विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय भूगोल)
अध्याय: 14.7 खनिज और ऊर्जा संसाधन
विषय-वस्तु: खनिज, ऊर्जा
1. परिचय
खनिज प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली अकार्बनिक पदार्थ हैं, जो चट्टानों में स्थित होते हैं और औद्योगिक विकास के मूलभूत आधार हैं। भारत खनिज संपदा की दृष्टि से एक समृद्ध देश है, परंतु खनिजों का वितरण असमान है। अधिकांश खनिज प्रायद्वीपीय पठार के क्षेत्रों—छोटानागपुर पठार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक—में केंद्रित हैं, जबकि उत्तरी मैदानों में खनिज कम पाए जाते हैं। खनिजों को मुख्यतः धात्विक खनिज (लौह-अयस्क, तांबा, बॉक्साइट, मैंगनीज) तथा अधात्विक खनिज (चूना पत्थर, अभ्रक, लवण) में बाँटा जाता है। इसके अतिरिक्त ईंधन खनिज (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम) ऊर्जा उत्पादन के आधार हैं।
ऊर्जा संसाधन किसी भी देश के आर्थिक विकास की रीढ़ होते हैं। ऊर्जा को मुख्यतः पारंपरिक स्रोत (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत, परमाणु ऊर्जा) तथा गैर-पारंपरिक स्रोत (सौर, पवन, भू-तापीय, ज्वारीय, जैव ऊर्जा) में विभाजित किया जाता है। भारत में ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत कोयला है, जो देश की ऊर्जा आवश्यकता का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। भारत विश्व में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि पेट्रोलियम के मामले में भारत को अपनी अधिकांश आवश्यकता आयात करनी पड़ती है।
भारत में खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का वितरण, प्रमुख खदानें, तेल-क्षेत्र, विद्युत परियोजनाएँ तथा नवीन ऊर्जा स्रोतों का विकास RRB NTPC परीक्षा के प्रश्नों के प्रमुख स्रोत हैं। लौह-अयस्क के भंडार, कोयला क्षेत्र (झरिया, रानीगंज, बोकारो, तालचेर), पेट्रोलियम क्षेत्र (डिगबोई, बंबई हाई, अंकलेश्वर) तथा परमाणु खनिज (यूरेनियम-जादुगुड़ा, थोरियम-केरल) पर आधारित प्रश्न लगभग प्रत्येक परीक्षा में पूछे जाते हैं। इसलिए इस अध्याय का विस्तृत अध्ययन अनिवार्य है।
2. प्रमुख धात्विक और अधात्विक खनिज
धात्विक खनिज:
लौह-अयस्क: भारत में दो मुख्य प्रकार—हेमेटाइट (उच्च कोटि) और मैग्नेटाइट। प्रमुख क्षेत्र—ओडिशा (मयूरभंज, क्योंझर), झारखंड (सिंहभूम), छत्तीसगढ़ (बैलाडिला, धल्ली-राजहरा), कर्नाटक (बेल्लारी-चित्रदुर्ग), महाराष्ट्र (रत्नागिरि)। भारत का सबसे बड़ा लौह-अयस्क उत्पादक राज्य ओडिशा है।
मैंगनीज: प्रमुख उत्पादक—ओडिशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र; स्टील निर्माण तथा बैटरी में उपयोग।
बॉक्साइट: एल्युमिनियम का अयस्क; प्रमुख उत्पादक—ओडिशा (पंचपतमाली), छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड; अमरकंटक पठार (म.प्र.) भी प्रमुख क्षेत्र है।
तांबा: प्रमुख क्षेत्र—खेतड़ी (राजस्थान), मालंजखंड (मध्य प्रदेश), सिंहभूम (झारखंड); भारत को तांबे का आयात करना पड़ता है।
अभ्रक: अधात्विक खनिज; भारत विश्व में अभ्रक का सबसे बड़ा उत्पादक; प्रमुख क्षेत्र—झारखंड (कोडरमा), बिहार, आंध्र प्रदेश।
चूना पत्थर: सीमेंट उद्योग का कच्चा माल; प्रमुख राज्य—मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु।
सोना: प्रमुख खदान—कोलार (कर्नाटक), होसपेट, हट्टी (कर्नाटक); भारत की सोने की खदानों में हट्टी सबसे पुरानी और प्रमुख है।
अन्य महत्वपूर्ण खनिज तथ्य:
कोडरमा (झारखंड): विश्व प्रसिद्ध अभ्रक उत्पादक क्षेत्र।
किम्बरलाइट चट्टानें: हीरे के स्रोत; प्रमुख हीरा क्षेत्र—पन्ना (मध्य प्रदेश), गोलकुंडा।
मैग्नेसाइट और क्रोमाइट: ओडिशा में प्रचुर।
बैलाडिला (छत्तीसगढ़): उच्च कोटि का लौह-अयस्क, दुर्ग क्षेत्र।
राजस्थान: जस्ता, तांबा, चांदी (ज़ावर खदान, उदयपुर) के लिए प्रमुख।
3. ऊर्जा संसाधन
भारत के प्रमुख ऊर्जा स्रोतों का विवरण इस प्रकार है:
कोयला: भारत में कोयला मुख्यतः गोंडवाना शैलों (दक्षिणी भाग) में पाया जाता है। प्रमुख क्षेत्र—झरिया व रानीगंज (झारखंड), बोकारो, तालचेर व रामचंद्रपुर (ओडिशा), सिंगरौली व कोरबा (म.प्र.-छत्तीसगढ़), बल्लारपुर (महाराष्ट्र)। लिग्नाइट (भूरा कोयला): नेवेली (तमिलनाडु), गुजरात, राजस्थान। भारत का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य झारखंड है। झरिया को 'भारत का कोयला स्टोर' कहा जाता है।
पेट्रोलियम: प्रमुख क्षेत्र—अंबे (डिगबोई, असम, भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र), मुंबई हाई (अरब सागर, भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र), अंकलेश्वर (गुजरात), कृष्णा-गोदावरी बेसिन (आंध्र प्रदेश), कावेरी बेसिन (तमिलनाडु), बरमेर (राजस्थान)। भारत में पेट्रोलियम का सबसे अधिक उत्पादन राजस्थान (बरमेर) और गुजरात राज्यों से होता है। मुंबई हाई से सर्वाधिक उत्पादन होता है।
प्राकृतिक गैस: प्रमुख क्षेत्र—कृष्णा-गोदावरी बेसिन, हजीरा (गुजरात), मुंबई हाई; भारत की पहली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) टर्मिनल दहीज (गुजरात) में है।
परमाणु ऊर्जा: प्रमुख केंद्र—तारापुर (महाराष्ट्र), रावतभाटा (राजस्थान), काकरापार (गुजरात), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरौरा (उत्तर प्रदेश), कुडनकुलम (तमिलनाडु)। परमाणु ईंधन—यूरेनियम (जादुगुड़ा, झारखंड) और थोरियम (केरल का मोनाजाइट रेत)।
गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों में सौर ऊर्जा (राजस्थान, गुजरात में अधिक संभावना), पवन ऊर्जा (तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक), भू-तापीय ऊर्जा (मणिकर्ण, हिमाचल प्रदेश), ज्वारीय ऊर्जा (गल्फ ऑफ कच्छ) तथा जैव ऊर्जा शामिल हैं। भारत पवन ऊर्जा में विश्व का चौथा तथा सौर ऊर्जा में प्रमुख देशों में शामिल है। नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की स्थापना भारत में हुई है।
4. विद्युत क्षमता और महत्वपूर्ण तथ्य
भारत में विद्युत उत्पादन का सबसे बड़ा स्रोत तापीय विद्युत (कोयला आधारित) है, इसके बाद जल-विद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा तथा परमाणु ऊर्जा का स्थान आता है। महत्वपूर्ण तथ्य निम्न हैं:
सिंगरौली (म.प्र.-उ.प्र. सीमा): 'ऊर्जा की राजधानी' कहा जाता है; सुपर थर्मल पावर स्टेशन।
नरोरा, कायमपुर, सूरतगढ़: प्रमुख तापीय विद्युत संयंत्र।
कोरबा (छत्तीसगढ़): प्रमुख तापीय परियोजना।
कलपक्कम: परमाणु विद्युत केंद्र, तमिलनाडु; भारत का पहला स्वदेशी द्रुत ब्रीडर रिएक्टर यहीं है।
कुडनकुलम (तमिलनाडु): भारत-रूस सहयोग से निर्मित सबसे बड़ा परमाणु विद्युत केंद्र।
पवन ऊर्जा में तमिलनाडु अग्रणी तथा सौर ऊर्जा में राजस्थान का योगदान प्रमुख है।
खनिज तथा ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण भी आवश्यक है। खनिज अक्षय संसाधन नहीं हैं, इसलिए इनके विवेकपूर्ण उपयोग, पुनर्चक्रण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर बल दिया जाता है। सरकार द्वारा 'मेक इन इंडिया', 'ग्रीन एनर्जी' अभियान तथा नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के अंतर्गत वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावॉट तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
खनिज
प्रमुख उत्पादक राज्य
विशेष तथ्य
लौह-अयस्क
ओडिशा
बैलाडिला उच्च कोटि का
मैंगनीज
ओडिशा
स्टील निर्माण में
बॉक्साइट
ओडिशा
एल्युमिनियम का अयस्क
तांबा
राजस्थान
खेतड़ी खदान
अभ्रक
झारखंड
कोडरमा प्रसिद्ध
सोना
कर्नाटक
हट्टी खदान
तालिका 2
ऊर्जा स्रोत
प्रमुख क्षेत्र/परियोजना
कोयला
झरिया, रानीगंज, बोकारो, तालचेर
लिग्नाइट
नेवेली (तमिलनाडु)
पेट्रोलियम
मुंबई हाई, डिगबोई, अंकलेश्वर
जल-विद्युत
भाखड़ा-नांगल, टिहरी, हीराकुंड
परमाणु ऊर्जा
तारापुर, रावतभाटा, कुडनकुलम
पवन ऊर्जा
तमिलनाडु, गुजरात
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[खनिज और ऊर्जा संसाधन] --> B[धात्विक खनिज]
B --> B1[लौह-अयस्क ओडिशा]
B --> B2[मैंगनीज ओडिशा]
B --> B3[बॉक्साइट ओडिशा]
B --> B4[तांबा राजस्थान]
A --> C[अधात्विक खनिज]
C --> C1[अभ्रक झारखंड]
C --> C2[चूना पत्थर]
C --> C3[सोना कर्नाटक]
A --> D[पारंपरिक ऊर्जा]
D --> D1[कोयला झरिया]
D --> D2[पेट्रोलियम मुंबई हाई]
D --> D3[जल-विद्युत भाखड़ा]
D --> D4[परमाणु कुडनकुलम]
A --> E[गैर-पारंपरिक ऊर्जा]
E --> E1[सौर राजस्थान]
E --> E2[पवन तमिलनाडु]
E --> E3[भू-तापीय मणिकर्ण]
E --> E4[ज्वारीय कच्छ]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलती: भारत का सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पादक राज्य असम बताना। सर्वाधिक पेट्रोलियम उत्पादन राजस्थान (बरमेर) व गुजरात से होता है, जबकि सबसे बड़ा तेल क्षेत्र मुंबई हाई है।
गलती: तांबे के प्रमुख क्षेत्र को ओडिशा बताना। तांबा मुख्यतः राजस्थान (खेतड़ी), म.प्र. (मालंजखंड) और झारखंड में है।
गलती: नेवेली को कोयला क्षेत्र बताना। नेवेली लिग्नाइट (भूरा कोयला) क्षेत्र है, गोंडवाना कोयले का नहीं।
गलती: सोने की खदान को राजस्थान बताना। भारत की सोने की खदानें मुख्यतः कर्नाटक (हट्टी, कोलार) में हैं।
गलती: यूरेनियम के भंडार को राजस्थान बताना। यूरेनियम का प्रमुख भंडार जादुगुड़ा (झारखंड) में है।
गलती: थोरियम के भंडार को ओडिशा बताना। थोरियम केरल के मोनाजाइट रेत में प्रचुर है।
गलती: भारत की सबसे बड़ी जल-विद्युत परियोजना को हीराकुंड बताना। स्थापित क्षमता की दृष्टि से टिहरी व भाखड़ा-नांगल प्रमुख हैं; हीराकुंड सबसे लंबा मिट्टी का बांध है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
खनिजों को 'अयस्क + प्रमुख राज्य + खदान का नाम' त्रिकोण में याद रखें।
कोयला क्षेत्रों (झरिया, रानीगंज, बोकारो, तालचेर, सिंगरौली) और उनके राज्यों को दोहराएँ।
तेल क्षेत्रों (मुंबई हाई, डिगबोई, अंकलेश्वर, बरमेर) को विशेष रूप से स्मरण रखें।
परमाणु केंद्रों की सूची और उनके राज्यों का मिलान करें (तारापुर-महाराष्ट्र, रावतभाटा-राजस्थान)।
पारंपरिक बनाम गैर-पारंपरिक ऊर्जा के उदाहरणों का वर्गीकरण स्पष्ट रखें।
यूरेनियम (जादुगुड़ा) और थोरियम (केरल) के भंडारों को राज्य सहित याद रखें।
10. निष्कर्ष
खनिज और ऊर्जा संसाधन भारत के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। लौह-अयस्क, कोयला, पेट्रोलियम, बॉक्साइट और परमाणु खनिजों के भंडारों तथा उनके क्षेत्रों का ज्ञान इस अध्याय का केंद्र है। ऊर्जा के पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक स्रोतों, प्रमुख विद्युत परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास को समझना भी अनिवार्य है। इन्हें मानचित्र और स्मरण तालिकाओं से पढ़ने पर परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। नियमित पुनरावृत्ति से RRB NTPC में इस अध्याय से पूछे जाने वाले प्रश्नों का समाधान सरल हो जाता है।