8.4 दूरी आधारित दिशा Notes

8.4 दूरी आधारित दिशा

विषय: रेलवे ग्रुप D – तर्कशक्ति (संबंध और दिशा) अध्याय: 8.4 दूरी आधारित दिशा विषय-वस्तु: दिशा और दूरी की गणना

1. परिचय

दूरी आधारित दिशा (डिस्टेंस एंड डायरेक्शन) के प्रश्नों में व्यक्ति एक निश्चित दिशा में कुछ दूरी चलता है, फिर मोड़ लेकर आगे की दूरी तय करता है, और अंत में उसकी स्थिति, प्रारंभिक बिंदु से सबसे छोटी दूरी (न्यूनतम दूरी) या अंतिम दिशा पूछी जाती है। ये प्रश्न दिशा ज्ञान के ही उन्नत रूप हैं, जिनमें दिशाओं के साथ-साथ दूरियों की गणना भी करनी होती है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में इस प्रकार के प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

इन प्रश्नों को हल करने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की आवश्यकता होती है – दिशा ज्ञान, सरल गणित (जोड़-घटाव) और पाइथागोरस प्रमेय। जब व्यक्ति दो लंबवत दिशाओं (जैसे उत्तर-पूर्व, पूर्व-दक्षिण) में चलता है, तो प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु की सीधी दूरी निकालने के लिए पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग होता है। इसलिए पाइथागोरस के त्रिक (जैसे 3-4-5, 6-8-10, 5-12-13) याद रखना अत्यंत लाभदायक है।

दूरी-दिशा के प्रश्न हल करते समय कागज़ पर मार्ग का चित्र बनाना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। चित्र बनाते समय उत्तर को ऊपर, दक्षिण को नीचे, पूर्व को दाएँ और पश्चिम को बाएँ मानना चाहिए। प्रत्येक चरण की दूरी को सही अनुपात में (पैमाने से) बनाना आवश्यक नहीं है, परंतु दिशाओं को सही रूप में दर्शाना अनिवार्य है। इस अध्याय में हम दूरी-दिशा की सम्पूर्ण गणना विधि को चरणबद्ध रूप से सीखेंगे।

2. दूरी की मूल अवधारणा

दूरी-दिशा के प्रश्नों में 'दूरी' दो प्रकार की होती है – तय की गई कुल दूरी (एक्यूअल डिस्टेंस) और सबसे छोटी दूरी (शॉर्टेस्ट डिस्टेंस)। तय की गई कुल दूरी में व्यक्ति के सभी चरणों की दूरियों को जोड़ा जाता है, जबकि सबसे छोटी दूरी प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु के बीच की सीधी दूरी होती है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति पूर्व में 3 किमी और फिर दक्षिण में 4 किमी चलता है, तो कुल तय दूरी 7 किमी है, परंतु सबसे छोटी दूरी 5 किमी है।

दिशा की दृष्टि से दूरियों को दो भागों में बाँटा जा सकता है – समान दिशा वाली दूरियाँ और विपरीत दिशा वाली दूरियाँ। यदि व्यक्ति पूर्व में 5 किमी और फिर उत्तर में 3 किमी चलता है, तो ये दोनों दूरियाँ अलग-अलग दिशाओं में हैं, अतः इन्हें सीधे जोड़ा नहीं जा सकता। वहीं यदि व्यक्ति पूर्व में 5 किमी और फिर पूर्व में ही 3 किमी चलता है, तो कुल पूर्व दूरी 8 किमी होगी। विपरीत दिशा में चलने पर दूरी घटती है, जैसे पूर्व 5 किमी और फिर पश्चिम 3 किमी चलने पर कुल पूर्व दूरी 2 किमी रह जाती है।

सबसे छोटी दूरी की गणना के लिए सबसे पहले यह देखना होता है कि प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु किन दो लंबवत दिशाओं में है। यदि अंतिम बिंदु प्रारंभिक बिंदु के उत्तर-पूर्व में है, तो उत्तर और पूर्व की दूरियाँ त्रिभुज की दो भुजाएँ होंगी और सबसे छोटी दूरी कर्ण होगी। इसके लिए पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग किया जाता है। जब कर्ण की लंबाई सीधे दी गई हो तो उत्तर और पूर्व की दूरियाँ पूर्णांक होती हैं, जिससे गणना सरल हो जाती है।

3. पाइथागोरस प्रमेय और दूरी की गणना

पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है। यदि दो भुजाएँ क्रमशः a और b हों तो कर्ण c = वर्गमूल(a² + b²) होता है। दूरी-दिशा के प्रश्नों में उत्तर-पूर्व, पूर्व-दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-उत्तर जैसी लंबवत दिशाओं की दूरियाँ ही दो भुजाएँ बनाती हैं। प्रायः प्रश्नों में 3-4-5, 6-8-10, 5-12-13, 7-24-25 जैसे पाइथागोरस त्रिक दिए जाते हैं, जिन्हें पहचानने से वर्गमूल निकालने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

पाइथागोरस त्रिकों को याद रखना बहुत उपयोगी है। सबसे प्रचलित त्रिक 3-4-5 है – यदि किसी व्यक्ति की उत्तर दूरी 3 किमी और पूर्व दूरी 4 किमी है तो सबसे छोटी दूरी 5 किमी होगी। इसी प्रकार 6-8-10 का कर्ण 10 है और 9-12-15 का कर्ण 15 है। इन त्रिकों को गुणनखंड के रूप में बढ़ाया जा सकता है, जैसे 6-8-10, 9-12-15, 12-16-20 सभी 3-4-5 के ही गुणज हैं। त्रिक को पहचानते ही उत्तर तुरंत लिखा जा सकता है।

दूरी-दिशा की गणना की चरणबद्ध विधि इस प्रकार है: (1) सबसे पहले प्रारंभिक बिंदु पर एक छोटा चिह्न लगाएँ। (2) प्रत्येक चरण को दिशा सहित चित्र में बनाएँ, दिशा में कोई गलती न होने दें। (3) अंत में प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु की स्थिति देखें – वह किस दिशा में है। (4) यदि दो लंबवत दिशाओं की दूरियाँ ज्ञात हों, तो सबसे छोटी दूरी के लिए पाइथागोरस प्रमेय लगाएँ। (5) यदि समान या विपरीत दिशाओं की दूरियाँ हों, तो सरल जोड़-घटाव करें। (6) अंत में उत्तर को प्रश्न के अनुसार (दिशा या दूरी) लिखें।

गणना करते समय कुछ सावधानियाँ रखनी चाहिए। यदि व्यक्ति विपरीत दिशाओं में बराबर दूरी चलता है, तो वह दिशा रद्द हो जाती है; जैसे पूर्व 4 किमी और फिर पश्चिम 4 किमी चलने पर पूर्व-पश्चिम दूरी शून्य हो जाती है। यदि व्यक्ति की कुल पूर्व और पश्चिम दूरियाँ बराबर हों, तो उसका अंतिम बिंदु प्रारंभिक बिंदु के सीध में होता है। इसी प्रकार उत्तर और दक्षिण की दूरियाँ बराबर हों तो उत्तर-दक्षिण घटक शून्य हो जाता है। इन नियमों से जटिल प्रश्न भी सरल हो जाते हैं।

4. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: एक व्यक्ति पूर्व की ओर 5 किमी चलता है, फिर दक्षिण की ओर 12 किमी चलता है। प्रारंभिक बिंदु से उसकी सबसे छोटी दूरी क्या होगी?

उदाहरण 2: रमेश उत्तर की ओर 4 किमी चलता है, फिर दाएँ मुड़कर 3 किमी चलता है। अब वह प्रारंभिक बिंदु से किस दिशा में और कितनी दूरी पर है?

उदाहरण 3: एक व्यक्ति दक्षिण की ओर 8 किमी चलता है, फिर बाएँ मुड़कर 6 किमी चलता है। प्रारंभिक बिंदु से उसकी सबसे छोटी दूरी क्या है?

उदाहरण 4: सीता पूर्व की ओर 7 किमी चलती है, फिर पश्चिम की ओर 4 किमी लौटती है। वह प्रारंभिक बिंदु से कितनी दूर है?

उदाहरण 5: एक व्यक्ति उत्तर की ओर 9 किमी, फिर पूर्व की ओर 12 किमी चलता है। प्रारंभिक बिंदु से सबसे छोटी दूरी ज्ञात कीजिए।

उदाहरण 6: मोहन पश्चिम की ओर 10 किमी चलता है, फिर उत्तर की ओर 10 किमी चलता है। वह प्रारंभिक बिंदु से किस दिशा में है?

उदाहरण 7: एक व्यक्ति पूर्व में 6 किमी चलता है, फिर उत्तर में 8 किमी, फिर पश्चिम में 6 किमी चलता है। अब वह प्रारंभिक बिंदु से कितनी दूर है?

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: प्रमुख पाइथागोरस त्रिक

पहली भुजा दूसरी भुजा कर्ण (सबसे छोटी दूरी)
3 4 5
6 8 10
5 12 13
9 12 15
8 15 17
7 24 25
10 24 26

तालिका 2: दूरी गणना के नियम

स्थिति गणना का नियम
समान दिशा में दूरियाँ दोनों दूरियाँ जोड़ें
विपरीत दिशा में दूरियाँ बड़ी में से छोटी घटाएँ
लंबवत दिशा में दूरियाँ पाइथागोरस प्रमेय लगाएँ
बराबर विपरीत दूरियाँ वह दिशा रद्द हो जाती है
उत्तर-पूर्व जैसी बराबर दूरियाँ दिशा मध्यवर्ती होती है

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[8.4 दूरी आधारित दिशा] --> B[कुल दूरी]
    A --> C[सबसे छोटी दूरी]
    A --> D[पाइथागोरस प्रमेय]
    A --> E[हल किए गए उदाहरण]
    B --> F[सभी चरणों का योग]
    C --> G[प्रारंभ से अंत की सीधी दूरी]
    D --> H[3-4-5 त्रिक]
    D --> I[6-8-10 त्रिक]
    D --> J[5-12-13 त्रिक]
    D --> K[लंबवत दिशाएँ]
    E --> L[13 किमी उत्तर-पूर्व]
    E --> M[10 किमी दक्षिण-पूर्व]
    F --> N[समान दिशा जोड़ें]
    G --> O[विपरीत दिशा घटाएँ]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

पाइथागोरस प्रमेय: 3-4-5 त्रिभुज 3 किमी (ऊर्ध्व) 4 किमी (क्षैतिज) 5 किमी प्रारंभ मोड़ स्वर्ण नियम लंबवत दिशाओं की दूरियों का वर्ग करके जोड़ें, वर्गमूल निकालने पर सबसे छोटी दूरी मिलती है।

दूरी-दिशा का चरणबद्ध चित्र पूर्व 6 किमी उत्तर 8 किमी प्रारंभ सबसे छोटी दूरी 10 किमी स्वर्ण नियम प्रत्येक मोड़ पर दिशा और दूरी दोनों चित्र में अंकित करें, फिर पाइथागोरस प्रमेय से सबसे छोटी दूरी निकालें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. कुल तय दूरी और सबसे छोटी दूरी में भ्रम करना; दोनों अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।
  2. विपरीत दिशा की दूरी को घटाने के स्थान पर जोड़ देना, जिससे गलत उत्तर आता है।
  3. लंबवत दिशाओं की दूरी को सीधे जोड़कर सबसे छोटी दूरी मान लेना; यह गलत है।
  4. पाइथागोरस प्रमेय में वर्ग करना भूल जाना और सीधे दूरियों को जोड़ देना।
  5. मोड़ की दिशा को गलत समझना, जिससे पूरा मार्ग उलट जाता है।
  6. प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु की दिशा की ओर न देखना, अर्थात् उल्टी दिशा में उत्तर देना।
  7. चित्र न बनाकर मन में ही गणना करना, जिससे जटिल प्रश्नों में गलती हो जाती है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रश्न को पढ़ते ही कागज़ पर प्रारंभिक बिंदु चिह्नित करें और हर चरण का तीर बनाते जाएँ।
  2. पाइथागोरस त्रिक (3-4-5, 5-12-13, 6-8-10, 8-15-17) याद रखें, इससे वर्गमूल निकालने का समय बचता है।
  3. समान दिशा की दूरियाँ जोड़ें और विपरीत दिशा की दूरियाँ घटाएँ, फिर शेष दिशा देखें।
  4. अंत में प्रश्न को पुनः पढ़ें कि दिशा पूछी गई है या दूरी या दोनों।
  5. यदि अंतिम बिंदु दो लंबवत दिशाओं में हो, तो सबसे छोटी दूरी कर्ण के रूप में निकालें।
  6. मोड़ के प्रश्नों में दाएँ-बाएँ का मान मुँह की दिशा से तय करें, कागज़ की दिशा से नहीं।
  7. उत्तर की पुष्टि के लिए मार्ग को एक बार पुनः पढ़कर चित्र से मिलाएँ।

10. निष्कर्ष

दूरी आधारित दिशा के प्रश्न दिशा ज्ञान और गणित के संयोजन हैं, जिन्हें सही विधि से हल करना बहुत आसान है। चित्र बनाना, दिशाओं को सही समझना और पाइथागोरस प्रमेय का सही उपयोग इन प्रश्नों के तीन स्तंभ हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में ये प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं और सही अभ्यास से पूर्ण अंक दिलाते हैं। पाइथागोरस त्रिकों को याद रखें, हल किए गए उदाहरणों को स्वयं बनाकर देखें और कम से कम 30 दूरी-दिशा के प्रश्नों का अभ्यास करें। इससे परीक्षा में यह खंड सुनिश्चित अंक प्रदान करेगा।