18.1 कोशिका और कोशिकांग Notes

18.1 कोशिका और कोशिकांग

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) अध्याय: 18.1 कोशिका और कोशिकांग विषय-वस्तु: कोशिका संरचना

1. परिचय

कोशिका (Cell) जीवन की सबसे छोटी संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। रॉबर्ट हुक (1665) ने कॉर्क की पतली परत में सूक्ष्मदर्शी से देखकर पहली बार 'कोशिका' शब्द का प्रयोग किया, जबकि रॉबर्ट ब्राउन (1831) ने कोशिका में केंद्रक (Nucleus) की खोज की। बाद में श्लाइडन और श्वान (1838-39) ने कोशिका सिद्धांत का प्रतिपादन किया। आधुनिक कोशिका सिद्धांत को रुडोल्फ विरखो (1855) ने पूर्णता प्रदान की, जिन्होंने कहा कि 'सभी कोशिकाएँ पहले से विद्यमान कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं'। यह अध्याय RRB NTPC के सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रतिवर्ष 2-3 प्रश्न कोशिका और उसके अंगों पर आते हैं।

कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं—प्रोकैरियोटिक (केंद्रक झिल्ली रहित, जैसे जीवाणु) तथा यूकैरियोटिक (केंद्रक झिल्ली सहित, जैसे पादप एवं जंतु कोशिका)। यूकैरियोटिक कोशिकाओं में विभिन्न कोशिकांग विद्यमान होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशिष्ट कार्य है। कोशिकांगों की खोज तथा उनके कार्य, कोशिका झिल्ली की संरचना, केंद्रक का महत्व और कोशिका विभाजन की प्रक्रियाएँ इस अध्याय की प्रमुख विषय-वस्तु हैं। पादप कोशिका और जंतु कोशिका के बीच के अंतर को भी सदैव स्मरण रखना चाहिए।

कोशिका का आकार बहुत छोटा होता है, फिर भी अनेक कोशिकाएँ नग्न आँखों से दिखाई देती हैं, जैसे मुर्गी का अंडा और शुतुरमुर्ग का अंडा। मानव शरीर में लाखों करोड़ों कोशिकाएँ होती हैं, जो समान कार्य करने के लिए मिलकर ऊतक, अंग तथा अंग-तंत्र का निर्माण करती हैं। NTPC परीक्षा में कोशिकांगों के नाम, उनकी खोज करने वाले वैज्ञानिक, सबसे बड़ी/सबसे छोटी कोशिका, कोशिका झिल्ली की संरचना तथा कोशिका विभाजन से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

2. कोशिका की संरचना

कोशिका को सामान्यतः तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है—कोशिका झिल्ली (Cell Membrane), कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) और केंद्रक (Nucleus)। पादप कोशिकाओं में इनके अतिरिक्त कोशिका भित्ति भी होती है।

कोशिका भित्ति (Cell Wall): केवल पादप कोशिकाओं में पाई जाती है। यह सेलुलोज से बनी होती है और कोशिका को कठोरता, आकृति तथा यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करती है। यह जीवाणु और कवक में भी पाई जाती है, परंतु जंतु कोशिका में नहीं होती। चयापचय के लिए यह पूर्णतः निष्क्रिय होती है।

सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग का अंडा है, सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका (न्यूरॉन) है, तथा मानव शरीर में सबसे छोटी कोशिका लाल रक्त कणिका (RBC) नहीं बल्कि शुक्राणु का धारक सिर होता है; आमतौर पर RBC को सबसे छोटी कोशिका माना जाता है। NTPC में इस प्रकार के तथ्यात्मक प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।

3. प्रमुख कोशिकांग और उनके कार्य

कोशिका द्रव्य में अनेक कोशिकांग विद्यमान होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का विशिष्ट कार्य होता है। इनके नाम और कार्य नीचे दिए गए हैं:

कोशिकांगों की खोज और कार्यों का यह विवरण NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। हर कोशिकांग के साथ उसकी एक प्रसिद्ध उपमा (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया-पावर हाउस) और खोजकर्ता का नाम याद रखें।

4. कोशिका विभाजन और कोशिका सिद्धांत

कोशिका का जन्म, वृद्धि और नई कोशिकाओं का निर्माण कोशिका विभाजन द्वारा होता है। कोशिका विभाजन दो प्रकार का होता है—समसूत्री विभाजन (Mitosis) तथा अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)।

कोशिका सिद्धांत (Cell Theory): श्लाइडन और श्वान द्वारा प्रतिपादित तथा विरखो द्वारा संशोधित। इसके मुख्य बिंदु हैं—सभी सजीव कोशिकाओं से बने होते हैं; कोशिका जीवन की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है; तथा सभी नई कोशिकाएँ पहले से विद्यमान कोशिकाओं के विभाजन से उत्पन्न होती हैं।

प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक: प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं (जीवाणु, नील-हरित शैवाल) में केंद्रक झिल्ली, केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी काय आदि नहीं होते; इनका आनुवंशिक पदार्थ साइटोप्लाज्म में स्वतंत्र रहता है। यूकैरियोटिक कोशिकाओं में ये सभी कोशिकांग केंद्रक झिल्ली में बंद केंद्रक सहित विद्यमान होते हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

कोशिकांग प्रमुख कार्य उपमा
माइटोकॉन्ड्रिया ATP/ऊर्जा का निर्माण शक्ति गृह
राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण प्रोटीन का कारखाना
लाइसोसोम पदार्थों का पाचन/विनाश आत्मघाती थैला
गॉल्जी काय स्रावों का पैकेजिंग-परिवहन कोशिका का डाकघर
अंतर्द्रव्यी जालिका प्रोटीन/लिपिड का परिवहन कोशिका का परिवहन तंत्र
केंद्रक आनुवंशिक नियंत्रण कोशिका का नियंत्रक
क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण हरित कारखाना

तालिका 2

विशेषता पादप कोशिका जंतु कोशिका
कोशिका भित्ति विद्यमान (सेलुलोज) अनुपस्थित
प्लास्टिड विद्यमान अनुपस्थित
रिक्तिका बड़ी (एक) छोटी (अनेक)
सेंट्रीओल अनुपस्थित विद्यमान
आकृति स्थिर/आयताकार अनियमित/गोल
कोशिका झिल्ली स्थिति आंतरिक बाह्य सीमा

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[कोशिका और कोशिकांग] --> B[कोशिका की संरचना]
    B --> B1[कोशिका झिल्ली]
    B --> B2[कोशिका द्रव्य]
    B --> B3[केंद्रक]
    B --> B4[कोशिका भित्ति पादप में]
    A --> C[प्रमुख कोशिकांग]
    C --> C1[माइटोकॉन्ड्रिया शक्ति गृह]
    C --> C2[राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण]
    C --> C3[लाइसोसोम आत्मघाती थैला]
    C --> C4[गॉल्जी काय पैकेजिंग]
    C --> C5[अंतर्द्रव्यी जालिका परिवहन]
    C --> C6[प्लास्टिड प्रकाश संश्लेषण]
    A --> D[कोशिका विभाजन]
    D --> D1[समसूत्री माइटोसिस दो कोशिकाएँ]
    D --> D2[अर्धसूत्री मियोसिस चार कोशिकाएँ]
    A --> E[कोशिका सिद्धांत]
    E --> E1[श्लाइडन और श्वान]
    E --> E2[विरखो संशोधन]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

जंतु कोशिका के प्रमुख कोशिकांग केंद्रक नाभिका माइटोकॉन्ड्रिया राइबोसोम गॉल्जी काय लाइसोसोम अंतर्द्रव्यी जालिका स्वर्ण नियम माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का शक्ति गृह तथा लाइसोसोम आत्मघाती थैला है।

पादप कोशिका एवं कोशिका विभाजन कोशिका भित्ति कोशिका झिल्ली केंद्रक क्लोरोप्लास्ट रिक्तिका समसूत्री विभाजन प्रावस्था प्रोफेज मध्यावस्था मेटाफेज पश्चावस्था एनाफेज अंतावस्था टेलोफेज परिणाम दो पुत्री कोशिकाएँ अर्धसूत्री में चार पुत्री कोशिकाएँ गुणसूत्र संख्या आधी n स्वर्ण नियम पादप कोशिका में भित्ति व प्लास्टिड होते हैं, जंतु कोशिका में सेंट्रीओल।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: कोशिका की खोज का श्रेय रॉबर्ट ब्राउन को देना। वास्तव में कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने की थी; रॉबर्ट ब्राउन ने केंद्रक की खोज की।
  2. गलती: माइटोकॉन्ड्रिया को 'आत्मघाती थैला' और लाइसोसोम को 'शक्ति गृह' बताना। इन उपमाओं को कभी आपस में न बदलें।
  3. गलती: कोशिका भित्ति को सभी कोशिकाओं में उपस्थित मानना। जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति नहीं होती।
  4. गलती: अर्धसूत्री विभाजन में दो पुत्री कोशिकाएँ बताना। अर्धसूत्री में चार पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं जबकि समसूत्री में दो।
  5. गलती: क्लोरोप्लास्ट को जंतु कोशिका का कोशिकांग मानना। क्लोरोप्लास्ट केवल पादप कोशिका में पाया जाता है।
  6. गलती: 'सभी कोशिकाएँ पहले से विद्यमान कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं' का श्रेय श्लाइडन को देना। यह कथन रुडोल्फ विरखो का है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रत्येक कोशिकांग को उसकी उपमा और खोजकर्ता के साथ एक साथ याद करें—यह संयोजन NTPC में बार-बार पूछा जाता है।
  2. पादप और जंतु कोशिका के अंतर की तालिका (भित्ति, प्लास्टिड, रिक्तिका, सेंट्रीओल) रट लें।
  3. कोशिका विभाजन के नाम और परिणामी कोशिकाओं की संख्या (माइटोसिस-2, मियोसिस-4) को तार्किक रूप से जोड़ें।
  4. तथ्यात्मक प्रश्नों (सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग का अंडा, सबसे लंबी तंत्रिका कोशिका) के लिए अलग सूची बनाएँ।
  5. कोशिका सिद्धांत के प्रतिपादक (श्लाइडन-श्वान) और संशोधक (विरखो) का क्रम याद रखें।

10. निष्कर्ष

कोशिका और कोशिकांग जीव विज्ञान की सबसे आधारभूत अवधारणा है, जिसकी समझ के बिना शरीर विज्ञान, प्रजनन और आनुवंशिकी का अध्ययन संभव नहीं है। कोशिका झिल्ली की अर्ध-पारगम्यता, केंद्रक का नियंत्रण, माइटोकॉन्ड्रिया का ऊर्जा उत्पादन तथा कोशिका विभाजन के प्रकार—ये सभी बिंदु परीक्षा की दृष्टि से स्वर्णिम हैं। नियमित पुनरावृत्ति और कोशिकांगों के नाम-कार्य-खोजकर्ता का समुचित अभ्यास करने पर NTPC परीक्षा में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न आसानी से हल हो जाते हैं।