विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (विद्युत और चुंबकत्व) अध्याय: 13.7 चुंबकीय क्षेत्र विषय-वस्तु: चुंबकीय क्षेत्र, बल रेखाएँ
चुंबकीय क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसमें किसी चुंबक या धारावाही चालक के आस-पास चुंबकीय बल का अनुभव होता है। चुंबक के चारों ओर का वह स्थान जहाँ उसका आकर्षण या प्रतिकर्षण प्रभाव देखा जाता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। चुंबकीय क्षेत्र को चुंबकीय बल रेखाओं द्वारा दर्शाया जाता है, जिन्हें 'बल रेखाएँ' भी कहा जाता है। ये रेखाएँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और तीव्रता को प्रदर्शित करती हैं।
चुंबकीय क्षेत्र के अध्ययन में दो प्रकार के चुंबक महत्वपूर्ण हैं - प्राकृतिक चुंबक (लौह अयस्क मैग्नेटाइट) और कृत्रिम चुंबक। कृत्रिम चुंबकों को विद्युत धारा तथा धातुओं की सहायता से बनाया जाता है। प्रत्येक चुंबक में दो ध्रुव होते हैं - उत्तरी ध्रुव (N) और दक्षिणी ध्रुव (S)। चुंबक के ध्रुवों का जोड़ा कभी अलग नहीं किया जा सकता, अर्थात चुंबक को आधा करने पर भी प्रत्येक टुकड़ा एक पूर्ण चुंबक ही होता है।
रेलवे ग्रुप D परीक्षा में चुंबकीय क्षेत्र और बल रेखाओं के प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। चुंबकीय क्षेत्र की इकाई टेस्ला, बल रेखाओं के गुण, चुंबक के गुण, चुंबकीय क्षेत्र मापने वाला यंत्र तथा चुंबकीय ध्रुवों के नियम परीक्षा में पूछे जाते हैं। इस अध्याय में इन सभी बिंदुओं का विस्तार से अध्ययन किया गया है।
चुंबकीय क्षेत्र की परिभाषा: किसी चुंबक या धारावाही चालक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें चुंबकीय बल का अनुभव होता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है।
चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई: टेस्ला (T)। - चुंबकीय क्षेत्र की CGS इकाई गॉस (G) है। - (1 \text{ टेस्ला} = 10^4 \text{ गॉस})।
चुंबकीय क्षेत्र का चिन्ह: चुंबकीय क्षेत्र को (B) से प्रदर्शित किया जाता है।
चुंबकीय क्षेत्र की दिशा: चुंबकीय क्षेत्र की दिशा उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर होती है (चुंबक के बाहर)। चुंबक के अंदर दक्षिण से उत्तर की ओर।
चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के उपाय: - स्थायी चुंबक द्वारा। - धारावाही चालक द्वारा (विद्युत धारा से)। - विद्युतचुंबक द्वारा।
चुंबक के गुण: - चुंबक के दो ध्रुव होते हैं - उत्तरी (N) और दक्षिणी (S)। - समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, विपरीत ध्रुव आकर्षित करते हैं। - मुक्त रूप से लटका चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है। - चुंबक के ध्रुवों को अलग करना असंभव है। - चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती हैं।
चुंबकत्व का कारण: चुंबकत्व इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण उत्पन्न होता है। परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के घूमने से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
उदाहरण 1: चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई क्या है? - हल: चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई टेस्ला (T) है। - उत्तर: टेस्ला।
उदाहरण 2: 1 टेस्ला कितने गॉस के बराबर होता है? - हल: (1 \text{ टेस्ला} = 10^4 \text{ गॉस})। - उत्तर: 10,000 गॉस।
चुंबकीय बल रेखाएँ: चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने वाली काल्पनिक रेखाएँ, जिनके स्पर्श रेखा की दिशा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है, चुंबकीय बल रेखाएँ कहलाती हैं। इन्हें चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ भी कहते हैं।
बल रेखाओं के गुण: - बल रेखाएँ चुंबक के उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती हैं (बाहर की ओर)। - चुंबक के अंदर बल रेखाएँ दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर जाती हैं। - बल रेखाएँ कभी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं। - बल रेखाएँ बंद वक्र होती हैं। - बल रेखाएँ काल्पनिक रेखाएँ हैं, वास्तविक नहीं। - जहाँ बल रेखाएँ घनी होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है। - जहाँ बल रेखाएँ विरल होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल होता है। - दो बल रेखाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ संभव नहीं, इसलिए वे प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
बल रेखाओं की तीव्रता: - ध्रुवों के निकट बल रेखाएँ घनी होती हैं, अतः चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है। - चुंबक के मध्य क्षेत्र में बल रेखाएँ विरल होती हैं, अतः चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल होता है। - चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता उस बिंदु पर बल रेखाओं के घनत्व के बराबर होती है।
उदाहरण 3: चुंबक के किस भाग में चुंबकीय क्षेत्र सबसे प्रबल होता है? - हल: चुंबक के दोनों ध्रुवों पर बल रेखाएँ सबसे घनी होती हैं। - उत्तर: चुंबक के ध्रुवों पर चुंबकीय क्षेत्र सबसे प्रबल होता है।
चुंबकीय ध्रुवों का नियम: - समान ध्रुव (N-N या S-S) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। - विपरीत ध्रुव (N-S) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
चुंबकीय क्षेत्र मापने वाला यंत्र: - चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता मापने का यंत्र मैग्नेटोमीटर है। - चुंबकीय क्षेत्र की दिशा जानने के लिए कम्पास का उपयोग होता है। - कम्पास की सुई हमेशा चुंबकीय उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।
पृथ्वी का चुंबकत्व: - पृथ्वी स्वयं एक बड़े चुंबक की तरह व्यवहार करती है। - पृथ्वी का भौगोलिक उत्तरी ध्रुव चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव के निकट है। - मुक्त रूप से लटकी कम्पास सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।
विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव: - धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। - धारा बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र बढ़ता है। - चालक से दूरी बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र घटता है।
चुंबकत्व के प्रकार: - लौहचुंबकीय: लोहा, निकल, कोबाल्ट - अत्यधिक चुंबकत्व ग्रहण करते हैं। - अनुचुंबकीय: एल्युमिनियम, प्लैटिनम - कम चुंबकत्व। - प्रतिचुंबकीय: तांबा, बिस्मथ - चुंबकत्व का विरोध।
उदाहरण 4: कम्पास सुई किस दिशा में ठहरती है? - हल: कम्पास सुई हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है। - उत्तर: उत्तर-दक्षिण दिशा में।
उदाहरण 5: एक चुंबक को बीच से दो भागों में काटा जाता है। प्रत्येक टुकड़ा कैसा होगा? - हल: चुंबक को काटने पर प्रत्येक टुकड़ा एक पूर्ण चुंबक बन जाता है, जिसमें उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रुव होते हैं। - उत्तर: प्रत्येक टुकड़ा पूर्ण चुंबक होगा।
| राशि/विषय | विवरण |
|---|---|
| चुंबकीय क्षेत्र का चिन्ह | B |
| SI इकाई | टेस्ला (T) |
| CGS इकाई | गॉस (G) |
| 1 टेस्ला | (10^4) गॉस |
| बल रेखाओं की दिशा (बाहर) | उत्तर से दक्षिण की ओर |
| मापन यंत्र | मैग्नेटोमीटर |
| गुण | विवरण |
|---|---|
| बल रेखाओं का स्वरूप | बंद वक्र |
| बल रेखाओं का प्रतिच्छेदन | कभी नहीं |
| बल रेखाएँ | काल्पनिक रेखाएँ |
| ध्रुवों पर क्षेत्र | प्रबल |
| मध्य क्षेत्र में | दुर्बल |
| समान ध्रुव | प्रतिकर्षण |
flowchart TD
A[13.7 चुंबकीय क्षेत्र] --> B[चुंबकीय क्षेत्र]
A --> C[बल रेखाएँ]
A --> D[चुंबक के गुण]
A --> E[पृथ्वी का चुंबकत्व]
B --> B1[इकाई - टेस्ला]
B --> B2[चिन्ह - B]
C --> C1[उत्तर से दक्षिण की ओर]
C --> C2[बंद वक्र, कोई प्रतिच्छेदन नहीं]
D --> D1[समान ध्रुव प्रतिकर्षण]
D --> D2[विपरीत ध्रुव आकर्षण]
E --> E1[कम्पास]
चुंबकीय क्षेत्र और बल रेखाएँ चुंबकत्व के अध्ययन का आधार हैं। इस अध्याय में चुंबकीय क्षेत्र की परिभाषा, इकाई, बल रेखाओं के गुण, चुंबक के ध्रुवों के नियम तथा पृथ्वी के चुंबकत्व का विस्तार से अध्ययन किया गया। परीक्षा की दृष्टि से बल रेखाओं के गुण और इकाई के प्रश्न सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। चुंबकीय क्षेत्र की यह अवधारणा आगे के अध्यायों - विद्युतचुंबकीय प्रभाव और विद्युतचुंबकीय प्रेरण - को समझने का आधार बनाती है, क्योंकि ये सभी चुंबकीय क्षेत्र पर ही निर्भर करते हैं। नियमित पुनरावृत्ति से यह अध्याय पूरी तरह से सरल हो जाता है।