विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था)
अध्याय: 15.1 संविधान की विशेषताएँ
विषय-वस्तु: संविधान निर्माण, विशेषताएँ
1. परिचय
भारतीय संविधान देश का सर्वोच्च विधान है, जो 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। यह विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जो नागरिकों के अधिकारों, सरकार के अंगों तथा राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों का व्यापक दस्तावेज़ है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया लगभग तीन वर्षों तक चली, जिसमें प्रारूप समिति ने 114 दिनों तक प्रस्तावना और विभिन्न प्रावधानों पर विचार-विमर्श किया।
संविधान सभा की स्थापना 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत हुई, और इसका प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को प्रारंभ हुआ। सर्वप्रथम 1934 में एम.एन. रॉय ने संविधान सभा का विचार प्रस्तुत किया था। डॉ. भीमराव अंबेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया, और वे संविधान के मुख्य शिल्पकार माने जाते हैं। राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष बने, जबकि 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ऐतिहासिक उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
संविधान में प्रारंभ में 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं, जो संशोधनों के कारण बढ़कर वर्तमान में 12 अनुसूचियों तक पहुँच गई हैं। यह विश्व के विभिन्न देशों से ली गई सर्वोत्तम विशेषताओं का समन्वय है, जिसे 'बगीचे का माली' कहा जाता है। संविधान की विशेषताएँ, निर्माण प्रक्रिया तथा अनुसूचियों से संबंधित प्रश्न RRB NTPC परीक्षा में नियमित रूप से पूछे जाते हैं, अतः इस अध्याय की गहन समझ आवश्यक है।
2. संविधान निर्माण की प्रक्रिया
भारतीय संविधान का निर्माण एक लंबी और व्यवस्थित प्रक्रिया के फलस्वरूप हुआ। इसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:
एम.एन. रॉय (1934): भारतीय कम्युनिस्ट नेता एम.एन. रॉय ने सबसे पहले संविधान सभा के गठन का विचार प्रस्तुत किया।
कैबिनेट मिशन योजना (1946): ब्रिटिश सरकार के इस मिशन के तहत संविधान सभा की रूपरेखा तय की गई।
संविधान सभा का गठन: प्रांतीय विधानसभाओं के अप्रत्यक्ष चुनाव द्वारा सदस्य चुने गए। प्रारंभ में कुल सदस्यों की संख्या 389 थी, जो विभाजन के बाद घटकर 299 रह गई।
प्रथम अधिवेशन: 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई। 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया।
उद्देश्य प्रस्ताव: 13 दिसंबर 1946 को पंडित नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव रखा, जो संविधान की आत्मा माना जाता है।
प्रारूप समिति: 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति बनाई गई, जिसमें 7 सदस्य थे। डॉ. अंबेडकर इसके अध्यक्ष बने। अन्य सदस्यों में एन. गोपालस्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, के.एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, एन. माधव राव तथा टी.टी. कृष्णामचारी शामिल थे।
अंगीकरण और प्रवर्तन: 26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकृत किया गया तथा 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। संविधान निर्माण में कुल 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे तथा लगभग 6.4 करोड़ रुपये व्यय हुए।
त्वरित तथ्य:
1. संविधान सभा की कुल बैठकें 11 हुईं, जिनमें 166 दिनों का समय लगा।
2. प्रस्तावना को अंतिम रूप देने में लगभग 114 दिन लगे।
3. 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
4. संविधान सभा ने 1947 से 1950 तक भारत की अंतरिम संसद के रूप में भी कार्य किया।
5. संविधान की प्रारूप समिति में सर्वाधिक प्रभावशाली सदस्य डॉ. अंबेडकर थे, जिन्हें 'भारतीय संविधान का जनक' कहा जाता है।
3. संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
भारतीय संविधान की विशेषताएँ इसे विश्व के अन्य संविधानों से अलग बनाती हैं। प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान: संविधान में विस्तृत प्रावधान होने के कारण यह सर्वाधिक लंबा लिखित संविधान है।
कठोर एवं लचीला संविधान: कुछ प्रावधान साधारण बहुमत से तथा कुछ विशेष बहुमत से संशोधित होते हैं, अतः यह कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण है।
संसदीय शासन प्रणाली: भारत में ब्रिटिश प्रणाली पर आधारित संसदीय शासन व्यवस्था अपनाई गई है, जिसमें राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख तथा प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालक है।
संघीय व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव: भारत में केन्द्र सशक्त है, अवशिष्ट शक्तियाँ संसद के पास हैं तथा एकीकृत न्यायपालिका है।
मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 12 से 35 तक नागरिकों को छह मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं।
नीति-निदेशक तत्व: अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति-निदेशक तत्व हैं, जो सकारात्मक अधिकार हैं पर न्यायोचित नहीं हैं।
मौलिक कर्तव्य: 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा अनुच्छेद 51क के तहत मौलिक कर्तव्य जोड़े गए।
धर्मनिरपेक्ष राज्य: राज्य किसी विशेष धर्म का समर्थन नहीं करता तथा सभी धर्मों को समान संरक्षण देता है।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: प्रारंभ में 21 वर्ष की मतदान आयु थी, जिसे 61वें संशोधन (1988) द्वारा घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया।
एकल नागरिकता: भारत में केवल एक ही नागरिकता की व्यवस्था है, संघीय नागरिकता का प्रावधान नहीं है।
स्वतंत्र न्यायपालिका: उच्चतम न्यायालय से लेकर निचली अदालतों तक एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका है, जिसे न्यायिक पुनरीक्षण की शक्ति प्राप्त है।
उदाहरण:
1. अमेरिका से मौलिक अधिकार तथा न्यायिक पुनरीक्षण लिया गया।
2. ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता तथा विधि का शासन लिया गया।
3. आयरलैंड से नीति-निदेशक तत्व लिए गए।
4. कनाडा से केन्द्र सशक्त संघ तथा अवशिष्ट शक्तियाँ ली गईं।
5. ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची तथा संयुक्त अधिवेशन की व्यवस्था ली गई।
6. सोवियत संघ (रूस) से मौलिक कर्तव्य तथा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श लिए गए।
7. जर्मनी (वाइमर संविधान) से आपातकाल में मौलिक अधिकारों का निलंबन लिया गया।
8. जापान से 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' की अवधारणा ली गई।
9. दक्षिण अफ्रीका से संविधान संशोधन की प्रक्रिया ली गई।
10. फ्रांस से गणतंत्र तथा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श लिए गए।
4. संविधान की अनुसूचियाँ तथा संशोधन प्रक्रिया
संविधान में संशोधन की प्रक्रिया अनुच्छेद 368 में दी गई है। संशोधन तीन प्रकार से होते हैं: साधारण बहुमत, विशेष बहुमत तथा विशेष बहुमत के साथ राज्यों के अनुमोदन। अनुच्छेद 368 के तहत संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु मूल ढाँचा (बेसिक स्ट्रक्चर) में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने मूल ढाँचा सिद्धांत प्रतिपादित किया।
संविधान में प्रारंभ में 8 अनुसूचियाँ थीं, जो वर्तमान में 12 हो गई हैं। अनुसूचियों का विवरण इस प्रकार है:
प्रथम अनुसूची: राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों का विवरण।
द्वितीय अनुसूची: राष्ट्रपति, राज्यपाल, न्यायाधीश आदि के वेतन और भत्ते।
तृतीय अनुसूची: पदधारियों की शपथ और प्रतिज्ञान।
चतुर्थ अनुसूची: राज्यसभा में सीटों का आवंटन।
पंचम अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन।
षष्ठ अनुसूची: पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
सप्तम अनुसूची: संघ, राज्य तथा समवर्ती सूची का वितरण।
अष्टम अनुसूची: 22 भाषाओं की सूची। सिंधी (1967), कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली (1992), तथा बोड़ो, डोगरी, मैथिली, संथाली (2004) को बाद में जोड़ा गया।
नवम अनुसूची: भूमि सुधार से संबंधित कानूनों की सुरक्षा।
दशम अनुसूची: दल-बदल विरोधी कानून (52वाँ संशोधन, 1985)।
एकादश अनुसूची: पंचायती राज संस्थाएँ (73वाँ संशोधन, 1992)।
द्वादश अनुसूची: नगरपालिकाएँ (74वाँ संशोधन, 1992)।
प्रमुख संशोधन:
1. 42वाँ संशोधन (1976): प्रस्तावना में 'समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता' जोड़ा; मौलिक कर्तव्य जोड़े। इसे 'लघु संविधान' कहा जाता है।
2. 44वाँ संशोधन (1978): आपातकाल के प्रावधानों में संशोधन; सम्पत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटाया गया।
3. 52वाँ संशोधन (1985): दल-बदल विरोधी कानून।
4. 61वाँ संशोधन (1988): मतदान आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष।
5. 73वाँ संशोधन (1992): पंचायती राज व्यवस्था।
6. 74वाँ संशोधन (1992): नगरपालिका व्यवस्था।
7. 101वाँ संशोधन (2016): वस्तु एवं सेवा कर (GST) की शुरुआत।
8. 103वाँ संशोधन (2019): आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण।
9. 105वाँ संशोधन (2021): अनुसूचित जाति व जनजाति की सूची निर्धारण की शक्ति राज्यों को।
10. 106वाँ संशोधन (2023): लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण (33 प्रतिशत)।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: संविधान के प्रमुख तथ्य
विवरण
आँकड़ा / तथ्य
अंगीकरण की तिथि
26 नवंबर 1949
प्रवर्तन की तिथि
26 जनवरी 1950
निर्माण में लगा समय
2 वर्ष 11 माह 18 दिन
संविधान सभा की बैठकें
11 अधिवेशन, 166 दिन
प्रारंभिक अनुच्छेद
395
वर्तमान अनुसूचियाँ
12
प्रस्तावना पर लगा समय
लगभग 114 दिन
निर्माण की लागत
लगभग 6.4 करोड़ रुपये
प्रारूप समिति के अध्यक्ष
डॉ. भीमराव अंबेडकर
संविधान सभा के अध्यक्ष
डॉ. राजेंद्र प्रसाद
तालिका 2: विभिन्न देशों से ली गई विशेषताएँ
देश
ली गई विशेषता
ब्रिटेन
संसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता, विधि का शासन
अमेरिका
मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरीक्षण, राष्ट्रपति का महाभियोग
आयरलैंड
नीति-निदेशक तत्व
कनाडा
केन्द्र सशक्त संघ, अवशिष्ट शक्तियाँ
ऑस्ट्रेलिया
समवर्ती सूची, संयुक्त अधिवेशन
जर्मनी
आपातकाल में अधिकारों का निलंबन
सोवियत संघ (रूस)
मौलिक कर्तव्य
जापान
विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया
दक्षिण अफ्रीका
संविधान संशोधन प्रक्रिया
फ्रांस
गणतंत्र, स्वतंत्रता-समानता-बंधुत्व
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[संविधान की विशेषताएँ] --> B[निर्माण प्रक्रिया]
A --> C[प्रमुख विशेषताएँ]
A --> D[अनुसूचियाँ एवं संशोधन]
B --> B1[कैबिनेट मिशन 1946]
B --> B2[प्रारूप समिति 29 अगस्त 1947]
B --> B3[अंगीकरण 26 नवंबर 1949]
B --> B4[प्रवर्तन 26 जनवरी 1950]
C --> C1[सबसे लंबा लिखित संविधान]
C --> C2[संसदीय शासन प्रणाली]
C --> C3[संघीय व्यवस्था]
C --> C4[धर्मनिरपेक्ष राज्य]
D --> D1[12 अनुसूचियाँ]
D --> D2[अनुच्छेद 368]
D --> D3[मूल ढाँचा सिद्धांत]
D --> D4[42वाँ संशोधन लघु संविधान]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
कई विद्यार्थी 'संविधान दिवस' (26 नवंबर) और 'गणतंत्र दिवस' (26 जनवरी) में भ्रमित हो जाते हैं; 26 नवंबर को अंगीकरण और 26 जनवरी को प्रवर्तन हुआ था।
मतदान आयु 21 वर्ष से 18 वर्ष करने वाले संशोधन को 42वाँ नहीं बल्कि 61वाँ संशोधन (1988) माना जाता है।
डॉ. अंबेडकर 'प्रारूप समिति के अध्यक्ष' थे, जबकि 'संविधान सभा के अध्यक्ष' डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे; इन दोनों पदों में भ्रम अक्सर होता है।
संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को हुआ था, न कि 26 जनवरी 1950 को।
'उद्देश्य प्रस्ताव' 13 दिसंबर 1946 को पंडित नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया था, इसे अंबेडकर से न जोड़ें।
मौलिक कर्तव्य 42वें संशोधन से जोड़े गए, मूल संविधान में नहीं थे; अनेक विद्यार्थी इसे मूल प्रावधान मान लेते हैं।
नवम अनुसूची भूमि सुधार कानूनों से संबंधित है, इसे दशम अनुसूची (दल-बदल) के साथ भ्रमित न करें।
संविधान 'पूर्णतया लचीला' नहीं बल्कि कठोर एवं लचीला दोनों है।
सप्तम अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं, अष्टम अनुसूची में 22 भाषाएँ; दोनों अनुसूचियों में भ्रम होना सामान्य है।
संविधान की प्रस्तावना में 42वें संशोधन से 'समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता' जोड़े गए, मूल प्रस्तावना में 'संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य' था।
9. परीक्षा युक्तियाँ
संविधान निर्माण की तिथियों (9 दिसंबर 1946, 26 नवंबर 1949, 26 जनवरी 1950) की एक सूची बनाकर रटें।
अनुसूचियों को याद रखने हेतु 'राज्य-शपथ-वेतन, सीट-क्षेत्र-भाषा, सूची-कानून-पंचायत-नगरपालिका' जैसे मैनेमोनिक का उपयोग करें।
देशों से ली गई विशेषताओं पर प्रश्न बहुत पूछे जाते हैं; ब्रिटेन, अमेरिका, आयरलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और सोवियत संघ पर विशेष ध्यान दें।
संशोधनों की सूची को वर्षवार याद करें; 42वाँ, 44वाँ, 52वाँ, 61वाँ, 73वाँ, 74वाँ, 101वाँ और 106वाँ संशोधन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
'प्रस्तावना पर 114 दिन' और 'निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन' जैसे संख्यात्मक तथ्य रट लें।
प्रारूप समिति के सदस्यों के नाम पढ़ें; प्रश्न में किसी गैर-सदस्य का नाम दिया जा सकता है।
केशवानंद भारती वाद (1973) को मूल ढाँचा सिद्धांत से जोड़ें।
अष्टम अनुसूची में भाषाएँ जोड़ने वाले संशोधनों (1967, 1992, 2004) को अलग-अलग याद करें।
रेलवे परीक्षा में तथ्यात्मक प्रश्न अधिक आते हैं, अतः तिथि-घटना-व्यक्ति के जोड़े बनाएं।
मॉक टेस्ट में गलत हुए तथ्यों की अलग नोटबुक बनाकर नियमित रूप से पुनरावृत्ति करें।
10. निष्कर्ष
भारतीय संविधान विश्व के सभी प्रमुख संविधानों के सर्वोत्तम तत्वों का समन्वय है, जो देश की विविधता में एकता स्थापित करता है। इसकी लंबाई, अनुसूचियाँ, संशोधन प्रक्रिया और उधार ली गई विशेषताएँ रेलवे NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संविधान निर्माण की तिथियों, प्रारूप समिति, अनुसूचियों तथा प्रमुख संशोधनों की सटीक पुनरावृत्ति से इस अध्याय के प्रश्न आसानी से हल हो सकते हैं।