विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (प्राचीन भारतीय इतिहास) अध्याय: 11.3 महाजनपद और बौद्ध धर्म विषय-वस्तु: 16 महाजनपद, बुद्ध जीवन, धम्म
लगभग 600 ईसा पूर्व में उत्तर भारत में छोटे-छोटे जनपदों के विलय से 16 महाजनपदों का उदय हुआ। यह काल भारतीय इतिहास में 'द्वितीय नगरीकरण' तथा धार्मिक आंदोलनों का काल माना जाता है। इन्हीं महाजनपदों में मगध सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा, जिसने बाद में पूरे उत्तर भारत को एक छत्र के नीचे एकत्र किया। बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' में इन 16 महाजनपदों का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
इसी काल में 6वीं शताब्दी ई.पू. में दो महान धार्मिक आंदोलन उठे – बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म। गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) ने बौद्ध धर्म की स्थापना की, जबकि महावीर ने जैन धर्म का पुनरुद्धार किया। ये दोनों आंदोलन वैदिक यज्ञ-कर्मकांडों तथा वर्ण-व्यवस्था के विरोध में उठे। इनके सिद्धांतों में जातिवाद का विरोध, अहिंसा और समानता पर बल दिया गया, जिससे इन्हें आम जनता का व्यापक समर्थन मिला।
बुद्ध की शिक्षाएँ 'धम्म' (धर्म) के नाम से प्रसिद्ध हुईं। धम्म का सार चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग तथा मध्यम मार्ग में निहित है। बुद्ध के उपदेशों को त्रिपिटक नामक ग्रंथों में संकलित किया गया। मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को श्रीलंका तथा अन्य देशों तक पहुँचाया। RRB NTPC परीक्षा में 16 महाजनपदों, बुद्ध के जीवन की घटनाओं तथा बौद्ध संगीतियों से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं।
अंगुत्तर निकाय के अनुसार 16 महाजनपदों में मगध, अंग, काशी, कोसल, वज्जि, मल्ल, चेदि, वत्स, कुरु, पांचाल, मत्स्य, सूरसेन, अश्मक, अवंति, गांधार और कंबोज शामिल थे। इनमें से अधिकांश राजतंत्रात्मक थे, जबकि वज्जि और मल्ल गणतांत्रिक (गणराज्य) थे। ये महाजनपद हिमालय से लेकर विंध्य तक तथा पश्चिम में गांधार से पूर्व में अंग तक फैले थे। एकमात्र अश्मक दक्षिण में गोदावरी नदी के किनारे स्थित था।
प्रमुख महाजनपद और उनकी विशेषताएँ:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): वत्स महाजनपद की राजधानी कौन-सी थी? (1) श्रावस्ती (2) कौशांबी (3) उज्जैन (4) वैशाली। सही उत्तर (2) कौशांबी है।
मगध के उत्थान का क्रम महत्वपूर्ण है: हर्यक वंश (बिंबिसार, अजातशत्रु, उदायिन), शिशुनाग वंश, तथा नंद वंश (महापद्मनंद)। उदायिन ने पाटलिपुत्र (पटना) की स्थापना की। महापद्मनंद को 'प्रथम साम्राज्यवादी शासक' और 'सर्व-क्षत्रांतक' कहा गया। नमूना उदाहरण (numbered): (1) बिंबिसार को 'श्रेणिक' भी कहा जाता था। (2) अजातशत्रु को 'कुनिक' कहा गया। (3) बुद्ध की मृत्यु के समय अजातशत्रु मगध का शासक था। (4) बिंबिसार जैन धर्म का अनुयायी था।
गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में शाक्य गणतंत्र के राजा शुद्धोधन के यहाँ हुआ। इनकी माता महामाया थीं। बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इनकी पत्नी यशोधरा तथा पुत्र राहुल था। इन्हें तीन नामों से जाना जाता है – सिद्धार्थ (जन्म नाम), गौतम (गोत्र) और शाक्यमुनि (शाक्य कुल के मुनि)। 12 वर्ष की आयु में ये राजपाट से विरक्त हो गए।
बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाएँ क्रमबद्ध रूप से इस प्रकार हैं:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): बुद्ध को ज्ञान कहाँ प्राप्त हुआ? (1) सारनाथ (2) बोधगया (3) लुंबिनी (4) कुशीनगर। सही उत्तर (2) है। नमूना प्रश्न 2: बुद्ध का प्रथम उपदेश कहाँ दिया गया? (1) सारनाथ (2) वैशाली (3) राजगृह (4) श्रावस्ती। सही उत्तर (1) है।
बुद्ध के संबंध में 'चार स्थान' विशेष पूजनीय हैं – जन्म (लुंबिनी), ज्ञान (बोधगया), प्रथम उपदेश (सारनाथ) और महापरिनिर्वाण (कुशीनगर)। नमूना उदाहरण (numbered): (1) बुद्ध के पिता शुद्धोधन थे। (2) बुद्ध की माता महामाया थीं। (3) बुद्ध के गुरु आलार कालाम तथा उद्दक रामपुत्त थे। (4) बुद्ध ने अपना अंतिम प्रवचन वैशाली में दिया।
बुद्ध की शिक्षाओं को 'धम्म' कहा जाता है। धम्म का सार निम्नलिखित सिद्धांतों में निहित है:
बौद्ध साहित्य में त्रिपिटक सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। त्रिपिटक के तीन भाग हैं – विनय पिटक (भिक्षुओं के आचार-नियम), सुत्त पिटक (बुद्ध के उपदेश) तथा अभिधम्म पिटक (दार्शनिक विवेचन)। बुद्ध के ग्रंथों को संग्रहीत करने के लिए बौद्ध संगीतियाँ आयोजित हुईं। प्रथम संगीति राजगृह में अजातशत्रु के संरक्षण में (महाकाश्यप की अध्यक्षता में), द्वितीय वैशाली में कालाशोक के शासनकाल में (सब्बाकामी की अध्यक्षता में), तृतीय पाटलिपुत्र में अशोक के शासनकाल में (मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में) तथा चतुर्थ कश्मीर में कनिष्क के शासनकाल में हुई।
नमूना प्रश्न (उदाहरण): त्रिपिटक का कौन-सा भाग भिक्षुओं के आचार-नियमों से संबंधित है? (1) सुत्त पिटक (2) विनय पिटक (3) अभिधम्म पिटक (4) धम्मपद। सही उत्तर (2) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) तृतीय संगीति की अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की। (2) बुद्ध का सबसे प्रसिद्ध उपदेशग्रंथ 'धम्मपद' है। (3) महायान और हीनयान में विभाजन चतुर्थ संगीति के बाद हुआ। (4) बौद्ध धर्म का प्रतीक अष्टांगिक मार्ग का चक्र (धर्मचक्र) है।
| महाजनपद | राजधानी | महाजनपद | राजधानी |
|---|---|---|---|
| मगध | राजगृह/पाटलिपुत्र | कुरु | इंद्रप्रस्थ |
| कोसल | श्रावस्ती | पांचाल | अहिच्छत्र |
| काशी | वाराणसी | मत्स्य | विराटनगर |
| अंग | चंपा | सूरसेन | मथुरा |
| वज्जि | वैशाली | अवंति | उज्जैन |
| मल्ल | कुशीनगर | अश्मक | पोतन |
| वत्स | कौशांबी | गांधार | तक्षशिला |
| चेदि | सोत्थिवती | कंबोज | राजपुर |
| संगीति | स्थान | संरक्षक/अध्यक्ष | समय |
|---|---|---|---|
| प्रथम | राजगृह | अजातशत्रु, अध्यक्ष महाकाश्यप | बुद्ध के बाद |
| द्वितीय | वैशाली | कालाशोक, अध्यक्ष सब्बाकामी | लगभग 383 ई.पू. |
| तृतीय | पाटलिपुत्र | अशोक, अध्यक्ष मोग्गलिपुत्त तिस्स | लगभग 250 ई.पू. |
| चतुर्थ | कश्मीर | कनिष्क, अध्यक्ष वसुमित्र | लगभग 78-100 ई. |
flowchart TD
A[महाजनपद और बौद्ध धर्म] --> B[16 महाजनपद]
A --> C[गौतम बुद्ध]
A --> D[धम्म]
B --> E[मगध - राजगृह]
B --> F[कोसल - श्रावस्ती]
B --> G[वत्स - कौशांबी]
C --> H[जन्म लुंबिनी 563 ई.पू.]
C --> I[ज्ञान बोधगया]
C --> J[उपदेश सारनाथ]
C --> K[निर्वाण कुशीनगर 483 ई.पू.]
D --> L[चार आर्य सत्य]
D --> M[अष्टांगिक मार्ग]
D --> N[मध्यम मार्ग]
D --> O[त्रिपिटक]
16 महाजनपदों का काल भारतीय इतिहास का वह सुनहरा दौर था जिसमें राजनीतिक एकीकरण के साथ-साथ धार्मिक पुनर्जागरण भी हुआ। मगध का उत्थान और बौद्ध तथा जैन धर्म का उदय इसी युग की देन है। बुद्ध के जीवन की घटनाएँ, धम्म के सिद्धांत तथा बौद्ध संगीतियाँ RRB NTPC के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। इन तथ्यों को क्रमबद्ध रूप से याद रखने वाले उम्मीदवार इस अध्याय से निश्चित रूप से अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।