17.8 आवर्त सारणी Notes

17.8 आवर्त सारणी

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (रसायन विज्ञान) अध्याय: 17.8 आवर्त सारणी विषय-वस्तु: आवर्त सारणी, गुण

1. परिचय

तत्वों की संख्या अधिक होने के कारण वैज्ञानिकों को उन्हें एक व्यवस्थित रूप में क्रमबद्ध करने की आवश्यकता महसूस हुई। जब कोई ज्ञात तत्वों को इस प्रकार व्यवस्थित करने की कोशिश की जाती है कि समान गुणों वाले तत्व एक स्थान पर आ जाएँ, तो उसे तत्वों का वर्गीकरण कहते हैं। वर्गीकरण का सबसे सफल रूप आवर्त सारणी है। आवर्त सारणी का विकास क्रम से हुआ—प्रारंभ में लैवॉज़िए ने तत्वों को धातु और अधातु में बाँटा; 1817 में डॉबेराइनर ने त्रिक का नियम (Triads) दिया; 1864 में न्यूलैंड्स ने अष्टक का नियम (Octaves) दिया; 1869 में मेंडलीव ने अपनी आवर्त सारणी प्रस्तुत की।

मेंडलीव की आवर्त सारणी को आधुनिक आवर्त सारणी का आधार कहा जाता है। मेंडलीव ने तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आधार पर व्यवस्थित किया और कहा कि तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन हैं। उन्होंने अनेक तत्वों के गुणों की भविष्यवाणी की—जैसे 'एका-सिलिकॉन' को बाद में जर्मेनियम, 'एका-एल्युमिनियम' को गैलियम और 'एका-बोरॉन' को स्कैंडियम कहा गया। मेंडलीव की सारणी में कुछ दोष भी थे, जैसे समस्थानिकों का स्थान निर्धारण असंभव होना और कुछ स्थानों पर द्रव्यमान के क्रम का उल्लंघन।

आधुनिक आवर्त सारणी का आधार मोसले का आवर्त नियम है, जिसके अनुसार तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन हैं। आधुनिक आवर्त सारणी को लंबा रूप या बोर-ब्यूरी आवर्त सारणी कहते हैं। NTPC परीक्षा में आवर्त सारणी की संरचना, समूह-आवर्त, धातु-अधातु की स्थिति तथा आवर्ती गुणों (परमाणु त्रिज्या, आयनन विभव, विद्युत ऋणात्मकता) के क्रम से प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

2. मेंडलीव की आवर्त सारणी से आधुनिक आवर्त सारणी तक

मेंडलीव की आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया गया और समान गुणों वाले तत्व एक ही वर्ग (ग्रुप) में रखे गए। इसके प्रमुख लाभ—अज्ञात तत्वों की भविष्यवाणी, तत्वों के गुणों का सुधार (जैसे इंडियम और सीरियम के गुणों का सही मान) तथा समान गुणों वाले तत्वों का एकत्रीकरण। परंतु इसके दोष—समस्थानिकों के लिए कोई स्थान नहीं, कुछ स्थानों पर द्रव्यमान क्रम टूटना (जैसे कोबाल्ट-निकल, टेल्यूरियम-आयोडीन), तथा हाइड्रोजन का स्थान विवादास्पद होना।

आधुनिक आवर्त नियम (मोसले, 1913): तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं। इस नियम ने मेंडलीव की सारणी के दोषों को दूर कर दिया। आधुनिक आवर्त सारणी में:

कार्य उदाहरण: कार्बन आवर्त सारणी के किस समूह और आवर्त में है?

हल—कार्बन (परमाणु क्रमांक 6) का इलेक्ट्रॉन विन्यास 2, 4 है। बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन के कारण यह समूह 14 में और 2 कोश होने के कारण द्वितीय आवर्त में स्थित है।

3. समूह और आवर्त की संरचना

आवर्त सारणी में ऊर्ध्वाधर स्तंभों को समूह और क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहते हैं।

मुख्य समूहों की पहचान—समूह 1: क्षार धातु (Li, Na, K, Rb, Cs, Fr); समूह 2: क्षारीय मृदा धातु (Be, Mg, Ca, Sr, Ba, Ra); समूह 17: हैलोजन (F, Cl, Br, I, At); समूह 18: उत्कृष्ट गैस (He, Ne, Ar, Kr, Xe, Rn); समूह 13: बोरॉन परिवार; समूह 14: कार्बन परिवार; समूह 15: नाइट्रोजन परिवार; समूह 16: ऑक्सीजन परिवार (चाल्कोजन)।

कार्य उदाहरण: क्षार धातुओं के समूह में नीचे की ओर जाने पर सक्रियता क्यों बढ़ती है?

हल—समूह में नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होता है, अतः उसे त्यागना सरल होता है। इसी कारण K, Na से अधिक सक्रिय है।

4. आवर्ती गुण (Periodic Properties)

आवर्ती गुण वे गुण हैं जो आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर और समूह में ऊपर से नीचे जाने पर एक नियमित प्रवृत्ति दर्शाते हैं। प्रमुख आवर्ती गुण निम्न हैं:

कार्य उदाहरण: Na, Mg, Al, Si, P, Cl में से सबसे अधिक और सबसे कम विद्युत ऋणात्मक तत्व कौन है?

हल—ये तत्व तृतीय आवर्त में हैं, जिनमें विद्युत ऋणात्मकता बाएँ से दाएँ बढ़ती है। अतः सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक क्लोरीन (Cl) और सबसे कम सोडियम (Na) है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

गुण आवर्त में बाएँ → दाएँ समूह में ऊपर → नीचे
परमाणु त्रिज्या घटती है बढ़ती है
आयनन विभव बढ़ता है घटता है
इलेक्ट्रॉन बंधुता बढ़ती है घटती है
विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है घटती है
धात्विक गुण घटते हैं बढ़ते हैं
अधात्विक गुण बढ़ते हैं घटते हैं

तालिका 2

समूह नाम तत्व
1 क्षार धातु Li, Na, K, Rb, Cs, Fr
2 क्षारीय मृदा धातु Be, Mg, Ca, Sr, Ba, Ra
17 हैलोजन F, Cl, Br, I, At
18 उत्कृष्ट गैस He, Ne, Ar, Kr, Xe, Rn
3-12 संक्रमण धातु (d-ब्लॉक) Fe, Cu, Zn, Ni, Cr

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[आवर्त सारणी] --> B[विकास क्रम]
    B --> B1[डॉबेराइनर त्रिक]
    B --> B2[न्यूलैंड्स अष्टक]
    B --> B3[मेंडलीव परमाणु द्रव्यमान]
    B --> B4[मोसले परमाणु क्रमांक]
    A --> C[संरचना]
    C --> C1[18 समूह 7 आवर्त]
    C --> C2[s p d f ब्लॉक]
    A --> D[प्रमुख समूह]
    D --> D1[क्षार धातु समूह 1]
    D --> D2[हैलोजन समूह 17]
    D --> D3[उत्कृष्ट गैस समूह 18]
    A --> E[आवर्ती गुण]
    E --> E1[परमाणु त्रिज्या]
    E --> E2[आयनन विभव]
    E --> E3[इलेक्ट्रॉन बंधुता]
    E --> E4[विद्युत ऋणात्मकता]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आवर्त सारणी का सरल स्वरूप s-ब्लॉक क्षार धातु p-ब्लॉक अधातु d-ब्लॉक धातुएँ बाएँ और मध्य में अधातुएँ दाएँ ऊपर f-ब्लॉक सीढ़ी रेखा सीढ़ी के दोनों ओर उपधातुएँ सिलिकॉन जर्मेनियम आर्सेनिक मुख्य नियम समूह में नीचे धात्विक गुण बढ़ते हैं, आवर्त में दाएँ घटते हैं स्वर्ण नियम समूह 1 क्षार धातु, समूह 17 हैलोजन, समूह 18 उत्कृष्ट गैस।

आवर्ती गुणों की प्रवृत्ति परमाणु त्रिज्या आवर्त में घटती है समूह में बढ़ती है आयनन विभव आवर्त में बढ़ता है समूह में घटता है विद्युत ऋणात्मकता फ्लोरीन सबसे अधिक सीज़ियम सबसे कम इलेक्ट्रॉन बंधुता क्लोरीन की सबसे अधिक होती है ऑक्सीजन और सल्फर ऑक्सीजन परिवार समूह 16 में हैं स्वर्ण नियम सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक फ्लोरीन और सबसे अधिक बंधुता वाला क्लोरीन।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: आधुनिक आवर्त सारणी का आधार परमाणु द्रव्यमान मान लेना। आधुनिक सारणी का आधार परमाणु क्रमांक (मोसले का नियम) है, परमाणु द्रव्यमान मेंडलीव की सारणी का आधार था।
  2. गलती: समूह और आवर्त को उलट लेना। समूह ऊर्ध्वाधर स्तंभ हैं (18), आवर्त क्षैतिज पंक्तियाँ हैं (7)।
  3. गलती: परमाणु त्रिज्या का क्रम गलत याद करना। आवर्त में बाएँ से दाएँ घटती है, समूह में नीचे बढ़ती है।
  4. गलती: फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता सबसे अधिक बताना। सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन बंधुता क्लोरीन की होती है; सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मकता फ्लोरीन की।
  5. गलती: हैलोजन को समूह 16 और उत्कृष्ट गैस को समूह 1 बताना। हैलोजन समूह 17, उत्कृष्ट गैस समूह 18 में हैं।
  6. गलती: क्षार धातुओं की सक्रियता समूह में ऊपर की ओर बढ़ना बताना। सक्रियता नीचे की ओर बढ़ती है क्योंकि परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रमुख समूहों की पहचान रटें—समूह 1 क्षार धातु, समूह 2 क्षारीय मृदा, समूह 17 हैलोजन, समूह 18 उत्कृष्ट गैस, समूह 3-12 संक्रमण धातु।
  2. आवर्ती गुणों की दिशा याद करने के लिए एक पंक्ति लिखें—आवर्त में दाएँ: त्रिज्या घटती, आयनन विभव व ऋणात्मकता बढ़ती।
  3. विकास क्रम याद रखें—डॉबेराइनर (त्रिक) → न्यूलैंड्स (अष्टक) → मेंडलीव (द्रव्यमान) → मोसले (क्रमांक)।
  4. मेंडलीव की भविष्यवाणियाँ (एका-सिलिकॉन = जर्मेनियम, एका-एल्युमिनियम = गैलियम) प्रश्न में आती हैं।
  5. फ्लोरीन (ऋणात्मकता), क्लोरीन (बंधुता), सीज़ियम (सबसे बड़ी त्रिज्या) जैसे चरम मान स्मरण रखें।
  6. तत्व का समूह-आवर्त ज्ञात करने के लिए इलेक्ट्रॉन वितरण लिखें—कोशों की संख्या आवर्त और बाहरी इलेक्ट्रॉन समूह निर्धारित करते हैं।

10. निष्कर्ष

आवर्त सारणी रसायन विज्ञान का मानचित्र है, जिसमें 118 तत्वों को व्यवस्थित कर उनके गुणों की भविष्यवाणी करना संभव हुआ है। मेंडलीव से मोसले तक के विकास, 18 समूह-7 आवर्त की संरचना, s-p-d-f ब्लॉकों का विभाजन तथा परमाणु त्रिज्या, आयनन विभव, इलेक्ट्रॉन बंधुता और विद्युत ऋणात्मकता की प्रवृत्तियाँ NTPC परीक्षा का अभिन्न अंग हैं। समूह-आवर्त का सही ज्ञान धातु-अधातु, वैलेंसी और रासायनिक अभिक्रियाओं के अध्यायों को भी मजबूत करता है। नियमित पुनरावृत्ति, स्मृति-सूत्र और पिछले वर्षों के प्रश्नों के अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण अंक आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।