विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था) अध्याय: 15.9 निर्वाचन आयोग और चुनाव व्यवस्था विषय-वस्तु: अनुच्छेद 324, चुनाव
भारतीय निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, जिसका प्रावधान अनुच्छेद 324 में है। यह संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करता है। निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, तथा उसका निष्कासन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से होता है। यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था है, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु का प्रत्येक नागरिक मतदान कर सकता है (अनुच्छेद 326)। मतदान की आयु मूल संविधान में 21 वर्ष थी, जिसे 61वें संशोधन (1988) द्वारा 18 वर्ष कर दिया गया। एक व्यक्ति एक मत तथा एक वोट का सिद्धांत लागू है। धर्म, जाति, लिंग के आधार पर किसी को भी मतदान से वंचित नहीं किया जा सकता (अनुच्छेद 325)। चुनाव संबंधी विवादों का निर्णय चुनाव याचिकाओं के माध्यम से होता है।
रेलवे NTPC परीक्षा में निर्वाचन आयोग की संरचना, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति और निष्कासन, राज्य निर्वाचन आयोग, चुनाव की प्रक्रिया, EVM और VVPAT, मॉडल आचार संहिता तथा विभिन्न चुनाव सुधारों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय में अनुच्छेद 324 की भूमिका तथा निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को समझना आवश्यक है। प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा प्रथम चुनावों के तथ्य भी महत्वपूर्ण हैं।
संरचना (अनुच्छेद 324): - निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं। - प्रारंभ में आयोग एक सदस्यीय था; 1993 से यह बहुसदस्यीय है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ दो अन्य आयुक्त शामिल हैं। - मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। - मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा शर्तें संसद द्वारा निर्धारित होती हैं। - मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो। - मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुपस्थिति में वरिष्ठतम आयुक्त अध्यक्षता करता है।
निष्कासन: - मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, अर्थात प्रत्येक सदन में कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित-मतदान सदस्यों के 2/3 बहुमत से। - अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर हटाया जा सकता है।
कार्य और शक्तियाँ: 1. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों की अधिसूचना जारी करना। 2. मतदाता सूचियों का संशोधन और निरीक्षण। 3. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति। 4. मतदान केंद्रों की स्थापना और EVM की व्यवस्था। 5. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव का संचालन। 6. राज्यसभा और विधान परिषदों के सदस्यों के चुनाव का संचालन। 7. मॉडल आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करना। 8. चुनाव परिणामों की घोषणा और निर्वाचित सदस्यों को प्रमाण पत्र देना। 9. चुनावी कदाचार और भ्रष्टाचार की जाँच के संबंध में सलाह देना। 10. राजनीतिक दलों को मान्यता देना तथा चुनाव चिह्न आवंटित करना।
त्वरित तथ्य: 1. निर्वाचन आयोग का गठन 25 जनवरी 1950 को हुआ; इस दिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। 2. प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन थे। 3. प्रथम सामान्य चुनाव 1951-52 में हुआ। 4. 1993 से आयोग बहुसदस्यीय है। 5. मुख्य निर्वाचन आयुक्त का निष्कासन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
भारत में विभिन्न स्तरों के चुनाव विभिन्न विधियों से होते हैं। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव प्रत्यक्ष होते हैं, जिसमें नागरिक सीधे अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। राज्यसभा और विधान परिषदों के सदस्यों का चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से अप्रत्यक्ष रूप से होता है। राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जबकि उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्य करते हैं।
मतदान प्रणाली: 1. प्रत्यक्ष चुनाव: लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकायों के लिए। 2. अप्रत्यक्ष चुनाव: राज्यसभा, विधान परिषद, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के लिए। 3. एकल संक्रमणीय मत प्रणाली: राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनाव में। 4. सापेक्ष बहुमत प्रणाली: लोकसभा और विधानसभा चुनावों में।
EVM और VVPAT: - ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का प्रथम प्रयोग 1982 में केरल में हुआ। - वीवीपैट (वोटर वेरिफाइबल पेपर ऑडिट ट्रेल) से मतदाता अपने मत की पुष्टि कर सकता है। - वीवीपैट मशीनें 2013 से प्रायोगिक रूप से उपयोग में आईं तथा 2017 के विधानसभा चुनावों से व्यापक रूप से प्रयोग हुईं। - EVM में अधिकतम 2000 मत दर्ज हो सकते हैं। - मतदान के दौरान कमीशनिंग कार्य चुनाव आयोग करता है।
मॉडल आचार संहिता: - यह एक दस्तावेज है जो चुनाव घोषणा से लेकर परिणाम तक राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के आचरण को नियंत्रित करता है। - इसे पहली बार 1960 के केरल चुनाव में लागू किया गया। - यह कानूनी दस्तावेज नहीं है, परंतु चुनाव आयोग इसे लागू करता है। - चुनाव की घोषणा से ही आचार संहिता लागू हो जाती है।
चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य: 1. मतदाता सूची तैयार करने का आधार अनुच्छेद 326 है। 2. एक व्यक्ति एक मत और एक मूल्य का सिद्धांत लागू है। 3. चुनाव चिह्न राजनीतिक दलों को निर्वाचन आयोग आवंटित करता है। 4. मतदान केंद्र पर अधिकतम 1500 मतदाता हो सकते हैं। 5. चुनाव याचिकाएँ उच्च न्यायालय में दायर की जाती हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग: - राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243क) पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का संचालन करता है। - नगरपालिकाओं के चुनाव का संचालन राज्य निर्वाचन आयोग करता है (अनुच्छेद 243ज्ञा)। - राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है। - राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं कराता।
मुख्य चुनाव सुधार: 1. 61वाँ संशोधन (1988): मतदान आयु 21 से 18 वर्ष। 2. 52वाँ संशोधन (1985): दल-बदल विरोधी कानून। 3. 91वाँ संशोधन (2003): मंत्रिपरिषद के आकार की सीमा तथा दल-बदल में कठोरता। 4. 104वाँ संशोधन (2019): एंग्लो-इंडियन आरक्षण समाप्त। 5. वीवीपैट का प्रयोग: मतदान की पारदर्शिता। 6. NOTA की शुरुआत: 2013 में, मतदाता 'उपरोक्त में से कोई नहीं' का विकल्प चुन सकता है। 7. ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण की सुविधा। 8. चुनाव आयोग द्वारा पर्यवेक्षकों की नियुक्ति। 9. राजनीतिक दलों की मान्यता की प्रक्रिया। 10. सीसीटीवी निगरानी और एप द्वारा मतदान सुविधा।
दल-बदल विरोधी कानून: - 52वें संशोधन (1985) द्वारा दशम अनुसूची जोड़ी गई। - इसका उद्देश्य सदस्यों के दल-बदल को रोकना है। - निर्णय की शक्ति अध्यक्ष या सभापति के पास होती है। - दल-बदल के आधार पर सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
त्वरित तथ्य: 1. राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी को मनाया जाता है। 2. राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है। 3. NOTA 2013 में शुरू किया गया। 4. प्रथम चुनाव 1951-52 में हुआ, जिसमें लगभग 17.32 करोड़ मतदाता थे। 5. EVM का प्रथम प्रयोग 1982 में केरल में हुआ।
| चुनाव | विधि | संचालन |
|---|---|---|
| लोकसभा | प्रत्यक्ष | निर्वाचन आयोग |
| राज्यसभा | अप्रत्यक्ष (STV) | निर्वाचन आयोग |
| विधानसभा | प्रत्यक्ष | निर्वाचन आयोग |
| पंचायत | प्रत्यक्ष | राज्य निर्वाचन आयोग |
| राष्ट्रपति | निर्वाचक मंडल | निर्वाचन आयोग |
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| अनुच्छेद 324 | निर्वाचन आयोग |
| अनुच्छेद 326 | वयस्क मताधिकार |
| मतदान आयु | 18 वर्ष (61वाँ संशोधन) |
| प्रथम चुनाव | 1951-52 |
| प्रथम मुख्य आयुक्त | सुकुमार सेन |
| राष्ट्रीय मतदाता दिवस | 25 जनवरी |
flowchart TD
A[निर्वाचन आयोग 324] --> B[संरचना]
A --> C[कार्य]
A --> D[चुनाव प्रक्रिया]
A --> E[सुधार]
B --> B1[मुख्य आयुक्त]
B --> B2[दो आयुक्त]
C --> C1[चुनाव संचालन]
C --> C2[मतदाता सूची]
D --> D1[प्रत्यक्ष]
D --> D2[अप्रत्यक्ष]
E --> E1[61वाँ संशोधन]
E --> E2[दल-बदल कानून]
E --> E3[NOTA, VVPAT]
भारतीय निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324) स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का संवैधानिक संरक्षक है, जो लोकतंत्र की आधारशिला को मजबूत करता है। इसकी संरचना, नियुक्ति, निष्कासन प्रक्रिया, चुनाव के प्रकार, मतदान प्रणाली तथा चुनाव सुधारों की सटीक समझ रेलवे NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य निर्वाचन आयोग और दल-बदल विरोधी कानून जैसे प्रावधानों को भी स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है, क्योंकि इन पर आधारित प्रश्न परीक्षा में नियमित रूप से पूछे जाते हैं।