विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान)
अध्याय: 18.5 रक्त और परिसंचरण तंत्र
विषय-वस्तु: रक्त, हृदय
1. परिचय
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जो शरीर में ऑक्सीजन, पोषक तत्व, हार्मोन तथा अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है। यह शरीर का परिवहन माध्यम है। एक स्वस्थ वयस्क के शरीर में लगभग 5 से 6 लीटर रक्त होता है, जो शरीर के भार का लगभग 7 प्रतिशत होता है। रक्त का pH लगभग 7.4 (हल्का क्षारीय) होता है। रक्त का अध्ययन 'हेमेटोलॉजी' कहलाता है।
परिसंचरण तंत्र में मुख्यतः तीन घटक होते हैं—रक्त, रक्त वाहिकाएँ (धमनी, शिरा, केशिका) तथा हृदय। हृदय एक पेशीय पंप है जो रक्त को पूरे शरीर में प्रवाहित करता है। RRB NTPC परीक्षा में रक्त घटकों, रक्त समूह, हृदय की संरचना, रक्त वाहिकाओं के अंतर तथा रक्त से संबंधित विकारों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। यह अध्याय जीव विज्ञान के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है।
रक्त के मुख्य कार्य हैं—परिवहन, रक्षा (श्वेत रक्त कणिकाएँ), थक्का जमाना (प्लेटलेट), ताप नियंत्रण तथा शरीर का संतुलन बनाए रखना। इस अध्याय में रक्त की संरचना, रक्त वाहिकाएँ, हृदय तथा रक्त से संबंधित विकारों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
2. रक्त की संरचना और रक्त कोशिकाएँ
रक्त दो मुख्य भागों से बना होता है—तरल भाग (प्लाज्मा) तथा ठोस भाग (रक्त कोशिकाएँ)।
प्लाज्मा (Plasma): रक्त का लगभग 55 प्रतिशत भाग। यह हल्के पीले रंग का तरल है, जिसमें लगभग 90-92 प्रतिशत जल होता है। प्लाज्मा में प्रोटीन—एल्बुमिन, ग्लोब्युलिन तथा फाइब्रिनोजन—पाए जाते हैं। प्लाज्मा पोषक तत्व, हार्मोन, अपशिष्ट तथा CO2 का परिवहन करता है।
लाल रक्त कणिकाएँ (RBC/Erythrocytes): रक्त की सबसे अधिक संख्या में पाई जाने वाली कोशिकाएँ। इनमें हीमोग्लोबिन होता है, जो ऑक्सीजन का परिवहन करता है। परिपक्व RBC में केंद्रक नहीं होता। इनका जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है। RBC का निर्माण अस्थि मज्जा में होता है तथा इनका विनाश प्लीहा में होता है। RBC की संख्या पुरुषों में लगभग 5 मिलियन तथा महिलाओं में 4.5 मिलियन प्रति क्यूबिक मिलीमीटर होती है।
श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC/Leukocytes): शरीर की रक्षा करने वाली कोशिकाएँ; इन्हें 'सेना' भी कहते हैं। इनकी संख्या लगभग 4000 से 11000 प्रति क्यूबिक मिलीमीटर होती है। इनका मुख्य कार्य रोगाणुओं को नष्ट करना (फैगोसाइटोसिस) तथा प्रतिरक्षा प्रदान करना है। WBC में केंद्रक होता है। अधिकांश WBC का निर्माण अस्थि मज्जा में होता है।
प्लेटलेट (Blood Platelets/Thrombocytes): रक्त का थक्का जमाने वाले सूक्ष्म कण; इनकी संख्या लगभग 1.5 से 4.5 लाख प्रति क्यूबिक मिलीमीटर होती है। प्लेटलेट की कमी से 'हीमोफीलिया जैसी स्थिति' या रक्तस्राव बंद नहीं होता। इनकी कमी से डेंगू में रक्तस्राव का खतरा बढ़ता है।
रक्त के अन्य तथ्य: रक्त को 'तरल संयोजी ऊतक' कहा जाता है। रक्त का निर्माण (हेमटोपोइसिस) अस्थि मज्जा में होता है। शरीर में रक्त की मात्रा का 45 प्रतिशत कोशिकाएँ (हेमेटोक्रिट) बनाती हैं। RBC में हीमोग्लोबिन की मात्रा पुरुषों में 14-16 g/dL तथा महिलाओं में 12-14 g/dL होती है।
3. हृदय की संरचना और रक्त परिसंचरण
हृदय मुट्ठी के आकार का पेशीय अंग है, जो वक्ष गुहा में दोनों फेफड़ों के बीच स्थित होता है। यह पेरीकार्डियम नामक झिल्ली में ढका रहता है। हृदय की पेशी 'हृदय पेशी' कहलाती है।
हृदय के कक्ष (Chambers): हृदय में चार कक्ष होते हैं—ऊपर दो आलिंद (बायाँ एवं दायाँ) तथा नीचे दो निलय (बायाँ एवं दायाँ)। बायाँ निलय सबसे मोटी दीवार वाला कक्ष है, क्योंकि यह रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है।
हृदय वाल्व (Valves): रक्त को एक दिशा में प्रवाहित रखने के लिए वाल्व होते हैं। बाइकस्पिड (माइट्रल) वाल्व बाएँ आलिंद-निलय के बीच तथा ट्राइकस्पिड वाल्व दाएँ आलिंद-निलय के बीच होता है। फुफ्फुसीय तथा महाधमनी वाल्व निलय से बाहर जाने वाले मार्गों पर होते हैं।
परिसंचरण का मार्ग: बायाँ निलय → महाधमनी → शरीर की धमनियाँ → केशिकाएँ → शिराएँ → दायाँ आलिंद → दायाँ निलय → फुफ्फुसीय धमनी → फेफड़े → फुफ्फुसीय शिरा → बायाँ आलिंद → बायाँ निलय। इस प्रकार रक्त दो मार्गों में प्रवाहित होता है—प्रणालीगत परिसंचरण तथा फुफ्फुसीय परिसंचरण।
हृदय गति: स्वस्थ वयस्क की सामान्य हृदय गति लगभग 72 बार प्रति मिनट होती है। हृदय का अध्ययन 'कार्डियोलॉजी' तथा रक्त परिसंचरण का 'हेमोडायनामिक्स' कहलाता है। हृदय गति को मापने के लिए स्टेथोस्कोप तथा ECG का उपयोग होता है।
रक्त वाहिकाएँ (Blood Vessels): धमनियाँ ऑक्सीजन युक्त रक्त (हृदय से दूर) ले जाती हैं, शिराएँ CO2 युक्त रक्त (हृदय की ओर) लाती हैं, जबकि केशिकाएँ धमनियों व शिराओं को जोड़ती हैं। फुफ्फुसीय धमनी अपवाद है जो शुद्ध अपवाहित (deoxygenated) रक्त ले जाती है। धमनियों में वाल्व नहीं होते, शिराओं में वाल्व होते हैं।
धमनी-शिरा का अंतर: धमनियाँ हृदय से दूर रक्त ले जाती हैं, दबाव अधिक होता है, दीवार मोटी, और इनमें वाल्व नहीं होते। शिराएँ हृदय की ओर रक्त लाती हैं, दबाव कम, दीवार पतली तथा इनमें वाल्व होते हैं।
4. रक्त समूह और रक्त से संबंधित विकार
रक्त समूह (Blood Group) का अध्ययन कार्ल लैंडस्टीनर ने किया। मुख्य रक्त समूह चार होते हैं—A, B, AB तथा O।
ABO तंत्र: इसमें एंटीजन (A, B) और एंटीबॉडी (anti-A, anti-B) की उपस्थिति के आधार पर रक्त समूह निर्धारित होते हैं। AB समूह को सार्वत्रिक ग्राही तथा O समूह को सार्वत्रिक दाता कहा जाता है।
Rh कारक: Rh पॉजिटिव तथा Rh नेगेटिव रक्त में अंतर करता है। Rh नेगेटिव माँ तथा Rh पॉजिटिव शिशु में 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटैलिस' हो सकता है।
रक्तदान: रक्तदान से शरीर को कोई हानि नहीं होती; दान किया गया रक्त प्लाज्मा द्वारा शीघ्र पूर्ण होता है। रक्तदान में RBC का पूर्ण होना लगभग 3-4 सप्ताह में होता है।
रक्त विकार: एनीमिया (रक्ताल्पता)—हीमोग्लोबिन की कमी; हीमोफीलिया—रक्त का थक्का न जमना (आनुवंशिक, X-गुणसूत्र से जुड़ा); ल्यूकेमिया—WBC का असामान्य बढ़ना (रक्त कैंसर); ल्यूकोपेनिया—WBC की कमी; थ्रोम्बोसाइटोपेनिया—प्लेटलेट की कमी।
रक्तचाप (Blood Pressure): सामान्य रक्तचाप लगभग 120/80 mm Hg होता है। सिस्टोलिक दाब (120) निलय संकुचन के समय तथा डायस्टोलिक दाब (80) शिथिलन के समय होता है। उच्च रक्तचाप को हाइपरटेंशन कहते हैं।
रक्त में गैस परिवहन: ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन से मिलकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है। CO2 का अधिकांश भाग प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट के रूप में तथा कुछ भाग कार्बामिनोहीमोग्लोबिन के रूप में परिवहन होता है।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
रक्त घटक
मात्रा/सामान्य मान
मुख्य कार्य
प्लाज्मा
रक्त का 55%
परिवहन
RBC
4.5-5 मिलियन/घन मिमी
ऑक्सीजन परिवहन
WBC
4000-11000/घन मिमी
रोगों से रक्षा
प्लेटलेट
1.5-4.5 लाख/घन मिमी
रक्त का थक्का
हीमोग्लोबिन
14-16 g/dL
ऑक्सीजन वाहक
तालिका 2
रक्त वाहिका
रक्त की दिशा
विशेषता
धमनी
हृदय से दूर
मोटी दीवार, उच्च दाब, वाल्व नहीं
शिरा
हृदय की ओर
पतली दीवार, वाल्व
केशिका
धमनी-शिरा के बीच
सूक्ष्म, गैस विनिमय
फुफ्फुसीय धमनी
हृदय से फेफड़े
अपवाहित रक्त ले जाती है
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[रक्त और परिसंचरण तंत्र] --> B[रक्त घटक]
B --> B1[प्लाज्मा]
B --> B2[लाल रक्त कणिका]
B --> B3[श्वेत रक्त कणिका]
B --> B4[प्लेटलेट]
A --> C[हृदय]
C --> C1[दो आलिंद]
C --> C2[दो निलय]
C --> C3[वाल्व]
C --> C4[72 बार प्रति मिनट]
A --> D[रक्त वाहिकाएँ]
D --> D1[धमनी]
D --> D2[शिरा]
D --> D3[केशिका]
A --> E[रक्त समूह]
E --> E1[A B AB O]
E --> E2[AB सार्वत्रिक ग्राही]
E --> E3[O सार्वत्रिक दाता]
A --> F[विकार]
F --> F1[एनीमिया]
F --> F2[हीमोफीलिया]
F --> F3[ल्यूकेमिया]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलती: फुफ्फुसीय धमनी को ऑक्सीजन युक्त रक्त ले जाने वाली बताना। फुफ्फुसीय धमनी अपवाहित (deoxygenated) रक्त ले जाती है।
गलती: O समूह को सार्वत्रिक ग्राही और AB को सार्वत्रिक दाता बताना। वास्तव में O सार्वत्रिक दाता तथा AB सार्वत्रिक ग्राही है।
गलती: RBC का जीवनकाल 300 दिन बताना। RBC का जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है।
गलती: शिराओं में वाल्व नहीं होते बताना। वाल्व शिराओं में होते हैं, धमनियों में नहीं।
गलती: रक्त का pH 7.0 या अम्लीय बताना। रक्त का pH लगभग 7.4 (हल्का क्षारीय) होता है।
गलती: हृदय की सबसे मोटी दीवार दाएँ निलय की बताना। सबसे मोटी दीवार बाएँ निलय की होती है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
रक्त घटकों की संख्या (RBC, WBC, प्लेटलेट) तथा हीमोग्लोबिन के सामान्य मानों की तालिका याद करें।
धमनी-शिरा के अंतर (दिशा, दाब, वाल्व, दीवार) को स्पष्ट रूप से पहचानें।
ABO रक्त समूह के नियम तथा सार्वत्रिक दाता-ग्राही का तथ्य याद रखें।
हृदय के चार कक्षों, वाल्वों तथा परिसंचरण मार्ग को आरेख सहित पढ़ें।
रक्त विकारों (एनीमिया, हीमोफीलिया, ल्यूकेमिया) के कारण एवं लक्षण जोड़कर स्मरण करें।
10. निष्कर्ष
रक्त और परिसंचरण तंत्र शरीर के सभी अंगों को पोषण, ऑक्सीजन तथा सुरक्षा प्रदान करने वाला प्रमुख तंत्र है। रक्त के घटक, हृदय की संरचना, रक्त वाहिकाएँ, रक्त समूह तथा रक्त विकार—ये NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। संख्यात्मक तथ्यों (72 हृदय गति, 120/80 दाब, 120 दिन RBC जीवनकाल) को विशेष रूप से स्मरण रखना चाहिए। व्यवस्थित तालिकाओं तथा नियमित अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।