विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (प्राचीन भारतीय इतिहास) अध्याय: 11.6 गुप्त साम्राज्य विषय-वस्तु: समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्वितीय
गुप्त साम्राज्य को भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है। इसकी स्थापना श्रीगुप्त ने की, परंतु साम्राज्य का वास्तविक विस्तार चंद्रगुप्त प्रथम (320 ई.) के समय हुआ। गुप्त वंश ने लगभग 320 ई. से 550 ई. तक शासन किया। इस काल में राजनीतिक एकता, कला, साहित्य, विज्ञान और धर्म का अभूतपूर्व विकास हुआ, इसीलिए इतिहासकार इसे भारतीय संस्कृति का स्वर्ण काल कहते हैं।
गुप्त वंश के प्रमुख शासक क्रमशः श्रीगुप्त, घटोत्कच, चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य), कुमारगुप्त और स्कंदगुप्त थे। चंद्रगुप्त प्रथम ने 320 ई. में अपने राज्याभिषेक से गुप्त संवत् का आरंभ किया। उसने लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की तथा 'महाराजाधिराज' की उपाधि धारण की।
गुप्त काल में आर्यभट्ट जैसे गणितज्ञ, कालिदास जैसे महाकवि, वराहमिहिर जैसे ज्योतिषी तथा धन्वंतरि जैसे वैद्य हुए। इसी काल में 'शून्य' का आविष्कार और 'दशमलव पद्धति' का विकास हुआ। RRB NTPC परीक्षा में गुप्त शासकों, उनकी उपलब्धियों, साहित्यकारों तथा अभिलेखों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
चंद्रगुप्त प्रथम गुप्त वंश का प्रथम महान शासक था, जिसने 320 ई. में गुप्त संवत् आरंभ किया। उसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। उसने लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह कर अपनी शक्ति बढ़ाई और 'महाराजाधिराज' की उपाधि ली। चंद्रगुप्त प्रथम के सिक्कों पर राजा एवं रानी के चित्र उत्कीर्ण हैं, जो गुप्त सिक्कों की विशेषता है।
समुद्रगुप्त (लगभग 335–380 ई.) गुप्त वंश का सबसे महान शासक माना जाता है। इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने उसे 'भारत का नेपोलियन' कहा। उसकी विजयों का वर्णन एलाहाबाद स्तंभ अभिलेख (प्रयाग प्रशस्ति) में मिलता है, जिसे उसके दरबारी कवि हरिषेण ने रचा। समुद्रगुप्त ने अनेक राजाओं को पराजित कर 'दिग्विजय' की नीति अपनाई तथा धार्मिक प्रश्नों पर संगठित किया।
समुद्रगुप्त की उपलब्धियाँ:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): समुद्रगुप्त को किस उपाधि से सम्मानित किया गया? (1) कविराज (2) महाराजाधिराज (3) देवगुप्त (4) विक्रमादित्य। सही उत्तर (1) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) समुद्रगुप्त की विजयों का विवरण एलाहाबाद स्तंभ अभिलेख में है। (2) हरिषेण ने प्रयाग प्रशस्ति लिखी। (3) चंद्रगुप्त प्रथम के सिक्कों पर राजा-रानी का चित्र है। (4) समुद्रगुप्त को 'भारत का नेपोलियन' कहा गया।
चंद्रगुप्त द्वितीय (लगभग 380–415 ई.) गुप्त साम्राज्य का सबसे प्रतापी शासक था। उसे 'विक्रमादित्य' की उपाधि दी गई। उसने शक क्षत्रपों को पराजित कर गुजरात एवं पश्चिमी भारत को अपने साम्राज्य में मिलाया। उसने उज्जैन को अपनी द्वितीय राजधानी बनाया तथा अनेक यज्ञ किए। उसके शासनकाल में भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च विकास हुआ।
चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल की प्रमुख विशेषताएँ:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): चंद्रगुप्त द्वितीय की द्वितीय राजधानी कौन-सी थी? (1) पाटलिपुत्र (2) उज्जैन (3) तक्षशिला (4) मथुरा। सही उत्तर (2) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) चंद्रगुप्त द्वितीय को विक्रमादित्य कहा गया। (2) फाह्यान चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया। (3) नवरत्न में कालिदास प्रमुख थे। (4) मेहरौली लौह स्तंभ चंद्रगुप्त द्वितीय से संबंधित है।
गुप्त काल को कला और साहित्य का स्वर्ण युग कहा गया। साहित्य के क्षेत्र में कालिदास (अभिज्ञानशाकुंतलम, रघुवंश), विशाखदत्त (देवीचंद्रगुप्तम), विष्णु शर्मा (पंचतंत्र), शूद्रक (मृच्छकटिकम्), वात्स्यायन (कामसूत्र) तथा आर्यभट्ट (आर्यभट्टीय) की रचनाएँ महत्वपूर्ण हैं। गणित में 'शून्य' का आविष्कार तथा वराहमिहिर का ग्रंथ 'बृहत्संहिता' इसी काल की देन है।
गुप्त काल में सांची एवं सारनाथ के मंदिर, एलोरा के कैलाश मंदिर की प्रेरणा, तथा अजंता की गुफा चित्रकला का प्रारंभ माना जाता है। इस काल के धर्म में हिंदू धर्म का पुनरुत्थान हुआ तथा देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनने लगीं। स्कंदगुप्त (455–467 ई.) ने हूणों को पराजित कर साम्राज्य की रक्षा की, इसीलिए उसे 'विक्रमादित्य' की उपाधि से सम्मानित किया गया।
गुप्त साम्राज्य के पतन के कारण:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): हूणों को किस गुप्त शासक ने पराजित किया? (1) समुद्रगुप्त (2) चंद्रगुप्त द्वितीय (3) स्कंदगुप्त (4) कुमारगुप्त। सही उत्तर (3) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) स्कंदगुप्त को 'विक्रमादित्य' उपाधि मिली। (2) कुमारगुप्त ने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की। (3) नालंदा की स्थापना का श्रेय कुमारगुप्त प्रथम को दिया जाता है। (4) गुप्तकाल में चित्रकला का सर्वोत्तम उदाहरण अजंता की गुफाएँ हैं।
| शासक | काल | मुख्य उपलब्धि |
|---|---|---|
| चंद्रगुप्त प्रथम | 320 ई. | गुप्त संवत् का आरंभ, महाराजाधिराज |
| समुद्रगुप्त | 335–380 ई. | भारत का नेपोलियन, एलाहाबाद अभिलेख |
| चंद्रगुप्त द्वितीय | 380–415 ई. | विक्रमादित्य, नवरत्न, फाह्यान का आगमन |
| कुमारगुप्त | 415–455 ई. | नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना |
| स्कंदगुप्त | 455–467 ई. | हूणों को पराजित करना |
| साहित्यकार | रचना | विशेषता |
|---|---|---|
| कालिदास | अभिज्ञानशाकुंतलम, मेघदूत | महाकवि, नवरत्न में प्रमुख |
| विशाखदत्त | देवीचंद्रगुप्तम, मुद्राराक्षस | नाटककार |
| विष्णु शर्मा | पंचतंत्र | नीति-कथाएँ |
| शूद्रक | मृच्छकटिकम् | प्राकृत नाटक |
| आर्यभट्ट | आर्यभट्टीय | गणित एवं खगोलशास्त्र |
flowchart TD
A[गुप्त साम्राज्य] --> B[चंद्रगुप्त प्रथम]
A --> C[समुद्रगुप्त]
A --> D[चंद्रगुप्त द्वितीय]
A --> E[स्कंदगुप्त]
B --> F[320 ई. गुप्त संवत्]
C --> G[भारत का नेपोलियन]
C --> H[एलाहाबाद अभिलेख]
D --> I[विक्रमादित्य]
D --> J[नवरत्न]
D --> K[फाह्यान का आगमन]
E --> L[हूणों पर विजय]
A --> M[स्वर्ण युग]
A --> N[कला-साहित्य का विकास]
गुप्त साम्राज्य भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग है, जिसमें राजनीतिक स्थिरता के साथ कला, साहित्य, गणित और धर्म का असाधारण विकास हुआ। चंद्रगुप्त प्रथम से स्कंदगुप्त तक के शासकों की उपलब्धियाँ तथा कालिदास, आर्यभट्ट, वराहमिहिर जैसे विद्वानों का योगदान इस युग को अद्वितीय बनाता है। RRB NTPC परीक्षा में शासक-क्रम, अभिलेख, रचनाएँ तथा उपाधियों से प्रश्न पूछे जाते हैं, अतः इन तथ्यों की क्रमबद्ध पुनरावृत्ति से उम्मीदवार आसानी से अंक अर्जित कर सकते हैं।