विषय: रेलवे ग्रुप D – तर्कशक्ति (आँकड़े और गैर-मौखिक तर्क) अध्याय: 10.2 आँकड़ा पर्याप्तता विषय-वस्तु: प्रश्न हल करने हेतु आँकड़ा पर्याप्तता
आँकड़ा पर्याप्तता (Data Sufficiency) तर्कशक्ति की वह शाखा है जिसमें पूछा गया प्रश्न तो सरल होता है, परंतु उसका उत्तर देने के लिए दिए गए कथनों (I और II) की जाँच करनी होती है कि कौन-सा कथन प्रश्न का उत्तर देने के लिए पर्याप्त है। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। इसका उद्देश्य परीक्षार्थी की यह क्षमता जाँचना है कि वह दिए गए आँकड़ों में से किसे उपयोग करेगा और कौन-सा आँकड़ा निरर्थक है।
इन प्रश्नों में सामान्यतः पाँच स्थितियाँ बनती हैं - केवल कथन I पर्याप्त है, केवल कथन II पर्याप्त है, दोनों में से कोई एक पर्याप्त है, दोनों मिलकर पर्याप्त हैं या दोनों मिलकर भी पर्याप्त नहीं हैं। परीक्षार्थी को प्रत्येक कथन को पहले अकेले जाँचना चाहिए और फिर दोनों को मिलाकर जाँचना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक उत्तर की गणना करने की आवश्यकता नहीं होती, केवल यह निर्णय करना होता है कि उत्तर ज्ञात किया जा सकता है या नहीं।
इस अध्याय में हम आँकड़ा पर्याप्तता के नियम, कथनों के विश्लेषण की विधि तथा चरण-दर-चरण हल किए गए उदाहरण सीखेंगे। साथ ही उन सामान्य गलतियों पर चर्चा करेंगे जिनके कारण सही जानते हुए भी उत्तर गलत हो जाता है, जैसे कथनों के बीच के अंतर को न पहचान पाना या गणना में उलझ जाना।
किसी प्रश्न के साथ दो कथन I तथा II दिए जाते हैं। निर्णय करने के लिए निम्न नियम अपनाएँ:
कथन को अकेले जाँचें: पहले कथन I को लेकर देखें कि क्या उससे प्रश्न का उत्तर मिलता है।
दूसरे कथन को अकेले जाँचें: फिर कथन II को अकेले लेकर देखें।
दोनों को मिलाकर जाँचें: यदि कोई अकेला पर्याप्त न हो, तो दोनों मिलाकर देखें।
कथन का सकारात्मक उत्तर आवश्यक नहीं: कभी-कभी हाँ या ना में उत्तर मिलना भी पर्याप्तता है। उदाहरण: क्या X, Y से लंबा है? यदि कथन दे कि X, Z से लंबा है और Z, Y से लंबा है, तो उत्तर निकल आता है।
अनावश्यक गणना न करें: केवल यह तय करना है कि उत्तर प्राप्त हो सकता है या नहीं, वास्तविक मान निकालना आवश्यक नहीं।
कथनों का विश्लेषण करते समय निम्न चरणों का क्रम अपनाएँ:
महत्वपूर्ण टिप: चरों की संख्या गिनें। दो अज्ञात राशियों के लिए कम से कम दो स्वतंत्र संबंध (कथन) चाहिए, अन्यथा उत्तर अनिश्चित रहता है।
उदाहरण 1: राम की आयु कितनी है? कथन I: राम, श्याम से 5 वर्ष बड़ा है। कथन II: श्याम की आयु 15 वर्ष है। हल: कथन II से श्याम की आयु 15 ज्ञात है, फिर कथन I से राम की आयु = 20। अकेले I से आयु नहीं मिलती; दोनों मिलकर पर्याप्त हैं। उत्तर: दोनों मिलकर।
उदाहरण 2: एक संख्या कौन-सी है? कथन I: संख्या का आधा 25 है। हल: संख्या = 50, अतः केवल कथन I ही पर्याप्त है।
उदाहरण 3: A और B की कुल आयु कितनी है? कथन I: A की आयु 20 वर्ष है। कथन II: B की आयु 25 वर्ष है। हल: कथन I से केवल A ज्ञात होता है, केवल II से केवल B ज्ञात होता है; कुल आयु के लिए दोनों मिलाकर चाहिए। उत्तर: दोनों मिलकर।
उदाहरण 4: एक त्रिभुज का क्षेत्रफल कितना है? कथन I: आधार 10 सेमी है। कथन II: ऊँचाई 8 सेमी है। हल: क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई, अतः दोनों मिलकर पर्याप्त हैं। केवल एक कथन से क्षेत्रफल नहीं निकलता।
उदाहरण 5: X, Y का भाई है? कथन I: X का पिता, Y का पिता है। कथन II: X, Y की माता का पुत्र है। हल: कथन I से X और Y सहोदर हो सकते हैं, परंतु लिंग स्पष्ट नहीं। कथन II से X पुत्र है, परंतु Y का संबंध स्पष्ट नहीं। दोनों मिलाकर X, Y का भाई सिद्ध होता है यदि Y भी उसी माता की संतान हो, परंतु स्पष्ट नहीं। अतः सही उत्तर दोनों मिलकर भी पर्याप्त नहीं।
उदाहरण 6: क्या P > Q है? कथन I: P = 3Q। कथन II: Q > 0। हल: कथन I अकेले देता है कि P, Q का 3 गुना है, किंतु Q के धनात्मक होने पर ही P > Q सिद्ध होगा। कथन II बताता है कि Q धनात्मक है। दोनों मिलाकर पर्याप्त हैं।
| स्थिति | निर्णय |
|---|---|
| केवल कथन I से उत्तर मिले | केवल I पर्याप्त है |
| केवल कथन II से उत्तर मिले | केवल II पर्याप्त है |
| दोनों में से कोई एक से उत्तर मिले | या तो I या II पर्याप्त है |
| दोनों मिलाकर उत्तर मिले | I और II मिलकर पर्याप्त हैं |
| दोनों मिलाकर भी उत्तर न मिले | दोनों अपर्याप्त हैं |
| अज्ञात राशियाँ | आवश्यक स्वतंत्र कथन |
|---|---|
| 1 चर | 1 कथन |
| 2 चर | 2 कथन |
| 3 चर | 3 कथन |
| 2 चर, 1 अनुपात | 2 कथन (कम से कम) |
flowchart TD
A[10.2 आँकड़ा पर्याप्तता] --> B[कथन I की जाँच]
A --> C[कथन II की जाँच]
B --> D{अकेले पर्याप्त?}
C --> D
D -->|हाँ| E[केवल वही कथन]
D -->|ना| F[दोनों मिलाकर जाँचें]
F --> G{दोनों मिलाकर?}
G -->|हाँ| H[दोनों मिलकर पर्याप्त]
G -->|ना| I[दोनों अपर्याप्त]
E --> J[उत्तर घोषित करें]
H --> J
I --> J
आँकड़ा पर्याप्तता में उत्तर निकालना नहीं, बल्कि यह तय करना होता है कि दिए गए कथनों से उत्तर प्राप्त किया जा सकता है या नहीं। नियमित अभ्यास तथा कथनों को अकेले और मिलाकर जाँचने की आदत से इस भाग में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। ध्यान रखें कि गणना में न उलझें और चरों की संख्या के आधार पर शीघ्र निर्णय लें।