर: 60 जूल कार्य होगा।

उदाहरण 7: किसी चालक के दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 6 वोल्ट है। 3 कूलॉम आवेश स्थानांतरित करने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए। - हल: (W = V \times Q = 6 \times 3 = 18) जूल। - उत्तर: 18 जूल कार्य होगा।

उदाहरण 8: किसी बल्ब में 220 वोल्ट विभवांतर पर 0.5 एम्पियर धारा बह रही है। 10 सेकंड में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए। - हल: (W = V \times I \times t = 220 \times 0.5 \times 10 = 1100) जूल। - उत्तर: 1100 जूल कार्य होगा।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

राशि सूत्र SI इकाई
विद्युत विभव (V = W/Q) वोल्ट (V)
विभवांतर (V = W/Q) वोल्ट (V)
किया गया कार्य (W = V \times Q) जूल (J)
कार्य (धारा से) (W = V \times I \times t) जूल (J)

तालिका 2

यंत्र मापी गई राशि संयोजन आदर्श प्रतिरोध
एमीटर विद्युत धारा श्रेणी क्रम शून्य
वोल्टमीटर विभवांतर समानांतर क्रम अनंत
गैल्वेनोमीटर छोटी धारा का पता श्रेणी क्रम कम

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[13.3 विभवांतर] --> B[विद्युत विभव]
    A --> C[विभवांतर]
    A --> D[वोल्ट की इकाई]
    A --> E[मापन यंत्र]
    B --> B1[V = W / Q]
    C --> C1[धारा प्रवाह का कारण]
    D --> D1[1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम]
    E --> E1[वोल्टमीटर]
    E --> E2[समानांतर संयोजन]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

वोल्टमीटर का समानांतर संयोजन बैटरी बल्ब V वोल्टमीटर वोल्टमीटर बल्ब के सिरों के बीच समानांतर में जुड़ा है स्वर्ण नियम: विभवांतर मापने हेतु वोल्टमीटर समानांतर में जोड़ें।

विभवांतर और धारा प्रवाह धन टर्मिनल उच्च विभव (+) ऋण टर्मिनल निम्न विभव (−) धारा का प्रवाह आवेश उच्च विभव से निम्न विभव की ओर बहता है V = W / Q (वोल्ट) 1 वोल्ट = 1 जूल / 1 कूलॉम स्वर्ण नियम: धारा हमेशा उच्च विभव से निम्न विभव की ओर बहती है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. वोल्टमीटर को श्रेणी क्रम में जोड़ने की गलती की जाती है, जबकि वोल्टमीटर को हमेशा समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है।
  2. विभवांतर के सूत्र में कार्य (W) को ऊर्जा समझकर जूल के स्थान पर वाट-घंटा में लिख देते हैं।
  3. 1 वोल्ट को 1 जूल/एम्पियर लिख देते हैं, जबकि 1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम होता है।
  4. विभवांतर की इकाई को एम्पियर लिख देते हैं; विभवांतर की इकाई वोल्ट और धारा की इकाई एम्पियर है।
  5. वोल्टमीटर और एमीटर के संयोजन को उलट देते हैं - एमीटर श्रेणी और वोल्टमीटर समानांतर जुड़ता है।
  6. (W = V \times I \times t) में समय को मिनट में रख लेते हैं, जबकि समय सेकंड में लेना चाहिए।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. सूत्र (V = W/Q) को अवश्य याद रखें; विभवांतर के प्रश्न इसी पर आधारित होते हैं।
  2. वोल्टमीटर के संयोजन पर प्रश्न आए तो उत्तर 'समानांतर क्रम' होगा और एमीटर के लिए 'श्रेणी क्रम'।
  3. 1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम, यह परिभाषा बार-बार पूछी जाती है, इसे रट लें।
  4. संख्यात्मक प्रश्नों में पहले इकाइयों को SI इकाई में बदलें - किलो वोल्ट को वोल्ट में और मिनट को सेकंड में।
  5. कार्य और आवेश दिया हो तो (V = W/Q), तथा वोल्ट और आवेश दिया हो तो (W = V \times Q) लगाएं।

10. निष्कर्ष

विभवांतर विद्युत परिपथ का वह इंजन है जो आवेशों को प्रवाहित करने के लिए प्रेरित करता है। इस अध्याय में विद्युत विभव, विभवांतर की परिभाषा, वोल्ट की इकाई, मापन के यंत्र और संख्यात्मक उदाहरणों का अध्ययन किया गया। वोल्टमीटर का समानांतर संयोजन और एमीटर का श्रेणी संयोजन परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभवांतर की अवधारणा स्पष्ट होने पर ओम का नियम और विद्युत शक्ति जैसे विषयों को समझना बहुत आसान हो जाता है, क्योंकि ये सभी विभवांतर पर ही आधारित हैं। नियमित अभ्यास के साथ इस अध्याय के सभी प्रश्न सरलता से हल किए जा सकते हैं।