विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – पदार्थ और परमाणु संरचना विषय-वस्तु: 14.6 परमाणु संरचना
परमाणु संरचना रसायन विज्ञान का वह अध्याय है जो परमाणु के आंतरिक भागों — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन — तथा उनकी व्यवस्था का अध्ययन करता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस अध्याय से विभिन्न मॉडलों, उप-परमाणु कणों, कक्षाओं (कोशों) तथा इलेक्ट्रॉन वितरण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। परमाणु पदार्थ की सबसे छोटी इकाई है, परंतु वह स्वयं इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन नामक तीन उप-परमाणु कणों से बना होता है। इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित, प्रोटॉन धनावेशित तथा न्यूट्रॉन उदासीन कण है।
परमाणु का केंद्र नाभिक कहलाता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन स्थित होते हैं। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में घूमते रहते हैं। नाभिक परमाणु के संपूर्ण द्रव्यमान का लगभग 99.9% भाग रखता है, परंतु परमाणु का अधिकांश स्थान रिक्त होता है। प्रोटॉन का द्रव्यमान लगभग 1.67 × 10 की घात -27 किलोग्राम है, जो इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से लगभग 1840 गुना अधिक है।
इस अध्याय में हम परमाणु के मॉडलों (थॉमसन, रदरफोर्ड, बोर), उप-परमाणु कणों के गुण, परमाणु में कणों की स्थिति, बोर-बरी नियम द्वारा इलेक्ट्रॉन वितरण, कोशों की क्षमता (2n वर्ग सूत्र) तथा स्थिर अष्टक नियम का विस्तार से अध्ययन करेंगे। रेलवे परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर इलेक्ट्रॉन वितरण तथा कणों की संख्या पर आधारित प्रश्न।
परमाणु तीन मुख्य कणों से बना होता है — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन। इन्हें उप-परमाणु कण कहते हैं।
इलेक्ट्रॉन (Electron): इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित कण है जिसका आवेश -1 होता है तथा द्रव्यमान लगभग 9.1 × 10 की घात -31 किलोग्राम होता है। इलेक्ट्रॉन का आवेश 1.602 × 10 की घात -19 कूलॉम होता है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में घूमता है। इलेक्ट्रॉन की खोज जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरणों के अध्ययन से की थी। इलेक्ट्रॉन का चिन्ह e^- है।
प्रोटॉन (Proton): प्रोटॉन एक धनावेशित कण है जिसका आवेश +1 होता है तथा द्रव्यमान लगभग 1.6726 × 10 की घात -27 किलोग्राम होता है। प्रोटॉन नाभिक में स्थित होता है। प्रोटॉन की खोज रदरफोर्ड ने 1919 में की थी। प्रोटॉन का चिन्ह p है। परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या ही तत्व की पहचान निर्धारित करती है।
न्यूट्रॉन (Neutron): न्यूट्रॉन उदासीन (कोई आवेश नहीं) कण है जिसका द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर होता है, लगभग 1.675 × 10 की घात -27 किलोग्राम। न्यूट्रॉन की खोज जेम्स चैडविक ने 1932 में की थी। न्यूट्रॉन नाभिक में स्थित होता है और परमाणु की स्थिरता में सहायक होता है। न्यूट्रॉन का चिन्ह n है। हाइड्रोजन के सामान्य परमाणु में न्यूट्रॉन नहीं होता।
द्रव्यमान और आवेश का सारांश: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान सबसे कम, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का द्रव्यमान लगभग समान होता है। प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन के आवेश परिमाण में समान परंतु विपरीत होते हैं। परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होने के कारण परमाणु उदासीन होता है।
उदासीन परमाणु का नियम: किसी उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = प्रोटॉनों की संख्या। यदि इलेक्ट्रॉन घट जाएँ तो धनात्मक आयन (धनायन) और बढ़ जाएँ तो ऋणात्मक आयन (ऋणायन) बनता है।
थॉमसन का मॉडल (1898): जे. जे. थॉमसन ने परमाणु को गोलाकार बताया जिसमें धनावेश समान रूप से फैला होता है तथा इलेक्ट्रॉन उसमें जड़े होते हैं, जैसे बेर में बीज। इसे प्लम-पुडिंग मॉडल भी कहते हैं। इस मॉडल में नाभिक की अवधारणा नहीं थी। यह मॉडल अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से खंडित हुआ।
रदरफोर्ड का मॉडल (1911): रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कणों की बौछार की। अधिकांश अल्फा कण सीधे निकल गए, कुछ थोड़े विक्षेपित हुए, तथा बहुत कम (लगभग 20000 में से 1) वापस लौट आए। इससे निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है, परमाणु का संपूर्ण धनावेश और द्रव्यमान एक बहुत छोटे केंद्रीय भाग नाभिक में केंद्रित होता है, तथा इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में घूमते हैं। इस मॉडल की सीमा यह थी कि यह परमाणु की स्थिरता की व्याख्या नहीं कर सका, क्योंकि सिद्धांततः घूमता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकीर्ण करके नाभिक में गिर जाना चाहिए।
बोर का मॉडल (1913): नील्स बोर ने माना कि इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं (कोशों) में ही घूम सकते हैं जिन्हें स्थायी कक्षाएँ कहते हैं। इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकीर्ण नहीं करते। ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन केवल तभी होता है जब इलेक्ट्रॉन एक कक्षा से दूसरी में जाता है। इन कक्षाओं को K, L, M, N आदि अक्षरों से दर्शाया जाता है।
बोर-बरी इलेक्ट्रॉन वितरण नियम: इलेक्ट्रॉन पहले नाभिक के निकटतम कोश (K) में भरते हैं, फिर अगले कोश (L) में। किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन क्षमता 2n वर्ग सूत्र से ज्ञात होती है, जहाँ n कोश की संख्या है। K कोश की क्षमता 2 × 1 वर्ग = 2, L की 2 × 4 = 8, M की 2 × 9 = 18 तथा N की 2 × 16 = 32 होती है। बाह्यतम कोश में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं।
उदाहरण इलेक्ट्रॉन वितरण: ऑक्सीजन (8): 2, 6। सोडियम (11): 2, 8, 1। क्लोरीन (17): 2, 8, 7। कैल्शियम (20): 2, 8, 8, 2। कार्बन (6): 2, 4। नाइट्रोजन (7): 2, 5। एलुमिनियम (13): 2, 8, 3।
स्थिर अष्टक नियम (Octet Rule): किसी तत्व के परमाणु का बाह्यतम कोश पूर्ण होने पर (अधिकतम 2, 8 या 18 इलेक्ट्रॉन) परमाणु स्थिर होता है। हीलियम का बाह्य कोश 2 इलेक्ट्रॉन के साथ पूर्ण है, अतः हीलियम स्थिर है। निऑन (2, 8), आर्गन (2, 8, 8) स्थिर अष्टक वाले तत्व हैं। रासायनिक अभिक्रिया में तत्व इसी स्थिर अष्टक को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
परमाणु के केंद्र में नाभिक होता है जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन (सामूहिक रूप से न्यूक्लियॉन) स्थित होते हैं। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कोशों में व्यवस्थित होते हैं। नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या से लगभग 10 की घात 5 गुना छोटी होती है, अर्थात परमाणु अधिकांशतः रिक्त होता है।
द्रव्यमान केंद्रित: नाभिक में परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान होता है, क्योंकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉन से लगभग 1840 गुना भारी होते हैं।
आवेश तटस्थता: उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या। प्रोटॉन की संख्या और न्यूट्रॉन की संख्या का योग नाभिक का द्रव्यमान संख्या देता है। यदि इलेक्ट्रॉनों की संख्या बदल जाए तो आयन बनता है।
विद्युत चुम्बकीय बल: नाभिक का धनावेश और इलेक्ट्रॉन का ऋणावेश के बीच स्थिरविद्युत आकर्षण बल होता है जो इलेक्ट्रॉन को नाभिक के चारों ओर बाँधे रखता है। न्यूट्रॉन नाभिक को स्थिरता प्रदान करते हैं।
रेलवे संदर्भ: रेलवे की लीड-एसिड बैटरी में विद्युत रासायनिक अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण पर आधारित है। इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह ही विद्युत धारा है, जो रेलवे की संकेत प्रणाली और मोटरों को चलाती है। अतः परमाणु संरचना की समझ टेक्नीशियन के विद्युत कार्य से जुड़ी है।
उदाहरण प्रश्न: सोडियम (Na, Z = 11) का इलेक्ट्रॉन वितरण लिखिए। हल: Na की परमाणु संख्या 11 है, अतः इलेक्ट्रॉन वितरण 2, 8, 1 होगा। बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होने के कारण सोडियम की संयोजकता 1 है।
| कण | आवेश | द्रव्यमान | स्थान | खोजकर्ता |
|---|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | -1 | 9.1 × 10^-31 किग्रा | कक्षाएँ | थॉमसन (1897) |
| प्रोटॉन | +1 | 1.67 × 10^-27 किग्रा | नाभिक | रदरफोर्ड (1919) |
| न्यूट्रॉन | 0 | 1.67 × 10^-27 किग्रा | नाभिक | चैडविक (1932) |
| कोश | n | क्षमता 2n^2 | अधिकतम इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|---|
| K | 1 | 2 × 1 = 2 | 2 |
| L | 2 | 2 × 4 = 8 | 8 |
| M | 3 | 2 × 9 = 18 | 18 |
| N | 4 | 2 × 16 = 32 | 32 |
flowchart TD
A[परमाणु संरचना] --> B[नाभिक]
A --> C[इलेक्ट्रॉन]
A --> D[मॉडल]
B --> B1[प्रोटॉन धनावेश]
B --> B2[न्यूट्रॉन उदासीन]
C --> C1[ऋणावेश]
C --> C2[कोशों में घूमते हैं]
D --> D1[थॉमसन मॉडल]
D --> D2[रदरफोर्ड मॉडल]
D --> D3[बोर मॉडल]
C --> C3[2n^2 सूत्र से क्षमता]
C --> C4[स्थिर अष्टक नियम]
D2 --> D21[अधिकांश भाग रिक्त]
D2 --> D22[द्रव्यमान नाभिक में]
D3 --> D31[स्थायी कक्षाएँ]
परमाणु संरचना रसायन विज्ञान का केंद्रीय अध्याय है। इस अध्याय में हमने तीन उप-परमाणु कणों — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन — के आवेश, द्रव्यमान, स्थान तथा खोजकर्ताओं का अध्ययन किया। थॉमसन, रदरफोर्ड और बोर के मॉडलों के माध्यम से परमाणु के मॉडल के विकास को समझा। रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से नाभिक की अवधारणा तथा बोर के मॉडल से K, L, M, N कोशों की अवधारणा प्राप्त हुई। बोर-बरी नियम द्वारा इलेक्ट्रॉन वितरण (2n वर्ग सूत्र) तथा स्थिर अष्टक नियम को सीखा। नाभिक में द्रव्यमान का संग्रह तथा इलेक्ट्रॉनों का कक्षाओं में घूमना स्पष्ट हुआ। यह अध्याय परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या और संयोजकता जैसे आगामी अध्यायों का आधार है। रेलवे परीक्षा में यह उच्च स्कोरिंग विषय है, अतः कणों के गुण और इलेक्ट्रॉन वितरण का अभ्यास आवश्यक है।