विषय: रेलवे NTPC – सामान्य ज्ञान (भारतीय कला और संस्कृति) अध्याय: 21.2 भारतीय संगीत विषय-वस्तु: संगीत घराने
भारतीय संगीत विश्व की सबसे प्राचीन और विकसित संगीत परंपराओं में से एक है। भारतीय संगीत को मुख्यतः दो शैलियों में विभाजित किया गया है: हिंदुस्तानी संगीत और कर्नाटक संगीत। हिंदुस्तानी संगीत उत्तर भारत में प्रचलित है, जबकि कर्नाटक संगीत दक्षिण भारत में विकसित हुआ। दोनों शैलियों का मूल आधार राग और ताल है, परंतु इनके प्रस्तुति के तरीके और संरचना में भिन्नता होती है। संगीत की परंपरा को भरत मुनि के नाट्यशास्त्र और सारंगदेव के संगीत रत्नाकर जैसे ग्रंथों से समझा जा सकता है।
हिंदुस्तानी संगीत में घरानों की विशेष परंपरा विकसित हुई। घराना संगीत की वह शैली है जो किसी विशेष गुरु या परिवार की परंपरा में विकसित होती है। प्रत्येक घराने की अपनी गायन शैली, रागों की प्रस्तुति और आभूषण की विशेषता होती है। हिंदुस्तानी संगीत के प्रमुख घरानों में ग्वालियर, आगरा, जयपुर, किराना, पटियाला, रामपुर-सहसवान और भिंडीबाजार घराने शामिल हैं। ये घराने शास्त्रीय गायन की अलग-अलग तकनीकों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कर्नाटक संगीत मुख्यतः गायन प्रधान है और इसमें कृतियों का विशेष महत्व है। त्रिमूर्तियों के रूप में प्रसिद्ध त्यागराज, मुत्तुस्वामी दीक्षित और श्यामा शास्त्री ने कर्नाटक संगीत को समृद्ध किया। इसी प्रकार हिंदुस्तानी संगीत में अमीर खुसरो ने खयाल गायन और सितार जैसे वाद्यों को विकसित किया। प्रतियोगी परीक्षाओं में संगीत घरानों, रागों, वाद्य यंत्रों और संगीतकारों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। एनटीपीसी परीक्षा में भारतीय संगीत के इन्हीं तथ्यों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
हिंदुस्तानी संगीत: - उत्तर भारत में प्रचलित। - रागों की प्रस्तुति, खयाल, ध्रुपद, ठुमरी शैलियाँ। - प्रमुख वाद्य: सितार, सरोद, तबला, बांसुरी, शहनाई।
कर्नाटक संगीत: - दक्षिण भारत में प्रचलित। - कृति गायन प्रधान। - प्रमुख वाद्य: वीणा, मृदंगम, घटम।
कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति: - त्यागराज - मुत्तुस्वामी दीक्षित - श्यामा शास्त्री
संगीत की मूल अवधारणाएँ: - राग: स्वरों की विशेष व्यवस्था जो भाव उत्पन्न करती है। - ताल: समय की माप, लय का नियंत्रण। - स्वर: संगीत की मूल ध्वनि इकाई। - श्रुति: स्वर की बारीक भिन्नता। - लय: गति का नियंत्रण।
सप्तक और स्वर: - सात स्वर: सा, रे, ग, म, प, ध, नि। - पहला स्वर सा आधार स्वर कहलाता है। - भैरव, यमन, भूपाली जैसे राग प्रमुख हैं।
प्रमुख हिंदुस्तानी घराने: - ग्वालियर घराना: हिंदुस्तानी संगीत का सबसे पुराना घराना, सरल और सीधी गायन शैली। - आगरा घराना: भाव प्रधान और ठुमरी शैली। - जयपुर घराना: जटिल राग संरचना और तेज तानें। - किराना घराना: खयाल गायन की प्रसिद्ध शैली। - पटियाला घराना: पंजाब का घराना, ठुमरी और दादरा प्रधान। - रामपुर-सहसवान घराना: उत्तर प्रदेश का घराना। - भिंडीबाजार घराना: मुंबई का घराना।
प्रसिद्ध गायक: - तानसेन: अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक, मियां की मल्हार राग के जनक। - बड़े गुलाम अली खान: पटियाला घराना। - पं. भीमसेन जोशी: किराना घराना। - पं. जसराज: मेवाती घराना। - मल्लिकार्जुन मंसूर: किराना घराना।
वाद्य यंत्रों के प्रकार: - तत वाद्य (तार): सितार, सरोद, वीणा। - अवनद्ध वाद्य (ढोल): तबला, मृदंगम, ढोलक। - सुषिर वाद्य (फूंक): बांसुरी, शहनाई, बीन। - घन वाद्य (ठोस): घटम, मंजीरा, करताल।
महत्वपूर्ण तथ्य: - तानसेन को हिंदुस्तानी संगीत का महानतम गायक माना जाता है। - अमीर खुसरो को खयाल गायन और सितार का जन्मदाता माना जाता है। - रवींद्र संगीत रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित गीत हैं। - सुगम संगीत में भजन, गजल, ठुमरी और दादरा शामिल हैं।
संगीत संस्थान: - संगीत नाटक अकादमी: भारत सरकार का संगीत, नृत्य और नाटक का राष्ट्रीय संस्थान। - भातखंडे संगीत विद्यापीठ: हिंदुस्तानी संगीत की शिक्षा का संस्थान। - कला अकादमी: राज्य स्तरीय संस्थान।
पुरस्कार: - संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार संगीतकारों को दिया जाता है। - पद्म पुरस्कार भी संगीत क्षेत्र में दिए जाते हैं।
रागों से जुड़े तथ्य: - रागों को सुबह, शाम और रात के समय के अनुसार गाया जाता है। - राग भैरव सुबह के समय गाया जाता है। - राग यमन रात के पहले प्रहर में गाया जाता है। - मियां की मल्हार वर्षा से जुड़ा राग है।
भारतीय संगीत की विशेषताएँ: - भारतीय संगीत मुख्यतः धुन आधारित है। - वाद्य संगत में तानपुरा हमेशा शामिल होता है। - प्रस्तुति में आलाप, तान, बंदिश जैसे तत्व होते हैं। - प्रत्येक घराने की अपनी बंदिशों की परंपरा होती है।
महत्वपूर्ण ग्रंथ: - नाट्यशास्त्र - भरत मुनि - संगीत रत्नाकर - सारंगदेव - संगीत दर्पण - दामोदर पंडित
| घराना | विशेषता |
|---|---|
| ग्वालियर | सबसे पुराना, सरल शैली |
| आगरा | भाव प्रधान |
| जयपुर | जटिल राग संरचना |
| किराना | खयाल गायन |
| पटियाला | ठुमरी और दादरा |
| प्रकार | नाम | उदाहरण |
|---|---|---|
| तत (तार) | तंतु वाद्य | सितार, सरोद, वीणा |
| अवनद्ध (ढोल) | चमड़े से ढका | तबला, मृदंगम |
| सुषिर (फूंक) | हवा से बजने वाले | बांसुरी, शहनाई |
| घन (ठोस) | टकराने वाले | घटम, मंजीरा |
flowchart TD
A[21.2 भारतीय संगीत] --> B[हिंदुस्तानी संगीत]
A --> C[कर्नाटक संगीत]
A --> D[संगीत घराने]
A --> E[वाद्य यंत्र]
B --> B1[उत्तर भारत]
B --> B2[खयाल, ध्रुपद]
C --> C1[दक्षिण भारत]
C --> C2[कृति गायन]
D --> D1[ग्वालियर घराना]
D --> D2[किराना घराना]
D --> D3[पटियाला घराना]
E --> E1[तत वाद्य]
E --> E2[सुषिर वाद्य]
भारतीय संगीत अपनी दो शैलियों, विविध घरानों और अनेक वाद्य यंत्रों के साथ देश की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत, प्रमुख घरानों, प्रसिद्ध गायकों और वाद्य यंत्रों की जानकारी एनटीपीसी परीक्षा के संस्कृति अनुभाग में अंक दिलाने वाले प्रश्नों को हल करने में सहायक सिद्ध होती है।