विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (विद्युत और चुंबकत्व) अध्याय: 13.5 श्रेणी और समानांतर परिपथ विषय-वस्तु: परिपथ संयोजन, तुल्य प्रतिरोध
विद्युत परिपथ में प्रतिरोधों को जोड़ने के दो प्रमुख तरीके होते हैं - श्रेणी संयोजन और समानांतर संयोजन। श्रेणी संयोजन में प्रतिरोधों को एक के बाद एक इस प्रकार जोड़ा जाता है कि उनमें से समान धारा प्रवाहित होती है, जबकि समानांतर संयोजन में सभी प्रतिरोधों के सिरों को एक साथ जोड़ा जाता है जिससे प्रत्येक प्रतिरोध पर समान विभवांतर होता है। इन दोनों संयोजनों का तुल्य (समतुल्य) प्रतिरोध अलग-अलग सूत्रों से ज्ञात किया जाता है।
घरों में विद्युत उपकरण (बल्ब, पंखा, टीवी) हमेशा समानांतर संयोजन में जुड़े होते हैं, क्योंकि इससे प्रत्येक उपकरण पर समान विभवांतर (220 वोल्ट) मिलता है और एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरण चलते रहते हैं। दूसरी ओर, क्रिसमस ट्री की लाइटें और पुराने प्रकार के बल्ब श्रेणी संयोजन में जुड़े होते हैं। इन दोनों संयोजनों के सिद्धांतों को समझना परीक्षा और व्यावहारिक जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।
रेलवे ग्रुप D परीक्षा में श्रेणी और समानांतर परिपथ के प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हैं। तुल्य प्रतिरोध की गणना, दोनों संयोजनों के गुणों में अंतर, विभाजित धारा तथा संख्यात्मक प्रश्न परीक्षा में सामान्यतः पूछे जाते हैं। इस अध्याय में इन सभी अवधारणाओं को सरल उदाहरणों के साथ विस्तार से समझाया गया है।
श्रेणी संयोजन की परिभाषा: जब कई प्रतिरोधों को एक के बाद एक इस प्रकार जोड़ा जाता है कि उनमें से समान धारा प्रवाहित होती है, तो ऐसे संयोजन को श्रेणी संयोजन कहते हैं।
श्रेणी संयोजन के गुण: - प्रत्येक प्रतिरोध से समान धारा प्रवाहित होती है। - विभवांतर सभी प्रतिरोधों में विभाजित हो जाता है। - कुल विभवांतर सभी प्रतिरोधों पर पड़ने वाले विभवांतरों का योग होता है। - तुल्य प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है, जो किसी भी एक प्रतिरोध से अधिक होता है।
तुल्य प्रतिरोध का सूत्र: (R_s = R_1 + R_2 + R_3 + ...) - यहाँ (R_s) = श्रेणी संयोजन का तुल्य प्रतिरोध। - श्रेणी संयोजन में तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े प्रतिरोध से अधिक होता है।
श्रेणी संयोजन के लक्षण: - (I = I_1 = I_2 = I_3) (धारा समान) - (V = V_1 + V_2 + V_3) (विभवांतर का योग) - (R_s = R_1 + R_2 + R_3) (प्रतिरोध का योग)
श्रेणी संयोजन के दोष: - यदि एक बल्ब खराब हो जाए तो पूरा परिपथ टूट जाता है और कोई भी बल्ब नहीं जलता। - अधिक प्रतिरोध के कारण धारा कम हो जाती है।
उदाहरण 1: तीन प्रतिरोध 2 ओम, 3 ओम और 5 ओम श्रेणी में जुड़े हैं। तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। - हल: (R_s = 2 + 3 + 5 = 10) ओम। - उत्तर: तुल्य प्रतिरोध 10 ओम है।
उदाहरण 2: श्रेणी में जुड़े 4 ओम, 6 ओम और 10 ओम के प्रतिरोधों पर 20 वोल्ट लगाया गया है। धारा ज्ञात कीजिए। - हल: (R_s = 4 + 6 + 10 = 20) ओम। - (I = V/R = 20/20 = 1) एम्पियर। - उत्तर: धारा 1 एम्पियर है।
समानांतर संयोजन की परिभाषा: जब कई प्रतिरोधों के एक-एक सिरों को परस्पर एक बिंदु पर तथा दूसरे-दूसरे सिरों को दूसरे बिंदु पर जोड़ा जाता है, तो ऐसे संयोजन को समानांतर संयोजन कहते हैं।
समानांतर संयोजन के गुण: - प्रत्येक प्रतिरोध पर समान विभवांतर होता है। - धारा सभी प्रतिरोधों में विभाजित हो जाती है। - कुल धारा सभी शाखाओं की धाराओं का योग होती है। - तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम, सभी प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है। - तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
तुल्य प्रतिरोध का सूत्र: (\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} + ...) - दो प्रतिरोधों के लिए: (R_p = \frac{R_1 \times R_2}{R_1 + R_2}) - समान n प्रतिरोधों के लिए: (R_p = \frac{R}{n})
समानांतर संयोजन के लक्षण: - (V = V_1 = V_2 = V_3) (विभवांतर समान) - (I = I_1 + I_2 + I_3) (धारा का योग) - (\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3})
समानांतर संयोजन के लाभ: - प्रत्येक उपकरण को पूरा विभवांतर मिलता है। - एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरण चलते रहते हैं। - तुल्य प्रतिरोध कम होने के कारण धारा अधिक प्रवाहित होती है।
घरेलू विद्युत परिपथ में समानांतर संयोजन क्यों? - सभी उपकरणों को समान विभवांतर (220 वोल्ट) मिलता है। - प्रत्येक उपकरण को स्वतंत्र रूप से चालू-बंद किया जा सकता है। - एक उपकरण की खराबी से अन्य उपकरण प्रभावित नहीं होते।
उदाहरण 3: दो प्रतिरोध 4 ओम और 6 ओम समानांतर में जुड़े हैं। तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। - हल: (R_p = (4 \times 6)/(4 + 6) = 24/10 = 2.4) ओम। - उत्तर: तुल्य प्रतिरोध 2.4 ओम है।
उदाहरण 4: तीन प्रतिरोध 6 ओम, 12 ओम और 12 ओम समानांतर में जुड़े हैं। तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। - हल: (1/R_p = 1/6 + 1/12 + 1/12 = 2/12 + 1/12 + 1/12 = 4/12 = 1/3) - (R_p = 3) ओम। - उत्तर: तुल्य प्रतिरोध 3 ओम है।
मिश्रित संयोजन: जब श्रेणी और समानांतर दोनों संयोजन एक ही परिपथ में हों तो पहले समानांतर वाले भाग का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करें, फिर श्रेणी वाले भाग को जोड़ें।
महत्वपूर्ण सूत्र सारांश: - श्रेणी: (R_s = R_1 + R_2 + R_3) - समानांतर: (1/R_p = 1/R_1 + 1/R_2 + 1/R_3) - दो समानांतर: (R_p = R_1 R_2/(R_1 + R_2)) - n समान प्रतिरोध समानांतर: (R_p = R/n) - n समान प्रतिरोध श्रेणी: (R_s = nR)
धारा और विभवांतर वितरण: - श्रेणी में धारा समान, विभवांतर विभाजित। - समानांतर में विभवांतर समान, धारा विभाजित। - श्रेणी में बड़े प्रतिरोध पर अधिक विभवांतर होता है। - समानांतर में कम प्रतिरोध वाली शाखा से अधिक धारा बहती है।
उदाहरण 5: चार प्रतिरोध 4 ओम के चारों को समानांतर जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध क्या होगा? - हल: (R_p = R/n = 4/4 = 1) ओम। - उत्तर: तुल्य प्रतिरोध 1 ओम है।
उदाहरण 6: दो प्रतिरोध 2 ओम और 6 ओम श्रेणी में तथा तीसरा प्रतिरोध 4 ओम उनके समानांतर जुड़ा है। कुल तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। - हल: श्रेणी में (R_s = 2 + 6 = 8) ओम। - अब 8 ओम और 4 ओम समानांतर में: (1/R_p = 1/8 + 1/4 = 1/8 + 2/8 = 3/8) - (R_p = 8/3 = 2.67) ओम। - उत्तर: तुल्य प्रतिरोध लगभग 2.67 ओम है।
उदाहरण 7: दो बल्ब 3 ओम और 6 ओम के समानांतर जोड़े गए हैं। उन पर लगे विभवांतर का अनुपात क्या होगा? - हल: समानांतर में सभी पर विभवांतर समान होता है। - उत्तर: अनुपात 1:1 है।
उदाहरण 8: श्रेणी में जुड़े 2 ओम और 3 ओम के प्रतिरोधों में धारा का अनुपात क्या होगा? - हल: श्रेणी में सभी प्रतिरोधों से समान धारा बहती है। - उत्तर: अनुपात 1:1 है।
| गुण | श्रेणी संयोजन | समानांतर संयोजन |
|---|---|---|
| धारा | समान रहती है | विभाजित होती है |
| विभवांतर | विभाजित होता है | समान रहता है |
| तुल्य प्रतिरोध | (R_1 + R_2 + R_3) | (1/(1/R_1 + 1/R_2 + ...)) |
| तुल्य प्रतिरोध मान | सबसे बड़े से अधिक | सबसे छोटे से कम |
| स्थिति | सूत्र |
|---|---|
| दो समानांतर प्रतिरोध | (R_p = R_1 R_2/(R_1 + R_2)) |
| n समान प्रतिरोध समानांतर | (R_p = R/n) |
| n समान प्रतिरोध श्रेणी | (R_s = nR) |
| श्रेणी में कुल विभवांतर | (V = V_1 + V_2 + V_3) |
| समानांतर में कुल धारा | (I = I_1 + I_2 + I_3) |
flowchart TD
A[13.5 श्रेणी और समानांतर परिपथ] --> B[श्रेणी संयोजन]
A --> C[समानांतर संयोजन]
A --> D[तुल्य प्रतिरोध]
B --> B1[धारा समान]
B --> B2[Rs = R1 + R2 + R3]
C --> C1[विभवांतर समान]
C --> C2[1/Rp = 1/R1 + 1/R2]
D --> D1[घरेलू परिपथ - समानांतर]
D --> D2[झालर लाइट - श्रेणी]
श्रेणी और समानांतर संयोजन विद्युत परिपथ की संरचना और उसके व्यावहारिक उपयोग को समझने की कुंजी हैं। इस अध्याय में दोनों संयोजनों की परिभाषा, गुण, तुल्य प्रतिरोध के सूत्र तथा संख्यात्मक उदाहरणों का विस्तार से अध्ययन किया गया। परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न तुल्य प्रतिरोध की गणना और दोनों संयोजनों के अंतर पर आधारित हैं, इसलिए सूत्रों और गुणों की तालिका को अच्छी तरह से याद रखें। व्यावहारिक जीवन में घरेलू विद्युत वितरण समानांतर संयोजन पर निर्भर करता है, जो इस अध्याय की उपयोगिता को प्रदर्शित करता है। नियमित अभ्यास से यह अध्याय पूरी तरह से सरल हो जाता है।