विषय: रेलवे NTPC – गणित (बीजगणित) अध्याय: 3.4 द्विघात समीकरण विषय-वस्तु: द्विघात समीकरण, मूल
द्विघात समीकरण वह समीकरण है जिसमें चर की अधिकतम घात 2 होती है। इसका सामान्य रूप ax² + bx + c = 0 है, जहाँ a ≠ 0 है। रेलवे NTPC परीक्षा में द्विघात समीकरण से मूल ज्ञात करना, मूलों का योग और गुणनफल तथा सरल शब्द समस्याएँ पूछी जाती हैं। गुणनखंड विधि और श्रीधराचार्य सूत्र इन प्रश्नों को हल करने की मुख्य तकनीकें हैं।
द्विघात समीकरण के मूल वे मान होते हैं जो चर रखने पर समीकरण को संतुष्ट करते हैं। एक द्विघात समीकरण के अधिकतम दो मूल होते हैं। NTPC के अधिकांश प्रश्नों में मूल सरल पूर्णांक होते हैं, इसलिए गुणनखंड विधि प्रायः पर्याप्त होती है। विवेचक (discriminant) की सहायता से मूलों की प्रकृति ज्ञात की जाती है, जो वैकल्पिक प्रश्नों में उपयोगी है।
इस अध्याय में हम गुणनखंड विधि, पूर्ण वर्ग विधि, श्रीधराचार्य सूत्र, मूलों का योग-गुणनफल तथा विवेचक की अवधारणा को विस्तार से सीखेंगे। प्रत्येक अवधारणा के साथ हल किए गए उदाहरण दिए गए हैं। अंत में त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ, माइंड मैप, आरेख, सामान्य गलतियाँ और परीक्षा युक्तियाँ प्रस्तुत हैं।
किसी द्विघात समीकरण ax² + bx + c = 0 के मूल ज्ञात करने की दो मुख्य विधियाँ हैं: गुणनखंड विधि और श्रीधराचार्य सूत्र।
गुणनखंड विधि: इस विधि में ax² + bx + c के गुणनखंड करके प्रत्येक गुणनखंड को शून्य के बराबर रखा जाता है। प्रत्येक रैखिक समीकरण से एक मूल प्राप्त होता है।
श्रीधराचार्य सूत्र: x = [-b ± √(b² - 4ac)] / 2a। इस सूत्र का प्रयोग तब किया जाता है जब गुणनखंड करना कठिन हो।
उदाहरण 1: x² - 5x + 6 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: गुणनखंड विधि से: x² - 5x + 6 = (x - 2)(x - 3) = 0। अतः x - 2 = 0 या x - 3 = 0, इसलिए x = 2 या x = 3।
उदाहरण 2: x² - 49 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: x² - 49 = (x + 7)(x - 7) = 0, अतः x = 7 या x = -7।
उदाहरण 3: 2x² - 5x - 3 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: 2x² - 6x + x - 3 = 0, अर्थात 2x(x - 3) + 1(x - 3) = 0, अतः (2x + 1)(x - 3) = 0। मूल: x = 3 या x = -1/2।
उदाहरण 4: x² - 4x + 4 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: (x - 2)² = 0, अतः x = 2, 2। यहाँ दोनों मूल समान हैं।
उदाहरण 5: x² + 5x + 6 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: (x + 2)(x + 3) = 0, अतः x = -2 या x = -3।
उदाहरण 6: x² = 36 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: x = ±√36 = ±6, अतः x = 6 या x = -6।
यदि द्विघात समीकरण ax² + bx + c = 0 के मूल α और β हों, तो: - मूलों का योग (α + β) = -b/a - मूलों का गुणनफल (α × β) = c/a
यदि मूल α और β दिए हों तो उनसे बनने वाला द्विघात समीकरण होता है: x² - (α + β)x + αβ = 0।
उदाहरण 7: x² - 7x + 12 = 0 के मूलों का योग और गुणनफल ज्ञात कीजिए।
हल: a = 1, b = -7, c = 12। योग = -b/a = 7, गुणनफल = c/a = 12। जाँच: मूल 3 और 4, योग 7 तथा गुणनफल 12।
उदाहरण 8: 2x² - 8x + 6 = 0 के मूलों का योग ज्ञात कीजिए।
हल: योग = -(-8)/2 = 4। जाँच: मूल 1 और 3, योग 4।
उदाहरण 9: 3x² + 6x - 9 = 0 के मूलों का गुणनफल ज्ञात कीजिए।
हल: गुणनफल = c/a = -9/3 = -3।
उदाहरण 10: यदि किसी द्विघात समीकरण के मूल 2 और 5 हों तो समीकरण क्या होगा?
हल: x² - (2 + 5)x + (2 × 5) = 0, अर्थात x² - 7x + 10 = 0।
उदाहरण 11: यदि मूलों का योग 6 और गुणनफल 8 हो तो द्विघात समीकरण क्या होगा?
हल: x² - 6x + 8 = 0। जाँच: मूल 2 और 4।
उदाहरण 12: x² - 9x + 20 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए और योग-गुणनफल से पुष्टि कीजिए।
हल: (x - 4)(x - 5) = 0, मूल 4 और 5। योग 9 = -b/a और गुणनफल 20 = c/a। दोनों सत्य हैं।
द्विघात समीकरण ax² + bx + c = 0 का विवेचक D = b² - 4ac होता है। विवेचक से मूलों की प्रकृति ज्ञात होती है:
उदाहरण 13: x² - 6x + 9 = 0 के मूलों की प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल: D = (-6)² - 4(1)(9) = 36 - 36 = 0, अतः दो समान वास्तविक मूल होंगे (x = 3, 3)।
उदाहरण 14: x² - 5x + 6 = 0 के विवेचक की गणना कीजिए।
हल: D = 25 - 24 = 1 > 0, अतः दो भिन्न वास्तविक मूल।
उदाहरण 15: x² + 4 = 0 के मूलों की प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल: D = 0 - 16 = -16 < 0, अतः कोई वास्तविक मूल नहीं है।
उदाहरण 16: 2x² + 4x + 2 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: सूत्र से a = 2, b = 4, c = 2। D = 16 - 16 = 0। x = -4/(4) = -1, अतः x = -1, -1।
उदाहरण 17: श्रीधराचार्य सूत्र से x² - 3x - 4 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: a = 1, b = -3, c = -4। D = 9 + 16 = 25। x = (3 ± 5)/2, अतः x = 4 या x = -1।
उदाहरण 18: यदि x² - 4x + k = 0 के मूल समान हों तो k का मान क्या होगा?
हल: D = 0 होना चाहिए: 16 - 4k = 0, अतः k = 4।
उदाहरण 19: 3x² - 10x + 3 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
हल: (3x - 1)(x - 3) = 0, अतः x = 3 या x = 1/3।
उदाहरण 20: x² - 4x + 3 = 0 के मूलों का योग और गुणनफल क्रमशः क्या है?
हल: योग = 4, गुणनफल = 3। जाँच: मूल 1 और 3।
| संकल्पना | सूत्र |
|---|---|
| सामान्य रूप | ax² + bx + c = 0 |
| मूलों का योग | α + β = -b/a |
| मूलों का गुणनफल | αβ = c/a |
| विवेचक | D = b² - 4ac |
| मूल (सूत्र) | x = (-b ± √D)/2a |
| मूलों से समीकरण | x² - (α + β)x + αβ = 0 |
| विवेचक D | मूलों की प्रकृति | उदाहरण |
|---|---|---|
| D > 0 | दो भिन्न वास्तविक मूल | x² - 5x + 6 = 0 |
| D = 0 | दो समान वास्तविक मूल | x² - 6x + 9 = 0 |
| D < 0 | कोई वास्तविक मूल नहीं | x² + 4 = 0 |
| D पूर्ण वर्ग | परिमेय मूल | x² - 3x - 4 = 0 |
flowchart TD
A[द्विघात समीकरण] --> B[मूल ज्ञात करना]
A --> C[मूलों का योग और गुणनफल]
A --> D[विवेचक]
B --> E[गुणनखंड विधि]
B --> F[श्रीधराचार्य सूत्र]
E --> G[प्रत्येक गुणनखंड को शून्य रखें]
F --> H[x = -b ± √D / 2a]
C --> I[योग = -b/a]
C --> J[गुणनफल = c/a]
C --> K[मूलों से समीकरण बनाना]
D --> L[D > 0 भिन्न मूल]
D --> M[D = 0 समान मूल]
D --> N[D < 0 काल्पनिक मूल]
K --> O[x² - Sx + P = 0]
द्विघात समीकरण NTPC परीक्षा में नियमित रूप से पूछे जाने वाला विषय है। गुणनखंड विधि और श्रीधराचार्य सूत्र की दक्षता, मूलों के योग-गुणनफल के सूत्र तथा विवेचक के आधार पर मूलों की प्रकृति की पहचान इस अध्याय की मुख्य आवश्यकताएँ हैं। अभ्यास के दौरान हर उत्तर को मूल समीकरण में रखकर जाँचने की आदत बनाएँ, जिससे अंकगणितीय त्रुटियाँ समाप्त हों और परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त हों।