विषय: रेलवे NTPC – तर्कशक्ति (तार्किक और विश्लेषणात्मक तर्क) अध्याय: 10.1 न्यायवाक्य विषय-वस्तु: सिलोजिज्म निष्कर्ष
न्यायवाक्य (सिलोजिज्म) तर्कशक्ति परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण और नियमित पूछा जाने वाला विषय है। इसमें दो या दो से अधिक कथन (premises) दिए जाते हैं और उनके आधार पर एक या अधिक निष्कर्ष निकालने होते हैं। परीक्षार्थी को यह बताना होता है कि दिए गए निष्कर्षों में से कौन-सा निश्चित रूप से सत्य है और कौन-सा असत्य अथवा संभाव्य। इसका मुख्य उद्देश्य उम्मीदवार की तार्किक क्षमता, निगमनात्मक चिंतन शक्ति और विश्लेषणात्मक योग्यता की जाँच करना है।
रेलवे NTPC की परीक्षा में न्यायवाक्य के प्रश्न प्रायः वेन आरेख के साथ जोड़कर पूछे जाते हैं। हर प्रश्न में दो कथनों के बाद दो या चार निष्कर्ष दिए जाते हैं। उम्मीदवार को कथनों को सत्य मानकर निष्कर्षों की सत्यता का परीक्षण करना होता है। यहाँ सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रश्नकर्ता द्वारा दिए गए तथ्यों से बाहर की जानकारी को ध्यान में नहीं लाना चाहिए, बल्कि केवल कथनों के आधार पर ही निर्णय करना चाहिए।
इस अध्याय में हम न्यायवाक्य के प्रकार, पद (terms), गुण-वाचक और अस्तित्ववाचक कथनों के भेद, तथा विभिन्न प्रकार के निष्कर्ष निकालने के नियमों को विस्तार से सीखेंगे। साथ ही हल किए गए उदाहरणों की सहायता से परीक्षा-स्तरीय प्रश्नों को हल करने की रणनीति को समझेंगे।
न्यायवाक्य चार श्रेणियों में बाँटा जाता है, जिन्हें हम आकृति (figure) के आधार पर समझते हैं:
कुछ A नहीं हैं B (विशेष अस्तित्ववाचक): जब "कुछ नहीं" या "नहीं हैं" का प्रयोग होता है। उदाहरण: कुछ कुत्ते काले नहीं हैं।
पदों के प्रकार: किसी भी न्यायवाक्य में तीन पद होते हैं। प्रमुख पद वह होता है जो निष्कर्ष का विधेय (predicate) बनता है, लघु पद निष्कर्ष का कर्ता (subject) बनता है, और मध्य पद दोनों कथनों में उभयनिष्ठ रहता है। उदाहरण: "सभी छात्र मेहनती हैं। सभी मेहनती सफल होते हैं।" यहाँ 'छात्र' लघु पद, 'सफल' प्रमुख पद और 'मेहनती' मध्य पद है।
मध्य पद का महत्व: मध्य पद दो कथनों को आपस में जोड़ने का काम करता है। यदि दोनों कथनों में कोई उभयनिष्ठ पद नहीं है, तो कोई निष्कर्ष नहीं निकल सकता। उदाहरण: "सभी A हैं B। सभी C हैं D।" यहाँ B और C में कोई संबंध नहीं है, अतः कोई निष्कर्ष संभव नहीं।
कथनों की व्यवस्था: जिस कथन में लघु पद होता है उसे लघु कथन कहते हैं और जिसमें प्रमुख पद होता है उसे प्रमुख कथन। सामान्यतः पहले लघु कथन और बाद में प्रमुख कथन दिया जाता है। परीक्षा में प्रायः यह क्रम पहले से व्यवस्थित होता है, किंतु कुछ प्रश्नों में इसे बदला भी जाता है।
नियम 1 - सामान्य से विशेष: यदि दोनों कथन सार्वभौमिक हैं, तो निष्कर्ष सार्वभौमिक ही होगा। यदि कोई एक कथन विशेष है, तो निष्कर्ष विशेष होगा। दोनों विशेष कथनों से सार्वभौमिक निष्कर्ष कभी नहीं निकलता।
नियम 2 - "सभी A हैं B" का निष्कर्ष: इस कथन से केवल "कुछ A हैं B" निश्चित निकलता है। "कुछ B हैं A" भी निश्चित है। किंतु "सभी B हैं A" निश्चित नहीं है, क्योंकि B के अतिरिक्त भाग का A से संबंध ज्ञात नहीं है।
नियम 3 - नकारात्मक कथन: "कोई A नहीं है B" से निश्चित निष्कर्ष "कोई B नहीं है A" है। दो नकारात्मक कथनों से कोई निष्कर्ष नहीं निकलता, क्योंकि संबंध स्थापित करने के लिए कम से कम एक कथन गुणवाचक होना आवश्यक है।
नियम 4 - मध्य पद का वितरण: मध्य पद का दोनों कथनों में कम से कम एक बार वितरित होना आवश्यक है। यदि मध्य पद दोनों कथनों में वितरित नहीं है, तो वैध निष्कर्ष नहीं निकलता। "कुछ A हैं B" में A और B दोनों अवितरित हैं।
नियम 5 - निष्कर्ष में पदों का वितरण: कोई भी पद निष्कर्ष में उससे अधिक वितरित नहीं हो सकता, जितना वह कथनों में वितरित था। उदाहरण: "सभी कुत्ते पशु हैं" से "सभी पशु कुत्ते हैं" नहीं निकलता, क्योंकि निष्कर्ष में 'पशु' वितरित है जबकि कथन में अवितरित था।
नियम 6 - संयुक्त नकारात्मक: यदि दोनों कथन गुणवाचक हैं, तो निष्कर्ष कभी नकारात्मक नहीं हो सकता। यदि दोनों कथन नकारात्मक हैं, तो कोई निष्कर्ष नहीं निकलता। इसका अर्थ है कि नकारात्मकता हमेशा एक गुणवाचक और एक नकारात्मक कथन के संयोजन से ही निकलती है।
नियम 7 - दो विशेष कथन: दो विशेष कथनों (दोनों "कुछ" वाले) से कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकलता। जैसे "कुछ A हैं B, कुछ B हैं C" से A और C के बीच कोई निश्चित संबंध स्थापित नहीं होता।
संभावनात्मक निष्कर्ष: जब कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकलता, तो कभी-कभी संभावनात्मक निष्कर्ष (possibility conclusion) दिए जाते हैं जिन्हें "संभव है", "हो सकता है" जैसे शब्दों से व्यक्त किया जाता है। ऐसे निष्कर्ष तभी सत्य होते हैं जब वे कथनों के विरुद्ध न हों।
उदाहरण 1: कथन: सभी कलम लेखन-सामग्री हैं। सभी लेखन-सामग्री स्कूल में मिलती हैं। निष्कर्ष I: सभी कलम स्कूल में मिलती हैं। निष्कर्ष II: कुछ स्कूल में मिलने वाली चीजें कलम हैं।
हल: सभी A हैं B और सभी B हैं C, अतः सभी A हैं C निश्चित है। इसलिए निष्कर्ष I सत्य है। चूँकि "सभी कलम स्कूल में मिलती हैं", इससे स्वतः "कुछ स्कूल में मिलने वाली चीजें कलम हैं" निकलता है। अतः दोनों निष्कर्ष अनुसरण करते हैं।
उदाहरण 2: कथन: कुछ फूल लाल हैं। सभी लाल रंग गाढ़े हैं। निष्कर्ष I: कुछ गाढ़े रंग फूल हैं। निष्कर्ष II: सभी फूल गाढ़े रंग के हैं।
हल: "कुछ फूल लाल हैं" और "सभी लाल गाढ़े हैं" से निष्कर्ष मिलता है कि "कुछ फूल गाढ़े हैं" अर्थात "कुछ गाढ़े रंग फूल हैं" (I सत्य)। परंतु II नहीं निकलता क्योंकि केवल कुछ फूल लाल हैं, सभी नहीं। अतः केवल निष्कर्ष I अनुसरण करता है।
उदाहरण 3: कथन: कोई पक्षी मछली नहीं है। सभी मछलियाँ जलीय प्राणी हैं। निष्कर्ष I: कोई पक्षी जलीय प्राणी नहीं है। निष्कर्ष II: कुछ जलीय प्राणी मछलियाँ हैं।
हल: पहले कथन में नकार है अतः निष्कर्ष नकारात्मक होगा, परंतु मध्य पद 'मछली' पहले कथन में वितरित है (कोई पक्षी मछली नहीं) और दूसरे में अवितरित। इस स्थिति में "कोई पक्षी जलीय प्राणी नहीं" निश्चित नहीं है क्योंकि जलीय प्राणियों के कुछ भाग पक्षी हो सकते हैं। निष्कर्ष II "कुछ जलीय प्राणी मछलियाँ हैं" निश्चित है क्योंकि सभी मछलियाँ जलीय प्राणी हैं। अतः केवल II अनुसरण करता है।
उदाहरण 4: कथन: कुछ A हैं B। कुछ B हैं C। निष्कर्ष I: कुछ A हैं C। निष्कर्ष II: कोई A, C नहीं है।
हल: यहाँ दोनों कथन विशेष हैं, अतः कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकलता। A और C के बीच संबंध B के माध्यम से संभव भी हो सकता है और नहीं भी। इसलिए न तो I निश्चित रूप से अनुसरण करता है और न ही II। उत्तर: कोई नहीं।
उदाहरण 5: कथन: सभी गाय शाकाहारी हैं। कोई शाकाहारी हिंसक नहीं है। निष्कर्ष I: कोई गाय हिंसक नहीं है। निष्कर्ष II: कुछ शाकाहारी गाय हैं।
हल: "सभी गाय शाकाहारी" और "कोई शाकाहारी हिंसक नहीं" से "कोई गाय हिंसक नहीं" निश्चित है (I सत्य)। चूँकि सभी गाय शाकाहारी हैं, अतः कुछ शाकाहारी गाय हैं निश्चित है (II सत्य)। उत्तर: दोनों अनुसरण करते हैं।
| कथन प्रकार | उदाहरण | वितरित पद | अवितरित पद | निश्चित निष्कर्ष |
|---|---|---|---|---|
| सभी A हैं B | सभी पुस्तकें कागज हैं | A | B | कुछ A हैं B, कुछ B हैं A |
| कोई A नहीं है B | कोई पुस्तक पत्थर नहीं | A और B | — | कोई B नहीं है A |
| कुछ A हैं B | कुछ पुस्तकें नई हैं | — | A और B | केवल पुनरावृत्ति |
| कुछ A नहीं हैं B | कुछ पुस्तकें पुरानी नहीं | B | A | कोई निश्चित नहीं |
| पहला कथन | दूसरा कथन | वैध निष्कर्ष |
|---|---|---|
| सभी A हैं B | सभी B हैं C | सभी A हैं C |
| सभी A हैं B | कुछ B हैं C | कुछ A हैं C (संभव) |
| कुछ A हैं B | कुछ B हैं C | कोई निश्चित नहीं |
| कोई A नहीं है B | सभी B हैं C | कुछ C नहीं हैं A (संभव) |
| सभी A हैं B | कोई B नहीं है C | कोई A नहीं है C |
flowchart TD
A[न्यायवाक्य] --> B[कथन के प्रकार]
A --> C[निष्कर्ष निकालने के नियम]
A --> D[वेन आरेख विधि]
B --> B1[सभी - सार्वभौमिक गुणवाचक]
B --> B2[कोई नहीं - सार्वभौमिक अस्तित्ववाचक]
B --> B3[कुछ - विशेष गुणवाचक]
B --> B4[कुछ नहीं - विशेष अस्तित्ववाचक]
C --> C1[सार्वभौमिक से सार्वभौमिक]
C --> C2[एक विशेष से विशेष]
C --> C3[दो विशेष से कोई नहीं]
C --> C4[दो नकारात्मक से कोई नहीं]
C --> C5[मध्य पद का वितरण]
D --> D1[मुख्य श्रेणी पहचानो]
D --> D2[छायांकन करो]
D --> D3[निष्कर्ष जाँचो]
न्यायवाक्य में सफलता पाने के लिए कथनों के प्रकारों का ज्ञान, मध्य पद की पहचान और वितरण के नियमों का अभ्यास आवश्यक है। नियमित अभ्यास और वेन आरेख विधि के उपयोग से उम्मीदवार कम समय में अधिक प्रश्न हल कर सकते हैं। याद रखें कि इस विषय में व्यावहारिक ज्ञान की बजाय शुद्ध तार्किक विश्लेषण ही सही उत्तर देता है।