ऊँचाई और दूरी Notes

ऊँचाई और दूरी

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: गणित – सांख्यिकी त्रिकोणमिति और विविध विषय-वस्तु: 5.3 ऊँचाई और दूरी

1. परिचय

ऊँचाई और दूरी त्रिकोणमिति का व्यावहारिक अनुप्रयोग है, जिसमें दुर्गम वस्तुओं की ऊँचाई या दूरी उन्नयन कोण और अवनमन कोण की सहायता से ज्ञात की जाती है। सीधे मापना संभव न होने पर यह विधि काम आती है, जैसे किसी मीनार या पेड़ की ऊँचाई नापना। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इस अध्याय से 2 से 3 प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं, विशेषकर मीनार, पेड़, सिग्नल टावर, नदी की चौड़ाई और झंडे के प्रश्न। इसके लिए त्रिकोणमितीय अनुपातों और विशेष कोणों की सारणी की अच्छी पकड़ आवश्यक है।

उन्नयन कोण (angle of elevation) वह कोण है जो किसी दर्शक की दृष्टि रेखा (line of sight) क्षैतिज रेखा से ऊपर की ओर बनाती है। जब कोई व्यक्ति किसी ऊँची वस्तु जैसे मीनार की ओर देखता है, तो दृष्टि रेखा और क्षैतिज रेखा के बीच बना कोण उन्नयन कोण कहलाता है। इसके विपरीत, जब दर्शक ऊँचाई पर हो और नीचे की वस्तु की ओर देखे, तो दृष्टि रेखा क्षैतिज से नीचे कोण बनाती है, जिसे अवनमन कोण (angle of depression) कहते हैं। दोनों ही स्थितियों में बनने वाला त्रिभुज समकोण त्रिभुज होता है।

इस अध्याय में हम उन्नयन और अवनमन कोण की अवधारणा को समझेंगे और उनकी सहायता से ऊँचाई तथा दूरी ज्ञात करना सीखेंगे। हम विभिन्न स्थितियों का चित्र बनाकर सही त्रिकोणमितीय अनुपात चुनना सीखेंगे। दो दर्शक बिंदुओं से देखने, दो वस्तुओं के बीच दूरी, नदी की चौड़ाई तथा झंडे की ऊँचाई जैसे प्रश्नों का हल करेंगे। इन प्रश्नों में चित्र बनाना आधी समस्या हल करने के बराबर है, इसलिए पहले चित्र बनाकर भुजाओं और कोणों की पहचान करनी चाहिए।

2. उन्नयन कोण की सहायता से ऊँचाई ज्ञात करना

जब किसी ऊँची वस्तु को दर्शक के स्थान से कुछ कोण पर देखा जाता है, तो बनने वाले समकोण त्रिभुज में दर्शक से वस्तु के आधार तक की दूरी आधार होती है, वस्तु की ऊँचाई लंब होती है और दृष्टि रेखा कर्ण होती है। यदि दूरी d और उन्नयन कोण θ ज्ञात हो, तो ऊँचाई h = d × tan θ होती है। यदि ऊँचाई और कोण ज्ञात हों, तो दूरी d = h / tan θ से निकाली जाती है। यह विधि अधिकांश ऊँचाई-दूरी के प्रश्नों का आधार है।

विशेष कोणों 30°, 45° और 60° के प्रश्न परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाते हैं क्योंकि इनमें सटीक मानों की सहायता से सरल उत्तर मिलते हैं। उदाहरण के लिए उन्नयन कोण 30° होने पर tan 30° = 1/√3 से ऊँचाई = दूरी/√3 होती है। कोण 45° होने पर ऊँचाई और दूरी बराबर होती है। कोण 60° होने पर ऊँचाई = दूरी × √3 होती है। ये तीनों संबंध याद रखने पर कई प्रश्न बिना गणना के हल हो जाते हैं।

उदाहरण 1: एक मीनार के आधार से 60 मीटर दूर स्थित बिंदु से मीनार की चोटी का उन्नयन कोण 30° है। मीनार की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।

हल: tan 30° = ऊँचाई/दूरी = h/601/√3 = h/60, अतः h = 60/√3 = 20√3 मीटर। मीनार की ऊँचाई 20√3 मीटर है।

उदाहरण 2: 45° के उन्नयन कोण पर एक पेड़ की चोटी दिखती है। दर्शक पेड़ से 20 मीटर दूर है। पेड़ की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।

हल: tan 45° = h/20, परंतु tan 45° = 1। अतः h = 20 × 1 = 20 मीटर। कोण 45° होने पर ऊँचाई और दूरी सदैव बराबर होती हैं।

3. अवनमन कोण की सहायता से दूरी ज्ञात करना

अवनमन कोण की स्थिति में दर्शक किसी ऊँचे स्थान जैसे मीनार के शीर्ष पर खड़ा होता है और नीचे की वस्तु को देखता है। दर्शक के स्थान से वस्तु तक की दृष्टि रेखा क्षैतिज रेखा से नीचे की ओर कोण बनाती है। क्षैतिज रेखा जमीन के समानांतर होती है, अतः वैकल्पिक कोणों (alternate angles) के सिद्धांत से अवनमन कोण उसी कोण के बराबर होता है जो वस्तु के स्थान से मीनार के शीर्ष पर बनता है। इसी कारण अवनमन कोण और उन्नयन कोण आपस में बराबर होते हैं।

जब दर्शक ऊँचाई h पर हो और वस्तु का अवनमन कोण θ हो, तो वस्तु की दूरी d = h / tan θ होती है। यदि अवनमन कोण 45° है, तो दूरी ऊँचाई के बराबर होती है। यदि कोण 30° है, तो दूरी h√3 होती है। ऐसे प्रश्नों में जमीन पर बने त्रिभुज को ध्यान से चित्रित करना चाहिए। नदी की चौड़ाई, समुद्र में तट से जहाज की दूरी आदि अवनमन कोण के सामान्य प्रश्न हैं।

उदाहरण 3: एक नदी के किनारे स्थित 30 मीटर ऊँची मीनार के शीर्ष से विपरीत किनारे पर स्थित पत्थर का अवनमन कोण 45° है। नदी की चौड़ाई ज्ञात कीजिए।

हल: चूँकि अवनमन कोण 45° है, अतः त्रिभुज में ऊँचाई = चौड़ाई। नदी की चौड़ाई = 30 मीटर।

उदाहरण 4: 100 मीटर ऊँचे सिग्नल टावर के शीर्ष से रेल की पटरी पर खड़ी ट्रेन का अवनमन कोण 30° है। टावर के आधार से ट्रेन की दूरी ज्ञात कीजिए।

हल: tan 30° = ऊँचाई/दूरी, अर्थात 1/√3 = 100/dd = 100√3 मीटर। ट्रेन की दूरी 100√3 मीटर है।

4. दो बिंदुओं से देखने वाले प्रश्न

कुछ प्रश्नों में एक ही वस्तु को दो अलग-अलग स्थानों से देखा जाता है, जिनमें उन्नयन कोण अलग-अलग होते हैं। ऐसे प्रश्नों में दोनों स्थानों के बीच की दूरी और वस्तु की ऊँचाई ज्ञात करनी होती है। इसके लिए दोनों दर्शक बिंदुओं पर अलग-अलग समकोण त्रिभुज बनते हैं, जिनमें ऊँचाई समान होती है। दोनों त्रिभुजों में से एक-एक समीकरण बनाकर हल किया जाता है। ये प्रश्न थोड़े कठिन होते हैं परंतु नियमित विधि से आसानी से हल हो जाते हैं।

उदाहरण के लिए यदि मीनार के दोनों ओर दो दर्शक हैं और एक कोण 45° तथा दूसरा 30° है, तो पहले दर्शक की दूरी ऊँचाई के बराबर होगी तथा दूसरे की दूरी h√3। दोनों के बीच की कुल दूरी दोनों दूरियों का योग होगी। जब दोनों दर्शक एक ही ओर हों, तो उनके बीच की दूरी दोनों दूरियों का अंतर होती है। इन स्थितियों को ध्यान से चित्र बनाकर ही हल करना चाहिए, ताकि गलती न हो।

उदाहरण 5: एक मीनार की चोटी का उन्नयन कोण, मीनार के दोनों ओर स्थित दो बिंदुओं से क्रमशः 45° और 60° है। यदि दोनों बिंदुओं के बीच की दूरी 20 मीटर है, तो मीनार की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।

हल: माना मीनार की ऊँचाई h है। 45° वाले बिंदु की दूरी = h (चूँकि tan 45° = 1)। 60° वाले बिंदु की दूरी = h/tan 60° = h/√3। कुल दूरी h + h/√3 = 20h(1 + 1/√3) = 20, अतः h = 20√3/(√3 + 1)। परिमेयकरण करने पर h = 10(3 - √3) मीटर।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: विशेष कोणों पर ऊँचाई-दूरी संबंध

उन्नयन कोण tan का मान संबंध
30° 1/√3 ऊँचाई = दूरी/√3
45° 1 ऊँचाई = दूरी
60° √3 ऊँचाई = दूरी × √3

तालिका 2: ऊँचाई-दूरी के सूत्र

स्थिति सूत्र
ऊँचाई ज्ञात करना h = d × tan θ
दूरी ज्ञात करना d = h / tan θ
अवनमन कोण (नीचे की वस्तु) tan θ = h/d
अवनमन = उन्नयन (वैकल्पिक कोण) दोनों बराबर
45° पर दोनों दर्शक दूरियों का योग/अंतर

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[ऊँचाई और दूरी] --> B[उन्नयन कोण]
    A --> C[अवनमन कोण]
    A --> D[समकोण त्रिभुज मॉडल]
    A --> E[दो दर्शक बिंदु]
    B --> B1[ऊपर की ओर देखना]
    B --> B2[h = d × tan θ]
    C --> C1[नीचे की ओर देखना]
    C --> C2[वैकल्पिक कोणों से बराबर]
    D --> D1[लंब = ऊँचाई]
    D --> D2[आधार = दूरी]
    D --> D3[कर्ण = दृष्टि रेखा]
    E --> E1[समान ऊँचाई से समीकरण]
    E --> E2[दूरियों का योग या अंतर]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

उन्नयन कोण से मीनार की ऊँचाई 30° h दूरी d दृष्टि रेखा क्षैतिज रेखा tan 30° = h/d, अतः h = d × tan 30° स्वर्ण नियम उन्नयन कोण क्षैतिज रेखा और दृष्टि रेखा के बीच ऊपर की ओर बनता है।

अवनमन कोण से दूरी h = 30 मी 45° दृष्टि रेखा नदी की चौड़ाई = 30 मी tan 45° = h/d = 30/d, अतः d = 30 मीटर अवनमन कोण = वैकल्पिक कोणों से उन्नयन कोण के बराबर स्वर्ण नियम 45° कोण पर ऊँचाई और दूरी सदैव बराबर होती हैं।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. उन्नयन और अवनमन कोण में अंतर न समझना; उन्नयन ऊपर की ओर और अवनमन नीचे की ओर होता है।
  2. त्रिभुज में ऊँचाई और दूरी की पहचान उलट लेना, जिससे अनुपात गलत हो जाता है।
  3. tan θ की जगह sin θ या cos θ का प्रयोग करना; ऊँचाई-दूरी प्रश्नों में अधिकतर tan का उपयोग होता है।
  4. 30° और 60° के tan मानों को आपस में बदल लेना; tan 30° = 1/√3 तथा tan 60° = √3 होता है।
  5. अवनमन कोण वाले प्रश्न में जमीन पर बने कोण की गणना न करना; वैकल्पिक कोणों से दोनों बराबर होते हैं।
  6. उत्तर में √3 वाले रूप को परिमेयकरण करना भूल जाना, जैसे 60/√3 को 20√3 लिखना।
  7. दो दर्शकों के प्रश्न में दूरियों का योग और अंतर इस आधार पर गलत चुनना कि दर्शक किस ओर हैं।
  8. इकाइयों को नहीं बदलना; मीटर, सेमी और किलोमीटर के रूपांतरण का ध्यान न रखना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रत्येक प्रश्न में पहले चित्र बनाएँ, भुजाओं (ऊँचाई, दूरी, कर्ण) और कोणों को अंकित करें।
  2. उपयुक्त अनुपात चुनें — ऊँचाई और दूरी के बीच tan θ का प्रयोग करें।
  3. विशेष कोणों के मानों की सारणी जल्दी याद करें, इससे गणना तेज़ होती है।
  4. 45° के कोण पर ऊँचाई = दूरी की विशेष स्थिति का लाभ उठाएँ।
  5. अवनमन कोण को उन्नयन कोण में बदलकर समान त्रिभुज पर हल करें।
  6. दो दर्शकों के प्रश्न में दोनों समीकरण लिखकर विलोपन विधि से हल करें।
  7. उत्तर में √3 वाले भाग को परिमेयकरण करके विकल्पों से मिलाएँ।

10. निष्कर्ष

ऊँचाई और दूरी त्रिकोणमिति का वह व्यावहारिक अध्याय है जो रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में लगभग हमेशा प्रश्न देता है। इस अध्याय में हमने उन्नयन कोण और अवनमन कोण की अवधारणा, उनके बीच वैकल्पिक कोणों का संबंध तथा समकोण त्रिभुज मॉडल को विस्तार से समझा। h = d × tan θ सूत्र की सहायता से ऊँचाई और दूरी ज्ञात करना सीखा। विशेष कोणों 30°, 45° और 60° के मानक संबंधों से अनेक प्रश्नों को बिना लंबी गणना के हल करना भी सीखा। दो दर्शक बिंदुओं वाले प्रश्नों को दो समीकरणों से हल करने की विधि इस अध्याय की उन्नत तकनीक है। चित्र बनाकर हल करने की आदत से इस अध्याय के प्रश्नों में पूर्ण अंक प्राप्त करना संभव है।