विषय: रेलवे NTPC – गणित (संख्या पद्धति) अध्याय: 1.2 पूर्णांक और प्राकृतिक संख्याएँ विषय-वस्तु: प्राकृतिक, पूर्ण, पूर्णांक संख्याएँ
पूर्णांक और प्राकृतिक संख्याएँ संख्या पद्धति का सबसे आधारभूत और सरल भाग हैं, परंतु एनटीपीसी परीक्षा में इनसे संबंधित प्रश्न अक्सर सूक्ष्म तर्क पर आधारित होते हैं। प्राकृतिक संख्याएँ गिनती की संख्याएँ हैं जिनकी सहायता से हम वस्तुओं की संख्या बताते हैं, जबकि पूर्ण संख्याएँ प्राकृतिक संख्याओं में शून्य को जोड़ने से बनती हैं। पूर्णांक संख्याएँ इससे एक कदम आगे हैं, जिनमें ऋणात्मक संख्याएँ भी शामिल होती हैं। इन तीनों के बीच के संबंध को समझना परीक्षा के लिए अनिवार्य है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रश्न संख्या रेखा, संख्याओं के गुणधर्म, चार बुनियादी संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) के चिह्न नियम, तथा सबसे छोटी या सबसे बड़ी संख्या ज्ञात करने से पूछे जाते हैं। कई बार परीक्षा में प्रश्नों को थोड़ा सा मोड़कर पूछा जाता है, जैसे "कौन-सी संख्या न तो प्राकृतिक है और न ही पूर्णांक का धनात्मक भाग" आदि। इसलिए परिभाषाओं के साथ-साथ उनके गुणों की गहरी समझ होनी चाहिए।
इस अध्याय में हम प्राकृतिक, पूर्ण और पूर्णांक संख्याओं की परिभाषाएँ, उनके समुच्चय, चिह्न नियम, सम और विषम पूर्णांक, तथा संक्रियाओं के महत्वपूर्ण गुणधर्मों को विस्तार से समझेंगे। हल किए गए उदाहरणों के माध्यम से हम देखेंगे कि इन अवधारणाओं का प्रयोग परीक्षा के प्रश्नों को हल करने में किस प्रकार होता है। यह अध्याय अन्य सभी अध्यायों की नींव है, इसलिए इसे पूर्ण आत्मविश्वास के साथ पढ़ना चाहिए।
प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers): वे संख्याएँ जो गिनती करने के काम आती हैं, प्राकृतिक संख्याएँ कहलाती हैं। इनका समुच्चय N = {1, 2, 3, 4, 5, ...} होता है। ये सभी धनात्मक होती हैं और 1 से प्रारंभ होती हैं। ध्यान देने योग्य बात है कि 0 प्राकृतिक संख्या नहीं है।
पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers): प्राकृतिक संख्याओं के समुच्चय में 0 को जोड़ देने पर पूर्ण संख्याओं का समुच्चय बनता है। इन्हें W = {0, 1, 2, 3, 4, ...} से दर्शाया जाता है।
प्राकृतिक और पूर्ण संख्याओं के गुणधर्म:
उदाहरण 1: पहले 10 प्राकृतिक संख्याओं का योग ज्ञात कीजिए।
हल: पहली n प्राकृतिक संख्याओं का योग = n(n + 1)/2। यहाँ n = 10 है। योग = 10 × 11 / 2 = 110 / 2 = 55। जाँच: 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8 + 9 + 10 = 55। उत्तर: 55
उदाहरण 2: पहली 10 विषम प्राकृतिक संख्याओं का योग ज्ञात कीजिए।
हल: पहली n विषम प्राकृतिक संख्याओं का योग = n² होता है। यहाँ n = 10, अतः योग = 10² = 100। जाँच: 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 + 17 + 19 = 100। उत्तर: 100
उदाहरण 3: पहली n सम प्राकृतिक संख्याओं का योग ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
हल: पहली n सम प्राकृतिक संख्याओं का योग = n(n + 1) होता है। उदाहरण के लिए n = 5, योग = 5 × 6 = 30। जाँच: 2 + 4 + 6 + 8 + 10 = 30। उत्तर: n(n + 1)
पूर्णांक संख्याएँ (Integers): पूर्ण संख्याओं के समुच्चय में सभी ऋणात्मक संख्याओं को शामिल करने पर पूर्णांकों का समुच्चय प्राप्त होता है। इन्हें Z = {..., -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ...} से दर्शाया जाता है। पूर्णांकों में तीन भाग होते हैं:
पूर्णांकों पर चारों बुनियादी संक्रियाएँ करते समय चिह्न नियमों का पालन करना अनिवार्य है। ये नियम परीक्षा के प्रश्नों को हल करने में सबसे अधिक सहायक होते हैं:
जोड़ (Addition) के नियम: - समान चिह्न वाली संख्याओं को जोड़ने पर चिह्न वही रहता है। जैसे: 5 + 3 = 8 और -5 + (-3) = -8। - भिन्न चिह्न वाली संख्याओं को जोड़ने पर बड़ी संख्या के चिह्न का अनुसरण होता है। जैसे: -5 + 3 = -2 और 5 + (-3) = 2।
घटाव (Subtraction) के नियम: - किसी संख्या से दूसरी संख्या घटाने का अर्थ है, विपरीत चिह्न वाली संख्या को जोड़ना। जैसे: 5 - (-3) = 5 + 3 = 8। - चिह्नों की जोड़ी: +(+) = +, +(-) = -, -(+) = -, -(-) = +
गुणन और भाग (Multiplication and Division) के नियम: - समान चिह्नों का गुणनफल धनात्मक: (+) × (+) = (+) और (-) × (-) = (+) - भिन्न चिह्नों का गुणनफल ऋणात्मक: (+) × (-) = (-) और (-) × (+) = (-) - भाग में भी यही नियम लागू होते हैं।
पूर्णांकों की महत्वपूर्ण विशेषताएँ: - किसी भी पूर्णांक में 0 जोड़ने पर वही संख्या प्राप्त होती है (0 योज्य तत्समक है)। - किसी भी पूर्णांक को 1 से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है (1 गुणात्मक तत्समक है)। - दो सम पूर्णांकों का योग सम होता है, दो विषम का योग सम होता है, और एक सम + एक विषम = विषम। - प्रत्येक पूर्णांक a के लिए a + (-a) = 0 होता है (व्युत्क्रम योगज)।
उदाहरण 4: (-7) + 12 - (-5) का मान ज्ञात कीजिए।
हल: सर्वप्रथम चिह्न नियम लागू करते हैं। -(-5) = +5 होगा। अतः व्यंजक बनता है: (-7) + 12 + 5। अब बाएं से दाएं हल करते हैं: (-7) + 12 = 5, फिर 5 + 5 = 10। उत्तर: 10
उदाहरण 5: (-8) × (-6) × 3 का मान ज्ञात कीजिए।
हल: (-8) × (-6) = 48 (समान चिह्न, धनात्मक परिणाम)। अब 48 × 3 = 144। चूंकि 48 धनात्मक है और 3 धनात्मक है, परिणाम धनात्मक ही रहता है। उत्तर: 144
उदाहरण 6: किसी संख्या का दो-तिहाई उसी संख्या के एक-तिहाई से 12 अधिक है। संख्या ज्ञात कीजिए।
हल: माना संख्या x है। प्रश्नानुसार, (2/3)x = (1/3)x + 12। दोनों पक्षों से (1/3)x घटाते हैं: (1/3)x = 12। दोनों पक्षों में 3 से गुणा करने पर x = 36। उत्तर: 36
पूर्णांकों के अध्ययन में सम-विषम संख्याओं तथा अभाज्य-भाज्य संख्याओं की पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि एनटीपीसी परीक्षा में इनसे कई प्रश्न पूछे जाते हैं।
सम संख्याएँ (Even Numbers): वे पूर्णांक जो 2 से पूर्णतः विभाज्य हैं, सम संख्याएँ कहलाती हैं। इनका सामान्य रूप 2n होता है। उदाहरण: 0, 2, 4, 6, 8, ...। सम संख्याओं की इकाई का अंक 0, 2, 4, 6 या 8 होता है।
विषम संख्याएँ (Odd Numbers): वे पूर्णांक जो 2 से विभाज्य नहीं हैं, विषम संख्याएँ कहलाती हैं। इनका सामान्य रूप 2n + 1 होता है। उदाहरण: 1, 3, 5, 7, 9, ...। विषम संख्याओं की इकाई का अंक 1, 3, 5, 7 या 9 होता है।
अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers): जिन संख्याओं के केवल दो भाजक होते हैं, 1 और स्वयं वह संख्या, वे अभाज्य संख्याएँ कहलाती हैं। उदाहरण: 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, ...। 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers): जिन संख्याओं के 1 और स्वयं के अलावा और भी भाजक होते हैं, वे भाज्य संख्याएँ कहलाती हैं। उदाहरण: 4, 6, 8, 9, 10, ...। 1 न तो अभाज्य है और न ही भाज्य।
संक्रियाओं के गुणधर्म (संक्षेप में): - सम ± सम = सम, विषम ± विषम = सम, सम ± विषम = विषम - सम × सम = सम, सम × विषम = सम, विषम × विषम = विषम - दो विषम संख्याओं का योग हमेशा सम होता है। - लगातार दो पूर्णांकों का गुणनफल हमेशा 2 से विभाज्य होता है। - किन्हीं तीन लगातार पूर्णांकों का गुणनफल 6 से विभाज्य होता है।
उदाहरण 7: सबसे छोटी सम अभाज्य संख्या कौन-सी है?
हल: अभाज्य संख्याएँ 2, 3, 5, 7, ... हैं। इनमें से 2 केवल वह अभाज्य संख्या है जो सम भी है। अन्य सभी अभाज्य संख्याएँ विषम होती हैं। उत्तर: 2
उदाहरण 8: 25 और 45 के बीच की सभी अभाज्य संख्याओं का योग ज्ञात कीजिए।
हल: 25 से 45 के बीच अभाज्य संख्याएँ हैं: 29, 31, 37, 41, 43। इनका योग = 29 + 31 + 37 + 41 + 43 = 181। उत्तर: 181
उदाहरण 9: यदि a एक विषम पूर्णांक है, तो a² क्या होगा?
हल: माना a = 5, तो a² = 25 जो विषम है। किसी भी विषम पूर्णांक का वर्ग सदैव विषम होता है। सामान्य रूप में विषम संख्या (2n + 1) का वर्ग = 4n² + 4n + 1 = 4n(n + 1) + 1, जो 1 अधिक सम संख्या है, अर्थात विषम। उत्तर: विषम पूर्णांक
| समुच्चय | प्रतीक | तत्व | सबसे छोटी संख्या |
|---|---|---|---|
| प्राकृतिक संख्याएँ | N | 1, 2, 3, 4, ... | 1 |
| पूर्ण संख्याएँ | W | 0, 1, 2, 3, ... | 0 |
| पूर्णांक | Z | ..., -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ... | कोई नहीं (अनंत) |
| धनात्मक पूर्णांक | Z+ | 1, 2, 3, ... | 1 |
| ऋणात्मक पूर्णांक | Z- | -1, -2, -3, ... | कोई नहीं |
| संक्रिया | चिह्न संयोजन | परिणाम |
|---|---|---|
| जोड़ | (+) + (+) | धनात्मक |
| जोड़ | (-) + (-) | ऋणात्मक |
| घटाव | (+) - (-) | जोड़ बन जाता है, धनात्मक |
| गुणा | (+) × (+) | धनात्मक |
| गुणा | (-) × (-) | धनात्मक |
| गुणा | (+) × (-) | ऋणात्मक |
| भाग | (-) ÷ (+) | ऋणात्मक |
flowchart TD
A[पूर्णांक और प्राकृतिक संख्याएँ] --> B[प्राकृतिक संख्याएँ]
A --> C[पूर्ण संख्याएँ]
A --> D[पूर्णांक]
B --> B1[1 से आरंभ]
C --> C1[प्राकृतिक + शून्य]
D --> D1[धनात्मक पूर्णांक]
D --> D2[शून्य]
D --> D3[ऋणात्मक पूर्णांक]
D --> E[चिह्न नियम]
D --> F[सम-विषम संख्याएँ]
D --> G[अभाज्य-भाज्य संख्याएँ]
E --> E1[समान चिह्न = धनात्मक]
E --> E2[भिन्न चिह्न = ऋणात्मक]
F --> F1[2n और 2n+1]
G --> G1[केवल 2 सम अभाज्य]
प्राकृतिक, पूर्ण और पूर्णांक संख्याएँ गणित के सबसे सरल परंतु सबसे आवश्यक आधार हैं। इन समुच्चयों के बीच के संबंध, चिह्न नियम तथा सम-विषम, अभाज्य-भाज्य संख्याओं के गुणधर्म एनटीपीसी परीक्षा के प्रश्नों को हल करने में सीधे सहायक सिद्ध होते हैं। अभ्यर्थी को इन परिभाषाओं को सटीकता से याद रखना चाहिए और रोजाना गणितीय संक्रियाओं का अभ्यास करना चाहिए ताकि परीक्षा कक्ष में ये नियम बिना विचारे स्वतः स्मरण आ जाएं। इस नींव के मजबूत होने पर बाकी के सभी अध्याय सरलता से सीखे जा सकते हैं।