विस्थापन अभिक्रिया Notes

विस्थापन अभिक्रिया

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – अभिक्रियाएँ और रासायनिक गुण विषय-वस्तु: 15.4 विस्थापन अभिक्रिया

1. परिचय

विस्थापन अभिक्रिया रासायनिक अभिक्रियाओं के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकारों में से एक है, जो धातुओं की क्रियाशीलता श्रेणी (Activity Series) पर आधारित होती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में रासायनिक अभिक्रियाओं से 3 से 5 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें विस्थापन अभिक्रिया की पहचान, अधिक क्रियाशील धातु का चुनाव तथा उदाहरण प्रमुख हैं। यह अभिक्रिया यह समझने में सहायता करती है कि कौन-सी धातु दूसरी धातु को उसके लवण से बाहर निकाल सकती है।

विस्थापन अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक में उपस्थित कम क्रियाशील तत्व को विस्थापित कर देता है। इसका सामान्य रूप है — A + BC → AC + B। यहाँ A अधिक क्रियाशील धातु है जो BC यौगिक से B को विस्थापित करके AC बनाती है। विस्थापन अभिक्रिया में एक तत्व, दूसरे तत्व की जगह ले लेता है।

विस्थापन अभिक्रिया तत्व की क्रियाशीलता श्रेणी पर निर्भर करती है। क्रियाशीलता श्रेणी में ऊपर की धातुएँ नीचे की धातुओं को उनके लवणों से विस्थापित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, लोहा ताँबे की तुलना में अधिक क्रियाशील है, इसलिए लोहे की कील को कॉपर सल्फेट विलयन में डालने पर ताँबा विस्थापित होकर निकल जाता है। यही कारण है कि विस्थापन अभिक्रिया को धातु क्रियाशीलता श्रेणी की परख माना जाता है।

2. विस्थापन अभिक्रिया की परिभाषा और सिद्धांत

विस्थापन अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई अधिक क्रियाशील तत्व, किसी कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करके नया यौगिक बनाता है। अभिक्रिया का सामान्य रूप है:

A + BC → AC + B

इस अभिक्रिया में A, B से अधिक क्रियाशील होना चाहिए। यदि A, B से कम क्रियाशील हो तो विस्थापन अभिक्रिया नहीं होती। क्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) में धातुएँ उच्चतम से निम्नतम क्रियाशीलता के क्रम में सजी होती हैं — पोटेशियम (K), सोडियम (Na), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), एल्युमीनियम (Al), जिंक (Zn), आयरन (Fe), लेड (Pb), हाइड्रोजन (H), कॉपर (Cu), सिल्वर (Ag), गोल्ड (Au)।

उदाहरण 1: लोहे की कील और कॉपर सल्फेट विलयन की अभिक्रिया —

Fe (ठोस) + CuSO₄ (जलीय) → FeSO₄ (जलीय) + Cu (ठोस)

जब लोहे की कील को नीले रंग के कॉपर सल्फेट विलयन में डाला जाता है, तो विलयन का नीला रंग धीरे-धीरे हल्का हरा हो जाता है और कील पर ताँबे की लाल-भूरी परत जम जाती है। यह इसलिए होता है क्योंकि लोहा ताँबे से अधिक क्रियाशील है।

उदाहरण 2: जिंक और कॉपर सल्फेट की अभिक्रिया —

Zn (ठोस) + CuSO₄ (जलीय) → ZnSO₄ (जलीय) + Cu (ठोस)

जिंक ताँबे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए यह कॉपर सल्फेट से ताँबे को विस्थापित कर देता है। इसी प्रकार जिंक और सिल्वर नाइट्रेट की अभिक्रिया Zn + 2AgNO₃ → Zn(NO₃)₂ + 2Ag होती है।

3. क्रियाशीलता श्रेणी और विस्थापन

क्रियाशीलता श्रेणी धातुओं की वह सूची है जिसमें धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। यह श्रेणी विस्थापन अभिक्रिया की दिशा निर्धारित करती है। श्रेणी में ऊपर स्थित धातु, नीचे स्थित धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती है, परंतु नीचे स्थित धातु ऊपर स्थित धातु को विस्थापित नहीं कर सकती।

क्रियाशीलता श्रेणी का घटता क्रम इस प्रकार है — K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, H, Cu, Ag, Au। हाइड्रोजन से ऊपर की सभी धातुएँ अम्लों से हाइड्रोजन गैस विस्थापित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, जिंक + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → जिंक क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस। Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂।

उदाहरण 3: क्या ताँबा जिंक सल्फेट से जिंक को विस्थापित कर सकता है?

हल: नहीं, क्योंकि ताँबा जिंक से कम क्रियाशील है। क्रियाशीलता श्रेणी में जिंक, ताँबे से ऊपर स्थित है। इसलिए Cu + ZnSO₄ अभिक्रिया नहीं करते।

यह नियम याद रखना परीक्षा में बहुत उपयोगी है — विस्थापन तभी होता है जब विस्थापित करने वाला तत्व श्रेणी में ऊपर हो।

4. विस्थापन अभिक्रिया के प्रकार और उपयोग

विस्थापन अभिक्रियाओं को दो मुख्य प्रकारों में बाँटा जा सकता है।

धातु-धातु विस्थापन: जब कोई धातु दूसरी धातु को उसके लवण से विस्थापित करती है। उदाहरण — Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu।

धातु-अम्ल विस्थापन: जब कोई धातु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित करती है। उदाहरण — Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂। इसके अलावा Mg + 2HCl → MgCl₂ + H₂ तथा 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂ जैसी अभिक्रियाएँ भी विस्थापन प्रकार की हैं।

विस्थापन अभिक्रियाओं का उद्योगों में व्यापक उपयोग है। थर्मिट अभिक्रिया में एल्युमीनियम, आयरन ऑक्साइड से लोहे को विस्थापित करता है। Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe। इस अभिक्रिया में अत्यधिक ऊष्मा निकलती है, जिसका उपयोग रेल पटरियों की मरम्मत और वेल्डिंग में होता है। इसी प्रकार जिंक, ताँबे से अधिक क्रियाशील होने के कारण विद्युत रासायनिक क्षेत्रों में प्रयोग होता है।

उदाहरण 4: थर्मिट अभिक्रिया —

Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe + ऊष्मा

एल्युमीनियम लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए यह आयरन ऑक्साइड से लोहे को विस्थापित कर देता है। यह अभिक्रिया बहुत अधिक ऊष्मा उत्सर्जित करती है, जिससे रेल पटरियों के जोड़ों को वेल्ड किया जाता है। इसी अभिक्रिया के सिद्धांत पर नवीन क्रिया रेल वेल्डिंग में प्रयुक्त होती है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: क्रियाशीलता श्रेणी (घटते क्रम में)

क्रम धातु प्रतीक विस्थापन क्षमता
1 पोटेशियम K सर्वाधिक क्रियाशील
2 सोडियम Na बहुत क्रियाशील
3 कैल्शियम Ca अत्यधिक क्रियाशील
4 मैग्नीशियम Mg अधिक क्रियाशील
5 एल्युमीनियम Al क्रियाशील
6 जिंक Zn मध्यम क्रियाशील
7 आयरन Fe कम क्रियाशील
8 लेड Pb बहुत कम क्रियाशील
9 हाइड्रोजन H संदर्भ बिंदु
10 कॉपर Cu कम क्रियाशील
11 सिल्वर Ag बहुत कम क्रियाशील
12 गोल्ड Au न्यूनतम क्रियाशील

तालिका 2: विस्थापन अभिक्रिया के उदाहरण

अभिक्रिया विस्थापित करने वाला विस्थापित होने वाला परिणाम
Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu Fe Cu नीला रंग हरा, लाल-भूरी परत
Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu Zn Cu ताँबा निकलता है
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂ Zn H हाइड्रोजन गैस बुलबुले
Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe Al Fe थर्मिट वेल्डिंग
Zn + 2AgNO₃ → Zn(NO₃)₂ + 2Ag Zn Ag चाँदी निकलती है

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[विस्थापन अभिक्रिया A + BC → AC + B] --> B[परिभाषा]
    A --> C[क्रियाशीलता श्रेणी]
    A --> D[प्रकार]
    A --> E[उपयोग]
    B --> B1[अधिक क्रियाशील तत्व]
    B --> B2[कम क्रियाशील को हटाता है]
    C --> C1[K Na Ca Mg Al Zn Fe Pb H Cu Ag Au]
    C --> C2[ऊपर वाला नीचे वाले को विस्थापित करता है]
    D --> D1[धातु-धातु Fe + CuSO₄]
    D --> D2[धातु-अम्ल Zn + 2HCl]
    E --> E1[थर्मिट वेल्डिंग]
    E --> E2[धातु निष्कर्षण]
    C2 --> X1[नीचे वाला ऊपर वाले को नहीं]
    E1 --> X2[Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

विस्थापन अभिक्रिया A + BC → AC + B A अधिक क्रियाशील + BC लवण विलयन AC नया लवण + B कम क्रियाशील Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu लोहे की कील पर ताँबे की लाल-भूरी परत नीला विलयन हरा हो जाता है नियम विस्थापन तभी होता है जब A, B से अधिक क्रियाशील हो Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu (हाँ) Cu + ZnSO₄ → कोई अभिक्रिया नहीं स्वर्ण नियम क्रियाशीलता श्रेणी में ऊपर वाली धातु ही नीचे वाली को विस्थापित करती है।

थर्मिट अभिक्रिया आयरन ऑक्साइड Fe₂O₃ जंग लगा लोहा + एल्युमीनियम 2Al अधिक क्रियाशील Al₂O₃ + 2Fe + बहुत अधिक ऊष्मा उपयोग रेल पटरियों के जोड़ों की वेल्डिंग अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है एल्युमीनियम लोहे से अधिक क्रियाशील वेल्डिंग के अतिरिक्त धातु निष्कर्षण में भी प्रयोग स्वर्ण नियम थर्मिट अभिक्रिया में Al, Fe को विस्थापित करता है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र यह मान लेते हैं कि कम क्रियाशील धातु भी अधिक क्रियाशील धातु को विस्थापित कर सकती है, जबकि यह संभव नहीं है।
  2. क्रियाशीलता श्रेणी का क्रम याद न रखना; K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, H, Cu, Ag, Au क्रम में गलती होना।
  3. Fe + CuSO₄ अभिक्रिया में रंग परिवर्तन — नीला से हरा — को याद न रखना।
  4. थर्मिट अभिक्रिया में Al और Fe की भूमिका उलट लिखना; Al ही Fe को विस्थापित करता है।
  5. विस्थापन अभिक्रिया में अभिकारक और उत्पाद की संख्या की तुलना संयोजन अभिक्रिया से कर भ्रमित होना।
  6. हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ ही अम्ल से H₂ विस्थापित करती हैं — इस नियम को भूलना।
  7. Cu + ZnSO₄ जैसी असंभव अभिक्रिया को संभव मान लेना।
  8. धातुओं के सूत्र और लवणों के संतुलन में गलती, जैसे Zn + 2AgNO₃ में 2 का गुणांक छोड़ना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. विस्थापन अभिक्रिया के प्रश्न में सदैव दोनों तत्वों की क्रियाशीलता की तुलना करें।
  2. क्रियाशीलता श्रेणी का क्रम मौखिक याद रखें — K Na Ca Mg Al Zn Fe Pb H Cu Ag Au।
  3. रंग परिवर्तन के प्रश्न आते हैं; Fe + CuSO₄ में नीला → हरा और ताँबे की लाल-भूरी परत याद रखें।
  4. थर्मिट अभिक्रिया Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe रेलवे के संदर्भ में (वेल्डिंग) विशेष रूप से याद रखें।
  5. "कौन-सी धातु विस्थापित करेगी" पूछने पर श्रेणी में ऊँची धातु चुनें।
  6. धातु और अम्ल की अभिक्रिया में H₂ गैस के बुलबुले निकलते हैं, यह उदाहरण के रूप में उपयोग करें।
  7. यदि विस्थापित करने वाला तत्व श्रेणी में नीचे हो तो उत्तर "कोई अभिक्रिया नहीं" होता है।
  8. संतुलित समीकरण लिखने के बाद दोनों पक्षों में परमाणुओं की गिनती करें।

10. निष्कर्ष

विस्थापन अभिक्रिया धातुओं की क्रियाशीलता श्रेणी पर आधारित वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से बाहर निकाल देता है। हमने इसके सामान्य रूप A + BC → AC + B, क्रियाशीलता श्रेणी के घटते क्रम तथा धातु-धातु और धातु-अम्ल विस्थापन अभिक्रियाओं का अध्ययन किया। Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu और थर्मिट अभिक्रिया Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe रेलवे परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। विस्थापन अभिक्रिया को समझने से द्विविस्थापन अभिक्रिया को समझना अत्यंत सरल हो जाता है, क्योंकि द्विविस्थापन में दोनों यौगिक आपस में अपने आयनों का आदान-प्रदान करते हैं। नियमित अभ्यास से इन प्रश्नों को सटीकता से हल करना संभव है।