विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ विषय-वस्तु: 17.8 श्वसन
श्वसन वह जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें जीव अपने भोजन (ग्लूकोज) का ऑक्सीकरण कर ऊर्जा (ATP) प्राप्त करते हैं। प्रत्येक जीवित कोशिका में श्वसन होता रहता है, इसलिए इसे कोशिकीय श्वसन भी कहते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में श्वसन के प्रकार, वायवीय एवं अवायवीय श्वसन, श्वसन के चरण और मानव श्वसन तंत्र के अंगों से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। श्वसन शब्द का सामान्य अर्थ साँस लेने का होता है, परंतु विज्ञान में श्वसन का अर्थ कोशिका के अंदर ऊर्जा उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया है।
श्वसन में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होता है और ऊर्जा निकलती है। ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण का समीकरण इस प्रकार है: C6H12O6 + 6O2 = 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा (36-38 ATP)। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज और ऑक्सीजन अभिकारक हैं जबकि कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा उत्पाद हैं। श्वसन मुख्यतः दो प्रकार का होता है — वायवीय श्वसन (ऑक्सीजन की उपस्थिति में) और अवायवीय श्वसन (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में)।
इस अध्याय में हम वायवीय एवं अवायवीय श्वसन की प्रक्रिया, श्वसन के चरण (ग्लाइकोलिसिस, क्रेब्स चक्र, इलेक्ट्रॉन परिवहन), किण्वन, मानव श्वसन तंत्र की संरचना तथा श्वसन को प्रभावित करने वाले कारकों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। श्वसन की समझ ऊर्जा चयापचय, प्रकाश संश्लेषण और उत्सर्जन जैसी जीवन प्रक्रियाओं से सीधे जुड़ी है।
वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration): यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है और अधिक ऊर्जा (36-38 ATP) मुक्त होती है। इसमें CO2 और जल बनते हैं। यह श्वसन तीन चरणों में होता है — ग्लाइकोलिसिस, क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन। मानव, जंतु और अधिकांश पौधे वायवीय श्वसन करते हैं।
अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration): यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। ग्लूकोज का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है और कम ऊर्जा (2 ATP) मुक्त होती है। इसमें एथेनॉल, कार्बन डाइऑक्साइड या लैक्टिक अम्ल बनते हैं। खमीर (यीस्ट) अवायवीय श्वसन द्वारा एथेनॉल और CO2 बनाता है। पेशियों में ऑक्सीजन की कमी होने पर लैक्टिक अम्ल का निर्माण होता है।
किण्वन (Fermentation): अवायवीय श्वसन की एक विशेष विधि है जो खमीर एवं कुछ जीवाणुओं द्वारा की जाती है। इससे एथेनॉल और CO2 का निर्माण होता है। किण्वन का उपयोग रोटी, दही, शराब तथा इडली-डोसा बनाने में होता है।
ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis): यह श्वसन का पहला चरण है जो कोशिकाद्रव्य (साइटोप्लाज्म) में होता है। इसमें एक अणु ग्लूकोज का अणुओं में विभाजन होता है और 2 अणु पाइरुवेट तथा थोड़ी मात्रा में ATP बनती है। ग्लाइकोलिसिस को एम्बडेन-मेयरहॉफ पथ भी कहते हैं। यह वायवीय और अवायवीय दोनों श्वसन का प्रथम चरण है।
क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle): यह श्वसन का दूसरा चरण है जो माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होता है। इसमें पाइरुवेट का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है और CO2 मुक्त होती है। इस चक्र में NADH और FADH2 जैसे ऊर्जा-वाहक बनते हैं। क्रेब्स चक्र को साइट्रिक अम्ल चक्र या टीसीए चक्र भी कहते हैं।
इलेक्ट्रॉन परिवहन (Electron Transport Chain): यह श्वसन का अंतिम चरण है जो माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली (क्राइस्टी) पर होता है। इसमें क्रेब्स चक्र से बने NADH और FADH2 के इलेक्ट्रॉनों से अधिकांश ATP (लगभग 34 अणु) बनते हैं। इस चरण में ऑक्सीजन अंतिम इलेक्ट्रॉन ग्राहक के रूप में कार्य करता है। इसी कारण वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन आवश्यक है।
मानव श्वसन तंत्र में नासिका छिद्र, नासा गुहा, ग्रसनी, स्वरयंत्र, श्वासनली (ट्रेकिआ), ब्रॉन्कस, ब्रॉन्कियोल्स और फेफड़े शामिल हैं। वायु नासिका छिद्र से प्रवेश कर नासा गुहा में धूल और रोगाणुओं से शुद्ध होती है, फिर श्वासनली से होती हुई ब्रॉन्कस में पहुँचती है। ब्रॉन्कस दो फेफड़ों में विभाजित हो जाता है। फेफड़ों के अंदर सूक्ष्म थैलियाँ होती हैं जिन्हें एल्वियोली कहते हैं।
एल्वियोली में ही वायु और रक्त के बीच गैसों का विनिमय होता है। एल्वियोली की दीवारें पतली होती हैं और इनके चारों ओर रक्त केशिकाओं का जाल होता है। ऑक्सीजन एल्वियोली से रक्त में और CO2 रक्त से एल्वियोली में पहुँचती है। CO2 का परिवहन मुख्यतः बाइकार्बोनेट आयन के रूप में होता है। रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन द्वारा होता है। श्वसन अंगों द्वारा वायु लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को बाह्य श्वसन तथा कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन को आंतरिक श्वसन कहते हैं।
| आधार | वायवीय श्वसन | अवायवीय श्वसन |
|---|---|---|
| ऑक्सीजन | आवश्यक | नहीं |
| स्थान | माइटोकॉन्ड्रिया | कोशिकाद्रव्य |
| ऊर्जा | 36-38 ATP | 2 ATP |
| अंतिम उत्पाद | CO2 और जल | एथेनॉल/लैक्टिक अम्ल |
| उदाहरण | मानव, पौधे | खमीर, पेशी |
| चरण | स्थान | मुख्य क्रिया |
|---|---|---|
| ग्लाइकोलिसिस | कोशिकाद्रव्य | ग्लूकोज से पाइरुवेट |
| क्रेब्स चक्र | माइटोकॉन्ड्रिया मैट्रिक्स | पाइरुवेट का ऑक्सीकरण, CO2 मुक्त |
| इलेक्ट्रॉन परिवहन | क्राइस्टी | अधिकांश ATP निर्माण |
flowchart TD
A[श्वसन] --> B[वायवीय श्वसन]
A --> C[अवायवीय श्वसन]
B --> B1[ग्लाइकोलिसिस - कोशिकाद्रव्य]
B --> B2[क्रेब्स चक्र - मैट्रिक्स]
B --> B3[इलेक्ट्रॉन परिवहन - क्राइस्टी]
C --> C1[किण्वन - खमीर]
C --> C2[लैक्टिक अम्ल - पेशी]
A --> D[मानव श्वसन तंत्र]
D --> D1[नासा गुहा]
D --> D2[श्वासनली]
D --> D3[ब्रॉन्कस]
D --> D4[एल्वियोली - गैस विनिमय]
श्वसन जीवन की ऊर्जा-उत्पादक प्रक्रिया है जिसमें ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होकर ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है। यह वायवीय और अवायवीय दो प्रकार का होता है। वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लाइकोलिसिस, क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन के तीन चरणों में संपन्न होता है, जिसमें 36-38 ATP ऊर्जा प्राप्त होती है। अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है और इसमें केवल 2 ATP बनती है, जिसमें खमीर एथेनॉल-कार्बन डाइऑक्साइड तथा पेशियाँ लैक्टिक अम्ल बनाती हैं। मानव श्वसन तंत्र में एल्वियोली गैस विनिमय का मुख्य स्थल है, जहाँ ऑक्सीजन रक्त में तथा कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से बाहर जाती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में श्वसन के चरण, ऊर्जा की मात्रा और मानव श्वसन तंत्र से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं, अतः इनकी पकड़ परीक्षा में सफलता के लिए आवश्यक है।