विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) अध्याय: 18.10 रोग, पोषण और स्वास्थ्य विषय-वस्तु: रोग, पोषण
स्वास्थ्य विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की परिभाषा के अनुसार पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की अवस्था है, न कि केवल रोग या दुर्बलता का अभाव। पोषण (Nutrition) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर भोजन से आवश्यक पोषक तत्व ग्रहण कर वृद्धि, मरम्मत तथा ऊर्जा प्राप्त करता है। संतुलित आहार और स्वच्छता स्वास्थ्य के मूल आधार हैं। RRB NTPC परीक्षा में रोग, पोषण और स्वास्थ्य से संतुलित आहार, विटामिनों की कमी, रोगों के कारक, प्रतिरक्षा तथा टीकाकरण पर प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
रोग (Disease) शरीर की सामान्य क्रियाओं में विघटन की स्थिति है। रोग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—संचारी (छूत के) रोग तथा असंचारी (गैर-संचारी) रोग। संचारी रोगों के कारक (रोगाणु)—जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटोजोआ तथा कृमि हैं। असंचारी रोग जीवनशैली, पोषण की कमी या आनुवंशिक कारणों से होते हैं। प्रतिरक्षा तंत्र शरीर को रोगों से बचाता है, जिसे टीकाकरण द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
मानव शरीर को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण, जल तथा रेशे की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी भी पोषक तत्व की कमी से विशेष रोग उत्पन्न होते हैं, जैसे विटामिन A की कमी से रतौंधी। इस अध्याय में पोषक तत्व, संतुलित आहार, रोगों के प्रकार, प्रमुख रोग तथा टीकाकरण का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
पोषक तत्व वे पदार्थ हैं जिनकी शरीर को वृद्धि, ऊर्जा और स्वास्थ्य के लिए आवश्यकता होती है। प्रमुख पोषक तत्व निम्न हैं:
संतुलित आहार (Balanced Diet): वह आहार जिसमें शरीर की आवश्यकता के अनुसार सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में मौजूद हों। इसमें कार्बोहाइड्रेट 50-60%, प्रोटीन 10-15%, वसा 20-30% तथा विटामिन-खनिज-जल-रेशा उचित अनुपात में होते हैं। पोषण विज्ञान में ऊर्जा की इकाई किलो कैलोरी (kcal) है। संतुलित आहार का सेवन करने से कुपोषण से बचा जा सकता है।
विटामिनों की खोज: विटामिन की खोज हॉपकिंस तथा 'विटामिन' शब्द का प्रयोग फंक ने किया। विटामिन शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
रोग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—संचारी रोग (Communicable/Infectious) तथा असंचारी रोग (Non-communicable)।
संचारी रोग (रोगाणुओं द्वारा): - जीवाणुजन्य (Bacterial): हैजा (विब्रियो कॉलेरी), तपेदिक (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस), निमोनिया, टाइफाइड (साल्मोनेला), प्लेग, डिप्थीरिया। - विषाणुजन्य (Viral): इन्फ्लूएंजा, खसरा, चेचक, पोलियो, रेबीज, एड्स (HIV), कोविड-19। - प्रोटोजोआ जन्य: मलेरिया (प्लाज्मोडियम), अमीबी पेचिश (एंटअमीबा), काला-आज़ार (लीशमैनिया)। मलेरिया का वाहक मादा एनोफिलीज मच्छर है। - कवकजन्य: दाद, खुजली (रिंगवर्म)। - कृमिजन्य: फीताकृमि, गोल कृमि (एस्केरिस), एलिफेंटियासिस (फाइलेरिया)।
रोग वाहक (Vectors): मलेरिया-मादा एनोफिलीज मच्छर, डेंगू/चिकनगुनिया-एडीज मच्छर, प्लेग-चूहे का पिस्सू। रोगाणु रोगी से स्वस्थ व्यक्ति में वायु, जल, भोजन, कीट तथा संपर्क द्वारा फैलते हैं।
असंचारी रोग: मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर, मोटापा तथा विटामिन की कमी से होने वाले रोग। ये जीवनशैली, आहार तथा आनुवंशिक कारणों से होते हैं।
कुपोषण से होने वाले रोग: क्वाशियोरकर (प्रोटीन की कमी), मैरास्मस (प्रोटीन-ऊर्जा की कमी), रतौंधी (विटामिन A), बेरीबेरी (विटामिन B1), स्कर्वी (विटामिन C), रिकेट्स (विटामिन D), पेलाग्रा (विटामिन B3), एनीमिया (आयरन), गॉयटर (आयोडीन)।
प्रतिरक्षा (Immunity) शरीर की रोगाणुओं से लड़ने तथा उन्हें नष्ट करने की क्षमता है। प्रतिरक्षा तंत्र को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है:
टीकाकरण (Vaccination): टीका शरीर में प्रवेश कराने से शरीर एंटीबॉडी बनाता है और रोग से सुरक्षित हो जाता है। टीकाकरण की खोज एडवर्ड जेनर (चेचक) ने की, जबकि रेबीज का टीका लुई पाश्चर ने विकसित किया। टीकों में कमजोर या निष्क्रिय रोगाणु होते हैं।
प्रमुख टीकाकरण: BCG—तपेदिक (जन्म पर), OPV/पोलियो—पोलियो, DPT—डिप्थीरिया, कुकुर खाँसी, टिटनेस, MMR—खसरा, गलसुआ, रूबेला, हेपेटाइटिस B टीका—पीलिया। COVID-19 के लिए विभिन्न टीके विकसित हुए।
रोग प्रतिरोधक तंत्र: श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC) रोगों से लड़ती हैं। एंटीबॉडी रोगाणुओं को निष्क्रिय करते हैं। एड्स (AIDS) में प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है, क्योंकि HIV T-लिम्फोसाइट (CD4 कोशिका) को नष्ट करता है। एड्स का पूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं है, केवल रोकथाम संभव है।
स्वास्थ्य सुझाव: स्वच्छता, संतुलित आहार, व्यायाम, शुद्ध जल तथा टीकाकरण स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। एड्स, हेपेटाइटिस B जैसे रोगों के लिए जागरूकता आवश्यक है।
| विटामिन | कमी से रोग | प्रमुख स्रोत |
|---|---|---|
| विटामिन A | रतौंधी | गाजर, पपीता, दूध |
| विटामिन B1 | बेरीबेरी | अनाज, मूँगफली |
| विटामिन C | स्कर्वी | नींबू, आँवला |
| विटामिन D | रिकेट्स | सूर्य प्रकाश |
| विटामिन K | रक्तस्राव | पत्तेदार सब्जियाँ |
| रोग | कारक | वाहक/संचरण |
|---|---|---|
| मलेरिया | प्लाज्मोडियम | मादा एनोफिलीज मच्छर |
| हैजा | विब्रियो कॉलेरी | दूषित जल-भोजन |
| तपेदिक | जीवाणु | वायु |
| एड्स | HIV विषाणु | रक्त-शारीरिक स्राव |
| डेंगू | विषाणु | एडीज मच्छर |
flowchart TD
A[रोग पोषण और स्वास्थ्य] --> B[पोषक तत्व]
B --> B1[कार्बोहाइड्रेट]
B --> B2[प्रोटीन]
B --> B3[वसा]
B --> B4[विटामिन]
B --> B5[खनिज]
A --> C[रोगों के प्रकार]
C --> C1[संचारी]
C --> C2[असंचारी]
A --> D[रोगाणु]
D --> D1[जीवाणु]
D --> D2[विषाणु]
D --> D3[प्रोटोजोआ]
D --> D4[कवक]
A --> E[विटामिन की कमी]
E --> E1[रतौंधी A]
E --> E2[स्कर्वी C]
E --> E3[रिकेट्स D]
A --> F[प्रतिरक्षा]
F --> F1[टीकाकरण]
F --> F2[WBC एंटीबॉडी]
F --> F3[BCG तपेदिक]
रोग, पोषण और स्वास्थ्य का अध्ययन न केवल परीक्षा के लिए बल्कि जीवन के लिए भी आवश्यक है। संतुलित आहार, विटामिन-खनिजों की उचित मात्रा, स्वच्छता तथा टीकाकरण स्वास्थ्य के मूल स्तंभ हैं। विटामिन की कमी से होने वाले रोग, रोगाणु जन्य रोग तथा प्रतिरक्षा तंत्र NTPC परीक्षा के प्रमुख विषय हैं। तालिकाओं के रूप में व्यवस्थित अध्ययन तथा नियमित पुनरावृत्ति से इस अध्याय में पूर्ण अंक अर्जित किए जा सकते हैं।