विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (रसायन विज्ञान) अध्याय: 17.1 पदार्थ और उसके गुण विषय-वस्तु: पदार्थ, गुण
हमारे चारों ओर जो कुछ भी दिखाई देता है—किताब, कुर्सी, पानी, हवा, मेज, बादल—सभी पदार्थ हैं। विज्ञान की परिभाषा के अनुसार जिस वस्तु में द्रव्यमान होता है और जो स्थान (आयतन) घेरती है, उसे पदार्थ कहते हैं। पदार्थ केवल एक या दो रूपों में नहीं पाया जाता, बल्कि यह तीन मुख्य अवस्थाओं—ठोस, द्रव और गैस—में विद्यमान रहता है। पानी इसका सबसे अच्छा उदाहरण है; यह ठोस अवस्था में बर्फ, द्रव अवस्था में जल तथा गैस अवस्था में जलवाष्प के रूप में मिलता है। पदार्थ का यह त्रिगुण स्वरूप रसायन विज्ञान की सबसे आधारभूत अवधारणा है और RRB NTPC की परीक्षा में इससे प्रतिवर्ष एक या दो प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं।
पदार्थ के अध्ययन का प्रारंभ भारतीय दार्शनिकों के समय से ही हो चुका था, जब महर्षि कणाद ने पदार्थ के सूक्ष्मतम कण को 'परमाणु' की संज्ञा दी थी। यूनानी दार्शनिकों ने भी पदार्थ को वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी जैसे तत्वों से बना माना था। आधुनिक विज्ञान में पदार्थ की सबसे महत्वपूर्ण देन कणिका सिद्धांत है, जिसके अनुसार पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों से बना होता है और इन कणों के बीच रिक्त स्थान होता है। तापमान और दाब के बदलने पर ये कण गतिशील हो जाते हैं, जिससे पदार्थ की अवस्था बदल जाती है। इसी सिद्धांत से वाष्पीकरण, संघनन, गलन और ऊर्ध्वपातन जैसी सभी प्रक्रियाओं को समझा जा सकता है।
पदार्थ का वैज्ञानिक अध्ययन तीन स्तरों पर किया जाता है—पहला भौतिक स्तर, जिसमें अवस्थाएँ, रंग, गंध, घनत्व और कठोरता जैसे भौतिक गुण शामिल हैं; दूसरा रासायनिक स्तर, जिसमें रासायनिक अभिक्रिया करने की क्षमता, दहन, संक्षारण जैसे रासायनिक गुण आते हैं; तथा तीसरा संरचनात्मक स्तर, जिसमें तत्व, यौगिक और मिश्रण का वर्गीकरण शामिल है। NTPC परीक्षा में प्रश्न प्रायः पदार्थ की अवस्थाओं, अवस्था परिवर्तन की प्रक्रियाओं तथा भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों के अंतर पर केंद्रित होते हैं। इसलिए इस अध्याय की मूल अवधारणाओं को उदाहरण सहित समझना अत्यंत आवश्यक है।
कणिका सिद्धांत के प्रमुख आधार हैं—पदार्थ बहुत छोटे-छोटे कणों से बना है, कणों के बीच रिक्त स्थान है, कण निरंतर गति में रहते हैं और कणों के बीच आकर्षण बल (अंतरा-अणुक बल) कार्य करता है। तापमान बढ़ने पर कणों की गति बढ़ती है, जबकि बाह्य दाब बढ़ने पर कणों के बीच की दूरी घट जाती है।
तापमान और दाब के प्रभाव को समझना आवश्यक है। जब ठोस को गर्म करते हैं तो कणों की गति बढ़ती है, वे एक-दूसरे से दूर हटते हैं और द्रव में बदल जाते हैं। द्रव को और गर्म करने पर वह गैस बन जाता है। इसी प्रकार गैस पर दाब बढ़ाने और तापमान घटाने से वह द्रव तथा फिर ठोस में बदल जाती है। इस प्रकार पदार्थ की अवस्था केवल तापमान और दाब पर निर्भर करती है।
पदार्थ के गुणों को दो प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है—भौतिक गुण और रासायनिक गुण।
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन के बीच के अंतर को उदाहरणों से स्पष्ट करते हैं। जब बर्फ पिघलकर पानी बनती है तो दोनों का रासायनिक सूत्र H₂O ही रहता है, अतः यह भौतिक परिवर्तन है। परंतु जब दूध से दही बनता है तो दूध का लैक्टोज लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है, अतः यह रासायनिक परिवर्तन है। इसी प्रकार मोमबत्ती का जलना एक विशेष उदाहरण है—मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन है, जबकि मोम का जलना रासायनिक परिवर्तन है।
कार्य उदाहरण: निम्नलिखित परिवर्तनों को भौतिक या रासायनिक में वर्गीकृत कीजिए—(क) लोहे का पिघलना, (ख) लोहे में जंग लगना, (ग) शक्कर का पानी में घुलना, (घ) मोमबत्ती की बत्ती का जलना।
हल—(क) लोहे का पिघलना भौतिक परिवर्तन है क्योंकि लोहे की रासायनिक संरचना Fe ही रहती है। (ख) जंग लगने पर लोहे का Fe₂O₃·xH₂O (हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड) बन जाता है, अतः यह रासायनिक परिवर्तन है। (ग) शक्कर का घुलना भौतिक परिवर्तन है क्योंकि वाष्पीकरण पर शक्कर वापस मिल जाती है। (घ) बत्ती का जलना रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि जलने पर CO₂ और जल बनते हैं।
अवस्था परिवर्तन से संबंधित निम्न प्रक्रियाएँ परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं:
कार्य उदाहरण: 100°C तापमान पर जल उबलता है, परंतु पहाड़ों पर जल 100°C से कम तापमान पर क्यों उबलता है?
हल—वायुमंडलीय दाब कम होने पर क्वथनांक घट जाता है। पहाड़ों पर वायुमंडलीय दाब कम होता है, अतः जल 100°C से पहले ही उबलने लगता है। इसका अर्थ यह भी है कि पहाड़ों पर भोजन पकने में अधिक समय लगता है, क्योंकि पानी का तापमान 100°C तक नहीं पहुँच पाता।
तापमान बढ़ने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे कणों के बीच की दूरी बढ़ जाती है। इसी कारण गर्म करने पर ठोस, द्रव और गैस सभी का प्रसार होता है। ठोस में प्रसार न्यूनतम, द्रव में मध्यम तथा गैस में अधिकतम होता है। थर्मामीटर में पारा इसी सिद्धांत पर कार्य करता है। गैसों में प्रसार की सबसे अधिक क्षमता होती है, यही कारण है कि गैस पूरे बर्तन में तेजी से फैल जाती है।
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| आकृति | निश्चित | निश्चित नहीं | निश्चित नहीं |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | निश्चित नहीं |
| कणों की दूरी | न्यूनतम | मध्यम | अधिकतम |
| आकर्षण बल | अधिकतम | मध्यम | न्यूनतम |
| संपीड्यता | नगण्य | बहुत कम | अधिकतम |
| घनत्व | उच्चतम | मध्यम | न्यूनतम |
| कणों की गति | न्यूनतम | मध्यम | अधिकतम |
| प्रक्रिया | परिवर्तन | उदाहरण |
|---|---|---|
| गलन | ठोस → द्रव | बर्फ का पिघलना (0°C) |
| क्वथन | द्रव → गैस | जल का उबलना (100°C) |
| संघनन | गैस → द्रव | भाप का जल बनना |
| हिमीकरण | द्रव → ठोस | पानी का बर्फ बनना |
| ऊर्ध्वपातन | ठोस → गैस | कपूर, आयोडीन, नेफ्थलीन |
| वाष्पीकरण | द्रव की सतह से गैस | गीले कपड़े का सूखना |
flowchart TD
A[पदार्थ और उसके गुण] --> B[तीन अवस्थाएँ]
B --> B1[ठोस निश्चित आकृति व आयतन]
B --> B2[द्रव निश्चित आयतन आकृति अनिश्चित]
B --> B3[गैस न तो आकृति न आयतन]
A --> C[कणिका सिद्धांत]
C --> C1[कणों के बीच रिक्त स्थान]
C --> C2[निरंतर गति और आकर्षण बल]
A --> D[गुणों के प्रकार]
D --> D1[भौतिक गुण रंग घनत्व गलनांक]
D --> D2[रासायनिक गुण दहन संक्षारण]
A --> E[अवस्था परिवर्तन]
E --> E1[गलन और क्वथन]
E --> E2[संघनन और हिमीकरण]
E --> E3[ऊर्ध्वपातन]
A --> F[भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन]
पदार्थ और उसके गुण रसायन विज्ञान की वह आधारशिला है, जिस पर परमाणु, अणु, तत्व, यौगिक और रासायनिक अभिक्रियाओं का संपूर्ण अध्ययन टिका हुआ है। तीन अवस्थाओं की विशेषताएँ, कणिका सिद्धांत, भौतिक-रासायनिक परिवर्तन का अंतर तथा गलन, क्वथन, ऊर्ध्वपातन जैसी प्रक्रियाएँ हर NTPC परीक्षा में प्रश्न जन्म देती हैं। इन मूल अवधारणाओं को दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़कर समझने से न केवल इस अध्याय में बल्कि रसायन विज्ञान के प्रत्येक आगामी अध्याय में स्थायी समझ विकसित होती है। नियमित पुनरावृत्ति और पिछले वर्षों के प्रश्नों के अभ्यास से ये सरल अंक NTPC परीक्षा में निश्चित रूप से प्राप्त किए जा सकते हैं।