विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था) अध्याय: 15.10 संवैधानिक और गैर-संवैधानिक निकाय विषय-वस्तु: आयोग, संस्थाएँ
भारतीय शासन व्यवस्था में अनेक संवैधानिक और गैर-संवैधानिक निकाय कार्यरत हैं। संवैधानिक निकाय वे हैं जिनकी स्थापना संविधान के किसी अनुच्छेद के तहत होती है, जैसे निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324), संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315), वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (अनुच्छेद 148)। इन निकायों की स्थापना, कार्य और निष्कासन की प्रक्रिया संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित है, जिससे इनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
गैर-संवैधानिक निकाय वे हैं जो संसद द्वारा बनाए गए कानूनों या कार्यपालिका के आदेशों के तहत स्थापित होते हैं, जैसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (1993), केंद्रीय सतर्कता आयोग (2003), NITI आयोग (2015) तथा सूचना आयोग (RTI अधिनियम 2005)। कुछ निकाय विधिक (स्टैच्यूटरी) होते हैं जो कानून से बनते हैं, जबकि कुछ कार्यपालक आदेश से बनते हैं। रेलवे परीक्षा में यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि कौन-सा निकाय संवैधानिक है और कौन-सा गैर-संवैधानिक।
रेलवे NTPC परीक्षा में निकायों की स्थापना, उनके अध्यक्ष, नियुक्ति प्रक्रिया, निष्कासन तथा उनके कार्यों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस अध्याय में सभी प्रमुख आयोगों की तुलनात्मक तालिका बनाना अत्यंत लाभदायक होता है। योजना आयोग का स्थान लेने वाले NITI आयोग जैसे निकायों के स्थापना वर्ष और कानूनी आधार को याद रखना विशेष रूप से आवश्यक है।
संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315-323): - इसका गठन अनुच्छेद 315 के तहत होता है। - अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। - सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। - निष्कासन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से होता है। - इसका कार्य भर्ती परीक्षाओं का आयोजन तथा पदोन्नति और अनुशासन के मामलों में परामर्श देना है। - राज्य लोक सेवा आयोग का प्रावधान अनुच्छेद 315 में ही है।
वित्त आयोग (अनुच्छेद 280): - राष्ट्रपति प्रत्येक पाँच वर्ष में वित्त आयोग का गठन करता है। - यह केंद्र और राज्यों के बीच करों के वितरण की सिफारिश करता है। - आयोग की सिफारिशें संसद के समक्ष रखी जाती हैं। - वित्त आयोग का अध्यक्ष निर्धारित करता है कि केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों का बँटवारा कैसे हो।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG, अनुच्छेद 148): - CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। - उसका निष्कासन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से होता है। - वह भारत की संचित निधि के सभी व्ययों का लेखा परीक्षण करता है। - उसे 'सार्वजनिक वित्त का संरक्षक' कहा जाता है। - वह लोक लेखा समिति की सहायता करता है। - उसका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
महान्यायवादी (अनुच्छेद 76): - भारत का महान्यायवादी राष्ट्रपति नियुक्त करता है। - वह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखने वाला व्यक्ति होता है। - वह भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। - वह संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं होता। - उसकी नियुक्ति की अवधि राष्ट्रपति की प्रसन्नता पर निर्भर है।
अन्य संवैधानिक निकाय: 1. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338)। 2. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (अनुच्छेद 338क)। 3. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (अनुच्छेद 338ख, 102वाँ संशोधन 2018)। 4. भाषायी अल्पसंख्यक आयुक्त (अनुच्छेद 350ख)। 5. जीएसटी परिषद (अनुच्छेद 279क, 101वाँ संशोधन 2016)। 6. राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243क)। 7. पंचायती राज तथा नगरपालिका संस्थाएँ (भाग 9 और 9क)।
त्वरित तथ्य: 1. CAG का निष्कासन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है। 2. वित्त आयोग प्रत्येक 5 वर्ष में गठित होता है। 3. UPSC सदस्यों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है। 4. GST परिषद संवैधानिक निकाय है। 5. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को 102वें संशोधन से संवैधानिक दर्जा मिला।
NITI आयोग (2015): - NITI आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) 1 जनवरी 2015 को स्थापित हुआ। - इसने योजना आयोग (1950 में स्थापित) का स्थान लिया। - यह एक कार्यपालक निकाय है, संवैधानिक नहीं। - यह नीति-निर्माण में सहयोग तथा राज्यों के साथ सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है। - प्रधानमंत्री इसका अध्यक्ष होता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (1993): - इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत हुई। - यह एक विधिक (स्टैच्यूटरी) निकाय है। - अध्यक्ष सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होता है। - मानवाधिकारों के उल्लंघन की जाँच करता है।
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC): - मूल रूप से 1964 में कार्यपालक प्रस्ताव से बना तथा 2003 में विधिक दर्जा मिला। - भ्रष्टाचार निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लोकपाल और लोकायुक्त: - लोकपाल अधिनियम 2013 के तहत लोकपाल की स्थापना हुई। - यह भ्रष्टाचार की जाँच के लिए स्वतंत्र निकाय है। - राज्य स्तर पर लोकायुक्त कार्य करते हैं।
सूचना आयोग: - केंद्रीय सूचना आयोग RTI अधिनियम 2005 के तहत बना। - यह सूचना के अधिकार से संबंधित अपीलों की सुनवाई करता है।
अन्य गैर-संवैधानिक निकाय: 1. सीबीआई (विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946)। 2. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (1992, पूर्व में 1978)। 3. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (2007)। 4. राष्ट्रीय महिला आयोग (1992)। 5. केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (1985)। 6. विधि आयोग। 7. राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (2008)।
त्वरित तथ्य: 1. NITI आयोग की स्थापना 2015 में हुई, अध्यक्ष प्रधानमंत्री। 2. NHRC विधिक निकाय है (अधिनियम 1993)। 3. लोकपाल अधिनियम 2013 में बना। 4. RTI अधिनियम 2005 है। 5. योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी।
संवैधानिक और गैर-संवैधानिक निकायों के मध्य निम्नलिखित अंतर हैं:
महत्वपूर्ण तुलना: 1. योजना आयोग (1950) गैर-संवैधानिक था; NITI आयोग (2015) भी गैर-संवैधानिक। 2. CAG (अनुच्छेद 148) संवैधानिक; जबकि लोक लेखा समिति संसदीय समिति है। 3. वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) संवैधानिक; वित्त मंत्रालय गैर-संवैधानिक। 4. UPSC संवैधानिक; भर्ती एजेंसियाँ गैर-संवैधानिक। 5. राष्ट्रीय महिला आयोग (1992) गैर-संवैधानिक विधिक निकाय है। 6. सीबीआई गैर-संवैधानिक; यह अधिनियम 1946 पर आधारित है।
उदाहरण: 1. GST परिषद 101वें संशोधन से संवैधानिक है। 2. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग 102वें संशोधन से संवैधानिक हुआ। 3. NHRC विधिक निकाय है जो कानून से बना। 4. केंद्रीय सतर्कता आयोग 2003 में विधिक दर्जा पाया। 5. लोकपाल 2013 के कानून से बना।
| निकाय | अनुच्छेद | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| निर्वाचन आयोग | 324 | चुनाव संचालन |
| UPSC | 315 | भर्ती परीक्षाएँ |
| वित्त आयोग | 280 | कर वितरण |
| CAG | 148 | लेखा परीक्षण |
| महान्यायवादी | 76 | विधि अधिकारी |
| राष्ट्रीय SC आयोग | 338 | SC कल्याण |
| निकाय | स्थापना | आधार |
|---|---|---|
| NITI आयोग | 2015 | कार्यपालक आदेश |
| NHRC | 1993 | अधिनियम 1993 |
| CVC | 2003 | विधिक |
| लोकपाल | 2013 | लोकपाल अधिनियम |
| सूचना आयोग | 2005 | RTI अधिनियम |
| CBI | 1946 | विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम |
flowchart TD
A[संवैधानिक निकाय] --> B[निर्वाचन आयोग 324]
A --> C[UPSC 315]
A --> D[वित्त आयोग 280]
A --> E[CAG 148]
A --> F[महान्यायवादी 76]
A --> G[गैर-संवैधानिक निकाय]
G --> G1[NITI आयोग 2015]
G --> G2[NHRC 1993]
G --> G3[लोकपाल 2013]
G --> G4[सूचना आयोग 2005]
G --> G5[सीबीआई 1946]
संवैधानिक निकाय संविधान के अनुच्छेदों से शक्ति प्राप्त करते हैं और अत्यधिक स्वतंत्र होते हैं, जबकि गैर-संवैधानिक निकाय कानून या कार्यपालक आदेश से बनते हैं। निर्वाचन आयोग, UPSC, वित्त आयोग और CAG जैसे निकाय लोकतंत्र के स्तंभ हैं, जबकि NITI आयोग, NHRC और लोकपाल जैसे निकाय शासन को मजबूत करते हैं। इनकी स्थापना, आधार और कार्यों की सटीक जानकारी रेलवे NTPC परीक्षा में उच्च अंक दिलाती है, अतः इस अध्याय की नियमित पुनरावृत्ति आवश्यक है।