5.5 माध्यिका और बहुलक Notes

5.5 माध्यिका और बहुलक

विषय: रेलवे NTPC – गणित (त्रिकोणमिति और सांख्यिकी) अध्याय: 5.5 माध्यिका और बहुलक विषय-वस्तु: माध्यिका, बहुलक

1. परिचय

माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode) केंद्रीय प्रवृत्ति की दो अन्य महत्वपूर्ण मापें हैं जो माध्य के साथ मिलकर आँकड़ों की पूरी तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। माध्य सभी मानों से प्रभावित होता है, परंतु जब आँकड़ों में बहुत बड़े या बहुत छोटे मान (चरम मान) मौजूद हों, तो माध्य सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। ऐसी स्थिति में माध्यिका अधिक विश्वसनीय होती है। रेलवे NTPC परीक्षा में माध्यिका और बहुलक से प्रतिवर्ष 1 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं।

माध्यिका वह मान है जो आँकड़ों को आरोही (बढ़ते) क्रम में व्यवस्थित करने पर ठीक बीच में आता है। यह आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करती है – आधे मान माध्यिका से छोटे और आधे बड़े होते हैं। माध्यिका की गणना के लिए मानों को क्रमबद्ध करना अनिवार्य है। विषम संख्या में प्रेक्षणों के लिए माध्यिका ठीक बीच का पद होता है, जबकि सम संख्या में दोनों बीच वाले पदों का औसत लिया जाता है।

बहुलक वह मान है जो आँकड़ों में सबसे अधिक बार आता है, अर्थात जिसकी बारंबारता सबसे अधिक होती है। बहुलक की गणना के लिए किसी गणना की आवश्यकता नहीं होती, केवल बारंबारता की तुलना की जाती है। कुछ आँकड़ों में एक से अधिक बहुलक हो सकते हैं (द्विबहुलक) या बहुलक नहीं भी हो सकता है। इस अध्याय में हम अवर्गीकृत आँकड़ों के माध्यिका और बहुलक, वर्गीकृत आँकड़ों के सूत्र और अनुभवजन्य संबंध (Empirical Relation) को विस्तार से सीखेंगे।

2. माध्यिका

अवर्गीकृत आँकड़ों की माध्यिका

माध्यिका ज्ञात करने के चरण:

  1. सभी मानों को आरोही क्रम (छोटे से बड़े) में व्यवस्थित करें
  2. यदि प्रेक्षणों की संख्या n विषम है, तो माध्यिका = (n+1)/2 वाँ पद
  3. यदि n सम है, तो माध्यिका = (n/2 वें पद + (n/2 + 1) वें पद) / 2

स्पष्ट करने वाला उदाहरण

उदाहरण 1: आँकड़ों 5, 8, 3, 9, 6, 7, 4 की माध्यिका ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: आरोही क्रम – 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 - चरण 2: n = 7 (विषम), माध्यिका = (7+1)/2 = चौथा पद - चरण 3: चौथा पद = 6 - उत्तर: 6

उदाहरण 2: आँकड़ों 10, 20, 30, 40, 50, 60 की माध्यिका ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: आँकड़े पहले से क्रम में हैं - चरण 2: n = 6 (सम), माध्यिका = (तीसरा + चौथा)/2 = (30 + 40)/2 - उत्तर: 35

उदाहरण 3: 11 खिलाड़ियों के रन 15, 20, 25, 30, 35, 40, 45, 50, 55, 60, 65 हैं। माध्यिका ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: n = 11 (विषम), माध्यिका = (11+1)/2 = छठा पद - चरण 2: छठा पद = 40 - उत्तर: 40

3. बारंबारता आँकड़ों की माध्यिका और बहुलक

बारंबारता तालिका में माध्यिका

जब मानों के साथ बारंबारता दी हो, तो संचयी बारंबारता (Cumulative Frequency) बनाई जाती है। माध्यिका वह मान है जिसकी संचयी बारंबारता पहली बार N/2 को पार करती है, जहाँ N = Σf (कुल बारंबारता)।

बहुलक

बहुलक वह मान है जिसकी बारंबारता सबसे अधिक होती है।

स्पष्ट करने वाला उदाहरण

उदाहरण 4: बारंबारता तालिका – मान 4 (f=3), 5 (f=8), 6 (f=5), 7 (f=4) में बहुलक ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: सबसे अधिक बारंबारता 8 है - चरण 2: यह बारंबारता मान 5 की है - उत्तर: बहुलक = 5

उदाहरण 5: बारंबारता तालिका – मान 2 (f=4), 3 (f=5), 4 (f=6), 5 (f=3) की माध्यिका ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: N = 4+5+6+3 = 18, N/2 = 9 - चरण 2: संचयी बारंबारता – मान 2: 4, मान 3: 4+5 = 9, मान 4: 9+6 = 15 - चरण 3: 9 को पार करने वाला पहला मान 4 है (क्योंकि 9 > 9 नहीं होता, सम संख्या में दोनों मध्य पदों का औसत) - चरण 4: चूंकि N सम है, माध्यिका = (9वाँ + 10वाँ)/2; 9वाँ = 3 (क्योंकि पहले 9 पदों में 2 और 3 हैं) और 10वाँ = 4, अतः माध्यिका = (3+4)/2 = 3.5 - उत्तर: 3.5

4. वर्गीकृत आँकड़ों के सूत्र और अनुभवजन्य संबंध

वर्गीकृत आँकड़ों में माध्यिका का सूत्र

माध्यिका = L + [(N/2 − cf)/f] × h

जहाँ L = माध्यिका वर्ग की निचली सीमा, N = कुल बारंबारता, cf = माध्यिका वर्ग से पहले की संचयी बारंबारता, f = माध्यिका वर्ग की बारंबारता, h = वर्ग आकार।

वर्गीकृत आँकड़ों में बहुलक का सूत्र

बहुलक = L + [(f₁ − f₀)/(2f₁ − f₀ − f₂)] × h

जहाँ L = बहुलक वर्ग की निचली सीमा, f₁ = बहुलक वर्ग की बारंबारता, f₀ = पिछले वर्ग की बारंबारता, f₂ = अगले वर्ग की बारंबारता, h = वर्ग आकार।

अनुभवजन्य संबंध (Empirical Relation)

माध्य, माध्यिका और बहुलक के बीच एक महत्वपूर्ण अनुभवजन्य संबंध होता है:

स्पष्ट करने वाला उदाहरण

उदाहरण 6: यदि माध्य = 60 और बहुलक = 66 हो, तो माध्यिका ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: अनुभवजन्य संबंध के अनुसार माध्यिका = (2 × माध्य + बहुलक)/3 - चरण 2: माध्यिका = (2 × 60 + 66)/3 = (120 + 66)/3 = 186/3 = 62 - उत्तर: 62

उदाहरण 7: यदि माध्य = 20 और माध्यिका = 22 हो, तो बहुलक ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: बहुलक = 3 × माध्यिका − 2 × माध्य - चरण 2: बहुलक = 3 × 22 − 2 × 20 = 66 − 40 = 26 - उत्तर: 26

उदाहरण 8: बारंबारता तालिका – मान 10 (f=2), 15 (f=4), 20 (f=6), 25 (f=8), 30 (f=5) का बहुलक ज्ञात कीजिए।

हल: - चरण 1: सबसे अधिक बारंबारता 8 है - चरण 2: 8 बारंबारता मान 25 की है - उत्तर: बहुलक = 25

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: माध्यिका की गणना के नियम

स्थिति विधि सूत्र
n विषम बीच का पद (n+1)/2 वाँ पद
n सम दो मध्य पदों का औसत (n/2 + n/2+1)/2
बारंबारता वाले संचयी बारंबारता विधि N/2 वाँ पद
वर्गीकृत आँकड़े माध्यिका वर्ग विधि L + [(N/2−cf)/f] × h

तालिका 2: माध्य, माध्यिका, बहुलक में अंतर

विशेषता माध्य माध्यिका बहुलक
परिभाषा सभी मानों का औसत बीच का मान सबसे अधिक बार आने वाला मान
क्रमबद्धता आवश्यक नहीं आवश्यक आवश्यक नहीं
चरम मानों से प्रभाव अधिक नगण्य कोई नहीं
बहुलक का विकल्प दो या अधिक हो सकते हैं
अनुभवजन्य संबंध बहुलक = 3माध्यिका − 2माध्य

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[5.5 माध्यिका और बहुलक] --> B[माध्यिका]
    B --> C[आरोही क्रम]
    B --> D[n विषम - बीच का पद]
    B --> E[n सम - दो पदों का औसत]
    A --> F[बहुलक]
    F --> G[सबसे अधिक बारंबारता]
    F --> H[गणना नहीं, तुलना]
    A --> I[वर्गीकृत सूत्र]
    I --> J[माध्यिका = L + N/2-cf/f x h]
    I --> K[बहुलक = L + f1-f0/2f1-f0-f2 x h]
    A --> L[अनुभवजन्य संबंध]
    L --> M[बहुलक = 3माध्यिका − 2माध्य]
    A --> N[उपयोग]
    N --> O[चरम मानों पर माध्यिका]
    N --> P[वस्तुओं के लोकप्रियता में बहुलक]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

माध्यिका – क्रमबद्ध आँकड़ों का बीच का मान 3 4 5 6 माध्यिका 7 8 9 आरोही क्रम: 3,4,5,6,7,8,9; n = 7 विषम माध्यिका = (7+1)/2 = चौथा पद = 6 सम संख्या के लिए: 10,20,30,40,50,60 की माध्यिका = (तीसरा + चौथा)/2 = (30 + 40)/2 = 35 स्वर्ण नियम माध्यिका निकालने से पहले आँकड़ों को आरोही क्रम में रखना अनिवार्य है; सम संख्या में दो बीच वाले पदों का औसत लें।

बहुलक – सबसे अधिक बार आने वाला मान f=3 मान 4 f=8 मान 5 f=5 मान 6 f=4 मान 7 सबसे अधिक बारंबारता 8 है, अतः बहुलक = 5 अनुभवजन्य संबंध: बहुलक = 3 × माध्यिका − 2 × माध्य यदि माध्य 60 और माध्यिका 62, तो बहुलक = 3×62 − 2×60 = 66 यदि माध्य 20 और माध्यिका 22, तो बहुलक = 66 − 40 = 26 स्वर्ण नियम बहुलक निकालने के लिए केवल बारंबारता की तुलना करें – सबसे बड़ी बारंबारता वाला मान ही बहुलक है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. माध्यिका निकालते समय आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करना भूल जाना – बिना क्रम के लिया गया 'बीच का मान' गलत होता है।
  2. सम संख्या में प्रेक्षणों की माध्यिका के लिए केवल एक पद लेना – दोनों मध्य पदों का औसत लेना अनिवार्य है।
  3. विषम संख्या में n के स्थान पर n+1 पद लेना या (n+1)/2 सूत्र भूल जाना – माध्यिका = (n+1)/2 वाँ पद होता है।
  4. बहुलक में सबसे अधिक 'बारंबारता' के स्थान पर सबसे बड़े 'मान' को बहुलक मान लेना – बहुलक वह मान है जिसकी बारंबारता अधिकतम हो।
  5. अनुभवजन्य संबंध बहुलक = 3माध्यिका − 2माध्य में चिह्न की गलती करना – माध्यिका का 3 गुना से माध्य का 2 गुना घटाया जाता है।
  6. वर्गीकृत आँकड़ों में cf (पिछली संचयी बारंबारता) और f (माध्यिका वर्ग की बारंबारता) में भ्रमित होना – सूत्र में सही मान रखें।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. माध्यिका के प्रश्न में सबसे पहले आरोही क्रम लिखें – इससे आधी गलतियाँ अपने आप दूर हो जाती हैं।
  2. n विषम है या सम, यह पहचानने के लिए तुरंत n देखें – विषम पर (n+1)/2, सम पर दो पदों का औसत।
  3. बारंबारता तालिका में बहुलक का प्रश्न आसान है – बस सबसे बड़ी बारंबारता वाला मान चुनें, अधिक गणना न करें।
  4. अनुभवजन्य संबंध के प्रश्नों में तीनों मानों (माध्य, माध्यिका, बहुलक) में से दो दिए होते हैं – तीसरा सूत्र से ज्ञात करें।
  5. यदि बारंबारता तालिका में संचयी बारंबारता बनानी पड़े, तो N/2 ज्ञात कर पहला वर्ग चुनें जहाँ संचयी बारंबारता N/2 से अधिक या बराबर हो।
  6. उत्तर को विकल्पों से मिलाते समय ध्यान दें कि माध्यिका और बहुलक का मान मूल आँकड़ों में मौजूद मान ही होता है (वर्गीकृत सूत्र को छोड़कर)।

10. निष्कर्ष

माध्यिका और बहुलक केंद्रीय प्रवृत्ति की ऐसी मापें हैं जो विभिन्न प्रकार के आँकड़ों के विश्लेषण में माध्य की पूरक हैं। क्रमबद्ध आँकड़ों के बीच का मान माध्यिका तथा सबसे अधिक बार आने वाला मान बहुलक कहलाता है। माध्यिका की गणना में आरोही क्रम और सम-विषम n का ध्यान रखना तथा बहुलक में अधिकतम बारंबारता की पहचान करना आवश्यक है। अनुभवजन्य संबंध को कंठस्थ करके तथा अभ्यास द्वारा आप NTPC परीक्षा में इस अध्याय के प्रश्नों में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।