11.9 दाब घनत्व और उत्प्लावन Notes

11.9 दाब घनत्व और उत्प्लावन

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (यांत्रिकी) अध्याय: 11.9 दाब घनत्व और उत्प्लावन विषय-वस्तु: दाब, घनत्व, उत्प्लावन बल

1. परिचय

दाब (pressure) प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है। दाब = बल ÷ क्षेत्रफल, अर्थात P = F/A। दाब की SI इकाई पास्कल (Pa) होती है, जो न्यूटन प्रति वर्ग मीटर के बराबर है। दाब का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि तेज धार वाला चाकू कम क्षेत्रफल के कारण अधिक दाब उत्पन्न करता है और वस्तु को आसानी से काटता है, जबकि बग्घी का चौड़ा पहिया अधिक क्षेत्रफल के कारण कम दाब लगाता है और कीचड़ में नहीं धँसता। तरल और गैसों में भी दाब होता है, और द्रव का दाब गहराई के साथ बढ़ता है, यही कारण है कि बाँध का तल भाग मोटा बनाया जाता है।

घनत्व (density) प्रति इकाई आयतन में उपस्थित द्रव्यमान है। घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन, अर्थात d = m/V। घनत्व की SI इकाई किलोग्राम प्रति घन मीटर (किग्रा/मी³) है। पानी का घनत्व 1000 किग्रा/मी³ या 1 ग्राम/सेमी³ होता है। जिस पदार्थ का घनत्व पानी से कम होता है वह पानी में तैरता है और जिसका अधिक होता है वह डूब जाता है। घनत्व ही वह आधार है जो तैरने और डूबने का निर्णय करता है, और इसीलिए लोहे की छड़ पानी में डूबती है जबकि लकड़ी का टुकड़ा तैरता है।

जब कोई वस्तु किसी द्रव में डुबोई जाती है तो द्रव उस पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है, जिसे उत्प्लावन बल (buoyant force) कहते हैं। आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है। इसी सिद्धांत पर जहाज, पनडुब्बी, हाइड्रोमीटर और लैक्टोमीटर कार्य करते हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में दाब, घनत्व और उत्प्लावन से जुड़े सैद्धांतिक और संख्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका अभ्यास इस अध्याय में किया जाएगा।

2. दाब

दाब की अवधारणा को समझने के लिए उसके सूत्र, इकाई और उदाहरणों का अध्ययन आवश्यक है।

उदाहरण 1: 100 न्यूटन का बल 2 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर लगता है। दाब ज्ञात कीजिए। हल: P = F/A = 100/2 = 50 पास्कल। उदाहरण 2: 50 न्यूटन का बल 0.5 मी² क्षेत्रफल पर लगता है। दाब ज्ञात कीजिए। हल: P = 50/0.5 = 100 पास्कल। उदाहरण 3: किसी सुई की नोक का क्षेत्रफल बहुत छोटा होता है, अतः वह कम बल में भी अधिक दाब उत्पन्न करती है – यही कारण है कि सुई आसानी से छेद कर देती है।

3. घनत्व

घनत्व पदार्थ के गुणों को पहचानने का आधार है और इसकी गणना सरल सूत्र से होती है।

उदाहरण 4: 4 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु का आयतन 0.5 घन मीटर है। घनत्व ज्ञात कीजिए। हल: d = m/V = 4/0.5 = 8 किग्रा/मी³। उदाहरण 5: किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 किलोग्राम और घनत्व 5 किग्रा/मी³ है। आयतन ज्ञात कीजिए। हल: V = m/d = 10/5 = 2 घन मीटर। उदाहरण 6: 300 ग्राम द्रव्यमान की वस्तु का आयतन 100 सेमी³ है। घनत्व ज्ञात कीजिए। हल: d = 300/100 = 3 ग्राम/सेमी³।

4. उत्प्लावन बल और आर्किमिडीज का सिद्धांत

उत्प्लावन बल द्रव द्वारा डुबोई गई वस्तु पर ऊपर की ओर लगाया जाने वाला बल है।

उदाहरण 7: एक वस्तु का आयतन 2 घन मीटर है और वह पानी में पूरी तरह डूबी है। उत्प्लावन बल ज्ञात कीजिए (पानी का घनत्व = 1000 किग्रा/मी³, g = 10 मी/से²)। हल: उत्प्लावन बल = V × d × g = 2 × 1000 × 10 = 20000 न्यूटन। उदाहरण 8: किसी वस्तु का पानी में आभासी भार कम क्यों होता है? हल: क्योंकि पानी का उत्प्लावन बल वस्तु के भार को आंशिक रूप से संतुलित करता है, इसलिए स्प्रिंग बैलेंस कम मान दिखाता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: दाब और घनत्व के सूत्र

राशि सूत्र SI इकाई
दाब P = F/A पास्कल
द्रव दाब P = hdg पास्कल
घनत्व d = m/V किग्रा/मी³
द्रव्यमान m = dV किलोग्राम
उत्प्लावन बल V × d × g न्यूटन

तालिका 2: तैरना और डूबना

स्थिति घनत्व की तुलना परिणाम
वस्तु का घनत्व < द्रव कम तैरती है
वस्तु का घनत्व = द्रव बराबर मध्य में तैरती है
वस्तु का घनत्व > द्रव अधिक डूब जाती है
जहाज औसत घनत्व कम तैरता है
पनडुब्बी नियंत्रित तैरती/डूबती है

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[दाब घनत्व उत्प्लावन] --> B[दाब]
    B --> C[P = F/A]
    B --> D[पास्कल]
    B --> E[P = hdg]
    A --> F[घनत्व]
    F --> G[d = m/V]
    F --> H[किग्रा/मी³]
    F --> I[पानी 1000 किग्रा/मी³]
    A --> J[उत्प्लावन बल]
    J --> K[आर्किमिडीज सिद्धांत]
    J --> L[विस्थापित द्रव का भार]
    A --> M[अनुप्रयोग]
    M --> N[जहाज पनडुब्बी]
    M --> O[हाइड्रोमीटर लैक्टोमीटर]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

द्रव में उत्प्लावन बल पानी वस्तु उत्प्लावन बल वस्तु का भार स्वर्ण नियम: उत्प्लावन बल = विस्थापित द्रव का भार; इससे वस्तु का आभासी भार घटता है।

घनत्व और तैरना लकड़ी घनत्व कम तैरती है लोहा घनत्व अधिक डूबता है पानी का घनत्व = 1000 किग्रा/मी³ = 1 ग्राम/सेमी³ बर्फ पानी में तैरती है क्योंकि उसका घनत्व पानी से कम है स्वर्ण नियम: घनत्व < द्रव → तैरना, घनत्व > द्रव → डूबना; जहाज अपने औसत घनत्व के कारण तैरता है। हाइड्रोमीटर घनत्व मापता है, लैक्टोमीटर दूध की जाँच करता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. दाब का सूत्र P = F × A लिख देना गलत है; सही सूत्र P = F/A है।
  2. दाब की इकाई को न्यूटन लिख दिया जाता है; दाब की इकाई पास्कल है।
  3. घनत्व का सूत्र V = m/d के स्थान पर d = V/m लिख देना सामान्य भूल है।
  4. उत्प्लावन बल को वस्तु के भार के बराबर हमेशा मान लेना गलत है; वह विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है।
  5. द्रव का दाब गहराई के साथ घटता है, यह गलत धारणा है; गहराई के साथ दाब बढ़ता है।
  6. बर्फ का घनत्व पानी से अधिक मान लिया जाता है; वास्तव में बर्फ पानी में तैरती है।
  7. सुई के छोटे क्षेत्रफल से दाब कम होता है, यह भ्रांति है; छोटे क्षेत्रफल से दाब अधिक होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. दाब के प्रश्न में बल को न्यूटन और क्षेत्रफल को वर्ग मीटर में रखें, तभी उत्तर पास्कल में आएगा।
  2. द्रव दाब के लिए P = hdg सूत्र याद रखें; गहराई, घनत्व और g का गुणनफल ही दाब है।
  3. घनत्व की गणना में द्रव्यमान और आयतन की इकाई एक ही प्रणाली में रखें (किग्रा और मी³)।
  4. आर्किमिडीज सिद्धांत का वक्तव्य याद रखें: उत्प्लावन बल = विस्थापित द्रव का भार।
  5. तैरने-डूबने के प्रश्न में वस्तु और द्रव के घनत्व की तुलना करें।
  6. उपकरण याद रखें: बैरोमीटर = वायुमंडलीय दाब, हाइड्रोमीटर = घनत्व, लैक्टोमीटर = दूध।
  7. वायुमंडलीय दाब का मान 1.01 × 10⁵ पास्कल याद रखें, इस पर प्रश्न बनता है।

10. निष्कर्ष

दाब प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है, जिसका सूत्र P = F/A है और इकाई पास्कल है; द्रव का दाब गहराई के साथ बढ़ता है। घनत्व प्रति इकाई आयतन में द्रव्यमान है, जो तैरने और डूबने का आधार निर्धारित करता है। उत्प्लावन बल, आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है, जिसके कारण जहाज, पनडुब्बी और हाइड्रोमीटर जैसे उपकरण कार्य करते हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में दाब, घनत्व और उत्प्लावन से संबंधित सूत्र, इकाइयाँ और व्यावहारिक अनुप्रयोग पूछे जाते हैं। इन अवधारणाओं की स्पष्ट समझ से संख्यात्मक प्रश्न सरलता से हल होते हैं और यह अध्याय कार्य-ऊर्जा के अध्याय की तैयारी में भी सहायक होता है।