9.3 दिशा ज्ञान Notes

9.3 दिशा ज्ञान

विषय: रेलवे NTPC – तर्कशक्ति (रक्त संबंध और दिशा) अध्याय: 9.3 दिशा ज्ञान विषय-वस्तु: आठ दिशाएँ, घूर्णन

1. परिचय

दिशा ज्ञान तर्कशक्ति का एक महत्वपूर्ण विषय है जिसमें परीक्षार्थी को विभिन्न दिशाओं में चलने और मुड़ने के बाद अंतिम स्थिति या दिशा ज्ञात करनी होती है। रेलवे NTPC परीक्षा में इस विषय से प्रायः एक प्रश्न अवश्य पूछा जाता है। इस अध्याय में चार मुख्य दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) और चार कोणीय दिशाओं (उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम) का पूर्ण ज्ञान आवश्यक है।

दिशा के प्रश्नों में प्रायः किसी व्यक्ति के चलने की दिशा, मुड़ने के कोण (90, 180, 45 अंश) और चली गई दूरी दी जाती है। परीक्षार्थी को उत्तर बताना होता है कि वह व्यक्ति अंत में किस दिशा में मुँह करके खड़ा है या आरंभिक स्थान से उसकी अंतिम स्थिति किस दिशा में है। कुछ प्रश्नों में सूर्योदय, सूर्यास्त, छाया की दिशा और घड़ी की दिशा से भी पूछा जाता है।

इस अध्याय में हम आठों दिशाओं की पहचान, घूर्णन के नियम और हल किए गए उदाहरणों के माध्यम से सीखेंगे कि दिशा संबंधी प्रश्नों को कैसे शीघ्र और सही हल किया जाए। अंत में तालिकाएँ, माइंड मैप, कम्पास आरेख, सामान्य गलतियाँ और परीक्षा युक्तियाँ दी गई हैं, जो अंतिम पुनरावृत्ति में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगी।

2. आठ दिशाएँ

दिशा ज्ञान के प्रश्नों को हल करने से पहले कम्पास के सभी आठ कोणों को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है:

दिशाओं का दक्षिणावर्त क्रम: उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम। इस क्रम को याद रखने से घूर्णन के प्रश्न बहुत आसान हो जाते हैं, क्योंकि दाएं मुड़ना अगले पड़ाव और बाएं मुड़ना पिछले पड़ाव पर ले जाता है।

दाएं-बाएं मुड़ने के नियम: (1) उत्तर की ओर मुख करके दाएं मुड़ने पर दिशा पूर्व हो जाती है। (2) पूर्व की ओर मुख करके दाएं मुड़ने पर दक्षिण मिलता है। (3) दक्षिण की ओर मुख करके दाएं मुड़ने पर पश्चिम मिलता है। (4) पश्चिम की ओर मुख करके दाएं मुड़ने पर उत्तर मिलता है। इसी प्रकार बाएं मुड़ने पर दिशा वामावर्त क्रम में बदलती है।

छाया और दिशा: सूर्योदय के समय सूर्य पूर्व में होता है, अतः सुबह के समय व्यक्ति की छाया पश्चिम दिशा में बनती है। सूर्यास्त के समय सूर्य पश्चिम में होता है, अतः छाया पूर्व दिशा में बनती है। दोपहर में सूर्य सिर के ठीक ऊपर होने पर छाया नहीं बनती या बहुत छोटी होती है। छाया हमेशा सूर्य की विपरीत दिशा में बनती है।

3. घूर्णन के नियम

घूर्णन संबंधी प्रश्नों को हल करने के लिए निम्नलिखित नियमों को अच्छी तरह समझना आवश्यक है:

  1. 90 अंश का घूर्णन: दाएं मुड़ना = 90 अंश दक्षिणावर्त घूर्णन; बाएं मुड़ना = 90 अंश वामावर्त घूर्णन। एक बार दाएं या बाएं मुड़ने पर दिशा अगली मुख्य दिशा में बदल जाती है।
  2. 135 अंश का घूर्णन: यह डेढ़ मोड़ के बराबर होता है, जिसमें मुख एक कोणीय दिशा के पार जाकर बदल जाता है। जैसे उत्तर से 135 अंश दक्षिणावर्त = दक्षिण-पूर्व।
  3. 180 अंश का घूर्णन: इसे विपरीत दिशा में जाना कहते हैं। उत्तर से 180 अंश दक्षिणावर्त या वामावर्त = दक्षिण। पूर्व से 180 अंश = पश्चिम।
  4. 45 अंश का घूर्णन: यह आधा मोड़ है, जिसमें दिशा कोणीय दिशा में बदलती है। उत्तर से 45 अंश दक्षिणावर्त = उत्तर-पूर्व।
  5. घड़ी की दिशा में और उसके विपरीत: घड़ी की दिशा में घूमना दक्षिणावर्त और घड़ी की विपरीत दिशा में घूमना वामावर्त कहलाता है।

व्यावहारिक विधि: रफ स्पेस में एक सरल चित्र बनाएं। ऊपर उत्तर, नीचे दक्षिण, दाएं पूर्व और बाएं पश्चिम लिखें। फिर प्रत्येक मोड़ पर तीर की दिशा बदलते रहें। अंत में जिस दिशा में तीर इंगित करे, वही उत्तर होगा। यदि प्रश्न में 'दाईं ओर मुड़ना' या 'बाईं ओर मुड़ना' जैसे शब्द आएं तो भी यही विधि लागू होती है।

सामान्य भ्रम: 'दाएं मुड़ना' और 'दाईं ओर जाना' में अंतर होता है। पहले में केवल मुँह की दिशा बदलती है, जबकि दूसरे में चलना शुरू होता है। साथ ही ध्यान रखें कि चलते समय मुड़ने पर नई दिशा, पिछली गति की दिशा के सापेक्ष मानी जाती है, न कि आरंभिक दिशा के सापेक्ष। सूर्योदय और सूर्यास्त वाले प्रश्नों में मौसम की दिशा को ध्यान से पहचानें।

4. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: राम उत्तर की ओर मुख करके खड़ा है। वह दाईं ओर मुड़ता है, फिर दाईं ओर, फिर बाईं ओर मुड़ता है। अब वह किस दिशा में मुख करके खड़ा है?

हल: उत्तर से दाईं ओर मुड़ने पर पूर्व। पूर्व से दाईं ओर मुड़ने पर दक्षिण। दक्षिण से बाईं ओर मुड़ने पर पूर्व। अतः अंतिम दिशा पूर्व है। उत्तर: पूर्व।

उदाहरण 2: सीता सुबह सूर्य की ओर मुँह करके खड़ी है। उसके दाईं ओर कौन सी दिशा होगी?

हल: सुबह सूर्य पूर्व दिशा में होता है। पूर्व की ओर मुख करने पर दाईं ओर दक्षिण दिशा होती है। उत्तर: दक्षिण।

उदाहरण 3: एक व्यक्ति पश्चिम की ओर मुँह करके चलना शुरू करता है। कुछ दूरी चलने के बाद वह बाईं ओर मुड़ता है। अब वह किस दिशा में मुख करके खड़ा है?

हल: पश्चिम से बाईं ओर मुड़ने पर दक्षिण दिशा मिलती है। अतः वह अब दक्षिण की ओर मुख करके खड़ा है। उत्तर: दक्षिण।

उदाहरण 4: रवि दक्षिण की ओर मुँह करके खड़ा है। वह 90 अंश दक्षिणावर्त मुड़ता है। अब वह किस दिशा में मुख करके है?

हल: दक्षिण से 90 अंश दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) मुड़ने पर पश्चिम दिशा मिलती है। उत्तर: पश्चिम।

उदाहरण 5: सूर्यास्त के समय एक लड़की पूर्व दिशा में मुँह करके खड़ी है। उसकी छाया किस दिशा में बनेगी?

हल: सूर्यास्त के समय सूर्य पश्चिम में होता है, अतः छाया सूर्य के विपरीत अर्थात पूर्व दिशा में बनती है। लड़की का मुँह भी पूर्व की ओर है, इसलिए छाया उसके मुँह के सामने अर्थात पूर्व दिशा में ही बनेगी। उत्तर: पूर्व।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

मुख्य दिशा दाएं मुड़ने पर बाएं मुड़ने पर विपरीत दिशा
उत्तर पूर्व पश्चिम दक्षिण
दक्षिण पश्चिम पूर्व उत्तर
पूर्व दक्षिण उत्तर पश्चिम
पश्चिम उत्तर दक्षिण पूर्व

तालिका 2

कोण घूर्णन प्रकार परिणाम
45 अंश दक्षिणावर्त उत्तर से उत्तर-पूर्व
90 अंश दक्षिणावर्त उत्तर से पूर्व
135 अंश दक्षिणावर्त उत्तर से दक्षिण-पूर्व
180 अंश उत्तर से दक्षिण
90 अंश वामावर्त उत्तर से पश्चिम

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[दिशा ज्ञान] --> B[चार मुख्य दिशाएं]
    A --> C[चार कोणीय दिशाएं]
    A --> D[घूर्णन के नियम]
    A --> E[दाएं बाएं मोड़]
    B --> F[उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम]
    C --> G[उत्तर-पूर्व उत्तर-पश्चिम]
    C --> H[दक्षिण-पूर्व दक्षिण-पश्चिम]
    D --> I[90 अंश दक्षिणावर्त]
    D --> J[180 अंश विपरीत]
    E --> K[कम्पास चित्र बनाएं]
    K --> L[अंतिम दिशा लिखें]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आठ दिशाओं का कम्पास उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम उत्तर-पूर्व उत्तर-पश्चिम दक्षिण-पूर्व दक्षिण-पश्चिम स्वर्ण नियम दक्षिणावर्त क्रम उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम होता है।

दाएं और बाएं मुड़ने का चित्र उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम दाएं मुड़ने पर पूर्व बाएं मुड़ने पर पश्चिम पीछे दक्षिण उत्तर की ओर मुख करने पर दाईं ओर पूर्व, बाईं ओर पश्चिम और पीछे दक्षिण होता है स्वर्ण नियम मुँह की दिशा बदलने पर ही नई दिशा निर्धारित होती है, चलने की दिशा नहीं।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. उत्तर की ओर मुख करने पर दाईं ओर पश्चिम मान लेना, जबकि सही दिशा पूर्व है।
  2. दाएं मुड़ने को वामावर्त और बाएं मुड़ने को दक्षिणावर्त समझना, जबकि दाएं = दक्षिणावर्त।
  3. मुड़ने के बाद की दिशा को आरंभिक दिशा के सापेक्ष मापना, जबकि वह पिछली दिशा के सापेक्ष मापी जाती है।
  4. सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा भूल जाना; सुबह छाया पश्चिम में और शाम छाया पूर्व में बनती है।
  5. 180 अंश मुड़ने को भी 90 अंश मान लेना, जिससे विपरीत दिशा के स्थान पर आसन्न दिशा उत्तर के रूप में आती है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. हर प्रश्न में पहले रफ स्पेस में चारों मुख्य दिशाओं का चित्र बनाएं, इससे भ्रम नहीं होगा।
  2. 'दाएं मुड़ना' और 'बाएं मुड़ना' को छोटे तीरों से अंकित करें और प्रत्येक मोड़ पर नई दिशा लिखते जाएं।
  3. सूर्योदय के समय मुँह पूर्व की ओर और सूर्यास्त के समय मुँह पश्चिम की ओर मानें, फिर छाया विपरीत दिशा में बनती है।
  4. यदि प्रश्न में कोण दिया हो जैसे 45, 135, 180 अंश तो उसे मुख्य दिशा के पड़ावों के बीच मापें।
  5. घड़ी की दिशा वाले प्रश्नों में याद रखें कि घड़ी की दिशा दक्षिणावर्त है, उत्तर से शुरू करके पूर्व, दक्षिण, पश्चिम क्रम में चलें।

10. निष्कर्ष

दिशा ज्ञान एक सरल और स्कोरिंग विषय है यदि अभ्यर्थी आठों दिशाओं के क्रम और घूर्णन के नियमों को अच्छी तरह याद रखे। चित्र बनाकर हल करने की आदत से लगभग सभी प्रश्न सटीक हल हो जाते हैं। सूर्योदय-सूर्यास्त, छाया और घड़ी की दिशा से जुड़े प्रश्नों का अभ्यास करके परीक्षा में इस विषय से पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।