परमाणु और अणु Notes

परमाणु और अणु

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – पदार्थ और परमाणु संरचना विषय-वस्तु: 14.5 परमाणु और अणु

1. परिचय

परमाणु और अणु रसायन विज्ञान की सबसे मौलिक अवधारणाएँ हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस अध्याय से परमाणु की परिभाषा, अणु की परिभाषा, परमाणु द्रव्यमान, अणु भार, मोल की अवधारणा तथा अवोगाद्रो संख्या से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रत्येक पदार्थ अति सूक्ष्म कणों से बना होता है। जो कण आगे और विभाजित नहीं हो सकता तथा तत्व के सभी गुणों को धारण करता है, उसे परमाणु कहते हैं। परमाणु पदार्थ की सबसे छोटी इकाई है। अणु तत्व या यौगिक के दो या अधिक परमाणुओं का समूह होता है जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है।

परमाणु की अवधारणा प्राचीन भारतीय विचारक कणाद तथा ग्रीक दार्शनिक डेमोक्रिटस से जुड़ी है। आधुनिक परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन जॉन डाल्टन ने 1808 में किया। डाल्टन के अनुसार प्रत्येक तत्व अति सूक्ष्म कणों — परमाणुओं — से बना होता है, सभी तत्वों के परमाणु समान होते हैं, तथा रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न तो निर्मित होते हैं और न ही नष्ट होते हैं। ये नियम आज भी मान्य हैं। परमाणु का आकार अत्यंत सूक्ष्म होता है, लगभग 10 की घात -10 मीटर, जिसे आँखों से नहीं देखा जा सकता।

इस अध्याय में हम परमाणु और अणु की परिभाषाओं, डाल्टन के परमाणु सिद्धांत, परमाणु द्रव्यमान इकाई, परमाणु द्रव्यमान और अणु भार, तत्वों के अणु तथा यौगिकों के अणु, मोल की अवधारणा और अवोगाद्रो संख्या का विस्तार से अध्ययन करेंगे। रेलवे परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें गणना-आधारित प्रश्नों का हिस्सा भी महत्वपूर्ण होता है।

2. परमाणु की अवधारणा

परमाणु तत्व का सबसे छोटा कण है जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में नहीं रह सकता परंतु सभी रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है। परमाणु इतना छोटा होता है कि उसे साधारण सूक्ष्मदर्शी से नहीं देखा जा सकता। रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं, केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।

डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (1808): प्रत्येक पदार्थ अति सूक्ष्म कणों से बना होता है जिन्हें परमाणु कहते हैं। एक ही तत्व के सभी परमाणु समान होते हैं। भिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न होते हैं। परमाणु अविभाज्य हैं तथा रासायनिक अभिक्रिया में न तो निर्मित होते हैं और न नष्ट। यौगिक निश्चित अनुपात में परमाणुओं के संयोजन से बनते हैं। इस सिद्धांत के बाद के विकास में परमाणु की विभाज्यता ज्ञात हुई, फिर भी रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणुओं का संरक्षण सत्य है।

परमाणु का आकार: परमाणु का क्रम 10 की घात -10 मीटर होता है। हाइड्रोजन का परमाणु सबसे छोटा तथा सबसे हल्का होता है। हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या लगभग 0.00000000005 मीटर (0.5 ऐंग्स्ट्रॉम) होती है। परमाणु का द्रव्यमान भी अत्यंत कम होता है, इसीलिए इसे मापने के लिए परमाणु द्रव्यमान इकाई (a.m.u.) का उपयोग किया जाता है।

परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic Mass Unit, a.m.u.): परमाणु द्रव्यमान इकाई कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान के 1/12 भाग के बराबर होती है। 1 a.m.u. = 1.66 × 10 की घात -27 किलोग्राम। किसी तत्व के एक परमाणु का द्रव्यमान उसके एक कार्बन-12 परमाणु के 1/12 भाग से तुलना करके परमाणु द्रव्यमान कहलाता है।

परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass): किसी तत्व के परमाणु का औसत द्रव्यमान उसकी परमाणु द्रव्यमान इकाई में व्यक्त किया जाता है। हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान 1.008 है, कार्बन का 12, ऑक्सीजन का 16, नाइट्रोजन का 14, सोडियम का 23, लोहे का 56 तथा ताँबे का 63.5 है। परमाणु द्रव्यमान को सापेक्ष द्रव्यमान कहते हैं क्योंकि यह कार्बन-12 से तुलना करके ज्ञात किया जाता है।

3. अणु और अणु भार

अणु पदार्थ का वह सूक्ष्मतम कण है जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है तथा जिसमें पदार्थ के सभी गुण विद्यमान होते हैं। अणु दो या अधिक परमाणुओं के रासायनिक संयोजन से बनता है। अणु तत्वों के अणु और यौगिकों के अणु दो प्रकार के होते हैं।

तत्वों के अणु (Molecules of Elements): जिन अणुओं में एक ही तत्व के परमाणु होते हैं, उन्हें तत्वों के अणु कहते हैं। ऑक्सीजन गैस का अणु (O2) दो ऑक्सीजन परमाणुओं से बनता है। हाइड्रोजन का अणु (H2), नाइट्रोजन का अणु (N2), क्लोरीन का अणु (Cl2) — ये सभी द्विपरमाणुक हैं। ओजोन का अणु (O3) तीन परमाणुओं का होता है। कुछ तत्वों के अणु एक परमाणु के होते हैं, जैसे हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar) — इन्हें एकपरमाणुक अणु कहते हैं। फास्फोरस का अणु (P4) चार तथा सल्फर का अणु (S8) आठ परमाणुओं का होता है।

यौगिकों के अणु (Molecules of Compounds): जिन अणुओं में भिन्न तत्वों के परमाणु होते हैं, उन्हें यौगिकों के अणु कहते हैं। जल का अणु (H2O) दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन परमाणु से बनता है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) एक कार्बन और दो ऑक्सीजन परमाणुओं से। अमोनिया (NH3) एक नाइट्रोजन और तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से बनता है।

अणु भार (Molecular Mass): किसी यौगिक या तत्व के एक अणु का द्रव्यमान जब परमाणु द्रव्यमान इकाई में व्यक्त किया जाता है, तो उसे अणु भार कहते हैं। अणु भार ज्ञात करने के लिए अणु में उपस्थित प्रत्येक तत्व के परमाणु द्रव्यमान को उसके परमाणुओं की संख्या से गुणा करके सबको जोड़ते हैं।

अणु भार की गणना के उदाहरण: जल (H2O) का अणु भार = (2 × 1) + (1 × 16) = 2 + 16 = 18। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का अणु भार = 12 + (2 × 16) = 12 + 32 = 44। सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) का अणु भार = (2 × 1) + 32 + (4 × 16) = 2 + 32 + 64 = 98। अमोनिया (NH3) का अणु भार = 14 + (3 × 1) = 17। सोडियम क्लोराइड (NaCl) का अणु भार = 23 + 35.5 = 58.5।

उदाहरण प्रश्न: कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) का अणु भार ज्ञात कीजिए। हल: Ca = 40, C = 12, O = 16; अणु भार = 40 + 12 + (3 × 16) = 40 + 12 + 48 = 100।

4. मोल की अवधारणा और अवोगाद्रो संख्या

रासायनिक गणनाओं को सरल बनाने के लिए मोल की अवधारणा विकसित की गई। एक मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें 6.022 × 10 की घात 23 कण (परमाणु, अणु या आयन) उपस्थित होते हैं। इस संख्या को अवोगाद्रो संख्या कहते हैं।

अवोगाद्रो संख्या (Avogadro Number): 6.022 × 10 की घात 23 को अवोगाद्रो संख्या कहते हैं। इसका नाम इतालवी वैज्ञानिक अमेदेओ अवोगाद्रो के नाम पर रखा गया है। किसी पदार्थ के एक मोल में अवोगाद्रो संख्या के बराबर कण होते हैं।

ग्राम-अणु भार (Molar Mass): किसी पदार्थ का अणु भार जब ग्राम में व्यक्त किया जाता है, तो वह पदार्थ की एक मोल मात्रा कहलाती है। जल का अणु भार 18 है, अतः 18 ग्राम जल = 1 मोल जल। कार्बन डाइऑक्साइड का मोलर द्रव्यमान 44 ग्राम है। ऑक्सीजन गैस (O2) का मोलर द्रव्यमान 32 ग्राम है।

मोलों की संख्या की गणना: मोलों की संख्या = दिया गया द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान। उदाहरण के लिए 36 ग्राम जल में मोल = 36 ÷ 18 = 2 मोल। 88 ग्राम CO2 में मोल = 88 ÷ 44 = 2 मोल। कणों की संख्या = मोलों की संख्या × अवोगाद्रो संख्या।

उदाहरण प्रश्न: 90 ग्राम जल में कितने मोल हैं? हल: मोल = 90 ÷ 18 = 5 मोल। अतः कणों की संख्या = 5 × 6.022 × 10 की घात 23।

रेलवे संदर्भ: बैटरी में प्रयुक्त सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4, अणु भार 98) तथा इलेक्ट्रोलाइट की सांद्रता मोलरिटी (मोल प्रति लीटर) में व्यक्त की जाती है। लीड-एसिड बैटरी में लेड (Pb, परमाणु द्रव्यमान 207) तथा लेड डाइऑक्साइड (PbO2) का उपयोग होता है। मोल की समझ से इलेक्ट्रोलाइट तैयार करने की गणना सरल हो जाती है।

परमाणु द्रव्यमान के कुछ मान: H = 1, He = 4, C = 12, N = 14, O = 16, Na = 23, Mg = 24, Al = 27, S = 32, Cl = 35.5, K = 39, Ca = 40, Fe = 56, Cu = 63.5, Zn = 65, Pb = 207। इन मानों को याद रखना अणु भार की गणना के लिए आवश्यक है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: परमाणु और अणु की तुलना

आधार परमाणु अणु
परिभाषा तत्व का सबसे छोटा कण पदार्थ का स्वतंत्र सूक्ष्मतम कण
अस्तित्व स्वतंत्र रूप से नहीं रहता स्वतंत्र रूप से रहता है
गुण तत्व के सभी गुण नहीं रखता पदार्थ के सभी गुण रखता है
उदाहरण H परमाणु, O परमाणु H2, O2, H2O, CO2
द्रव्यमान परमाणु द्रव्यमान (a.m.u.) अणु भार (a.m.u.)

तालिका 2: कुछ यौगिकों के अणु भार

यौगिक सूत्र गणना अणु भार
जल H2O (2×1) + 16 18
कार्बन डाइऑक्साइड CO2 12 + (2×16) 44
अमोनिया NH3 14 + (3×1) 17
सल्फ्यूरिक अम्ल H2SO4 (2×1)+32+(4×16) 98
सोडियम क्लोराइड NaCl 23 + 35.5 58.5

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[परमाणु और अणु] --> B[परमाणु]
    A --> C[अणु]
    A --> D[मोल]
    B --> B1[तत्व का सबसे छोटा कण]
    B --> B2[परमाणु द्रव्यमान]
    C --> C1[तत्वों के अणु H2, O2, N2]
    C --> C2[यौगिकों के अणु H2O, CO2]
    C --> C3[अणु भार की गणना]
    D --> D1[अवोगाद्रो संख्या]
    D --> D2[6.022 × 10^23]
    D --> D3[मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान]
    B2 --> B21[a.m.u. = C-12 का 1/12]
    C3 --> C31[अवयवों के भार का योग]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

परमाणु बनाम अणु परमाणु एकल परमाणु, स्वतंत्र नहीं H, O, C के परमाणु अणु परमाणुओं का समूह H2, O2, H2O, CO2 जल H2O: 2 हाइड्रोजन + 1 ऑक्सीजन CO2: 1 कार्बन + 2 ऑक्सीजन स्वर्ण नियम अणु स्वतंत्र रह सकता है, परमाणु केवल अभिक्रिया में भाग लेता है।

मोल और अवोगाद्रो संख्या 1 मोल = 6.022 × 10^23 कण (अवोगाद्रो संख्या) कण परमाणु, अणु या आयन हो सकते हैं 1 मोल H2O = 18 ग्राम अणु भार 18, मोलर द्रव्यमान 18 ग्राम 1 मोल CO2 = 44 ग्राम अणु भार 44, मोलर द्रव्यमान 44 ग्राम मोल = दिया गया द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान 36 ग्राम जल में मोल = 36 ÷ 18 = 2 कणों की संख्या = मोलों की संख्या × अवोगाद्रो संख्या स्वर्ण नियम मोल की गणना में द्रव्यमान को हमेशा ग्राम में लें और मोलर द्रव्यमान से भाग दें।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र परमाणु को अणु समझ लेते हैं; परमाणु स्वतंत्र रूप से नहीं रहता, अणु रह सकता है।
  2. परमाणु द्रव्यमान में भारी संख्या लिखना, जैसे हाइड्रोजन का द्रव्यमान 1.008 के बदले 1 a.m.u. लिख देना।
  3. अणु भार की गणना में परमाणु की संख्या को गुणा करना भूल जाना, जैसे H2O के लिए 2×1 के स्थान पर केवल 1 लिखना।
  4. अवोगाद्रो संख्या को गलत लिखना — 6.022 × 10 की घात 23, इसे 10 की घात 22 मान लेना।
  5. एक मोल को ग्राम में न लिखना; मोल की इकाई ग्राम होती है।
  6. ऑक्सीजन अणु (O2) को एक परमाणु (O) मान लेना, दोनों का भार अलग होता है।
  7. अणु भार की गणना में CO2 के ऑक्सीजन का 2 से गुणा करना भूल जाना, CO2 का भार 44 नहीं 28 मान लेना।
  8. सल्फ्यूरिक अम्ल H2SO4 में हाइड्रोजन के दो परमाणुओं की गिनती छूट जाना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. परमाणु द्रव्यमान के महत्वपूर्ण मान याद रखें: H=1, C=12, N=14, O=16, Na=23, S=32, Cl=35.5, Ca=40, Fe=56।
  2. अणु भार ज्ञात करने के लिए प्रत्येक तत्व का परमाणु द्रव्यमान उसकी संख्या से गुणा करके जोड़ें।
  3. मोल की गणना का सूत्र — मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान — तीन रूपों में याद रखें ताकि कणों की संख्या भी निकाली जा सके।
  4. अवोगाद्रो संख्या 6.022 × 10^23 सदैव लिखें, प्रश्न में पूछे जाने पर इसका प्रयोग करें।
  5. द्विपरमाणुक अणु (H2, O2, N2, Cl2) तथा बहुपरमाणुक अणु (O3, P4, S8) की पहचान याद रखें।
  6. एक मोल गैस का आयतन STP पर 22.4 लीटर होता है — यह तथ्य भी रखें।
  7. रेलवे संदर्भ से जोड़ें: लीड-एसिड बैटरी में H2SO4 (98 ग्राम/मोल) का उपयोग।
  8. गणना के प्रश्नों में इकाई अवश्य लिखें ताकि अंक न कटें।

10. निष्कर्ष

परमाणु और अणु की अवधारणा पदार्थ की संरचना को समझने का आधार है। इस अध्याय में हमने परमाणु की परिभाषा — तत्व का सबसे छोटा कण — तथा अणु की परिभाषा — पदार्थ का स्वतंत्र सूक्ष्मतम कण — का अध्ययन किया। डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अनुसार परमाणु अविभाज्य होते हैं तथा अभिक्रिया में न तो बनते हैं और न नष्ट होते हैं। हमने परमाणु द्रव्यमान इकाई (a.m.u.), परमाणु द्रव्यमान, अणु भार तथा मोल की अवधारणा को समझा। अवोगाद्रो संख्या 6.022 × 10^23 कण प्रति मोल होती है। जल, CO2, H2SO4 जैसे यौगिकों के अणु भार की गणना सीखी। मोल की अवधारणा से रासायनिक गणनाएँ सरल हो जाती हैं। यह अध्याय परमाणु संरचना, संयोजकता तथा रासायनिक समीकरण जैसे आगामी अध्यायों की नींव है तथा रेलवे परीक्षा में उच्च स्कोरिंग विषय है।