विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – धातु कार्बन और आवर्त सारणी विषय-वस्तु: 16.10 आवर्त सारणी और आवर्त गुण
तत्वों की लगभग 118 ज्ञात प्रजातियाँ हैं, जिन्हें सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने के लिए आवर्त सारणी का उपयोग किया जाता है। आवर्त सारणी में तत्वों को उनके परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, जिससे समान गुण वाले तत्व एक निश्चित क्रम में आ जाते हैं। वैज्ञानिक डॉ. दिमित्री मेंडलीव ने 1869 में पहली आवर्त सारणी प्रस्तुत की, जबकि आधुनिक आवर्त सारणी हेनरी मोसले के परमाणु क्रमांक नियम पर आधारित है। मोसले के अनुसार, तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्त फलन होते हैं।
आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को 18 वर्ग (ग्रुप) तथा 7 आवर्त (पीरियड) में व्यवस्थित किया गया है। उर्ध्व (ऊपर-नीचे) स्तंभों को वर्ग कहते हैं, जबकि क्षैतिज (बाएँ-दाएँ) पंक्तियों को आवर्त कहते हैं। एक ही वर्ग के तत्वों में बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। एक ही आवर्त के तत्वों में बाह्यतम कोश समान होता है, परंतु इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती जाती है। कुछ विशेष तत्वों को संक्रमण धातुओं के रूप में सारणी के मध्य में रखा गया है।
रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में आवर्त सारणी से 2 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें वर्ग और आवर्त की पहचान, आवर्त गुणों में परिवर्तन, विद्युत्-ऋणात्मकता, इलेक्ट्रॉन बंधुता तथा धात्विक-अधात्विक चरित्र के प्रश्न प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त सोडियम, क्लोरीन जैसे तत्वों की स्थिति तथा उनके वर्ग एवं आवर्त से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं। आवर्त सारणी की दृढ़ पकड़ रसायन के सभी प्रश्नों को आसान बनाती है।
आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक के आधार पर बनी है। इसमें कुल 7 आवर्त तथा 18 वर्ग होते हैं। प्रथम आवर्त में केवल 2 तत्व (हाइड्रोजन, हीलियम) होते हैं, द्वितीय और तृतीय आवर्त में 8-8 तत्व होते हैं, चतुर्थ एवं पंचम आवर्त में 18-18 तत्व तथा षष्ठ एवं सप्तम आवर्त में 32-32 तत्व होते हैं। लैन्थेनाइड एवं एक्टिनाइड श्रृंखलाओं को सारणी के नीचे अलग से रखा गया है। वर्गों को 1 से 18 तक क्रमांकित किया गया है।
आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करती है। किसी तत्व का वर्ग उसके बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित होता है, जबकि आवर्त बाह्यतम कोश की संख्या (मुख्य ऊर्जा स्तर) से निर्धारित होता है। उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) का विन्यास 2, 8, 1 है, अतः यह प्रथम वर्ग तथा तृतीय आवर्त में स्थित है। क्लोरीन (Cl) का विन्यास 2, 8, 7 है, अतः यह 17वें वर्ग तथा तृतीय आवर्त में स्थित है।
वर्ग 1 के तत्व क्षार धातुएँ, वर्ग 17 के तत्व हैलोजन तथा वर्ग 18 के तत्व उत्कृष्ट गैसें कहलाते हैं। उत्कृष्ट गैसों के बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (हीलियम में 2) होते हैं, इसलिए ये अत्यधिक स्थायी और अक्रिय होती हैं। हैलोजनों में बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा ये अत्यधिक अभिक्रियाशील होते हैं। इन तत्वों के वर्ग-नाम परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
उदाहरण 1: तत्व कैल्शियम (परमाणु क्रमांक 20) का विन्यास 2, 8, 8, 2 है। इसका वर्ग और आवर्त बताइए।
हल: बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होने से यह द्वितीय वर्ग में तथा 4 कोश होने से चतुर्थ आवर्त में स्थित है।
परमाणु त्रिज्या: एक आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है, क्योंकि परमाणु क्रमांक बढ़ने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है तथा इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक आकर्षित करता है। एक वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, क्योंकि नए कोश जुड़ते जाते हैं। उदाहरण के लिए, तृतीय आवर्त में Na (बड़ा) से Cl (छोटा) की ओर त्रिज्या घटती है।
विद्युत्-ऋणात्मकता: किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति विद्युत्-ऋणात्मकता कहलाती है। एक आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर विद्युत्-ऋणात्मकता बढ़ती है, क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन आकर्षण बढ़ता है। एक वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत्-ऋणात्मकता घटती है, क्योंकि परमाणु आकार बढ़ता है। फ्लोरीन (F) सर्वाधिक विद्युत्-ऋणात्मक तत्व है।
इलेक्ट्रॉन बंधुता: ऊर्जा मुक्त होने पर तटस्थ गैसीय परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति इलेक्ट्रॉन बंधुता कहलाती है। एक आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर इलेक्ट्रॉन बंधुता प्रायः बढ़ती है तथा क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता सर्वाधिक होती है (फ्लोरीन के छोटे आकार के कारण विशेषता से)।
एक आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक चरित्र घटता है तथा अधात्विक चरित्र बढ़ता है। कारण यह है कि बाएँ से दाएँ जाने पर इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति घटती है तथा इलेक्ट्रॉन ग्रहण की प्रवृत्ति बढ़ती है। तृतीय आवर्त में बाएँ से सोडियम (धातु), मैग्नीशियम (धातु), ऐलुमिनियम (धातु), सिलिकॉन (अर्द्धधातु), फॉस्फोरस, सल्फर, क्लोरीन (अधातुएँ) की ओर चरित्र बदलता है। एक वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक चरित्र बढ़ता है।
आयनन एन्थैल्पी: गैसीय अवस्था में किसी तटस्थ परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा आयनन एन्थैल्पी कहलाती है। एक आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर आयनन एन्थैल्पी प्रायः बढ़ती है, जबकि एक वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है। अधिक धात्विक तत्वों की आयनन एन्थैल्पी कम होती है, क्योंकि वे आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं।
इन सभी आवर्त गुणों के आधार पर ही हम किसी तत्व के व्यवहार का अनुमान लगा सकते हैं। एक वर्ग के तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं, क्योंकि उनके बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। यही कारण है कि वर्ग 1 के तत्व एक संयोजकता प्रदर्शित करते हैं और वर्ग 17 के तत्व समान प्रकार की अभिक्रियाएँ करते हैं। आवर्त गुणों में परिवर्तन की दिशा परीक्षा में सबसे अधिक पूछी जाती है।
उदाहरण 2: तृतीय आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक चरित्र में क्या परिवर्तन होता है?
हल: तृतीय आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक चरित्र घटता है तथा अधात्विक चरित्र बढ़ता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति घटती है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| वर्गों की संख्या | 18 |
| आवर्तों की संख्या | 7 |
| प्रथम आवर्त में तत्व | 2 (H, He) |
| द्वितीय/तृतीय आवर्त | 8-8 तत्व |
| वर्ग 1 | क्षार धातुएँ |
| वर्ग 17 | हैलोजन |
| वर्ग 18 | उत्कृष्ट गैसें |
| लैन्थेनाइड/एक्टिनाइड | नीचे अलग पंक्तियाँ |
| गुण | आवर्त में बाएँ से दाएँ | वर्ग में ऊपर से नीचे |
|---|---|---|
| परमाणु त्रिज्या | घटती है | बढ़ती है |
| विद्युत्-ऋणात्मकता | बढ़ती है | घटती है |
| आयनन एन्थैल्पी | बढ़ती है | घटती है |
| धात्विक चरित्र | घटता है | बढ़ता है |
| अधात्विक चरित्र | बढ़ता है | घटता है |
flowchart TD
A[आवर्त सारणी] --> B[संरचना]
A --> C[आवर्त गुण]
A --> D[वर्ग विशेषताएँ]
B --> B1[7 आवर्त]
B --> B2[18 वर्ग]
B --> B3[परमाणु क्रमांक आधार]
C --> C1[परमाणु त्रिज्या]
C --> C2[विद्युत्-ऋणात्मकता]
C --> C3[आयनन एन्थैल्पी]
C --> C4[धात्विक चरित्र]
D --> D1[वर्ग 1 क्षार धातु]
D --> D2[वर्ग 17 हैलोजन]
D --> D3[वर्ग 18 उत्कृष्ट गैस]
आवर्त सारणी सभी ज्ञात तत्वों को सुव्यवस्थित करने वाला रसायन विज्ञान का सर्वाधिक उपयोगी उपकरण है। इस अध्याय में हमने आधुनिक आवर्त सारणी की संरचना, 18 वर्गों और 7 आवर्तों की व्यवस्था, परमाणु क्रमांक पर आधारित मोसले का नियम तथा वर्गों की विशेषताएँ (क्षार धातु, हैलोजन, उत्कृष्ट गैस) समझीं। आवर्त गुणों — परमाणु त्रिज्या, विद्युत्-ऋणात्मकता, आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन बंधुता तथा धात्विक-अधात्विक चरित्र — में आवर्त एवं वर्ग के अनुसार परिवर्तन का अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इन गुणों के परिवर्तन से 2 से 4 प्रश्न अवश्य आते हैं। आवर्त सारणी की दृढ़ पकड़ संपूर्ण रसायन विज्ञान के अध्ययन को सरल और सटीक बनाती है।