विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता विषय-वस्तु: 18.8 आनुवंशिकता और जीन
आनुवंशिकता (heredity) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जनकों की विशेषताएँ (गुण) संतति में संचारित होती हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में आनुवंशिकता, जीन, गुणसूत्र तथा मेंडल के नियमों से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। आनुवंशिकता का अध्ययन करने वाले विज्ञान को आनुवंशिकी (genetics) कहते हैं। जीन (gene) आनुवंशिकता की मूल इकाई है, जो गुणों के संचरण को नियंत्रित करती है। जीन गुणसूत्रों (chromosomes) पर स्थित होते हैं और डीएनए (DNA) से बने होते हैं। प्रत्येक जीव में गुणों का निर्धारण उसके जीनों के समूह (जीनोम) द्वारा होता है।
आनुवंशिकी की नींव ग्रेगोर मेंडल (Gregor Mendel) ने 19वीं शताब्दी में मटर के पौधे पर प्रयोग करके रखी थी। मेंडल ने पहली बार प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध किया कि गुण विशेष इकाइयों (जिन्हें अब जीन कहते हैं) के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित होते हैं। उन्होंने अपने प्रयोगों में मटर के पौधों के सात विपरीत लक्षणों (जैसे लंबा-बौना, पीला-हरा बीज) का अध्ययन किया। मेंडल के कार्य को आधुनिक आनुवंशिकी की आधारशिला माना जाता है।
इस अध्याय में हम आनुवंशिकता की अवधारणा, जीन और उनके प्रकार, डीएनए की संरचना, जीनोटाइप तथा फेनोटाइप, प्रमुख एवं अप्रमुख जीन, समयुग्मजी तथा विषमयुग्मजी अवस्थाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे। साथ ही वंशानुक्रम की प्रक्रिया और पर्यावरण की भूमिका को समझेंगे। परीक्षा की दृष्टि से जीन की परिभाषा, डीएनए की संरचना तथा जीनोटाइप-फेनोटाइप का अंतर सबसे महत्वपूर्ण है। इन तथ्यों की पकड़ परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है।
जीन (Gene): जीन आनुवंशिकता की मूल इकाई है, जो एक विशेष लक्षण को नियंत्रित करती है। जीन डीएनए (डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) के खंडों से बने होते हैं। प्रत्येक जीन किसी एक विशेष गुण (जैसे आँख का रंग, ऊँचाई) के निर्धारण में सहायक होता है। जीन की स्थिति को गुणसूत्र पर उसका स्थान (locus) कहते हैं। मनुष्य में लगभग 20,000 से 25,000 जीन पाए जाते हैं। जीन विशेष प्रोटीन के निर्माण का कूट-संदेश (code) रखते हैं। रेलवे परीक्षा में जीन की परिभाषा — आनुवंशिकता की मूल इकाई — प्रायः पूछी जाती है।
गुणसूत्र (Chromosome): गुणसूत्र कोशिका के केंद्रक में उपस्थित धागे जैसी संरचनाएँ हैं, जिन पर जीन स्थित होते हैं। गुणसूत्र डीएनए तथा प्रोटीन (हिस्टोन) से बने होते हैं। मनुष्य में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं। इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम तथा 1 जोड़ा सेक्स (लिंग) गुणसूत्र होता है। स्त्रियों में सेक्स गुणसूत्र XX तथा पुरुषों में XY होते हैं। गुणसूत्रों पर जीन एक क्रम में व्यवस्थित होते हैं।
डीएनए (DNA): डीएनए या डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल वह अणु है जो आनुवंशिक सूचना को संग्रहीत करता है। डीएनए दोहरे कुंडलिनी (double helix) संरचना वाला होता है। इसकी संरचना 1953 में वाटसन और क्रिक द्वारा प्रतिपादित की गई थी। डीएनए चार क्षारकों — एडिनीन (A), थायमिन (T), ग्वानीन (G), साइटोसिन (C) — से बना होता है। इनमें A का युग्म हमेशा T से और G का युग्म हमेशा C से बनता है। डीएनए का कार्य आनुवंशिक सूचना का संग्रहण तथा संचरण है। रेलवे परीक्षा में डीएनए के क्षारक युग्म तथा वाटसन-क्रिक के नाम प्रायः पूछे जाते हैं।
एलील (Allele): किसी गुण के लिए उत्तरदायी जीन के वैकल्पिक रूपों को एलील कहते हैं। उदाहरण के लिए, मटर में ऊँचाई के गुण के दो एलील होते हैं — लंबाई के लिए (T) तथा बौनापन के लिए (t)। समजात गुणसूत्रों पर विपरीत स्थानों पर एलील स्थित होते हैं। यदि दोनों एलील समान हैं तो समयुग्मजी (homozygous) तथा भिन्न हैं तो विषमयुग्मजी (heterozygous) कहलाते हैं।
जीनोटाइप (Genotype): किसी जीव में उपस्थित जीनों का कुल समूह, विशेषकर किसी एक गुण के लिए एलील्स का संयोजन, जीनोटाइप कहलाता है। जीनोटाइप जीव का आनुवंशिक बनावट है, जिसे टीटी, टीटी, टीटी जैसे चिह्नों द्वारा दर्शाया जाता है। यह दृश्य रूप से देखा नहीं जा सकता। जीनोटाइप जनक से संतति में संचारित होता है।
फेनोटाइप (Phenotype): किसी जीव की बाह्य रूप से दिखने वाली विशेषताएँ फेनोटाइप कहलाती हैं। यह जीनोटाइप और पर्यावरण की अंतःक्रिया का परिणाम है। उदाहरण के लिए, पौधे का लंबा या बौना होना, बीज का पीला या हरा होना फेनोटाइप है। फेनोटाइप दृश्य है जबकि जीनोटाइप अदृश्य है।
प्रमुख एवं अप्रमुख जीन (Dominant and Recessive): जीन के वे एलील जो विषमयुग्मजी अवस्था में भी अपना लक्षण व्यक्त करते हैं, प्रमुख (dominant) कहलाते हैं। जो एलील विषमयुग्मजी अवस्था में लक्षण व्यक्त नहीं करते, वे अप्रमुख (recessive) कहलाते हैं। अप्रमुख लक्षण केवल समयुग्मजी अवस्था में व्यक्त होता है। उदाहरण के लिए, मटर में लंबा (T) प्रमुख तथा बौना (t) अप्रमुख है। टीटी और टीटी दोनों जीनोटाइप वाले पौधे लंबे होते हैं, जबकि केवल टीटी वाले पौधे बौने होते हैं। रेलवे परीक्षा में प्रमुख-अप्रमुख जीन की अवधारणा पर आधारित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।
वंशानुक्रम की प्रक्रिया: प्रत्येक जनक अपने गुणसूत्रों का आधा भाग (एक-एक एलील) अपनी संतति को देता है। नर से शुक्राणु में 23 गुणसूत्र तथा मादा से अंडाणु में 23 गुणसूत्र मिलकर संतति में 46 गुणसूत्र बनाते हैं। इस प्रकार संतति को प्रत्येक जनक से गुणों के एलील्स मिलते हैं। यही वंशानुक्रम (inheritance) है।
आनुवंशिक विविधता का स्रोत: युग्मक निर्माण के समय अर्धसूत्री विभाजन में क्रॉसिंग ओवर तथा गुणसूत्रों का पृथक्करण आनुवंशिक विविधता को जन्म देता है। इसके अतिरिक्त संतति को दो जनकों से अलग-अलग एलील्स मिलते हैं, जिससे संयोजन की नई व्यवस्थाएँ बनती हैं। आनुवंशिक विविधता ही प्रजाति के विकास का आधार है।
किसी जीव का विकास जीन तथा पर्यावरण दोनों से प्रभावित होता है। जीनोटाइप निर्धारित करता है कि क्या संभव है, जबकि पर्यावरण निर्धारित करता है कि वह किस सीमा तक व्यक्त होगा। उदाहरण के लिए, ऊँचाई का जीन लंबा होने की क्षमता देता है, परंतु अपर्याप्त पोषण मिलने पर पौधा या व्यक्ति पूर्ण रूप से विकसित नहीं होता। इसी प्रकार आँखों का रंग जीन से निर्धारित होता है, जबकि शरीर का रंग सूर्य के प्रकाश से प्रभावित हो सकता है। फेनोटाइप = जीनोटाइप + पर्यावरणीय प्रभाव।
आनुवंशिक रोग (Genetic Disorders): कुछ रोग जीन में दोष (म्यूटेशन) के कारण होते हैं। इनमें सिकल सेल एनीमिया, हीमोफीलिया, कलर ब्लाइंडनेस, डाउन सिंड्रोम तथा थैलेसीमिया प्रमुख हैं। सिकल सेल एनीमिया तथा थैलेसीमिया रक्त में हीमोग्लोबिन के दोष से संबंधित हैं। हीमोफीलिया में रक्त नहीं जमता। कलर ब्लाइंडनेस में लाल-हरा रंग अंतर नहीं किया जा सकता। ये रोग आनुवंशिकता से संबंधित हैं, इसलिए आनुवंशिक रोग कहलाते हैं। रेलवे परीक्षा में इन रोगों के नाम तथा उनके कारण प्रायः पूछे जाते हैं।
आनुवंशिकता का व्यावहारिक महत्व: आनुवंशिकता के ज्ञान का उपयोग कृषि में उत्तम फसलों की किस्में विकसित करने, पशुपालन में उत्तम नस्लें बनाने तथा चिकित्सा में आनुवंशिक रोगों की पहचान करने में होता है। जीन थेरेपी के माध्यम से दोषपूर्ण जीनों को ठीक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे परीक्षा में आनुवंशिकी के व्यावहारिक उपयोग से संबंधित सामान्य प्रश्न भी पूछे जाते हैं।
| अवधारणा | परिभाषा |
|---|---|
| जीन | आनुवंशिकता की मूल इकाई |
| गुणसूत्र | जीनों से बनी केंद्रकीय संरचना |
| डीएनए | आनुवंशिक सूचना वाला अणु |
| एलील | जीन के वैकल्पिक रूप |
| जीनोटाइप | जीनों का आनुवंशिक समूह |
| फेनोटाइप | दृश्य लक्षण |
| रोग | कारण/विशेषता |
|---|---|
| सिकल सेल एनीमिया | हीमोग्लोबिन में दोष |
| हीमोफीलिया | रक्त का न जमना |
| कलर ब्लाइंडनेस | लाल-हरा रंग अंतर करने में अक्षमता |
| थैलेसीमिया | हीमोग्लोबिन निर्माण में दोष |
| डाउन सिंड्रोम | अतिरिक्त गुणसूत्र 21 |
flowchart TD
A[आनुवंशिकता और जीन] --> B[जीन - मूल इकाई]
A --> C[गुणसूत्र]
A --> D[डीएनए]
A --> E[जीनोटाइप व फेनोटाइप]
A --> F[प्रमुख व अप्रमुख जीन]
A --> G[आनुवंशिक रोग]
B --> B1[एलील]
B --> B2[लोकस]
C --> C1[46 गुणसूत्र मनुष्य में]
C --> C2[22 ऑटोसोम जोड़े + 1 लिंग जोड़ा]
D --> D1[दोहरी कुंडलिनी]
D --> D2[क्षारक A-T, G-C]
E --> E1[जीनोटाइप - आनुवंशिक]
E --> E2[फेनोटाइप - दृश्य]
F --> F1[प्रमुख - हमेशा व्यक्त]
F --> F2[अप्रमुख - केवल समयुग्मजी में]
G --> G1[सिकल सेल एनीमिया]
G --> G2[हीमोफीलिया]
G --> G3[कलर ब्लाइंडनेस]
आनुवंशिकता और जीन जीव विज्ञान का वह विषय है जो गुणों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरण को स्पष्ट करता है। इस अध्याय में हमने जीन की परिभाषा, गुणसूत्रों की संरचना, डीएनए की दोहरी कुंडलिनी तथा क्षारक युग्मों का अध्ययन किया। जीनोटाइप और फेनोटाइप का अंतर, प्रमुख तथा अप्रमुख जीन की अवधारणा तथा आनुवंशिक रोगों की जानकारी भी प्राप्त की। डीएनए में A-T तथा G-C के युग्म आनुवंशिक सूचना को संग्रहीत करते हैं। जीन और पर्यावरण मिलकर जीव का फेनोटाइप निर्धारित करते हैं। रेलवे टेक्नीशियन परीक्षा में इस विषय से सरल परंतु सटीक प्रश्न पूछे जाते हैं, अतः इन मूल अवधारणाओं का नियमित दोहराव आवश्यक है।