12.3 ऊष्मा संचरण Notes

12.3 ऊष्मा संचरण

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश) अध्याय: 12.3 ऊष्मा संचरण विषय-वस्तु: चालन संवहन विकिरण

1. परिचय

ऊष्मा एक स्थान से दूसरे स्थान तक तीन प्रकार से संचरित होती है – चालन, संवहन और विकिरण। चालन (conduction) वह प्रक्रिया है जिसमें ऊष्मा माध्यम के कणों द्वारा आस-पास के कणों को क्रमशः ऊर्जा देकर संचरित होती है, परंतु कण स्वयं अपने स्थान से नहीं हटते। यह मुख्यतः ठोस पदार्थों में होता है। धातुएँ अच्छे चालक होती हैं, जबकि लकड़ी, प्लास्टिक और काँच कुचालक होते हैं। लोहे की छड़ के एक सिरे को आग में रखने पर दूसरा सिरा गर्म हो जाता है, यह चालन का उदाहरण है। चालन वह कारण है कि धातु का चम्मच गर्म पानी में रखने पर जल्दी गर्म हो जाता है।

संवहन (convection) वह प्रक्रिया है जिसमें ऊष्मा तरल या गैस के गर्म भागों के ऊपर उठने और ठंडे भागों के नीचे जाने से संचरित होती है। संवहन केवल द्रवों और गैसों में होता है, ठोसों में नहीं। पानी उबालने पर नीचे का गर्म पानी ऊपर उठता है और ठंडा पानी नीचे आता है, इससे संवहन धाराएँ बनती हैं। समुद्री हवा (sea breeze) और स्थलीय हवा (land breeze) संवहन के कारण ही बनती हैं। वातानुकूलक को कमरे के ऊपर क्यों लगाया जाता है, इसका उत्तर भी संवहन ही है – ठंडी हवा नीचे गिरती है।

विकिरण (radiation) ऊष्मा का वह संचरण है जिसमें ऊष्मा बिना किसी माध्यम के तरंगों के रूप में चलती है। सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा अंतरिक्ष के निर्वात के माध्यम से विकिरण द्वारा ही पहुँचती है। विकिरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। कृष्ण पृष्ठ (black surface) अच्छा अवशोषक और अच्छा उत्सर्जक होता है, जबकि चमकीले पृष्ठ कम अवशोषित और कम उत्सर्जित करते हैं। थर्मस फ्लास्क (वैक्यूम फ्लास्क) में चालन, संवहन और विकिरण तीनों को रोककर ऊष्मा संरक्षित की जाती है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में ऊष्मा संचरण के तीनों तरीकों और उनके उदाहरणों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. चालन

चालन में ऊष्मा बिना कणों के विस्थापन के, कणों के कंपन से एक कण से दूसरे कण तक पहुँचती है।

उदाहरण 1: गर्म पानी में रखा धातु का चम्मच जल्दी गर्म हो जाता है, परंतु लकड़ी का चम्मच नहीं। कारण बताइए। हल: धातु ऊष्मा की अच्छी चालक है, अतः चालन द्वारा ऊष्मा तेजी से पहुँचती है, जबकि लकड़ी कुचालक है। उदाहरण 2: बर्तन का हत्था प्लास्टिक या लकड़ी का क्यों बनाया जाता है? हल: क्योंकि ये कुचालक होते हैं और हाथ को गर्म होने से बचाते हैं।

3. संवहन

संवहन में ऊष्मा द्रव या गैस के कणों के आगे-पीछे होने से संचरित होती है।

उदाहरण 3: समुद्री हवा कब चलती है? हल: दिन के समय, जब स्थल समुद्र से अधिक गर्म हो जाता है और गर्म हवा ऊपर उठती है, तब समुद्र से ठंडी हवा स्थल की ओर बहती है। उदाहरण 4: वातानुकूलक को कमरे के ऊपरी भाग में क्यों लगाया जाता है? हल: क्योंकि ठंडी हवा भारी होकर नीचे गिरती है और संवहन से पूरा कमरा ठंडा हो जाता है।

4. विकिरण

विकिरण में ऊष्मा विद्युतचुंबकीय तरंगों के रूप में संचरित होती है, जिसके लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।

उदाहरण 5: थर्मस फ्लास्क में दोहरी दीवार के बीच निर्वात क्यों होता है? हल: निर्वात चालन और संवहन दोनों को रोकता है क्योंकि बिना माध्यम के ये संभव नहीं हैं। उदाहरण 6: धूप में काले कपड़े अधिक गर्म क्यों लगते हैं? हल: काले पृष्ठ विकिरण को अच्छी तरह अवशोषित करते हैं, इसलिए अधिक गर्मी मिलती है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: ऊष्मा संचरण के तीन तरीके

तरीका माध्यम उदाहरण किसमें होता है
चालन आवश्यक लोहे की छड़ गर्म होना ठोस
संवहन आवश्यक पानी उबालना द्रव, गैस
विकिरण आवश्यक नहीं सूर्य की ऊष्मा निर्वात में भी

तालिका 2: अच्छे चालक और कुचालक

अच्छे चालक कुचालक
चाँदी लकड़ी
ताँबा प्लास्टिक
एल्युमिनियम काँच
लोहा रबर, ऊन

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[ऊष्मा संचरण] --> B[चालन]
    A --> C[संवहन]
    A --> D[विकिरण]
    B --> E[ठोसों में]
    B --> F[धातु अच्छे चालक]
    C --> G[द्रव और गैस में]
    C --> H[समुद्री स्थलीय हवा]
    D --> I[माध्यम नहीं चाहिए]
    D --> J[सूर्य की ऊष्मा]
    A --> K[थर्मस फ्लास्क]
    K --> L[निर्वात चालन संवहन रोकता है]
    K --> M[चमकदार सतह विकिरण रोकती है]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

चालन: लोहे की छड़ में ऊष्मा का संचरण लोहे की छड़ आग ऊष्मा चालन द्वारा प्रवाहित होती है कण कंपन करते हैं पर अपनी जगह नहीं छोड़ते स्वर्ण नियम: चालन ठोसों में होता है; धातुएँ अच्छी चालक और लकड़ी-प्लास्टिक कुचालक होते हैं। चाँदी और ताँबा सबसे अच्छे चालक हैं।

संवहन धाराएँ: गर्म द्रव ऊपर, ठंडा नीचे गर्म पानी ऊपर ठंडा पानी नीचे आग संवहन धाराएँ: गर्म द्रव ऊपर उठता है, ठंडा नीचे आता है स्वर्ण नियम: समुद्री हवा और वातानुकूलक का ऊपर लगना दोनों संवहन के उदाहरण हैं।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. चालन को केवल द्रवों में होना मान लिया जाता है; चालन ठोसों में मुख्य रूप से होता है।
  2. संवहन को ठोसों में भी होना बताया जाता है; संवहन केवल द्रव और गैस में होता है।
  3. विकिरण के लिए माध्यम आवश्यक है, यह भ्रांति है; विकिरण निर्वात में भी होता है।
  4. सूर्य की ऊष्मा चालन से पृथ्वी तक पहुँचती है, यह गलत है; यह विकिरण है।
  5. चमकीले पृष्ठ अच्छे अवशोषक होते हैं, यह गलत है; काले पृष्ठ अच्छे अवशोषक होते हैं।
  6. थर्मस फ्लास्क की चमकदार दीवार चालन रोकती है, यह गलत है; चमकदार सतह विकिरण रोकती है।
  7. धातुओं को कुचालक बता देना सामान्य गलती है; धातुएँ अच्छी चालक होती हैं।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. चालन = ठोस, संवहन = द्रव/गैस, विकिरण = निर्वात भी, यह मिलान कंठस्थ रखें।
  2. सूर्य की ऊष्मा के प्रश्न में उत्तर सदैव विकिरण होता है।
  3. अच्छे चालक: चाँदी, ताँबा, एल्युमिनियम, लोहा; कुचालक: लकड़ी, प्लास्टिक, काँच, ऊन।
  4. समुद्री हवा (दिन) और स्थलीय हवा (रात) संवहन के उदाहरण हैं।
  5. थर्मस फ्लास्क में निर्वात चालन-संवहन और चमकदार सतह विकिरण रोकती है।
  6. काले पृष्ठ अच्छे अवशोषक एवं उत्सर्जक, चमकीले पृष्ठ अच्छे परावर्तक होते हैं।
  7. वातानुकूलक ऊपर और हीटर नीचे लगाने का कारण संवहन है।

10. निष्कर्ष

ऊष्मा संचरण चालन, संवहन और विकिरण तीन तरीकों से होता है, जिनमें चालन ठोसों में कणों के कंपन से, संवहन द्रव-गैसों में कणों के विस्थापन से और विकिरण बिना माध्यम के तरंगों से होता है। धातुएँ अच्छे चालक होती हैं और लकड़ी-प्लास्टिक कुचालक। समुद्री हवा, स्थलीय हवा और वातानुकूलक की स्थिति संवहन से जुड़ी हैं, जबकि सूर्य की ऊष्मा विकिरण से पृथ्वी तक पहुँचती है। थर्मस फ्लास्क तीनों विधियों को रोककर ऊष्मा का संरक्षण करता है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में इन तीनों विधियों की पहचान और उदाहरण पूछे जाते हैं। इस अध्याय की स्पष्ट समझ ऊष्मा संबंधी सभी प्रश्नों को हल करने में सहायक होती है।