विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता विषय-वस्तु: 18.3 हार्मोन और समन्वय
जीवों के शरीर में क्रियाओं के नियंत्रण और समन्वय का दूसरा प्रमुख तंत्र अंत:स्रावी तंत्र (endocrine system) है। तंत्रिका तंत्र विद्युत-रासायनिक संकेतों से तीव्र एवं क्षणिक प्रतिक्रिया करता है, जबकि हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक हैं जो रक्त के माध्यम से लक्ष्य अंग तक पहुँचकर धीमी परंतु दीर्घकालिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में हार्मोन के स्रोत, लक्ष्य अंग, हार्मोन की कमी तथा अधिकता से होने वाले विकारों पर प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। हार्मोन मुख्यतः विशेष ग्रंथियों द्वारा स्रावित होते हैं, जिन्हें अंत:स्रावी ग्रंथियाँ कहते हैं, क्योंकि इनके स्राव रक्त में सीधे प्रवेश करते हैं।
हार्मोन की परिभाषा में तीन बिंदु महत्वपूर्ण हैं — ये रासायनिक पदार्थ हैं, इनका स्राव अंत:स्रावी ग्रंथियों द्वारा होता है तथा ये रक्त द्वारा विशेष लक्ष्य अंग तक पहुँचकर उसकी क्रिया को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में भी कार्य करते हैं। शरीर की मुख्य अंत:स्रावी ग्रंथियाँ हैं — पीयूष ग्रंथि (मास्टर ग्रंथि), थायरॉइड ग्रंथि, पैराथायरॉइड ग्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि, अग्नाशय, अंडाशय तथा वृषण। इनके अतिरिक्त पीनियल ग्रंथि तथा थाइमस भी अंत:स्रावी कार्य करती हैं।
इस अध्याय में हम प्रत्येक अंत:स्रावी ग्रंथि के स्थान, उसके स्रावित हार्मोन, हार्मोन के मुख्य कार्य तथा कमी-अधिकता से उत्पन्न होने वाले विकारों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। इसके अलावा हार्मोन और तंत्रिका तंत्र के बीच समन्वय तथा होमोस्टैसिस में हार्मोन की भूमिका को समझेंगे। परीक्षा की दृष्टि से हार्मोन-विकार संबंधी तालिका (जैसे इंसुलिन की कमी से मधुमेह) सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इन तथ्यों को स्मरण रखने से रेलवे परीक्षा में आसानी से अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland): इसे मास्टर ग्रंथि कहते हैं क्योंकि यह अन्य अंत:स्रावी ग्रंथियों की क्रियाओं को नियंत्रित करती है। यह मस्तिष्क के आधार पर, हाइपोथैलेमस के नीचे स्थित होती है और इसका आकार मटर के दाने जैसा होता है। इसके प्रमुख हार्मोन हैं — वृद्धि हार्मोन (GH), थायरॉइड उत्तेजक हार्मोन (TSH), एड्रिनोकॉर्टिकोट्रॉफिक हार्मोन (ACTH) तथा एंटीडाइयूरेटिक हार्मोन (ADH)। वृद्धि हार्मोन की कमी से बौनापन (dwarfism) तथा अधिकता से बाल्यावस्था में विशालकायता (gigantism) और वयस्कावस्था में एक्रोमेगली होती है। ADH गुर्दे में जल के पुनर्अवशोषण को नियंत्रित करता है, इसकी कमी से डायबिटीज इनसिपिडस होता है।
थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland): यह गर्दन में कंठ के नीचे, श्वासनली के दोनों ओर स्थित होती है। इसके हार्मोन थायरॉक्सिन (T4) और ट्राइआयोडोथायरोनिन (T3) शरीर के चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को नियंत्रित करते हैं। थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है। आयोडीन की कमी से गले में सूजन (घेंघा / गॉयटर) होती है। थायरॉइड की कमी से बाल्यावस्था में क्रिटिनिज्म और वयस्कावस्था में मिक्सीडीमा होता है। थायरॉक्सिन की अधिकता से ग्रेव्स रोग होता है। थायरॉइड में कैल्सीटोनिन हार्मोन भी बनता है जो रक्त में कैल्सियम का स्तर कम करता है।
पैराथायरॉइड ग्रंथि (Parathyroid Gland): थायरॉइड ग्रंथि के पीछे चार छोटी ग्रंथियाँ स्थित होती हैं, जिन्हें पैराथायरॉइड कहते हैं। इनका हार्मोन पैराथार्मोन रक्त में कैल्सियम का स्तर बढ़ाता है तथा फॉस्फेट का स्तर कम करता है। इसकी कमी से रक्त में कैल्सियम कम हो जाता है, जिससे पेशियों में ऐंठन (टेटनी) होती है।
अग्नाशय (Pancreas): यह उदर में स्थित मिश्रित ग्रंथि है, जो पाचन एंजाइम तथा हार्मोन दोनों बनाती है। इसकी लैंगरहैंस द्वीपिकाएँ (islets of Langerhans) दो मुख्य हार्मोन स्रावित करती हैं — इंसुलिन (बीटा कोशिकाओं से) तथा ग्लूकागन (अल्फा कोशिकाओं से)। इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज का स्तर कम करता है, जबकि ग्लूकागन ग्लूकोज का स्तर बढ़ाता है। इंसुलिन की कमी या अनुपयोगिता से मधुमेह (डायबिटीज मेलिटस) होता है। रेलवे परीक्षा में मधुमेह के संबंध में इंसुलिन प्रश्न सर्वाधिक पूछा जाता है।
अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland): दोनों गुर्दों के ऊपर स्थित दो त्रिभुजाकार ग्रंथियाँ अधिवृक्क ग्रंथियाँ कहलाती हैं। इनका बाहरी भाग कॉर्टेक्स तथा भीतरी भाग मेड्युला कहलाता है। अधिवृक्क मेड्युला से एड्रिनेलिन (एपिनेफ्रिन) और नॉर-एड्रिनेलिन स्रावित होते हैं। एड्रिनेलिन को आपातकालीन हार्मोन या युद्ध-भाग (fight or flight) हार्मोन कहते हैं। यह खतरे के समय हृदय गति, रक्तचाप तथा रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ाकर शरीर को आपात स्थिति के लिए तैयार करता है। अधिवृक्क कॉर्टेक्स से कॉर्टिकोस्टेरॉइड हार्मोन स्रावित होते हैं, जिनमें कोर्टिसोल तथा एल्डोस्टेरोन प्रमुख हैं। एल्डोस्टेरोन गुर्दे में सोडियम तथा जल संतुलन बनाए रखता है।
पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland): यह मस्तिष्क में स्थित छोटी ग्रंथि है जो मेलाटोनिन हार्मोन स्रावित करती है। मेलाटोनिन नींद-जागने के चक्र (सर्केडियन रिदम) को नियंत्रित करता है। रेलवे में रात की ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की नींद के चक्र में मेलाटोनिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
थाइमस ग्रंथि (Thymus): यह छाती में, उरोस्थि के पीछे स्थित होती है और बचपन में सबसे अधिक सक्रिय रहती है। यह थाइमोसिन हार्मोन स्रावित करती है जो रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
जनन ग्रंथियाँ (Gonads): अंडाशय (स्त्री) तथा वृषण (पुरुष) जनन ग्रंथियाँ हैं। अंडाशय एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है। एस्ट्रोजन स्त्री के माध्यमिक लैंगिक लक्षणों को विकसित करता है। प्रोजेस्टेरोन गर्भावस्था को बनाए रखता है। वृषण टेस्टोस्टेरोन स्रावित करता है, जो पुरुष के माध्यमिक लैंगिक लक्षणों (दाढ़ी, आवाज का भारी होना) को विकसित करता है।
हार्मोन शरीर में संदेशवाहक का कार्य करते हैं। हार्मोन का स्राव मुख्यतः ऋणात्मक पुनर्भरण (negative feedback) द्वारा नियंत्रित होता है। जब रक्त में किसी हार्मोन की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है, तो संबंधित ग्रंथि का स्राव घट जाता है और कम होने पर बढ़ जाता है। पीयूष ग्रंथि तथा हाइपोथैलेमस इस नियंत्रण में मुख्य भूमिका निभाते हैं। हाइपोथैलेमस स्नायुतंत्र और हार्मोन तंत्र के बीच सेतु का कार्य करता है, इसलिए इसे मस्तिष्क के हार्मोन नियंत्रक केंद्र के रूप में जाना जाता है।
तंत्रिका तंत्र और हार्मोन का समन्वय: कुछ स्थितियों में तंत्रिका तंत्र सीधे हार्मोन स्राव को उत्तेजित करता है। उदाहरण के लिए, खतरे की स्थिति में तंत्रिका तंत्र अधिवृक्क मेड्युला से एड्रिनेलिन स्राव करवाता है। एड्रिनेलिन की क्रिया क्षणिक होती है, जबकि थायरॉक्सिन जैसे हार्मोन की क्रिया दीर्घकालिक होती है। इस प्रकार दोनों तंत्र मिलकर शरीर का पूर्ण समन्वय करते हैं।
होमोस्टैसिस में हार्मोन की भूमिका: हार्मोन शरीर के आंतरिक वातावरण को स्थिर रखते हैं। इंसुलिन तथा ग्लूकागन मिलकर रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित करते हैं। एल्डोस्टेरोन जल तथा लवण संतुलन बनाए रखता है। पैराथार्मोन तथा कैल्सीटोनिन रक्त कैल्सियम का स्तर नियंत्रित करते हैं। रेलवे परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि कैल्सियम संतुलन पैराथार्मोन और कैल्सीटोनिन द्वारा नियंत्रित होता है।
| ग्रंथि | हार्मोन | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| पीयूष | वृद्धि हार्मोन | शरीर की वृद्धि |
| थायरॉइड | थायरॉक्सिन | चयापचय नियंत्रण |
| अग्नाशय | इंसुलिन | रक्त ग्लूकोज कम करना |
| अधिवृक्क | एड्रिनेलिन | आपातकालीन प्रतिक्रिया |
| अंडाशय | एस्ट्रोजन | स्त्री लक्षण विकास |
| वृषण | टेस्टोस्टेरोन | पुरुष लक्षण विकास |
| हार्मोन | कमी से विकार | अधिकता से विकार |
|---|---|---|
| वृद्धि हार्मोन | बौनापन | विशालकायता / एक्रोमेगली |
| थायरॉक्सिन | क्रिटिनिज्म, मिक्सीडीमा | ग्रेव्स रोग |
| इंसुलिन | मधुमेह | हाइपोग्लाइसीमिया |
| पैराथार्मोन | टेटनी | हाइपरकैल्सीमिया |
| ADH | डायबिटीज इनसिपिडस | जल विषाक्तता |
flowchart TD
A[अंत:स्रावी तंत्र] --> B[पीयूष ग्रंथि]
A --> C[थायरॉइड ग्रंथि]
A --> D[अग्नाशय]
A --> E[अधिवृक्क ग्रंथि]
A --> F[जनन ग्रंथियाँ]
B --> B1[वृद्धि हार्मोन]
B --> B2[मास्टर ग्रंथि]
C --> C1[थायरॉक्सिन - चयापचय]
C --> C2[कमी से घेंघा]
D --> D1[इंसुलिन - ग्लूकोज कम]
D --> D2[ग्लूकागन - ग्लूकोज बढ़]
E --> E1[एड्रिनेलिन - आपात हार्मोन]
E --> E2[कॉर्टिसोल]
F --> F1[एस्ट्रोजन]
F --> F2[टेस्टोस्टेरोन]
A --> G[समन्वय]
G --> G1[ऋणात्मक पुनर्भरण]
G --> G2[होमोस्टैसिस]
हार्मोन और समन्वय जीव विज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस अध्याय में हमने अंत:स्रावी तंत्र की प्रमुख ग्रंथियों — पीयूष, थायरॉइड, पैराथायरॉइड, अग्नाशय, अधिवृक्क, पीनियल, थाइमस तथा जनन ग्रंथियों — के हार्मोन और उनके कार्यों का विस्तार से अध्ययन किया। हमने जाना कि इंसुलिन रक्त ग्लूकोज घटाता है, थायरॉक्सिन चयापचय नियंत्रित करता है और एड्रिनेलिन आपातकालीन प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। हार्मोन की कमी-अधिकता से होने वाले विकारों की जानकारी परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है। तंत्रिका तंत्र और हार्मोन तंत्र मिलकर शरीर का समन्वय तथा होमोस्टैसिस बनाए रखते हैं। रेलवे टेक्नीशियन परीक्षा में इस विषय से नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं, अतः हार्मोन-ग्रंथि-विकार की तालिकाओं का नियमित दोहराव आवश्यक है।