16.8 विद्युत धारा और परिपथ Notes

16.8 विद्युत धारा और परिपथ

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (भौतिक विज्ञान) अध्याय: 16.8 विद्युत धारा और परिपथ विषय-वस्तु: धारा, परिपथ, ओम नियम

1. परिचय

विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर है। जब चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दिशा में प्रवाहित होते हैं, तो विद्युत धारा उत्पन्न होती है। धारा की दिशा धन आवेश के प्रवाह की दिशा में मानी जाती है, जो इलेक्ट्रॉनों की गति की विपरीत दिशा होती है। विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पियर (A) है। 1 एम्पियर = 1 कूलॉम/सेकंड। धारा मापने का यंत्र एमीटर है, जो परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। विद्युत धारा के प्रवाह के लिए एक संपूर्ण बंद परिपथ आवश्यक होता है।

परिपथ वह बंद पथ है जिससे होकर धारा प्रवाहित होती है। परिपथ में विद्युत स्रोत (सेल या बैटरी), चालक तार, स्विच तथा भार (बल्ब, मोटर आदि) होते हैं। जब परिपथ बंद होता है तो धारा प्रवाहित होती है, परिपथ खुला होने पर धारा नहीं बहती। परिपथ में आवेश की मात्रा मापने का मात्रक कूलॉम है। सेल के अंदर रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदलती है। एक बैटरी में एक से अधिक सेल श्रेणीक्रम या समांतर क्रम में जोड़े जाते हैं।

इस अध्याय में हम विद्युत धारा, विभवांतर, प्रतिरोध, ओम का नियम, प्रतिरोधों का श्रेणीक्रम-समांतर संयोजन, विद्युत शक्ति, विद्युत ऊर्जा, विद्युत उपकरणों की सुरक्षा तथा दैनिक जीवन में विद्युत के उपयोग का अध्ययन करेंगे। ओम का नियम विद्युत परिपथ का सबसे महत्वपूर्ण नियम है, जो धारा, विभवांतर और प्रतिरोध के बीच संबंध स्थापित करता है। NTPC परीक्षा में इस अध्याय से वैचारिक और संख्यात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. विद्युत धारा, विभवांतर और प्रतिरोध

हल किया गया उदाहरण: एक चालक में 10 सेकंड में 20 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है। धारा ज्ञात कीजिए। हल: I = Q/t = 20/10 = 2 A

हल किया गया उदाहरण: एक विद्युत हीटर का प्रतिरोध 220 Ω है तथा इसमें 2 A की धारा प्रवाहित होती है। विभवांतर ज्ञात कीजिए। हल: V = I × R = 2 × 220 = 440 V

3. प्रतिरोधों का संयोजन: श्रेणीक्रम और समांतर क्रम

हल किया गया उदाहरण: 10 Ω, 20 Ω तथा 30 Ω के प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। हल: R = 10 + 20 + 30 = 60 Ω

हल किया गया उदाहरण: 10 Ω तथा 20 Ω के दो प्रतिरोधों को समांतर क्रम में जोड़ा गया है। कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। हल: 1/R = 1/10 + 1/20 = (2 + 1)/20 = 3/20 → R = 20/3 ≈ 6.67 Ω

हल किया गया उदाहरण: 220 V पर कार्य करने वाले 1100 W के हीटर में प्रवाहित धारा ज्ञात कीजिए। हल: P = V × I → I = P/V = 1100/220 = 5 A

4. विद्युत परिपथ, सुरक्षा उपाय और दैनिक उपयोग

हल किया गया उदाहरण: 100 W का बल्ब प्रतिदिन 5 घंटे जलता है। 30 दिन में कितनी विद्युत ऊर्जा (kWh) व्यय होगी? हल: E = P × t = 0.1 kW × 5 × 30 = 15 kWh

हल किया गया उदाहरण: 200 Ω प्रतिरोध के चालक में 2 A धारा प्रवाहित होती है। 10 सेकंड में उत्पन्न ऊष्मा ज्ञात कीजिए। हल: H = I²Rt = 2² × 200 × 10 = 4 × 2000 = 8000 J

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

राशि सूत्र SI मात्रक यंत्र
विद्युत धारा I = Q/t एम्पियर (A) एमीटर
विभवांतर V = W/Q वोल्ट (V) वोल्टमीटर
प्रतिरोध R = V/I ओम (Ω) ओममीटर
शक्ति P = VI वाट (W) वाटमीटर
आवेश Q = It कूलॉम (C) -

तालिका 2

संयोजन कुल प्रतिरोध सूत्र धारा विभवांतर
श्रेणीक्रम R = R₁ + R₂ + R₃ सभी में समान विभाजित
समांतर 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ विभाजित सभी में समान
श्रेणीक्रम विशेष nR - -
समांतर विशेष R/n - -

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[16.8 विद्युत धारा और परिपथ] --> B[विद्युत धारा]
    B --> B1[I = Q ÷ t]
    B --> B2[एम्पियर मात्रक]
    B --> B3[एमीटर से मापन]
    A --> C[विभवांतर]
    C --> C1[V = W ÷ Q]
    C --> C2[वोल्ट मात्रक]
    C --> C3[वोल्टमीटर]
    A --> D[ओम का नियम]
    D --> D1[V = IR]
    D --> D2[प्रतिरोध ओम]
    A --> E[प्रतिरोध संयोजन]
    E --> E1[श्रेणीक्रम जोड़ने पर]
    E --> E2[समांतर व्युत्क्रम जोड़ने पर]
    A --> F[विद्युत शक्ति]
    F --> F1[P = VI]
    F --> F2[वाट मात्रक]
    A --> G[विद्युत ऊर्जा]
    G --> G1[E = Pt]
    G --> G2[किलोवाट घंटा]
    A --> H[सुरक्षा]
    H --> H1[फ्यूज]
    H --> H2[अर्थिंग]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

सरल विद्युत परिपथ + सेल बल्ब स्विच धारा प्रवाह की दिशा स्वर्ण नियम: धारा के लिए बंद परिपथ अनिवार्य है।

विभवांतर बनाम धारा ग्राफ (ओम का नियम) 0 धारा I (एम्पियर) विभवांतर V (वोल्ट) सीधी रेखा: ओम नियम ढाल = प्रतिरोध R = V ÷ I स्वर्ण नियम: V-I ग्राफ की ढाल प्रतिरोध दर्शाती है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. धारा की दिशा इलेक्ट्रॉन की दिशा में मानना: धारा की दिशा धन आवेश की दिशा में होती है, जो इलेक्ट्रॉनों की दिशा के विपरीत है।
  2. वोल्टमीटर को श्रेणीक्रम में जोड़ना: वोल्टमीटर सदैव समांतर क्रम में जोड़ा जाता है, एमीटर श्रेणीक्रम में।
  3. ओम का नियम सभी चालकों पर लागू मानना: यह केवल धात्विक (ओमिक) चालकों पर लागू होता है।
  4. श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध की गणना व्युत्क्रम से करना: श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है, समांतर में व्युत्क्रम जोड़े जाते हैं।
  5. शक्ति की इकाई kWh को शक्ति मानना: kWh ऊर्जा की इकाई है, शक्ति की इकाई वाट है।
  6. फ्यूज को समांतर क्रम में लगाना: फ्यूज सदैव श्रेणीक्रम में लगाया जाता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. I = Q/t, V = IR, P = VI, E = Pt — इन चार मूल सूत्रों को स्मरण रखें, अधिकांश प्रश्न इन्हीं पर आधारित हैं।
  2. श्रेणीक्रम में धारा समान और समांतर में विभवांतर समान रहता है, इस तथ्य से संख्यात्मक प्रश्न आसानी से हल होंगे।
  3. समांतर संयोजन के प्रश्न में सूत्र 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ का प्रयोग करें।
  4. बल्ब की रेटिंग से प्रतिरोध R = V²/P से ज्ञात कर सकते हैं।
  5. kWh की गणना में शक्ति kW में और समय घंटे में लें, फिर गुणा करें।
  6. फ्यूज, अर्थिंग और एमसीबी विद्युत सुरक्षा के उपाय हैं, इनके प्रश्न बार-बार आते हैं।

10. निष्कर्ष

विद्युत धारा और परिपथ आधुनिक जीवन का आधार हैं। धारा, विभवांतर और प्रतिरोध की मूल अवधारणाओं तथा ओम के नियम की समझ से विद्युत परिपथ के सभी प्रश्न हल हो जाते हैं। प्रतिरोधों के श्रेणीक्रम-समांतर संयोजन, विद्युत शक्ति तथा विद्युत ऊर्जा की गणना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। फ्यूज, अर्थिंग जैसे सुरक्षा उपायों की जानकारी न केवल परीक्षा में बल्कि वास्तविक जीवन में भी उपयोगी है। विद्युत बिल की गणना और उपकरणों की रेटिंग की समझ दैनिक जीवन से जुड़ी है। संख्यात्मक अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण निपुणता प्राप्त की जा सकती है। यह अध्याय NTPC के लिए अत्यधिक स्कोरिंग है।