विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (यांत्रिकी) अध्याय: 11.1 इकाइयाँ और मापन विषय-वस्तु: मात्रक, SI इकाइयाँ, मापन उपकरण
भौतिकी में किसी भी भौतिक राशि को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए उसके संख्यात्मक मान के साथ एक मानक मात्रक या इकाई का होना आवश्यक है। किसी राशि को मापने का अर्थ है उसकी तुलना किसी निश्चित मानक मात्रा से करना, जिसे मात्रक या इकाई कहते हैं। उदाहरण के लिए किसी तार की लंबाई 5 मीटर है, तो यहाँ संख्या 5 है और मीटर उसका मात्रक है। बिना मात्रक के केवल संख्या से किसी राशि की माप का कोई अर्थ नहीं होता। मात्रक चुनते समय यह आवश्यक है कि वह निश्चित, सुलभ, अपरिवर्तनीय और सभी स्थानों पर सुविधाजनक हो।
विश्व में भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग मात्रक प्रणालियाँ प्रयोग होती थीं, जैसे CGS (सेंटीमीटर-ग्राम-सेकंड), FPS (फुट-पाउंड-सेकंड) और MKS (मीटर-किलोग्राम-सेकंड) प्रणाली। इन विभिन्न प्रणालियों के कारण वैज्ञानिक और व्यापारिक क्षेत्र में भ्रम उत्पन्न होता था। इस समस्या को हल करने के लिए वर्ष 1960 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सर्वमान्य प्रणाली को अपनाया गया, जिसे SI प्रणाली (अंतरराष्ट्रीय इकाई प्रणाली / System International d'Unités) कहते हैं। आज भारत सहित पूरे विश्व में वैज्ञानिक मापन SI इकाइयों पर ही आधारित है।
रेलवे ग्रुप D जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में इकाइयों और मापन से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। मूल राशियों की SI इकाइयाँ, व्युत्पन्न इकाइयाँ, छोटे-बड़े मानों के लिए प्रयुक्त उपसर्ग (जैसे किलो, मिली, नैनो) तथा मापन उपकरणों जैसे वर्नियर कैलीपर्स और स्क्रू गेज का न्यूनतम माप जानना अत्यंत लाभकारी है। इस अध्याय में हम मात्रक के प्रकार, SI इकाइयों की सूची, उपसर्गों का उपयोग और विभिन्न मापन उपकरणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
भौतिक राशियों को मापने के लिए प्रयोग होने वाले मात्रक मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं – मूल मात्रक, व्युत्पन्न मात्रक और पूरक मात्रक।
मूल (मौलिक) मात्रक: वे मात्रक जो किसी अन्य मात्रक पर निर्भर नहीं होते, उन्हें मूल या मौलिक मात्रक कहते हैं। SI प्रणाली में सात मूल मात्रक होते हैं।
व्युत्पन्न मात्रक: जो मात्रक मूल मात्रकों के गुणन या भाग से प्राप्त होते हैं, उन्हें व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं। जैसे बल का मात्रक न्यूटन = किग्रा × मी/से², कार्य का मात्रक जूल, शक्ति का मात्रक वाट, दाब का मात्रक पास्कल।
पूरक मात्रक: रेडियन (समतल कोण) और स्टेरेडियन (ठोस कोण) को SI प्रणाली में पूरक मात्रक कहा जाता है।
उदाहरण 1: पास्कल (Pa) किन SI मूल इकाइयों से मिलकर बना है? हल: दाब = बल/क्षेत्रफल। बल = द्रव्यमान × त्वरण = किग्रा × मी/से²। अतः पास्कल = किग्रा/(मी × से²) अर्थात N/m²।
बहुत बड़ी और बहुत छोटी राशियों को व्यक्त करने के लिए मात्रक के आगे उपसर्ग लगाए जाते हैं। ये उपसर्ग दस की घातों पर आधारित होते हैं।
उदाहरण 2: 5 मिलीग्राम को किलोग्राम में बदलिए। हल: 1 मिलीग्राम = 10⁻⁶ किलोग्राम, अतः 5 मिलीग्राम = 5 × 10⁻⁶ किलोग्राम। उदाहरण 3: 2.5 किलोमीटर को नैनोमीटर में बदलिए। हल: 2.5 किमी = 2.5 × 10³ मीटर = 2.5 × 10¹² नैनोमीटर (क्योंकि 1 मीटर = 10⁹ नैनोमीटर)।
किसी मापन उपकरण द्वारा सबसे छोटी मात्रा जिसे सटीक रूप से मापा जा सके, उसे उस उपकरण का न्यूनतम माप (least count) कहते हैं।
उदाहरण 4: एक स्क्रू गेज की पिच 1 मिलीमीटर है और उसके वृत्ताकार पैमाने पर 100 भाग हैं, तो न्यूनतम माप ज्ञात कीजिए। हल: न्यूनतम माप = 1 ÷ 100 = 0.01 मिलीमीटर। उदाहरण 5: एक वर्नियर कैलीपर्स में मुख्य पैमाने का 1 भाग 1 मिलीमीटर है तथा वर्नियर पैमाने का 1 भाग 0.9 मिलीमीटर के बराबर है। न्यूनतम माप ज्ञात कीजिए। हल: न्यूनतम माप = 1 − 0.9 = 0.1 मिलीमीटर।
| क्र. | भौतिक राशि | SI मात्रक | संकेत |
|---|---|---|---|
| 1 | लंबाई | मीटर | m |
| 2 | द्रव्यमान | किलोग्राम | kg |
| 3 | समय | सेकंड | s |
| 4 | विद्युत धारा | एम्पियर | A |
| 5 | तापमान | केल्विन | K |
| 6 | पदार्थ की मात्रा | मोल | mol |
| 7 | ज्योति तीव्रता | कैंडेला | cd |
| भौतिक राशि | SI मात्रक | अन्य प्रचलित मात्रक |
|---|---|---|
| बल | न्यूटन (N) | डाइन (CGS) |
| कार्य/ऊर्जा | जूल (J) | अर्ग (CGS) |
| शक्ति | वाट (W) | अश्वशक्ति (HP) |
| दाब | पास्कल (Pa) | बार, वायुमंडलीय |
| आवृत्ति | हर्ट्ज (Hz) | - |
| उपसर्ग | किलो | 10³ |
| उपसर्ग | मिली | 10⁻³ |
| उपसर्ग | नैनो | 10⁻⁹ |
flowchart TD
A[इकाइयाँ और मापन] --> B[मात्रक के प्रकार]
A --> C[SI इकाइयाँ]
A --> D[उपसर्ग]
A --> E[मापन उपकरण]
B --> F[मूल मात्रक]
B --> G[व्युत्पन्न मात्रक]
B --> H[पूरक मात्रक]
C --> I[सात मूल इकाइयाँ]
C --> J[व्युत्पन्न इकाइयाँ न्यूटन जूल वाट]
D --> K[किलो मेगा गीगा]
D --> L[मिली माइक्रो नैनो]
E --> M[वर्नियर कैलीपर्स]
E --> N[स्क्रू गेज]
E --> O[मीटर स्केल]
M --> P[न्यूनतम माप 0.1 मिमी]
N --> Q[न्यूनतम माप 0.01 मिमी]
इकाइयाँ और मापन विज्ञान की नींव है क्योंकि इसी पर समस्त भौतिक मापन और गणनाएँ आधारित हैं। SI प्रणाली के सात मूल मात्रक, व्युत्पन्न इकाइयाँ, दशमलव उपसर्ग तथा वर्नियर कैलीपर्स और स्क्रू गेज जैसे उपकरणों का न्यूनतम माप रेलवे ग्रुप D परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इस अध्याय को अच्छे से पढ़ने पर मापन से जुड़े प्रश्न सरलता से हल किए जा सकते हैं और आगे के अध्यायों जैसे गति, बल और ऊर्जा को समझने का आधार भी मजबूत होता है। नियमित रूप से इकाई परिवर्तन का अभ्यास करने से इस विषय में पूर्ण महारत हासिल हो जाती है।