विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – धातु कार्बन और आवर्त सारणी विषय-वस्तु: 16.7 समजातीय श्रेणी
कार्बनिक यौगिकों की संख्या लाखों में है, परंतु यह स्मरण करना असंभव होता यदि इन्हें सुव्यवस्थित श्रेणियों में न बाँटा गया होता। वह श्रृंखला जिसमें कार्बनिक यौगिक इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं कि क्रमागत सदस्यों में CH2 समूह का अंतर होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है। समजातीय श्रेणी के सभी सदस्यों का सामान्य सूत्र समान होता है तथा उनके भौतिक गुण सुव्यवस्थित रूप से बदलते हैं। उदाहरण के लिए, एल्केन की समजातीय श्रेणी CH4, C2H6, C3H8, C4H10 ... है, जिसमें प्रत्येक क्रमागत सदस्य में CH2 का अंतर है।
समजातीय श्रेणी के सदस्यों को समजात कहते हैं। समजातों के रासायनिक गुण समान होते हैं क्योंकि इनके क्रियात्मक समूह समान होते हैं। भौतिक गुण, जैसे गलनांक, क्वथनांक और घनत्व, सामान्यतः श्रृंखला में आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ बढ़ते जाते हैं। समजातीय श्रेणी का यह व्यवस्थित स्वरूप ही कार्बनिक यौगिकों के गुणों की भविष्यवाणी करने में सहायक होता है।
रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में समजातीय श्रेणी से 1 से 2 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें समजातीय श्रेणी की परिभाषा, CH2 समूह का अंतर, समजातों की पहचान तथा समान गुणों वाले सदस्यों के प्रश्न प्रमुख हैं। समजातीय श्रेणी को समझने से कार्बनिक रसायन के जटिल यौगिकों का स्मरण आसान हो जाता है। इस अध्याय में हम समजातीय श्रेणी की परिभाषा, विशेषताएँ, उदाहरण तथा भौतिक गुणों में परिवर्तन का अध्ययन करेंगे।
समजातीय श्रेणी कार्बनिक यौगिकों की वह श्रृंखला है जिसमें क्रमागत सदस्य एक दूसरे से CH2 समूह (एक कार्बन और दो हाइड्रोजन) के अंतर से भिन्न होते हैं। प्रत्येक सदस्य का सामान्य सूत्र समान होता है तथा इनके रासायनिक गुण समान होते हैं। समजातीय श्रेणी के सदस्यों को एक सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है, जैसे एल्केन का सामान्य सूत्र CnH2n+2, एल्कोहॉल का CnH2n+1OH तथा एल्डिहाइड का CnH2n+1CHO है।
समजातीय श्रेणी के सदस्यों के बीच आणविक द्रव्यमान का अंतर 14 होता है (CH2 का द्रव्यमान = 12 + 2 = 14)। यह तथ्य प्रश्नों में विशेष रूप से उपयोगी होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी सदस्य का द्रव्यमान ज्ञात हो, तो अगले या पिछले सदस्य का द्रव्यमान 14 जोड़कर या घटाकर निकाला जा सकता है। समजातीय श्रेणी में सदस्यों की संख्या की कोई सीमा नहीं होती और श्रेणी के सभी सदस्यों की संरचना तथा संयोजन नियम समान होते हैं।
समजातों की पहचान: दो यौगिक समजात होने के लिए आवश्यक है कि उनमें CH2 का अंतर हो, उनका सामान्य सूत्र समान हो तथा उनका क्रियात्मक समूह समान हो। उदाहरण के लिए, मेथेनॉल (CH3OH) और एथेनॉल (C2H5OH) समजात हैं, क्योंकि दोनों में हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) है तथा इनमें CH2 का अंतर है। इसी प्रकार एथेनोइक अम्ल और प्रोपेनोइक अम्ल भी समजात हैं, क्योंकि दोनों में कार्बोक्सिल समूह (-COOH) है।
उदाहरण 1: क्या CH4 और C2H4 समजात हैं?
हल: नहीं। CH4 एल्केन (CnH2n+2) तथा C2H4 एल्कीन (CnH2n) है। इनका सामान्य सूत्र समान नहीं है, अतः ये समजात नहीं हैं।
समजातीय श्रेणी के सबसे सरल उदाहरण एल्केन की श्रृंखला है — मेथेन (CH4), एथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8), ब्यूटेन (C4H10), पेंटेन (C5H12) इत्यादि। इसी प्रकार एल्कोहॉल की श्रृंखला — मेथेनॉल (CH3OH), एथेनॉल (C2H5OH), प्रोपेनॉल (C3H7OH) — तथा कार्बोक्सिलिक अम्लों की श्रृंखला — मेथेनोइक अम्ल (HCOOH), एथेनोइक अम्ल (CH3COOH), प्रोपेनोइक अम्ल (C2H5COOH) — के सदस्य समजात हैं। प्रत्येक श्रृंखला में क्रियात्मक समूह समान रहता है।
समजातीय श्रेणी में आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ भौतिक गुणों में सुव्यवस्थित परिवर्तन होता है। गलनांक, क्वथनांक तथा घनत्व सामान्यतः बढ़ते हैं, जबकि विलेयता जल में घटती जाती है। ये भौतिक गुण प्रश्नों में समजात श्रृंखला के सदस्यों की तुलना के लिए उपयोग किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, एल्केन श्रृंखला में कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता जाता है।
रासायनिक गुण समान होने का कारण: समजातीय श्रेणी के सभी सदस्यों का रासायनिक व्यवहार समान होता है क्योंकि उनका क्रियात्मक समूह समान होता है। क्रियात्मक समूह ही यौगिक की विशिष्ट अभिक्रियाओं को निर्धारित करता है। इसीलिए समजातीय श्रेणी के सभी सदस्य समान प्रकार की अभिक्रियाएँ करते हैं, केवल अभिक्रिया की गति में अंतर हो सकता है। यही कारण है कि समजातों के गुणों को समझकर पूरी श्रृंखला के गुणों की भविष्यवाणी की जा सकती है।
समजातीय श्रेणी का सबसे बड़ा उपयोग कार्बनिक यौगिकों का सुव्यवस्थित अध्ययन है। लाखों यौगिकों को कुछ ही श्रेणियों में बाँटकर उनके गुणों का अध्ययन संभव हो जाता है। समजातीय श्रेणी से यह भी ज्ञात होता है कि किसी यौगिक का आणविक सूत्र जानकर उसका सामान्य सूत्र, क्रियात्मक समूह तथा भौतिक गुणों का अनुमान लगाया जा सकता है। यह भविष्यवाणी क्षमता समजातीय श्रेणी की सबसे बड़ी विशेषता है।
समजातीय श्रेणी का ज्ञान व्यावहारिक रूप से भी उपयोगी है। ईंधनों के गुण, औषधियों की क्रियाशीलता तथा औद्योगिक रसायनों के गुण उनके क्रियात्मक समूहों और समजातीय श्रृंखला के आधार पर ही समझे जाते हैं। उदाहरण के लिए, एल्कोहॉल की समजातीय श्रृंखला में आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर विलेयता घटती है, जो व्यावहारिक उपयोग को प्रभावित करता है। इसी प्रकार कार्बोक्सिलिक अम्लों की श्रृंखला में सदस्यों की अम्लीय प्रबलता में व्यवस्थित परिवर्तन देखा जाता है।
उदाहरण 2: समजातीय श्रेणी में क्रमागत सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में कितना अंतर होता है?
हल: क्रमागत सदस्यों में CH2 का अंतर होता है। CH2 का द्रव्यमान 14 होता है, अतः आणविक द्रव्यमान में 14 का अंतर होता है।
| श्रेणी | सामान्य सूत्र | क्रियात्मक समूह | प्रथम सदस्य |
|---|---|---|---|
| एल्केन | CnH2n+2 | — | मेथेन CH4 |
| एल्कीन | CnH2n | द्वि बंध | एथीन C2H4 |
| एल्कोहॉल | CnH2n+1OH | -OH | मेथेनॉल CH3OH |
| एल्डिहाइड | CnH2n+1CHO | -CHO | मेथेनल HCHO |
| कार्बोक्सिलिक अम्ल | CnH2n+1COOH | -COOH | मेथेनोइक अम्ल HCOOH |
| सदस्य | आणविक सूत्र | आणविक द्रव्यमान | भौतिक अवस्था |
|---|---|---|---|
| मेथेनॉल | CH3OH | 32 | द्रव |
| एथेनॉल | C2H5OH | 46 | द्रव |
| प्रोपेनॉल | C3H7OH | 60 | द्रव |
| ब्यूटेनॉल | C4H9OH | 74 | द्रव |
flowchart TD
A[समजातीय श्रेणी] --> B[परिभाषा CH2 अंतर]
A --> C[विशेषताएँ]
A --> D[उदाहरण]
A --> E[गुणों में परिवर्तन]
A --> F[महत्व]
B --> B1[सामान्य सूत्र समान]
B --> B2[क्रियात्मक समूह समान]
C --> C1[आणविक द्रव्यमान अंतर 14]
C --> C2[रासायनिक गुण समान]
D --> D1[एल्केन CH4 C2H6 C3H8]
D --> D2[एल्कोहॉल CH3OH C2H5OH]
D --> D3[अम्ल HCOOH CH3COOH]
E --> E1[क्वथनांक बढ़ता है]
E --> E2[घनत्व बढ़ता है]
F --> F1[सुव्यवस्थित अध्ययन]
F --> F2[गुणों की भविष्यवाणी]
समजातीय श्रेणी कार्बनिक यौगिकों के अध्ययन को सरल एवं सुव्यवस्थित बनाने वाली अवधारणा है। इस अध्याय में हमने समजातीय श्रेणी की परिभाषा, CH2 समूह के अंतर, सामान्य सूत्र की समानता, समान क्रियात्मक समूह तथा आणविक द्रव्यमान में 14 के अंतर का अध्ययन किया। समजातों के रासायनिक गुण समान होते हैं, जबकि भौतिक गुण (क्वथनांक, घनत्व) आणविक द्रव्यमान के साथ बढ़ते हैं। यह अवधारणा ही क्रियात्मक समूह और कार्बनिक यौगिकों के अगले अध्याय का आधार है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इससे परिभाषा तथा श्रृंखला आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं, अतः सामान्य सूत्र और क्रियात्मक समूह की पकड़ दृढ़ रखें।