विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था) अध्याय: 15.4 मौलिक कर्तव्य और नीति निदेशक तत्व विषय-वस्तु: अनुच्छेद 36-51, 51A
नीति-निदेशक तत्व संविधान के भाग 4 (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित हैं। ये राज्य को शासन के लिए दिए गए निर्देश हैं, जिनका पालन करना राज्य का कर्तव्य है, परंतु ये न्यायालय द्वारा लागू करने योग्य नहीं हैं। इन तत्वों को आयरलैंड के संविधान से लिया गया है। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये तत्व न्यायोचित नहीं हैं, किंतु देश के शासन में इनका अनुप्रयोग मौलिक है। ये तत्व 'कल्याणकारी राज्य' की स्थापना का आधार हैं।
मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51क में वर्णित हैं, जिन्हें 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया। स्वरण सिंह समिति की सिफारिश पर इन कर्तव्यों को संविधान में शामिल किया गया। प्रारंभ में 10 कर्तव्य थे, जिनमें 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा 11वाँ कर्तव्य जोड़ा गया। मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा सोवियत संघ (रूस) के संविधान से प्रेरित है। ये कर्तव्य न्यायालय द्वारा लागू नहीं होते, परंतु ये नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग करते हैं।
रेलवे NTPC परीक्षा में नीति-निदेशक तत्वों के वर्गीकरण, प्रमुख अनुच्छेदों के विषय, मौलिक कर्तव्यों की संख्या, उन्हें जोड़ने वाले संशोधन तथा अधिकारों-कर्तव्यों के संबंध पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय को समझते समय अनुच्छेदों का क्रम और उनके विषय एक साथ याद रखना आवश्यक है। नीति-निदेशक तत्व तथा मौलिक अधिकारों के मध्य संबंध को भी स्पष्ट रूप से समझना चाहिए।
नीति-निदेशक तत्वों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है: समाजवादी, गांधीवादी तथा उदारवादी-बौद्धिक। समाजवादी तत्व कल्याण और समानता पर बल देते हैं; गांधीवादी तत्व ग्रामीण विकास, कुटीर उद्योग तथा ग्राम पंचायतों से संबंधित हैं; उदारवादी-बौद्धिक तत्व आधुनिक शासन के सिद्धांतों से जुड़े हैं।
त्वरित तथ्य: 1. नीति-निदेशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं। 2. अनुच्छेद 37 के अनुसार ये न्यायोचित नहीं हैं, परंतु शासन में मौलिक हैं। 3. 42वाँ संशोधन ने अनुच्छेद 39क, 43क और 48क जोड़े। 4. 97वाँ संशोधन (2011) ने अनुच्छेद 43ख जोड़ा। 5. 86वाँ संशोधन (2002) ने अनुच्छेद 45 में बाल्यावस्था देखभाल का प्रावधान किया।
मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा भाग 4क में अनुच्छेद 51क के रूप में जोड़ा गया। स्वरण सिंह समिति की सिफारिश पर ये कर्तव्य जोड़े गए। प्रारंभ में 10 कर्तव्य थे; 86वें संशोधन (2002) द्वारा 11वाँ कर्तव्य जोड़ा गया। मौलिक कर्तव्य भारत के प्रत्येक नागरिक पर लागू होते हैं। ये निम्नलिखित हैं:
त्वरित तथ्य: 1. मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा सोवियत संघ से ली गई है। 2. इन्हें 42वाँ संशोधन द्वारा जोड़ा गया तथा 11वाँ कर्तव्य 86वें संशोधन द्वारा। 3. मौलिक कर्तव्य केवल नागरिकों पर लागू होते हैं। 4. मौलिक कर्तव्य न्यायालय द्वारा लागू करने योग्य नहीं हैं। 5. स्वरण सिंह समिति ने 1976 में इनकी सिफारिश की थी।
मौलिक अधिकार, नीति-निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य संविधान की त्रिवेणी माने जाते हैं। मौलिक अधिकार (भाग 3) ऋणात्मक दायित्व हैं, जो राज्य को कुछ करने से रोकते हैं; नीति-निदेशक तत्व (भाग 4) धनात्मक निर्देश हैं, जो राज्य को कल्याणकारी कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं; तथा मौलिक कर्तव्य (भाग 4क) नागरिकों को उनके दायित्वों का स्मरण कराते हैं।
अंतर: - मौलिक अधिकार न्यायोचित हैं, जबकि नीति-निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य गैर-न्यायोचित हैं। - मौलिक अधिकार व्यक्ति को राज्य से संरक्षण देते हैं; निदेशक तत्व राज्य को कार्य करने का निर्देश देते हैं। - मौलिक अधिकार भाग 3 में तथा निदेशक तत्व भाग 4 में हैं। - मौलिक कर्तव्य भाग 4क (अनुच्छेद 51क) में हैं। - मौलिक अधिकार और कर्तव्य केवल नागरिकों या सभी व्यक्तियों पर लागू हो सकते हैं, जबकि निदेशक तत्व राज्य को लक्ष्य करते हैं।
संघर्ष और समाधान: 1. चंपकम दोराईराजन वाद (1951) में न्यायालय ने कहा कि अधिकार प्रधान हैं। 2. गोलकनाथ वाद (1967) में अधिकारों को प्रधान माना गया। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में दोनों के बीच सामंजस्य का प्रयास किया गया। 4. मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में कहा गया कि अधिकारों और निदेशक तत्वों में सामंजस्य होना चाहिए; दोनों में एक-दूसरे को मजबूत करने का संबंध है। 5. वर्तमान में यह मान्यता है कि निदेशक तत्व मौलिक अधिकारों की पूर्ति में सहायक हैं तथा अनुच्छेद 14, 19, 21 की व्याख्या में इनका उपयोग होता है।
उदाहरण: 1. न्यायिक फैसलों में अनुच्छेद 21 के साथ अनुच्छेद 39क (निःशुल्क विधिक सहायता) का उपयोग हुआ। 2. पर्यावरण संरक्षण (अनुच्छेद 48क) को अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार से जोड़ा गया है। 3. समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44) पर समय-समय पर चर्चा होती रहती है। 4. ग्राम पंचायतों का संविधानिक आधार अनुच्छेद 40 है, जिसे 73वें संशोधन द्वारा मजबूत किया गया। 5. 6-14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा अनुच्छेद 21क (अधिकार) और 51क(क) (कर्तव्य) दोनों से जुड़ी है।
| श्रेणी | अनुच्छेद |
|---|---|
| समाजवादी | 38, 39, 39क, 41, 42, 43, 43क |
| गांधीवादी | 40, 43, 43ख, 46, 47, 48 |
| उदारवादी-बौद्धिक | 44, 45, 48, 48क, 49, 50, 51 |
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 40 | ग्राम पंचायतों का गठन |
| 44 | समान नागरिक संहिता |
| 45 | बाल्यावस्था देखभाल |
| 48क | पर्यावरण संरक्षण |
| 49 | स्मारकों का संरक्षण |
| 50 | न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण |
| 51 | अंतर्राष्ट्रीय शांति |
| 51क | मौलिक कर्तव्य (11) |
flowchart TD
A[नीति निदेशक तत्व 36-51] --> B[समाजवादी]
A --> C[गांधीवादी]
A --> D[उदारवादी]
A --> E[मौलिक कर्तव्य 51क]
B --> B1[समान वेतन 39क]
B --> B2[निःशुल्क विधिक सहायता 39क]
C --> C1[ग्राम पंचायत 40]
C --> C2[कुटीर उद्योग 43]
D --> D1[समान नागरिक संहिता 44]
D --> D2[पर्यावरण 48क]
E --> E1[42वाँ संशोधन 1976]
E --> E2[86वाँ संशोधन 2002]
नीति-निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36-51) राज्य को कल्याणकारी शासन के लिए दिशा देते हैं, जबकि मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51क) नागरिकों को अपने दायित्वों के प्रति सजग करते हैं। इन दोनों प्रावधानों का अनुच्छेद क्रम, वर्गीकरण और जोड़े गए संशोधनों की सटीक समझ रेलवे NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन पर आधारित प्रश्न प्रतिवर्ष परीक्षा में पूछे जाते हैं।