विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (मध्यकालीन भारतीय इतिहास) अध्याय: 12.6 विजयनगर और बहमनी राज्य विषय-वस्तु: हम्पी, कृष्णदेवराय, बहमनी
सन् 14वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में दो बड़े राज्य उभरे: विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने तुंगभद्रा नदी के तट पर की, जबकि बहमनी राज्य की स्थापना 1347 में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह (हसन गंगू) ने दौलताबाद में की। ये दोनों राज्य लंबे समय तक एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे और इनके मध्य तुंगभद्रा तथा कृष्णा नदियों के क्षेत्र में निरंतर संघर्ष हुआ। विजयनगर एक हिंदू साम्राज्य था, जबकि बहमनी एक मुस्लिम राज्य था।
विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी थी, जो आज कर्नाटक राज्य में स्थित एक विश्व धरोहर स्थल है। इस साम्राज्य का वैभव विरुपाक्ष मंदिर, विट्ठल मंदिर, हज़रा राम मंदिर और लोटस महल जैसे स्मारकों में आज भी देखा जा सकता है। विजयनगर के सबसे महान शासक कृष्णदेवराय (1509–1529) ने साम्राज्य को अपने चरम वैभव पर पहुँचाया। 1565 में तालिकोटा (राक्षसी-तंगड़ी) की लड़ाई में दक्कन सुल्तानों की संयुक्त सेना से पराजय के बाद विजयनगर साम्राज्य का पतन आरंभ हुआ।
रेलवे NTPC परीक्षा में इस अध्याय से विजयनगर के वंश, कृष्णदेवराय की उपलब्धियाँ, हम्पी के स्मारक, बहमनी राज्य की राजधानियाँ और उसके उत्तराधिकारी दक्कन सुल्तानों के नाम पूछे जाते हैं। 1336, 1347, 1509 और 1565 जैसी तिथियाँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। दक्कन के पाँच राज्यों (बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर, बीदर, बरार) की जानकारी इस अध्याय में उच्च अंक दिला सकती है।
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का ने की, जिनके गुरु विद्यारण्य (माधवाचार्य) थे। विजयनगर नाम का अर्थ 'विजय का नगर' है। यह साम्राज्य तुंगभद्रा नदी के दक्षिण तट पर स्थित था और इसकी राजधानी हम्पी थी। विजयनगर साम्राज्य में चार वंशों ने शासन किया:
विजयनगर की सेना में हाथी, घोड़े और पैदल सैनिक शामिल थे। साम्राज्य में भू-राजस्व उपज का एक तिहाई वसूला जाता था। विजयनगर के शासक हिंदू धर्म के अनुयायी थे और मंदिर निर्माण को भरपूर संरक्षण देते थे। हम्पी में विरुपाक्ष मंदिर शिव की उपासना का प्रमुख केंद्र था।
त्वरित तथ्य: विजयनगर के चार वंश क्रमशः संगम, सलुव, तुलुव और अरवीडु हैं। विदेशी यात्री अब्दुर्रज्जाक और डोमिंगो पेस ने विजयनगर का विस्तृत विवरण लिखा।
कृष्णदेवराय (1509–1529) विजयनगर साम्राज्य का सबसे महान शासक था। उसने 1509 में राज्याभिषेक किया और बीजापुर, उड़ीसा (गजपति) तथा अन्य प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध सफल अभियान चलाए। उसने साम्राज्य की सीमाओं का भारी विस्तार किया। वह साहित्य और कला का महान संरक्षक था और उसे 'आंध्र भोज' की उपाधि दी गई। उसने तेलुगु भाषा में 'अमुक्तमाल्यदा' नामक प्रसिद्ध काव्यग्रंथ की रचना की।
त्वरित तथ्य: कृष्णदेवराय की रचना 'अमुक्तमाल्यदा' तेलुगु भाषा में है। हम्पी का विट्ठल मंदिर अपने स्टोन चारियट के लिए विश्वप्रसिद्ध है। तालिकोटा की लड़ाई 1565 में लड़ी गई।
बहमनी राज्य की स्थापना 1347 में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह (हसन गंगू) ने की। प्रारंभ में इसकी राजधानी गुलबर्गा (अहसनाबाद) थी, जिसे बाद में 1422 के आसपास अहमद शाह वली ने बीदर स्थानांतरित कर दिया। बहमनी राज्य के शासक मुस्लिम थे और उन्होंने इस्लामी संस्कृति तथा कला को संरक्षण दिया।
त्वरित तथ्य: बहमनी राज्य की दो राजधानियाँ गुलबर्गा और बीदर थीं। गोलकुंडा किला कुतुब शाही वंश का केंद्र था। दक्कन के पाँच राज्यों में बीजापुर का आदिल शाही वंश सबसे शक्तिशाली बना।
| वंश | काल | प्रमुख शासक |
|---|---|---|
| संगम वंश | 1336–1485 | हरिहर, बुक्का, देवराय द्वितीय |
| सलुव वंश | 1485–1505 | सलुव नरसिंह |
| तुलुव वंश | 1505–1570 | वीरनरसिंह, कृष्णदेवराय |
| अरवीडु वंश | 1570–1646 | रामराय |
| राज्य | वंश |
|---|---|
| बीजापुर | आदिल शाही |
| गोलकुंडा | कुतुब शाही |
| अहमदनगर | निजाम शाही |
| बीदर | बरीद शाही |
| बरार | इमाद शाही |
flowchart TD
A[दक्कन के राज्य] --> B[विजयनगर साम्राज्य 1336]
A --> C[बहमनी राज्य 1347]
B --> B1[संगम वंश]
B --> B2[सलुव वंश]
B --> B3[तुलुव वंश]
B --> B4[अरवीडु वंश]
B3 --> B5[कृष्णदेवराय 1509-1529]
B5 --> B6[अमुक्तमाल्यदा]
B --> B7[तालिकोटा 1565 पराजय]
C --> C1[गुलबर्गा राजधानी]
C --> C2[बीदर राजधानी]
C --> C3[महमूद गवाँ]
C --> D[पाँच राज्यों में विभाजन]
D --> D1[बीजापुर-आदिल शाही]
D --> D2[गोलकुंडा-कुतुब शाही]
D --> D3[अहमदनगर-निजाम शाही]
D --> D4[बीदर-बरीद शाही]
D --> D5[बरार-इमाद शाही]
विजयनगर और बहमनी राज्य दक्कन के इतिहास की दो महान शक्तियाँ थीं। विजयनगर ने हिंदू धर्म, कला और साहित्य को संरक्षण दिया, जिसका शिखर कृष्णदेवराय का काल रहा, जबकि बहमनी राज्य अपनी इस्लामी संस्कृति और प्रशासन के लिए जाना गया। तालिकोटा की लड़ाई (1565) ने दोनों के संघर्ष का अंत कर दक्कन में नया राजनीतिक स्वरूप दिया। RRB NTPC के लिए वंशों का क्रम, तिथियाँ और स्मारकों का मिलान इस अध्याय में पूर्ण अंक दिला सकता है।