विषय: रेलवे NTPC – भारतीय अर्थव्यवस्था और सामान्य ज्ञान अध्याय: 20.8 पंचवर्षीय योजनाएँ और नीति आयोग विषय-वस्तु: योजनाएँ, नीति आयोग
स्वतंत्रता के बाद भारत ने आर्थिक विकास के लिए आयोजित विकास का मार्ग अपनाया। सन् 1950 में योजना आयोग की स्थापना की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते थे। पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 से शुरू हुई। पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य देश के संसाधनों का विकास के लिए सही आवंटन करना, कृषि और उद्योग में वृद्धि, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन था। योजनाओं का संचालन केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर होता था।
भारत में सन् 1951 से 2012 तक बारह पंचवर्षीय योजनाएँ चलाई गईं। प्रत्येक योजना का अपना विशेष उद्देश्य और लक्ष्य था। पहली योजना में कृषि पर जोर दिया गया, दूसरी योजना में औद्योगिकीकरण, तीसरी योजना में आत्मनिर्भरता तथा बाद की योजनाओं में गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय पर बल दिया गया। योजना आयोग के पहले उपाध्यक्ष गुलज़ारी लाल नंदा थे और पहले अध्यक्ष प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। योजना आयोग की संरचना में उपाध्यक्ष, सदस्य सचिव और कई सदस्य शामिल होते थे।
सन् 2014 में भारत सरकार ने योजना आयोग को भंग कर दिया और 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग का गठन किया। नीति आयोग का पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान है। यह आयोग एक विचार मंच है जो केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है। नीति आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है और इसका मुख्य कार्य दीर्घकालिक नीतियाँ बनाना, राज्यों को तकनीकी सहायता देना और सतत विकास लक्ष्यों को लागू करना है। एनटीपीसी परीक्षा में पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्य, उनकी अवधि और नीति आयोग की संरचना से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56): - मुख्य उद्देश्य कृषि विकास और देश का पुनर्निर्माण। - हरित क्रांति की नींव रखी गई। - हॉर्डिंग की मॉडल पर आधारित थी।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61): - मुख्य उद्देश्य तीव्र औद्योगिकीकरण। - पी. सी. महालनोबिस की मॉडल पर आधारित। - भारी उद्योगों पर बल दिया गया।
तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-66): - उद्देश्य आत्मनिर्भरता और स्वावलंबी अर्थव्यवस्था। - कृषि और उद्योग दोनों पर ध्यान।
योजना अवकाश (1966-69): - युद्ध और सूखे के कारण तीन वार्षिक योजनाएँ चलाई गईं।
चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (1969-74): - उद्देश्य स्थिरता के साथ विकास। - हरित क्रांति का विस्तार।
पंचम पंचवर्षीय योजना (1974-79): - उद्देश्य गरीबी हटाओ का नारा। - गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन।
छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85): - गरीबी उन्मूलन और क्षेत्रीय संतुलन।
सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-90): - उत्पादकता और खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि।
आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97): - आर्थिक सुधारों के बाद मानव संसाधन विकास और रोजगार।
नवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002): - समावेशी विकास और सामाजिक न्याय।
दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-07): - रोजगार सृजन और विकास दर 8 प्रतिशत का लक्ष्य।
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-12): - तीव्र और समावेशी विकास।
बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-17): - तीव्र, सतत और समावेशी विकास। यह अंतिम पंचवर्षीय योजना थी।
नीति आयोग का गठन 1 जनवरी 2015 को किया गया। यह योजना आयोग का उत्तराधिकारी है, लेकिन इसमें मूलभूत अंतर है:
नीति आयोग के प्रमुख कार्यक्रम: - आत्मनिर्भर भारत अभियान: आत्मनिर्भरता को बढ़ावा। - वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: सीमावर्ती गाँवों का विकास। - एस्पायरिंग डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम: पिछड़े जिलों का विकास। - स्टार्टअप इंडिया: नए उद्यमों को प्रोत्साहन।
नीति आयोग के कार्य: - दीर्घकालिक नीतियों और कार्यक्रमों का निर्माण। - केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय। - संसाधनों के आवंटन में सहायता। - निगरानी और मूल्यांकन। - विशेषज्ञों और विश्वविद्यालयों से सहयोग।
महत्वपूर्ण तथ्य: - नीति आयोग का पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान है। - नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष अरविंद पाणिग्रही थे। - नीति आयोग एक संवैधानिक निकाय नहीं है। - नीति आयोग सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर कार्य करता है।
योजना आयोग बनाम नीति आयोग: - योजना आयोग 1950 में स्थापित, नीति आयोग 2015 में। - योजना आयोग धन आवंटित करता था, नीति आयोग केवल सलाह देता है। - योजना आयोग स्थापित करने के लिए किसी संवैधानिक प्रावधान की आवश्यकता नहीं थी, यह सरकार का कार्यकारी प्रस्ताव था। - नीति आयोग को थिंक टैंक भी कहा जाता है।
योजनाओं से जुड़े प्रमुख तथ्य: - पहली पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य हार्वर्ड के प्रोफेसर डब्ल्यू. ए. लुईस की मॉडल पर आधारित था। - द्वितीय योजना पी. सी. महालनोबिस की मॉडल पर थी। - गरीबी हटाओ का नारा पंचम पंचवर्षीय योजना से जुड़ा है। - बारहवीं योजना अंतिम पंचवर्षीय योजना थी, जो 2012-17 तक चली। - योजना आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष गुलज़ारी लाल नंदा थे।
सामाजिक-आर्थिक सूचक: - योजनाओं के मूल्यांकन के लिए आर्थिक सर्वेक्षण और विकास दर के आंकड़े उपयोग होते थे। - विकास दर में निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति का मूल्यांकन किया जाता था। - योजना आयोग के भंग होने के बाद मूल्यांकन का कार्य नीति आयोग करता है।
| योजना | अवधि | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| प्रथम | 1951-56 | कृषि विकास |
| द्वितीय | 1956-61 | औद्योगिकीकरण |
| तृतीय | 1961-66 | आत्मनिर्भरता |
| पंचम | 1974-79 | गरीबी हटाओ |
| आठवीं | 1992-97 | मानव संसाधन विकास |
| बारहवीं | 2012-17 | समावेशी विकास |
| विशेषता | योजना आयोग | नीति आयोग |
|---|---|---|
| स्थापना | 1950 | 2015 |
| धन आवंटन | करता था | नहीं करता |
| अध्यक्ष | प्रधानमंत्री | प्रधानमंत्री |
| स्वरूप | योजना निकाय | थिंक टैंक |
flowchart TD
A[20.8 पंचवर्षीय योजनाएँ और नीति आयोग] --> B[योजना आयोग]
A --> C[पंचवर्षीय योजनाएँ]
A --> D[नीति आयोग]
B --> B1[स्थापना 1950]
B --> B2[अध्यक्ष प्रधानमंत्री]
C --> C1[प्रथम योजना कृषि]
C --> C2[द्वितीय योजना उद्योग]
C --> C3[बारहवीं अंतिम योजना]
D --> D1[गठन 2015]
D --> D2[सहकारी संघवाद]
D --> D3[थिंक टैंक]
भारत की विकास यात्रा में पंचवर्षीय योजनाओं ने कृषि, उद्योग और मानव विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योजना आयोग से नीति आयोग तक का सफर देश की नीति निर्माण प्रणाली के परिवर्तन को दर्शाता है। इन तथ्यों की गहरी समझ एनटीपीसी परीक्षा में अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रश्नों को हल करने में सहायक है।